Thu Oct 8, 2026 | 04:30 PM IST

Medically Reviewed by Dr Sharad Malhotra , Senior Consultant & Director – Gastroenterology, Hepatology & Therapeutic Endoscopy

महिलाओं में पित्त की पथरी का खतरा क्यों होता है ज्यादा? जानें हार्मोन, डाइट और लाइफस्टाइल का कनेक्शन

पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में पित्त की पथरी का खतरा ज्यादा होता है। महिलाओं में हार्मोनल बदलाव, प्रेग्नेंसी और वजन से जुड़े कारणों से पित्त की पथरी का जोखिम बढ़ सकता है।
महिलाओं में पित्त की पथरी का खतरा क्यों होता है ज्यादा? जानें हार्मोन, डाइट और लाइफस्टाइल का कनेक्शनमहिलाओं में पित्त की पथरी का खतरा क्यों होता है ज्यादा? जानें हार्मोन, डाइट और लाइफस्टाइल का कनेक्शन

गॉल ब्लैडर यानी पित्ताशय में जब पित्त में मौजूद कोलेस्ट्रॉल, बिलीरुबिन या अन्य पदार्थों का बैलेंस बिगड़ जाता है, तो धीरे-धीरे पथरी बन सकती है। पित्त की पथरी की समस्या किसी को भी हो सकती है, लेकिन महिलाओं में इसका खतरा पुरुषों की तुलना में ज्यादा देखा जाता है। महिलाओं में पित्त की पथरी का बढ़ा हुआ जोखिम कई कारणों से जुड़ा होता है। आकाश हेल्थकेयर के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं थेराप्यूटिक एंडोस्कोपी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट और डायरेक्टर, डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव, प्रेग्नेंसी, वजन में तेजी से बदलाव और कुछ लाइफस्टाइल फैक्टर महिलाओं में पित्त की पथरी के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। यही कारण है कि महिलाओं को गॉल ब्लैडर यानी पित्ताशय की सेहत को लेकर ज्यादा जागरुक रहने की जरूरत होती है।

महिलाओं को पित्त पथरी होने का खतरा क्यों होता है?

डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं, ''महिलाओं में पित्त की पथरी का एक प्रमुख कारण हार्मोनल प्रभाव हो सकता है, एस्ट्रोजन हार्मोन शरीर में कोलेस्ट्रॉल के लेवल को प्रभावित कर सकता है। पित्त की पथरी के कई प्रकार होते हैं लेकिन सबसे ज्यादा कोलेस्ट्रॉल स्टोन होता है, जो पित्ताशय में कोलेस्ट्रॉल के जमा होने से बन सकता है। महिलाओं में प्रेग्नेंसी, हार्मोनल बदलाव या कुछ स्थितियों में एस्ट्रोजन का लेवल बढ़ने से पित्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे पथरी बनने का खतरा बढ़ सकता है। इसी वजह से प्रेग्नेंसी के दौरान या कई बार हार्मोनल बदलावों के समय पित्त की पथरी का जोखिम ज्यादा देखा जाता है।''

1. प्रेग्नेंसी और वजन में बदलाव

प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में कई हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं। इस दौरान पित्ताशय का फंक्शन प्रभावित हो सकता है और पित्त के खाली होने की प्रोसेस धीमी हो सकती है। इससे पित्त में मौजूद पदार्थ जमा होकर पथरी का रूप ले सकते हैं। इसके अलावा तेजी से वजन बढ़ना या अचानक वजन कम करना भी पित्त की पथरी के जोखिम को बढ़ा सकता है। बहुत कम समय में ज्यादा वजन घटाने वाली डाइट या लंबे समय तक बहुत कम कैलोरी लेने से गॉल ब्लैडर यानी पित्ताशय में पित्त का संतुलन बिगड़ सकता है और पथरी बनने की संभावना बढ़ सकती है।

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साल 2006 में Wiener Medizinische Wochenschrift में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पित्त की पथरी की समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में दो से तीन गुना ज्यादा देखी जाती है।

