Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr Sharad Malhotra , Senior Consultant & Director – Gastroenterology, Hepatology & Therapeutic Endoscopy

क्या परिवार में पित्त की पथरी का इतिहास बढ़ा सकता है आपका खतरा? डॉक्टर से जानें जेनेटिक कनेक्शन

पित्त की पथरी को लेकर कई लोगों के मन में एक सवाल रहता है कि अगर परिवार में किसी को पहले से गॉलस्टोन यानी पित्त की पथरी की समस्या रही है, तो क्या अगली पीढ़ी में भी इसका खतरा बढ़ जाता है? इस बारे में डॉक्टर शरद मल्होत्रा बताते हैं कि अगर परिवार में किसी को पित्त की पथरी रही है, तो आपका जोखिम बढ़ सकता है।

आजकल यदि आपके परिवार में माता-पिता, भाई-बहन या किसी करीबी रिश्तेदार को पित्त की पथरी की समस्या रही है, तो आपके मन में भी यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या आपको भी इसका खतरा ज्यादा है। आकाश हेल्थकेयर के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं थेराप्यूटिक एंडोस्कोपी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट और डायरेक्टर, डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं कि फैमिली हिस्ट्री होने का मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को पित्त की पथरी होगी, लेकिन ऐसे लोगों को अपनी सेहत के प्रति ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है।। सही जानकारी और समय पर सावधानी अपनाकर इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। डॉक्टर शरद मल्होत्रा का मानना है कि केवल जेनेटिक्स ही नहीं, बल्कि मोटापा, असंतुलित खानपान, फिजिकल इनएक्टिविटी, डायबिटीज और तेजी से वजन कम करना भी पित्त की पथरी के जोखिम कारक हैं।

क्या पित्ताशय की पथरी परिवारों में चलती है?

डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं, ''अगर माता-पिता, भाई-बहन या परिवार के किसी करीबी सदस्य को पित्त की पथरी की समस्या रही है, तो अन्य सदस्यों में भी इसका जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा हो सकता है। इसके पीछे कुछ ऐसे जीन हो सकते हैं जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल, मेटाबॉलिज्म और पित्त के बनने को प्रभावित करते हैं। हालांकि केवल आनुवंशिक कारण ही जिम्मेदार नहीं होते, बल्कि खानपान, मोटापा और फिजिकल एक्टिविटी की कमी जैसे कारक भी पित्त की पथरी बनने में अहम भूमिका निभाते हैं।''

  • फैमिली हिस्ट्री के अलावा कुछ अन्य कारण भी पित्त की पथरी के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
  • इनमें मोटापा, ऑयली फूड और हाई-कोलेस्ट्रॉल भोजन का सेवन, तेजी से वजन कम करना, डायबिटीज और महिलाओं में हार्मोनल बदलाव शामिल हैं।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान या लंबे समय तक हार्मोनल दवाओं का उपयोग करने वाली महिलाओं में भी इसका खतरा ज्यादा देखा जाता है।
  • यदि इन कारणों के साथ फैमिली हिस्ट्री भी जुड़ जाए, तो जोखिम और बढ़ सकता है।

साल 2017 में BMJ Journals में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, स्वीडन में 2017 में हुई एक बड़ी स्टडी में पाया गया कि पित्त की पथरी (gallstone) की बीमारी वाले 36% लोगों में इस बीमारी का पारिवारिक इतिहास था। इनमें से लगभग आधे लोगों के माता-पिता में से किसी एक को पित्त की पथरी थी। इस स्टडी के अनुसार, पित्त की पथरी की बीमारी के पीछे अनुवांशिक या जेनेटिक कारण बहुत अहम भूमिका निभाते हैं। डेटा से पता चलता है कि लगभग 36% मामलों में यह बीमारी परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। यदि परिवार के सदस्यों जैसे माता-पिता या भाई-बहन को यह समस्या रही है, तो अन्य सदस्यों में भी इसके होने का खतरा सामान्य से काफी ज्यादा हो जाता है। जिन परिवारों में एक से ज्यादा भाई-बहन इस बीमारी से पीड़ित हैं, वे सबसे हाई रिस्क वाले ग्रुप में आते हैं, जहां बीमारी का खतरा 10 गुना से भी ज्यादा बढ़ जाता है। वहीं दूसरी ओर, पति-पत्नी में इसका जोखिम बहुत मामूली देखा गया, जो यह साबित करता है कि यह सिर्फ खान-पान या एक जैसी लाइफस्टाइल से नहीं, बल्कि मुख्य रूप से जींस (Genes) के कारण होता है।

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क्या पित्त की पथरी की फैमिली हिस्ट्री होने पर जांच करानी चाहिए?

