Fri Sep 11, 2026 | 07:30 PM IST

Medically Reviewed by Dr Jayaditya Ghosh , Consultant Endocrinologist

थायराइड और फैमिली हिस्ट्री: जेनेटिक रिस्क, शुरुआती लक्षण और बचाव के तरीके जानें डॉक्टर से

थायराइड का संबंध परिवार के इतिहास यानी जेनेटिक्स से भी हो सकता है। अगर परिवार में किसी को थायराइड है, तो अगली पीढ़ी में इसका खतरा रहता है। हालांकि, केवल जेनेटिक्स ही नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल, तनाव और खानपान भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।

आज के समय में थायराइड से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं और यह सिर्फ लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी नहीं रह गई है। कई मामलों में इसका संबंध परिवार से भी होता है। यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. जयादित्य घोष के अनुसार, अगर परिवार में किसी एक व्यक्ति को थायराइड की बीमारी है, तो अन्य सदस्यों में भी इसका खतरा बढ़ सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को यह बीमारी होगी, लेकिन जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा होता है। थायराइड एक छोटी सी ग्रंथि होती है, लेकिन इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। जब यह सही से काम नहीं करती, तो शरीर में कई तरह की समस्याएं शुरू हो सकती हैं। इसलिए अगर परिवार में पहले से थायराइड का इतिहास है, तो इस पर खास ध्यान देना बेहद जरूरी हो जाता है।

क्या थायराइड बीमारी परिवार में चलती है?

थायराइड डिसऑर्डर, खासकर ऑटोइम्यून थायराइड डिजीज, अक्सर परिवार में देखी जाती है। जैसे Hashimoto’s Thyroiditis और Graves’ Disease ऐसी बीमारियां हैं जिनमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से थायराइड ग्रंथि पर हमला करने लगता है। इन बीमारियों में जेनेटिक फैक्टर की बड़ी भूमिका होती है।

साल 2013 की NCBI Bookshelf में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, ऑटोइम्यून थायराइड रोग (AITD) के विकास में जेनेटिक्स यानी आनुवंशिकता की बहुत बड़ी भूमिका होती है। कई ऐसे जीन पाए गए हैं जो इम्यून सिस्टम को प्रभावित करके इस बीमारी का खतरा बढ़ाते हैं। खासकर HLA-DR3, CTLA-4 और CD40 जैसे जीन AITD से मजबूत रूप से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा PTPN22, FOXP3 और CD25 जैसे जीन भी शरीर की इम्यूनिटी को बदलकर थायराइड पर हमला करने की प्रक्रिया को बढ़ावा देते हैं। इस रिसर्च से यह भी पता चलता है कि कुछ जीन बीमारी का जोखिम बढ़ाते हैं, जबकि कुछ जीन सुरक्षा भी प्रदान कर सकते हैं। कुल मिलाकर, AITD एक गंभीर बीमारी है जिसमें कई जीन मिलकर काम करते हैं और इम्यून सिस्टम को असंतुलित कर देते हैं। 

इसका मतलब यह है कि अगर आपके परिवार में किसी को थायराइड है, तो आपको सतर्क रहने की जरूरत है, लेकिन घबराने की नहीं। सही जानकारी और समय पर जांच से इस जोखिम को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।

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किन लोगों में ज्यादा खतरा होता है?

डॉ. जयादित्य घोष बताते हैं कि थायराइड की समस्या कुछ लोगों में दूसरों की तुलना में ज्यादा देखने को मिलती है। यह महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले ज्यादा पाई जाती है, इसका मुख्य कारण महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव हैं। प्यूबर्टी, प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज जैसे समय में हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे थायराइड ग्रंथि प्रभावित होती है। आमतौर पर 30 साल की उम्र के बाद थायराइड से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ने लगता है। हालांकि, अगर किसी व्यक्ति के परिवार में पहले से थायराइड की बीमारी रही है, तो यह समस्या कम उम्र में भी हो सकती है। 

