आमतौर पर लोग एसिडिटी को पेट से ही जोड़कर देखते हैं और इस परेशानी का इलाज दवा लेकर कर लेते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि जिन लोगों को बार-बार एसिडिटी की समस्या होती है, उन्हें गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) की समस्या हो सकती है। अगर बार-बार एसिडिटी हो रही है, तो इसका असर दांतों पर भी पड़ सकता है। कई बार तो दांतों पर असर इतना धीमा होता है कि मरीज को लंबे समय तक इसका एहसास भी नहीं होता। एसडिटी के कारण दांतों से जुड़े नुकसान के बारे में जानने के लिए हमने Dr. Keshav Naithani, Principal Director & HOD, Department of Dental & Maxillofacial Surgery, Max Multi-Speciality Hospital, Noida (UP) से बात की। उन्होंने बताया कि कई बार मरीज दांतों में ठंडा-गरम लगने या दांत घिसने की शिकायत लेकर आते हैं। चेकअप के दौरान पता चलता है कि इसकी वजह कोई दांतों की बीमारी नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही एसिडिटी या एसिड रिफ्लक्स है।
एसिडिटी से दांतों को कैसे नुकसान होता है?
Dr. Keshav Naithani कहते हैं, “जब पेट में एसिडिटी बनती है, तो यह खाने की नली से होते हुए मुंह तक पहुंच जाती है। जह एसिड दांतों की सबसे मजबूत परत एनामेल तक पहुंचता है, तो इसे नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है। हालांकि, यह एक बार में नहीं होता, बल्कि कई सालों तक एसिडिटी होने की वजह से होता है, क्योंकि दांत का एनामेल शरीर का सबसे मजबूत टिश्यू होता है, लेकिन पेट की एसिडिटी भी इसे धीरे-धीरे घिसने लगती है। वैसे तो शुरुआत में बदलाव इतने ज्यादा मामूली होते हैं कि लोगों को ज्यादा परेशानी महसूस नहीं होती, लेकिन समय के साथ यह परत कमजोर होने लगती है और लोगों को कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं।”
क्या कहती है स्टडी?
Archives of Oral Biology में प्रकाशित स्टडी में पेट की बाइल एसिड और दांतों को होने वाले नुकसान पर की गई थी। इस स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों को गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) की समस्या थी, उन मरीजों के दांतों के घिसने की समस्या सेहतमंद लोगों के मुकाबले तेजी से देखी गई थी। सेहतमंद लोगों में यह सिर्फ 7% थी, तो GERD के मरीजों में यह 27 फीसदी देखा गया था। इसके अलावा, स्टडी में पाया गया कि एसिडिटी के कारण लोगों के दांतों से कैल्शियम भी निकलने लगता है, लेकन दांत की ऊपरी सतह पर कोई बदलाव नहीं होता, क्योंकि कैल्शियम की मात्रा काफी कम रिलीज होती है।

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बार-बार एसिडिटी से परेशान लोगों को किन लक्षणों का ध्यान रखना चाहिए?
Dr. Keshav Naithani ने बताया, “जिन लोगों को लंबे समय से एसिडिटी की समस्या है, तो उन्हें कुछ लक्षणों को ध्यान रखना चाहिए। दरअसल, कई मरीजों को सीने में जलन या एसिडिटी के लक्षण महसूस नहीं होते, लेकिन जब वह डेंटल चेकअप के लिए आते हैं, तो दांतों पर एसिड इरोजन के निशान देखकर GERD के टेस्ट की सलाह देता हूं। इसका मतलब है कि कई बार दांतों की समस्या भी पेट की बीमारी का पहला संकेत बन सकते हैं। इसलिए लक्षणों की पहचान जरूर करें।”
- ठंडी या गर्म चीजें खाते-पीते समय दांतों में तेजी से सेंसिटिविटी महसूस होना
- दांतों का पहले के मुकाबले ज्यादा पीलापन दिखाई देना
- सामने के दांतों के किनारे पतले या घिसे हुए लगना
- दांतों की चमक कम हो जाना
- दांतों का कमजोर या जल्दी टूटना
- चबाने से समय दिक्कत होना
क्या एसिडिटी के तुरंत बाद ब्रश करना सही है?
