Fri Sep 11, 2026 | 09:03 PM IST

Medically Reviewed by Dr Abhinav Gupta , Consultant Neurologist & Director - Neurology Bhav Neuro Centre, Ghaziabad

क्या माइग्रेन माता-पिता से बच्चों में आता है? जानें डॉक्टर से कारण, लक्षण और बचाव

माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी ट्रांसफर हो सकती है। अगर माता-पिता में से किसी को माइग्रेन है, तो बच्चों में इसका खतरा कई गुना बढ़ जाता है। डॉक्टर से जानें माइग्रेन के जेनेटिक कारण, लक्षण और बचाव के उपाय।

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माइग्रेन साधारण सिरदर्द नहीं होता, बल्कि यह एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है। माइग्रेन का दर्द कई बार इतना तेज होता है कि व्यक्ति कई दिनों तक नॉर्मल काम नहीं कर पाता। WHO के मुताबिक, साल 2021 में दुनिया भर में 310 करोड़ लोग (लगभग 40% आबादी) सिरदर्द की बीमारियों से प्रभावित हैं और इसमें माइग्रेन भी एक समस्या है। इसमें बताया गया है कि विकलांगता (DALYs) के आधार पर माइग्रेन दुनिया में तीसरे स्थान पर है। स्ट्रोक और नियोनेटल एन्सेफैलोपैथी बीमारियां पहले और दूसरे स्थान पर हैं।

WHO की इसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सिरदर्द से जुड़ी बीमारियां पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा पाई गई है और इसका मुख्य कारण हार्मोनल बदलाव है। माइग्रेन एक क्रोनिक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जो जीवनभर बनी रह सकती है। आमतौर पर लोग मानते हैं कि अगर फैमिली में किसी को है, तो अगली पीढ़ी में भी जा सकता है। माइग्रेन से जुड़े इस सवाल और इसके लक्षणों से लेकर बचाव के उपायों के बारे में हमने ग्रेटर नोएडा के सर्वोदय अस्पताल के न्यूरोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. अभिनव गुप्ता से बात की।

माइग्रेन क्या है?

Dr. Abhinav Gupta कहते हैं, “माइग्रेन सिर्फ एक सामान्य सिरदर्द नहीं है, बल्कि इसमें दर्द बहुत ज्यादा होता है और अक्सर सिर के एक हिस्से में धड़कन जैसा महसूस होता है। माइग्रेन का दर्द दिमाग के नर्व सिग्नल्स, केमिकल्स और ब्लड वेसल्स के बीच असामान्य एक्टिविटीज के कारण होता है। कुछ लोगों को माइग्रेन से पहले ऑरा के लक्षण महसूस होते हैं, जिसमें आंखों के सामने जिगजैग जैसी लाइन्स दिखाई देना या बोलने में दिक्कत महसूस होती है।"

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दुनियाभर में माइग्रेन के आंकड़े

Lancet में प्रकाशित Global Burden of Disease (GBD 2021) स्टडी के अनुसार, माइग्रेन सिर्फ एक सिरदर्द नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर में विकलांगता का बड़ा कारण बन चुका है। स्टडी में कई दिलचस्प आंकड़े देखने को मिले हैं। 

  • 1990 से 2021 के बीच हुई स्टडी के अनुसार, पिछले 30 सालों के बीच माइग्रेन के मामलों में 58.2% की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान माइग्रेन के कारण होने वाली अक्षमता या विकलांगता के कुल मामलों में 58.9% बढ़े हैं।
  • 5 से 19 साल के लोगों में - इस उम्र के लोगों में माइग्रेन विकलांगता (DALYs) के तीन सबसे बड़े मुख्य कारणों में से एक है। इस उम्र के प्रति 100,000 बच्चों में से लगभग 380 बच्चे इस बीमारी के बोझ से जूझ रहे हैं।
  • 20-59 साल के लोगों में - कामकाजी उम्र के वयस्कों में, स्ट्रोक के बाद माइग्रेन ही वह बीमारी है जो सबसे ज्यादा सेहत को नुकसान पहुंचा रही है। इस उम्र के प्रति 100,000 लोगों में से करीब 750.8 वयस्क माइग्रेन की बीमारी से पीड़ित हैं।
  • माइग्रेन का महिला-से-पुरुष अनुपात 1.62 देखा गया है।

माइग्रेन होने के क्या लक्षण हैं?

