आमतौर पर लोग माइग्रेन को सिर्फ सिरदर्द से जोड़कर ही देखते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होता। माइग्रेन के कई प्रकार होते हैं और उनमें हेमिप्लेजिक माइग्रेन ऐसी कंडीशन है, जिसमें न सिर्फ सिरदर्द होता है, बल्कि यह पूरे शरीर को प्रभावित करता है। StatPearls जर्नल के अनुसार, हेमिप्लेजिक माइग्रेन में सिरदर्द के साथ-साथ शरीर के एक हिस्से में मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होती है। इस तरह का माइग्रेन बहुत कम लोगों में देखने को मिलता है। इस रिसर्च में बताया गया है कि सामान्य तौर पर होने वाला माइग्रेन करीब 15 से 20 फीसदी लोगों में पाया गया है, लेकिन हेमिप्लेजिक माइग्रेन सिर्फ 0.01% लोगों में ही है। इसका मतलब है कि दस हजार लोगों में लगभग एक व्यक्ति को हेमिप्लेजिक माइग्रेन होता है। यह बीमारी आमतौर पर 12 से 17 साल की उम्र के बीच शुरू हो सकती है। इस रिसर्च में यह भी बताया गया है कि यह माइग्रेन पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलता है। हेमिप्लेजिक माइग्रेन के बारे में पूरी जानकारी जानने के लिए हमने ग्रेटर नोएडा के सर्वोदय अस्पताल के न्यूरोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. अभिनव गुप्ता से बात की।
हेमिप्लेजिक माइग्रेन क्या है?
Cleveland Clinic के अनुसार, हेमिप्लेजिक माइग्रेन में तेज सिरदर्द के साथ शरीर के किसी भी एक तरफ मांसपेशियों में सुन्नपन, झनझनाहट या आंखों के सामने धुंधलापन आने लगता है। इस कंडीशन में मरीज को बोलने में दिक्कत होने लगती है। इसके लक्षण काफी हद तक स्ट्रोक जैसे महसूस होते हैं, इसलिए इसका समय पर इलाज कराना बहुत महत्वपूर्ण है। कई मामलों में मांसपेशियों में कमजोरी माइग्रेन से ठीक पहले या सिरदर्द के दौरान हो सकती है। ऐसी कंडीशन को अनदेखा करना भारी पड़ सकता है। AJNR के मुताबिक, हेमिप्लेजिक माइग्रेन की शुरुआत में दिमाग की नसों की एक्टिविटी कम होने से ब्लड वेसल्स सिकुड़ने लगती हैं और ब्लड फ्लो कम हो जाता है। इससे ऑरा के लक्षण और कमजोरी आती है और जब सिरदर्द शुरू हो जाता है, तो इसमें ब्लड वेसल्स फैलने लगती हैं। इस वजह से ब्लड फ्लो तेजी से बढ़ने लगता है, जो तेज सिरदर्द का कारण बनता है।

हेमिप्लेजिक माइग्रेन के लक्षण क्या हैं?
डॉ. अभिनव गुप्ता कहते हैं, "हेमिप्लेजिक माइग्रेन के लक्षण अन्य माइग्रेन से काफी अलग होते हैं, इसलिए इन लक्षणों को आसानी से पहचाना जा सकता है। हालांकि, यह बीमारी काफी कम लोगों में होती है, तो उन्हें इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती, इसलिए हेमिप्लेजिक माइग्रेन के लक्षणों की पहचान करना बहुत जरूरी है। ये लक्षण कुछ घंटों तक रह सकते हैं, लेकिन कुछ मामलों में ये लक्षण महीनाभर महसूस हो सकते हैं।"
- एक साइड के शरीर में हाथ, पैर या चेहरे में कमजोरी या टेम्परेरी लकवा महसूस होना
- आंखों के सामने अंधेरा महसूस होना
- मरीज को एक की जगह दो चीजें दिखाई देना (डबल विजन होना)
- आंखों में चमकती रोशनी महसूस होना
- हाथों और पैरों में सुई चुभने जैसी झनझनाहट महसूस होना
- हाथों और पैरों में सुन्नपन महसूस होना
- लड़खड़ाकर बोलना
- बात कहने में दिक्कत महसूस होना
- शरीर में बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होना
- सोचने-समझने में मुश्किल होना
हेमिप्लेजिक माइग्रेन कितनी तरह का होता है?