साल 2021 में JAMA network में प्रकाशित रिव्यू आर्टिकल के अनुसार थायराइड की समस्याए महिलाओं में पुरुषों की तुलना में अधिक पाई जाती हैं, जिसका मुख्य कारण उनके इम्यून सिस्टम में अंतर है। कई मामलों में यह एक ऑटोइम्यून बीमारी के रूप में विकसित होती है, जहां शरीर का इम्यून सिस्टम ही थायराइड ग्रंथि पर हमला करता है। हालांकि, एंटीबॉडी की मौजूदगी हमेशा बीमारी का संकेत नहीं होती, क्योंकि कई लोगों में ये बिना किसी लक्षण के भी पाई जाती हैं। महिलाओं के जीवन के अलग-अलग चरण, जैसे किशोरावस्था, गर्भावस्था और मेनोपॉज, थायराइड के फंक्शन पर प्रभाव डालते हैं और बीमारी के समय को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

family history and thyroid

इसके अलावा, जिन लोगों को पहले से कोई ऑटोइम्यून बीमारी है, उनमें भी थायराइड का खतरा ज्यादा होता है। टाइप-1 डायबिटीज और रूमेटॉइड अर्थराइटिस जैसी बीमारियां इम्यून सिस्टम को कमजोर या असंतुलित कर देती हैं, जिससे शरीर अपने ही अंगों पर हमला करने लगता है और थायराइड भी प्रभावित हो सकता है।

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शुरुआती लक्षणों को पहचानना है जरूरी

डॉ. जयादित्य घोष बताते हैं कि थायराइड के लक्षण अक्सर इतने सामान्य होते हैं कि लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। यही सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है। शुरुआत में ये लक्षण हल्के लगते हैं, लेकिन अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है और पूरे शरीर के फंक्शन को प्रभावित कर सकती है।

  • सबसे पहले वजन में बिना कारण बदलाव एक जरूरी संकेत है। अगर आपका वजन अचानक बढ़ने या कम होने लगे, जबकि आपकी डाइट और लाइफस्टाइल में कोई खास बदलाव न हो, तो यह थायराइड का संकेत हो सकता है। इसके साथ ही लगातार थकान रहना, कमजोरी महसूस होना और रोजमर्रा के काम करने में मन न लगना भी इसके शुरुआती लक्षण हैं।
  • बालों का तेजी से झड़ना, स्किन का ड्राई और बेजान हो जाना भी थायराइड की ओर इशारा करते हैं। कई लोग इसे मौसम या सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह शरीर के अंदर हो रहे हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है।
  • महिलाओं में थायराइड का असर ज्यादा देखने को मिलता है। पीरियड्स का अनियमित होना, बहुत ज्यादा या बहुत कम ब्लीडिंग होना और प्रेग्नेंसी में दिक्कत आना भी इसके लक्षण हो सकते हैं। इन संकेतों को हल्के में लेना आगे चलकर गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है।
  • मानसिक स्वास्थ्य पर भी थायराइड का असर पड़ता है। मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन, चिंता, डिप्रेशन और नींद न आना जैसी समस्याएं भी इससे जुड़ी हो सकती हैं। कई बार लोग इसे सिर्फ तनाव समझते हैं, जबकि असल कारण थायराइड हो सकता है। 
  • कुछ मामलों में गर्दन में सूजन या गांठ नजर आ सकती है। यह एक गंभीर संकेत हो सकता है और इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
  • इसलिए जरूरी है कि अगर शरीर में ऐसे कोई भी बदलाव नजर आएं, तो उन्हें हल्के में न लें। समय पर जांच और डॉक्टर से सलाह लेने से बीमारी को शुरुआती स्टेज में ही कंट्रोल किया जा सकता है और आगे होने वाली जटिलताओं से बचा जा सकता है।

स्क्रीनिंग और जांच

अगर आपके परिवार में थायराइड की बीमारी है, तो नियमित जांच कराना बेहद जरूरी है। डॉ. जयादित्य घोष के अनुसार, 20-30 साल की उम्र से ही स्क्रीनिंग शुरू कर देनी चाहिए, खासकर अगर कोई लक्षण दिखाई दे रहे हों। थायराइड की जांच के लिए TSH टेस्ट सबसे जरूरी होता है। इसके अलावा T3 और T4 टेस्ट भी किए जाते हैं, जो थायराइड हार्मोन के लेवल को मापते हैं। अगर आपकी रिपोर्ट सामान्य है, तब भी हर 1-2 साल में जांच कराना फायदेमंद होता है। इससे बीमारी का जल्दी पता चल सकता है और समय पर इलाज शुरू किया जा सकता है।