Dr. Keshav Naithani ने कहा, “कुछ लोग सोचते हैं कि अगर मुंह में खट्टापन महसूस हो रहा है, तो तुरंत ब्रश कर लेना चाहिए। लेकिन यह आदत दांतों को और ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है। दरअसल, जब एसिड दांतों तक पहुंचता है, तो कुछ समय के लिए एनामेल नरम हो जाता है। अगर उसी समय ब्रश कर लिया जाए, तो ब्रश के रगड़ने से एनामेल और तेजी से घिस सकता है। इसलिए मुंह में खट्टापन आए, तो सादे पानी से कुल्ला करना बेहतर होता है। एसिड मुंह में आने के कम से कम आधे से एक घंटे बाद ही किसी फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से ब्रश करें।”
जिन लोगों को GERD की समस्या थी, उससे जुड़ी PLOS One में रिसर्च पेपर प्रकाशित किया गया। इसमें गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) और दांतों की सड़न को लेकर स्टडी की गई है। इसमें 15000 वयस्कों को शामिल किया गया। इस स्टडी में पाया गया कि हालांकि GERD होने से दांतों में सड़न या कैविटी का खतरा कम है, लेकिन जो लोग दिन में एक या इससे ज्यादा बार ब्रश नहीं करते, उनमें ब्रश करने वालों के मुकाबले दांतों की सड़न का खतरा करीब चार गुना ज्यादा पाया गया। ध्यान देने वाली बात यह है कि इसमें लोगों को दिन में कम से कम दो बार ब्रश करने की हिदायत दी गई है, लेकिन एसिडिटी के तुरंत बाद ब्रश करने की बात नहीं कही गई है।
बार-बार एसिडिटी होने पर दांतों की सुरक्षा कैसे करें?
Dr. Keshav Naithani के अनुसार, अगर किसी को बार-बार एसिडिटी या GERD की समस्या रहती है, तो सिर्फ पेट का इलाज ही काफी नहीं है। दांतों को मजबूत बनाने के लिए कुछ आदतों को जरूर अपनाना चाहिए।
- दिन में दो बार फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से ब्रश करें।
- बहुत ज्यादा खट्टे, कार्बोनेटेड और शुगर वाले ड्रिंक्स न लें।
- भोजन के तुरंत बाद लेटने की आदत छोड़ें।
- रात का खाना सोने से कम से कम दो से तीन घंटे पहले खाएं।
- पर्याप्त पानी पिएं ताकि मुंह सूखा न रहे, क्योंकि लार दांतों को एसिड से बचाने में मदद करती है।
- हर छह महीने में एक बार डेंटल चेकअप जरूर कराएं।
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निष्कर्ष
Dr. Keshav Naithani कहते हैं कि अगर किसी को लगातार एसिडिटी रहती है और दांतों में सेंसिटिविटी बहुत ज्यादा बढ़ गई है, मुंह से दुर्गंध आती और बार-बार मुंह में खट्टापन महसूस होता है, तो दांतों का चेकअप जरूर कराएं। दांतों की समस्या कई बार शरीर में चल रही बीमारियों के शुरुआती संकेत भी देती है। इसलिए बार-बार होने वाली एसिडिटी जैसी समस्याओं को नजरअंदाज न करें, बल्कि इसका समय पर इलाज कराए, ताकि दांत लंबे समय तक सेहतमंद रहें।
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FAQ
क्या दांतों का घिसना हमेशा उम्र बढ़ने की वजह से होता है?
उम्र बढ़ने के साथ दांतों में कुछ प्राकृतिक बदलाव जरूर आते हैं, लेकिन अगर कम उम्र में ही दांत तेजी से घिस रहे हैं या उनकी ऊपरी परत पतली होती जा रही है, तो इसके पीछे एसिड रिफ्लक्स, दांत पीसने की आदत, गलत खानपान या कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी जिम्मेदार हो सकती हैं।दांतों का यह नुकसान आम कैविटी (सड़न) से कैसे अलग है?
आम कैविटी या सड़न मुंह के बैक्टीरिया और मीठा खाने की वजह से होती है, जो दांत के किसी एक हिस्से में गड्ढा पैदा करती है। इसके उल्ट, एसिडिटी के कारण होने वाला 'एसिड इरोजन' बिना किसी बैक्टीरिया के होता है और यह एक साथ कई दांतों की पूरी सतह को चमचे की तरह घिस देता है।
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Jul 17, 2026 16:10 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Keshav Naithani