आज के समय में हार्टबर्न यानी सीने में जलन और एसिड रिफ्लक्स जैसी पाचन संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। कई लोग रात में खाना खाने के तुरंत बाद सो जाते हैं, जिससे पेट का एसिड भोजन नली यानी इसोफेगस में वापस आने लगता है और सीने में तेज जलन, खट्टी डकार, गले में जलन तथा बेचैनी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। यदि यह समस्या बार-बार होने लगे तो यह गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) का संकेत भी हो सकती है। यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के वरिष्ठ कंसल्टेंट फिजिशियन एवं डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. जी. कृष्ण मोहन रेड्डी के अनुसार, बाईं करवट सोना हार्टबर्न से राहत देने का एक प्रभावी सहायक उपाय हो सकता है।
बाईं करवट सोने का सीने में जलन पर असर
डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. जी. कृष्ण मोहन रेड्डी बताते हैं, ''मानव शरीर में पेट शरीर के बाईं ओर थोड़ा झुका हुआ होता है। जब कोई व्यक्ति बाईं करवट सोता है, तब पेट और भोजन नली के बीच का जोड़ पेट में मौजूद एसिड के लेवल से ऊपर रहता है। इससे पेट का एसिड भोजन नली में वापस आने की संभावना कम हो जाती है। इसके विपरीत, दाईं करवट सोने पर कुछ लोगों में पेट का एसिड भोजन नली की ओर ज्यादा आसानी से पहुंच सकता है, जिससे सीने में जलन, खट्टी डकार और एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) से पीड़ित लोगों के लिए बाईं करवट सोना रात के समय राहत देने वाला एक आसान उपाय हो सकता है।''
- डॉ. जी. कृष्ण मोहन रेड्डी का कहना है कि बाईं करवट सोना एक सहायक उपाय है, लेकिन इसे बीमारी का पूरा इलाज नहीं माना जा सकता।
- यदि कोई व्यक्ति लगातार अनहेल्दी खानपान और गलत लाइफस्टाइल अपनाता है, तो केवल सोने की स्थिति बदलने से पूरी राहत नहीं मिलेगी।
- एसिड रिफ्लक्स से बचने के लिए रात में सोने से ठीक पहले भारी भोजन करने से बचना चाहिए।
- शाम के समय ज्यादा मसालेदार और तले-भुने फूड्स का सेवन सीमित रखना चाहिए।
- इसके अलावा शराब का सेवन कम करना और शरीर का वजन संतुलित बनाए रखना भी बेहद जरूरी है।
- हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने से हार्टबर्न की समस्या काफी हद तक कंट्रोल की जा सकती है।
साल 2023 में World Journal of Clinical Cases में प्रकाशित मेटा एनालिसिस के अनुसार, बाईं करवट सोने से रात के समय होने वाले एसिड रिफ्लक्स को कम किया जा सकता है। इससे GERD यानी पेट में एसिड बनने की बीमारी से पीड़ित लोगों में सुधार होता है। पेट की इस तकलीफ से राहत पाने और बेहतर नींद के लिए रात में बाईं करवट सोने की आदत को बढ़ावा देना बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।
साल 2024 में Journal of Sleep Research में प्रकाशित रिसर्च में पाया गया कि जो लोग पीठ के बल सोते हैं, उनकी नींद बार-बार टूटती है। इस वजह से वे खुद-ब-खुद करवट लेकर सोने लगते हैं ताकि नींद में खलल न पड़े।
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रात में हार्टबर्न होने पर क्या करें?
डॉ. जी. कृष्ण मोहन रेड्डी के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को रात में बार-बार सीने में जलन होती है, तो बिस्तर के सिर वाले हिस्से को कुछ हद तक ऊंचा करना ज्यादा प्रभावी माना जाता है। इससे गुरुत्वाकर्षण के कारण पेट का एसिड ऊपर आने से काफी हद तक रुक सकता है। सिर्फ तकियों का इस्तेमाल करने से गर्दन और पीठ पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, जबकि पूरे बेड का सिर वाला हिस्सा ऊंचा करने से शरीर सही स्थिति में रहता है और एसिड रिफ्लक्स की संभावना कम हो सकती है।
डॉक्टर की सलाह
डॉ. जी. कृष्ण मोहन रेड्डी के अनुसार, यदि लाइफस्टाइल में बदलाव करने के बाद भी हार्टबर्न लगातार बना रहता है या इसके साथ भोजन निगलने में कठिनाई, लगातार उल्टी या बिना किसी कारण वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। लंबे समय तक रहने वाला एसिड रिफ्लक्स भोजन नली को नुकसान पहुंचा सकता है और गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहना सही नहीं है।
निष्कर्ष
बाईं करवट सोना GERD और रात में होने वाले हार्टबर्न के लक्षणों को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। हालांकि, यह केवल एक सहायक उपाय है, न कि इलाज। बैलेंस डाइट, समय पर भोजन, हेल्दी वजन बनाए रखना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना ही हार्टबर्न से बचाव का सबसे असरदार तरीका है। लगातार या गंभीर लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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FAQ
क्या दाहिनी ओर सोने से एसिड रिफ्लक्स हो सकता है?
दाईं करवट सोने पर कुछ लोगों में एसिड रिफ्लक्स की समस्या हो सकती है, ऐसा इसलिए क्योंकि पेट का एसिड भोजन नली में ज्यादा पहुंच सकता है।हार्टबर्न से बचने के लिए क्या करें?
हार्टबर्न से बचने के लिए सोने से 2-3 घंटे पहले भोजन कर लें, भारी और मसालेदार भोजन से बचें तथा देर रात खाने की आदत न रखें।
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Jul 28, 2026 17:25 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr. G. Krishna Mohan Reddy