WHO के अनुसार, माइग्रेन के इन लक्षणों पर नजर रखने की जरूरत होती है।

  1. सिरदर्द मध्यम से गंभीर होता है, जो अक्सर सिर की एक तरफ या आंखों के पीछे होता है।
  2. सिरदर्द में नसों में तेज धड़कन महसूस होना, जो फिजिकल एक्टिविटी करते समय बढ़ जाता है।
  3. माइग्रेन का दर्द चार से 72 घंटे तक रह सकता है।
  4. माइग्रेन का मरीज रोशनी और आवाज को लेकर सेंसिटिव हो जाते हैं।
  5. मतली और उल्टी जैसा महसूस होता है।
  6. बच्चों में माइग्रेन वयस्कों के मुकाबले कम समय के लिए होता है।

क्या माइग्रेन जेनेटिक होता है?

Neuropsychiatric Disease and Treatment 2021 में प्रकाशित स्टडी में माइग्रेन और जेनेटिक्स के बारे में विस्तार से बताया गया है। स्टडी के अनुसार, परिवार में सामान्य माइग्रेन पॉलीजेनिक माने जाते हैं, जो कई जीन्स के प्रभाव से होता है और इसकी आनुवंशिकता का अनुमान 34% से 64% तक लगाया गया है। मरीज के पहले रिश्तेदार जैसे बच्चे या भाई-बहन में बिना ऑरा वाले माइग्रेन होने की संभावना दोगुनी ज्यादा होती है। ऑरा वाले माइग्रेन के मरीजों के रिश्तेदारों में इसके होने की संभावना चार गुना ज्यादा होती है। कुछ दुर्लभ प्रकार के मोनोजेनिक माइग्रेन होते हैं, जो मुख्य तौर पर आयन चैनलों (Ion channels) को एनकोड करने वाले जीन में म्यूटेशन के कारण होते हैं।

इसमें बताया गया है कि वैज्ञानिकों ने लाखों जेनेटिक वेरिएंट्स का परीक्षण किया जिसमें 59,674 माइग्रेन रोगियों और 3,16,078 स्वस्थ व्यक्तियों को शामिल किया गया। इस शोध ने 38 अलग-अलग स्थानों (Loci) पर 44 जेनेटिक वेरिएंट्स की पहचान की, जो सामान्य माइग्रेन से जुड़े हैं।

पीढ़ी दर पीढ़ी माइग्रेन होने के बारे में Dr. Abhinav Gupta कहते हैं, “माइग्रेन होने के कारणों की सही वजह समझना मुश्किल है क्योंकि माइग्रेन होने की वजह सिर्फ एक नहीं होती, लेकिन माइग्रेन अक्सर अगली जनरेशन में भी जा सकता है। अगर पैरेंट्स में से किसी एक को माइग्रेन की समस्या है, तो बच्चों में होने की संभावना कई गुना बढ़ सकती है। माइग्रेन पॉलीजेनिक डिसऑर्डर है, यानी इसमें कई जीन मिलकर भूमिका निभाते हैं, जो यह तय करते हैं कि इससे माइग्रेन हो सकता है। कई बार अलग-अलग जीन का कॉम्बिनेशन भी माइग्रेन होने की वजह बन सकता है।”

क्या सभी माइग्रेन जीन जेनेटिक होते हैं?

Dr. Abhinav Gupta कहते हैं, “जब जेनेटिक माइग्रेन की बात होती है, तो हेमिप्लेजिक माइग्रेन के बारे में सबसे ज्यादा बताया जाता है, क्योंकि इसके विशेष जीन की पहचान हो चुकी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सिर्फ हेमिप्लेजिक माइग्रेन ही जेनेटिक होता है। जो माइग्रेन ऑरा या बिना ऑरा के होते हैं, वे भी एक जनरेशन से दूसरी जनरेशन में पास हो सकते हैं। इसके अलावा, कई तरह के माइग्रेन होते हैं, जो जेनेटिकल हो सकते हैं, लेकिन इसके बारे में रिसर्च ज्यादा नहीं है।"

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क्या बच्चों को सिर्फ जेनेटिक वजह से ही माइग्रेन हो सकता है?