डॉक्टर शरद मल्होत्रा के अनुसार, यदि परिवार में कई लोगों को पित्त की पथरी की समस्या रही है और साथ ही व्यक्ति को पेट दर्द, अपच या अन्य संबंधित लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो समय पर जांच कराना बेहतर होता है। अल्ट्रासाउंड पित्त की पथरी की पहचान करने का सबसे सामान्य और प्रभावी तरीका माना जाता है। समय रहते बीमारी का पता चलने पर उचित इलाज और गंभीर समस्याओं से बचाव संभव है।

family history increase gallstone risk

पित्त की पथरी से बचाव के लिए क्या करें?

डॉक्टर शरद मल्होत्रा बताते हैं कि फैमिली हिस्ट्री को बदला नहीं जा सकता, लेकिन हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर पित्त की पथरी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। बैलेंस डाइट लें जिसमें हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और फाइबर की पर्याप्त मात्रा शामिल हो। तले-भुने और ज्यादा फैट भोजन से दूरी बनाएं।

साल 2016 में Korean Journal of Family Medicine में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, पित्त की पथरी की बीमारी में मरीजों को जागरूक करने का मकसद उन्हें हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने के लिए प्रेरित करना होना चाहिए। इसमें सही और आदर्श वजन बनाए रखना, रोजाना फिजिकल रूप से एक्टिव रहना, मेटाबॉलिक सिंड्रोम से बचना और शरीर में शुगर व कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कंट्रोल रखना शामिल है, ताकि पित्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा न बढ़े। दवाओं के जरिए बचाव का तरीका केवल कुछ खास जोखिम वाले मरीजों के समूह तक ही सीमित होना चाहिए। इसके अलावा, पर्यावरण और खान-पान के असर से हमारे जींस पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने के लिए और स्टडी की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस बीमारी से बचाव के और भी बेहतर तरीके खोजे जा सकें।

पित्त की पथरी का इलाज कैसे किया जाता है?

यदि पित्त की पथरी कोई परेशानी नहीं पैदा कर रही है, तो कई मामलों में केवल नियमित निगरानी की सलाह दी जाती है लेकिन यदि बार-बार दर्द, इंफेक्शन या पित्त नली में रुकावट जैसी समस्या हो, तो डॉक्टर दवाओं या सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। आजकल पित्त की पथरी के इलाज के लिए लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के जरिए गॉलब्लैडर को सुरक्षित तरीके से हटाया जाता है, जिससे मरीज जल्दी रिकवर हो जाता है और नॉर्मल लाइफ में लौट सकता है।

निष्कर्ष

फैमिली हिस्ट्री पित्त की पथरी के जोखिम को बढ़ा सकती है, लेकिन यह बीमारी होना तय नहीं करती। आनुवंशिक कारणों के साथ-साथ आपकी लाइफस्टाइल, खानपान और वजन भी इस समस्या में अहम भूमिका निभाते हैं। यदि परिवार में पित्त की पथरी का इतिहास है, तो नियमित हेल्थ चेकअप, बैलेंस डाइट, एक्सरसाइज और समय पर डॉक्टर की सलाह लेकर इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। किसी भी तरह के लगातार पेट दर्द या पाचन संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज न करें, क्योंकि समय पर पहचान और इलाज से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।

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FAQ

  • पित्त की पथरी का ऑपरेशन कब करवाना चाहिए?

    यदि पथरी कोई लक्षण नहीं दे रही है, तो कई मामलों में केवल निगरानी की जाती है। डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह मरीज की स्थिति को देखकर देते हैं।
  • क्या पित्त की पथरी दोबारा बन सकती है?

    यदि गॉलब्लैडर यानी पित्ताशय है और केवल पथरी का इलाज किया गया है, तो दोबारा बनने की संभावना हो सकती है।

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Akanksha Tiwari

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आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 24, 2026 18:29 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Sharad Malhotra

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