  • ऐसा मुख्य रूप से महिला हार्मोन, खासकर 'एस्ट्रोजन' के कारण होता है।
  • एस्ट्रोजन हार्मोन लिवर से निकलने वाले पित्त (bile) में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को बहुत बढ़ा देता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल जमकर पथरी का रूप ले लेता है।
  • यही वजह है कि प्रेग्नेंसी, गर्भनिरोधक गोलियां और मेनोपॉज के बाद ली जाने वाली हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) महिलाओं में इसका खतरा काफी बढ़ा देती हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि कम एस्ट्रोजन वाली मॉडर्न गर्भनिरोधक गोलियों से इसका जोखिम अब काफी कम हो गया है।

American Clinical and Climatological Association की स्टडी के अनुसार, महिलाओं में पुरुषों की तुलना में कोलेस्ट्रॉल की पित्त की पथरी ज्यादा होने का एक बड़ा कारण उनके ओवेरियन हार्मोन हो सकते हैं।

  1. शुरुआती स्टडी से पता चलता है कि प्रेग्नेंसी के दौरान पित्त में फैट की मात्रा और पित्ताशय के काम करने का तरीका असामान्य हो सकता है।
  2. फिलहाल इस विषय पर आगे की रिसर्च चल रही है, ताकि यह पूरी तरह साफ हो सके कि प्रेग्नेंसी किस तरह पित्त की पथरी बनने की प्रोसेस को प्रभावित करती है।

2. लाइफस्टाइल और डाइट का असर

डॉ. शरद मल्होत्रा का कहना है कि आजकल की खराब लाइफस्टाइल भी पित्त की पथरी के बढ़ते मामलों के पीछे एक कारण मानी जाती है। ज्यादा फैट और कैलोरी वाले भोजन का सेवन, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और मोटापा पित्त की पथरी के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, बैलेंस डाइट जिसमें पर्याप्त फाइबर, फल, सब्जियां और हेल्दी फैट शामिल हों, पित्ताशय की सेहत के लिए बेहतर होता है। नियमित एक्सरसाइज वजन को कंट्रोल रखने में मदद करती है, जिससे पित्त की पथरी का खतरा कम किया जा सकता है।

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डॉक्टर की सलाह

जिन महिलाओं का वजन ज्यादा है, जिनमें बार-बार वजन बढ़ने और घटने की समस्या रहती है, परिवार में पित्त की पथरी का इतिहास है या जो हार्मोनल बदलावों से गुजर रही हैं, उनमें खतरा ज्यादा हो सकता है। हालांकि, हर महिला में पित्त की पथरी के लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। यदि पेट के ऊपरी दाएं हिस्से में बार-बार दर्द, खासतौर पर ऑयली खाने के बाद परेशानी, मतली, उल्टी या अपच जैसी समस्या होती है, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान होने से समस्याओं से बचा जा सकता है।

निष्कर्ष

महिलाओं में गॉलस्टोन का खतरा अधिक होने के पीछे हार्मोनल बदलाव, गर्भावस्था, वजन में उतार-चढ़ाव और जीवनशैली जैसे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। हालांकि, स्वस्थ वजन बनाए रखना, संतुलित आहार लेना और नियमित शारीरिक गतिविधि करना इस जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। यदि गॉलस्टोन से जुड़े लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से सलाह लेना बेहतर होता है।

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FAQ

  • क्या पित्त की पथरी से लिवर पर असर पड़ सकता है?

    यदि पथरी पित्त नली में रुकावट पैदा करती है, तो इससे लिवर और डाइजेशन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
  • क्या पित्त का पथरी की समस्या दोबारा हो सकती है?

    यदि पित्ताशय में पथरी बनी रहती है, तो लक्षण दोबारा आ सकते हैं। इलाज के बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार लाइफस्टाइल में बदलाव जरूरी होते हैं।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 28, 2026 17:06 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Sharad Malhotra