Dr. Abhinav Gupta कहते हैं, "बच्चों में माइग्रेन होने का कारण जेनेटिक भी हो सकता है और इसके अन्य कारण जैसे स्ट्रेस, डाइट, डिहाइड्रेशन या किसी चीज से एलर्जी के कारण भी हो सकता है। बच्चों में माइग्रेन डायग्नोज करना काफी चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि उनके लिए खास तरह का CT Scan या MRI उपलब्ध नहीं हैं।" Oman Medical Journal में प्रकाशित 2023 के रिव्यू आर्टिकल में बताया गया है कि 10 से 20 फीसदी स्कूली बच्चे और बड़े बच्चे क्रोनिक माइग्रेन से पीड़ित हो सकते हैं। इस स्टडी में बताया गया कि बच्चों में माइग्रेन के ट्रिगर में स्ट्रेस, नींद की कमी, वीडियो गेम और मौसम में बदलाव शामिल है।

माइग्रेन होने के कौन से ट्रिगर्स होते हैं?

Dr. Abhinav Gupta कहते हैं कि माइग्रेन के कई ट्रिगर्स हो सकते हैं, जिस पर ध्यान देना जरूरी है।

  1. स्ट्रेस होना
  2. नींद की कमी या नींद का शेड्यूल खराब होना
  3. हार्मोनल बदलाव जो महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलता है।
  4. कैफीन का लेना
  5. मौसम में बदलाव
  6. खाने पीने के ट्रिगर - चॉकलेट, पनीर, MSG और प्रिजर्वेटिव वाले माइग्रेन को ट्रिगर कर सकते हैं।
  7. पानी की कमी से माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है।
  8. बहुत ज्यादा धूप या टिमटिमाते फ्लोरोसेंट बल्ब
  9. किसी इत्र या केमिकल की तेज गंध
  10. दवाओं का बहुत ज्यादा इस्तेमाल

माइग्रेन कितनी बार हो सकता है?

Dr. Abhinav Gupta कहते हैं, "माइग्रेन कब और कितनी बार हो सकता है, ये सब मरीज के ट्रिगर्स पर निर्भर करता है। किसी को साल में एक बार हो सकता है, तो किसी को हर हफ्ते भी हो सकता है। अगर किसी को महीने में 15 या उससे ज्यादा बार सिरदर्द रहता है, तो इसे क्रोनिक माइग्रेन कहा जाता है। मैंने कई मरीजों में यह भी देखा है कि जब लोग सुबह सोकर उठते हैं, तो उन्हें माइग्रेन महसूस होता है। कई महिलाओं को पीरियड्स से पहले माइग्रेन हो सकता है। कई बार बहुत ज्यादा स्ट्रेस के बाद जब शरीर रिलैक्स करता है, तो माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है। इसलिए यह कह पाना मुश्किल है कि माइग्रेन कितनी देर और कितनी बार हो सकता है।"

माइग्रेन की पहचान

Mayo Clinic के अनुसार, माइग्रेन के डायग्नोसिस के लिए न्यूरोलॉजिस्ट मरीज से कुछ सवाल करते हैं।

  • डॉक्टर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, दर्द का पैटर्न, फैमिली हिस्ट्री जानते हैं।
  • सिरदर्द के दौरान होने वाले लक्षणों की पहचान करते हैं।
  • ज्यादातर मामलों में स्कैन की जरूरत नहीं होती, लेकिन गंभीर मामलों में डॉक्टर कुछ टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।
  • MRI स्कैन - इसके जरिए मरीज के ब्रेन ट्यूमर, स्ट्रोक और दिमाग की ब्लीडिंग, इन्फेक्शन को चेक करते हैं।
  • CT स्कैन - इसमें मरीज के इन्फेक्शन, ब्रेन डैमेज और ब्लीडिंग जैसे फैक्टर्स की जांच की जाती है।

 माइग्रेन से कैसे बचाव हो सकता है?