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थायराइड से बचाव और इलाज

डॉ. जयादित्य घोष बताते हैं कि थायराइड की बीमारी को पूरी तरह से रोकने का कोई पक्का तरीका नहीं है, खासकर जब इसका कारण जेनेटिक हो। फिर भी कुछ सावधानियां अपनाकर इसके खतरे को कम किया जा सकता है। सबसे जरूरी है बैलेंस और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना। नियमित रूप से पौष्टिक डाइट लेना, जिसमें आयोडीन और जिंक जैसे पोषक तत्व शामिल हों, थायराइड के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। साथ ही, तनाव को कम रखना, पर्याप्त नींद लेना और रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करना भी बहुत जरूरी है।

  • थायराइड का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज को कौन-सी समस्या है। अगर किसी को हाइपोथायरॉयडिज्म है, तो इसका इलाज आमतौर पर थायराइड हार्मोन रिप्लेसमेंट दवाओं से किया जाता है। ये दवाएं शरीर में हार्मोन के लेवल को सामान्य बनाए रखने में मदद करती हैं, जिससे लक्षण धीरे-धीरे कम होने लगते हैं।
  • वहीं, हाइपरथायरायडिज्म के मामले में इलाज थोड़ा अलग होता है। इसमें डॉक्टर दवाओं के जरिए हार्मोन के प्रोडक्शन को कंट्रोल करते हैं। कुछ गंभीर मामलों में रेडियोएक्टिव आयोडीन थेरेपी या सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है, ताकि थायराइड ग्रंथि की एक्टिविटी को कम किया जा सके।
  • थायराइड के मरीजों के लिए नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन करना बेहद जरूरी है। दवाओं को समय पर लेना और बीच में इलाज बंद न करना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि लापरवाही से समस्या दोबारा बढ़ सकती है। समय पर पहचान और सही इलाज से इस बीमारी को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है और व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है।

डॉक्टर से कब मिलें?

अगर आपको थायराइड डिसऑर्डर से जुड़े कोई भी लक्षण महसूस हो रहे हैं, अगर आपका वजन बिना किसी स्पष्ट कारण के तेजी से बढ़ रहा है या कम हो रहा है, तो यह एक संकेत हो सकता है।

  • इसके अलावा लगातार थकान, कमजोरी, काम करने में मन न लगना या हर समय सुस्ती महसूस होना भी थायराइड की ओर इशारा करता है।
  • महिलाओं में अगर पीरियड्स अनियमित हो जाएं, बहुत ज्यादा या बहुत कम ब्लीडिंग हो या कंसीव करने में दिक्कत आ रही हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। 
  • बालों का ज्यादा झड़ना, त्वचा का सूखापन, चेहरे पर सूजन या गर्दन में गांठ भी अहम संकेत हो सकते हैं।

निष्कर्ष

थायराइड डिसऑर्डर की खास बात यह है कि इसके लक्षण धीरे-धीरे दिखाई देते हैं और अक्सर सामान्य समस्याओं की तरह लगते हैं। यही कारण है कि कई लोग समय पर इसे पहचान नहीं पाते लेकिन अगर शुरुआत में ही ध्यान दिया जाए, तो इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। सही समय पर जांच, जैसे TSH Test और डॉक्टर की सलाह से इलाज शुरू करना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना, बैलेंस्ड डाइट लेना, नियमित एक्सरसाइज करना और तनाव को कम करना इस समस्या को मैनेज करने में मदद करता है।

FAQ

  • महिलाओं में थायराइड ज्यादा क्यों होता है?

    महिलाओं में थायराइड ज्यादा होने का कारण हार्मोनल बदलाव जैसे पीरियड्स, प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज हैं।
  • क्या थायराइड पूरी तरह ठीक हो सकता है?

    इसे पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन कंट्रोल किया जा सकता है।
  • क्या तनाव से थायराइड बढ़ सकता है?

    ज्यादा तनाव हार्मोनल असंतुलन को बढ़ा सकता है।
  • क्या बिना दवा के थायराइड ठीक हो सकता है?

    आमतौर पर नहीं, लेकिन लाइफस्टाइल सुधार से लक्षण कम हो सकते हैं।
  • क्या डाइट से थायराइड कंट्रोल होता है?

    हेल्दी डाइट से थायराइड कंट्रोल करने में काफी मदद मिल सकती है।

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Akanksha Tiwari

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आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 26, 2026 06:49 IST

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