Cleveland Clinic के अनुसार, हेमिप्लेजिक माइग्रेन दो तरह के होते हैं।
- फैमिली हिस्ट्री के कारण - इस तरह के माइग्रेन को Familial Hemiplegic Migraine (FHM) कहा जाता है। अगर किसी के परिवार में हेमिप्लेजिक माइग्रेन की समस्या होती है, तो इसके होने की संभावना काफी बढ़ सकती है। ये तीन तरह के सबटाइप्स FHM होते हैं और हर एक सबटाइप जीन में बदलाव के कारण होता है। टाइप 4 में उन लोगों को रखा जाता है, जिनमें जेनेटिक बदलाव का पता नहीं चलता।
- स्पोराडिक हेमिप्लेजिक माइग्रेन - जिन लोगों के परिवार में हेमिप्लेजिक माइग्रेन की कोई फैमिली हिस्ट्री नहीं होती। इसमें डॉक्टर हेमिप्लेजिक माइग्रेन के लक्षणों को समझकर इसे डायग्नोज करते हैं।
हेमिप्लेजिक माइग्रेन के कारण क्या हैं?
हेमिप्लेजिक माइग्रेन होने के कई कारण हो सकते हैं और इसका मुख्य कारण नर्व सेल्स का बहुत ज्यादा एक्टिव होना और उसमें केमिकल रिएक्शन होना हो सकता है।
- कॉर्टिकल स्प्रेडिंग डिप्रेशन - दिमाग की नसें एक इलेक्ट्रिक चार्ज की तरह काम करती हैं, जो आयन मॉलिक्यूल्स को अंदर-बाहर जाने में मदद करता है, जिससे न्यूरोट्रांसमीटर शरीर को मैसेज कर पाते हैं। हेमिप्लेजिक माइग्रेन में कॉर्टिकल स्प्रेडिंग डिप्रेशन इस इलेक्ट्रिक एक्टिविटी को अचानक बदल देती है। यह एक स्लो वेव की तरह होता है, जो दिमाग के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक फैलता है। इस वजह से मरीज को लकवा और कमजोरी जैसे लक्षण महसूस होते हैं।
- जेनेटिक बदलाव - जीन में होने वाले बदलाव यह तय करते हैं कि नर्व सेल्स कैसे फंक्शन करेंगे। खास तरह के जीन वेरिएंट नसों के आयन को अंदर-बाहर लेने को खराब कर देते हैं।
बच्चों में हेमिप्लेजिक माइग्रेन
Journal of Clinical Medicine के अनुसार, बच्चों में हेमिप्लेजिक माइग्रेन बहुत ही रेयर कंडीशन होती है। अगर बच्चों में हेमिप्लेजिक माइग्रेन होता है, तो इसके लक्षणों की पहचान कर पाना बहुत मुश्किल होता है। अगर बच्चों में सपोरैडिक हेमिप्लेजिक माइग्रेन होता है, तो यह काफी लंबे समय तक रह सकता है और यह गंभीर स्थिति होती है, लेकिन शुरुआती दौर में यह बार-बार नहीं आते। हेमिप्लेजिक माइग्रेन से पीड़ित बच्चों में व्यस्कों के मुकाबले सुन्नपन और बोलने की दिक्कत कम देखे जा सकते हैं।
हेमिप्लेजिक माइग्रेन के ट्रिगर्स क्या हैं?
डॉ. अभिनव गुप्ता कहते हैं, "हेमिप्लेजिक माइग्रेन अटैक होने पर कई तरह की जटिलताएं बढ़ सकती हैं। इसमें दौरे पड़ना, मेमोरी खोना और लोगों के व्यवहार में बदलाव हो सकता है। कई मामलों में मरीज कोमा में भी जा सकता है। इसलिए माइग्रेन के ट्रिगर्स जैसे नींद पूरी न होना, तेज टिमटिमाती रोशनी और खाने-पीने वाले चीजों की एलर्जी से बचना चाहिए।”
- बहुत ज्यादा स्ट्रेस होना
- फिजिकल स्ट्रेस होने पर
- नींद की कमी
- बहुत ज्यादा नींद लेने पर
- तेज रोशनी लगना
- सिर पर हल्की चोट लगना

हेमिप्लेजिक माइग्रेन की पहचान कैसे करें?