NHS के अनुसार, माइग्रेन का परमानेंट इलाज नहीं है, लेकिन सही इलाज के जरिए इसके लक्षणों को मैनेज किया जा सकता है।

  1. जब माइग्रेन अटैक आता है, तो उस समय डॉक्टर की बताई सामान्य पेनकिलर्स ली जा सकती हैं।
  2. मतली, उल्टी या जी मिचलाने की समस्या होने पर डॉक्टर इसे रोकने की दवाई दे सकते हैं।
  3. माइग्रेन को रोकने के लिए बीटा ब्लॉकर्स या एंटीडिप्रेसेंट दवाएं दी जा सकती हैं।
  4. कई मरीजों पर एक्यूपंक्चर भी काफी प्रभावी साबित हुआ है।
  5. मरीजों के स्ट्रेस को कम करने के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) का सुझाव दिया जा सकता है।
  6. खाने-पीने का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि लो ब्लड शुगर एक ट्रिगर है।
  7. चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक कम से कम करें।
  8. प्रचुर मात्रा में पानी जरूर पिएं।
  9. माइग्रेन के ट्रिगर्स से बचें।

डॉक्टर से कब मिले?

Dr. Abhinav Gupta कहते हैं कि अगर मरीज को बहुत तेज सिरदर्द हो, सिरदर्द के पैटर्न में बदलाव हो, सिरदर्द अचानक बढ़ने लगे, सिरदर्द के साथ बोलने में दिक्कत, तेज बुखार, गर्दन में अकड़न महसूस हो और महीने में 10 से 15 दिन पेनकिलर्स लेनी पड़ें, तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

निष्कर्ष

माइग्रेन होने का कारण फैमिली हिस्ट्री भी हो सकती है, लेकिन इसे लाइफस्टाइल में बदलाव करके और ट्रिगर्स की पहचान करके मैनेज कर सकते हैं। माइग्रेन का कोई स्थायी इलाज नहीं है, इसलिए समय पर डॉक्टर की सलाह और दवाओं के जरिए ही इसे मैनेज किया जा सकता है। बच्चों में माइग्रेन होने पर डॉक्टर को दिखाना बहुत जरूरी है, इसे सिर्फ सिरदर्द समझकर इग्नोर नहीं करना चाहिए।

FAQ

  • माइग्रेन और सामान्य सिरदर्द में क्या अंतर है?

    माइग्रेन अक्सर सिर के एक हिस्से में होता है और इसमें धड़कन जैसा दर्द महसूस होता है। मरीज को मतली या उल्टी होने लगती है। सामान्य सिरदर्द में दर्द थोड़ी देर होता है और दर्द बहुत ज्यादा गंभीर नहीं होता।
  • क्या माइग्रेन के लिए कोई जेनेटिक टेस्ट करवाना चाहिए?

    हेमिप्लेजिक माइग्रेन जैसे दुर्लभ मामलों को छोड़कर, सामान्य माइग्रेन के लिए किसी जेनेटिक टेस्ट की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर लक्षणों और फैमिली हिस्ट्री से ही इसका पता लगा लेते हैं।
  • 'क्रोनिक माइग्रेन' क्या है?

    अगर किसी व्यक्ति को महीने में 15 या उससे ज्यादा दिन सिरदर्द रहता है, तो उसे क्रोनिक माइग्रेन कहा जाता है।
  • क्या गर्भावस्था के दौरान माइग्रेन बढ़ सकता है?

    हार्मोनल बदलावों के कारण कुछ महिलाओं में माइग्रेन बढ़ सकता है, लेकिन कुछ मामलों में प्रेग्नेंसी में कम भी हो सकता है। अगर किसी प्रेग्नेंट महिला को माइग्रेन हो, तो बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर बिल्कुल न लें।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 23, 2026 17:09 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Apr 23, 2026 17:09 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Abhinav Gupta

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