डॉ. अभिनव गुप्ता ने बताया कि हेमिप्लेजिक माइग्रेन के लक्षणों की पहचान करना जरूरी है और इसके लिए सबसे पहले स्ट्रोक या ट्यूमर की संभावना को पूरी तरह खत्म करना जरूरी है। आमतौर पर, हेमिप्लेजिक माइग्रेन के औसतन तीन अटैक हो सकते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह बहुत ज्यादा हो सकते हैं। इस माइग्रेन की पहचान के लिए हम कुछ बातों का ध्यान रखते हैं।
- अटैक के समय शरीर के एक हिस्से में तेज रिफ्लेक्स और पैर के अंगूठे की असामान्य एक्टिविटी हो सकती है।
- अटैक के बीच मरीजों में चलने में दिक्कत, बोलने में मुश्किल या आंखों का असामान्य तरीके से घुमाना
- तेज सिरदर्द के साथ ऑरा महसूस होना
- गंभीर मामलों में मरीज को बहुत ज्यादा नींद आने लगती है या कोमा की कंडीशन महसूस होती है।
- कई मामलों में बुखार और दिमाग में सूजन तक आ सकती है।
- मरीज को MRI या CT स्कैन की सलाह दी जा सकती है।
हेमिप्लेजिक माइग्रेन और स्ट्रोक में फर्क
डॉ. अभिनव गुप्ता कहते हैं कि हेमिप्लेजिक माइग्रेन के लक्षण काफी हद तक स्ट्रोक जैसे लगते हैं, लेकिन दोनों में काफी फर्क होता है।
हेमिप्लेजिक माइग्रेन
- यह कुछ समय से कुछ घंटों तक हो सकता है।
- लक्षण कुछ घंटों से कुछ दिनों में सुधर जाते हैं।
- अगर माइग्रेन ऑरा वाला है, तो मरीज को जिगजैग लाइंस दिख सकती हैं।
- शरीर में सुई चुभने जैसा लग सकता है, कुछ मामलों में सुन्नपन आ सकता है।
- मरीज को बोलने में दिक्कत या चक्कर आ सकते हैं।
- सिरदर्द होना कॉमन है।
- कुछ दिनों में लक्षण एकदम खत्म हो जाते हैं।
स्ट्रोक
- स्ट्रोक अचानक आता है।
- स्ट्रोक में सिरदर्द जरूरी नहीं है।
- कई बार मरीजों की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है।
- कई बार मरीज की एक आंख से दिखना बंद हो सकता है।
- कई मरीजों के शरीर के किसी अंग का काम करना बंद हो सकता है।
- लक्षण अक्सर परमानेंट हो सकते हैं।
- लक्षण तुरंत दिखते हैं।
- लक्षणों में तुरंत सुधार नहीं होता है।
प्रेग्नेंसी में हेमिप्लेजिक माइग्रेन का इलाज
मैनेजमेंट ऑफ माइग्रेन ड्यूरिंग प्रेग्नेंसी (Management of Migraine During Pregnancy) मेडिकल रिसर्च के अनुसार, आमतौर पर प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में पहली बार ट्रांसिएंट फोकल न्यूरोलॉजिकल लक्षण (transient focal neurologic symptoms) देखे जा सकते हैं। इसमें हेमिप्लेजिक माइग्रेन शामिल है। प्रेग्नेंसी के दौरान माइग्रेन के इलाज के लिए पैरासिटामोल या एस्पिरिन दवाई दी जा सकती है। इसका इस्तेमाल पहली और दूसरी तिमाही में किया जा सकता है, लेकिन तीसरी तिमाही में इससे बचना चाहिए। हालांकि, किसी भी तरह के पेनकिलर को लेने से पहले डॉक्टर से जरूर सलाह लें क्योंकि हर महिला की प्रेग्नेंसी अलग होती है, तो उसकी जटिलताएं भी अलग हो सकती है। इसलिए प्रेग्नेंसी में किसी भी तरह की दवाई लेने से पहले डॉक्टर की सलाह बहुत महत्वपूर्ण है।
डॉक्टर से कब मिलें?
डॉ. अभिनव गुप्ता कहते हैं, “हेमिप्लेजिक माइग्रेन का अटैक आने पर मरीजों को तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। अगर मरीज को बोलने में दिक्कत हो या खड़े होने पर भी बैलेंस न बन रहा हो, तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें।”
डॉक्टर की सलाह
हेमिप्लेजिक माइग्रेन को पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसके आने के साइकल को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए डॉक्टर मरीज की मेडिकल कंडीशन देखकर दवाइयां दे सकते हैं। मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी तरह का पेनकिलर नहीं लेना चाहिए। इसलिए डॉक्टर से सलाह लेकर ही किसी भी तरह की दवा लेनी चाहिए। अगर कंडीशन काफी खराब है, तो तत्काल राहत वाली दवाएं दी जा सकती हैं। डॉक्टर ट्रिगर्स की पहचान करके कुछ खाने-पीने की चीजों से परहेज करने की सलाह दे सकते हैं। इन ट्रिगर्स से बचकर हेमिप्लेजिक माइग्रेन के रिस्क को कम किया जा सकता है।
निष्कर्ष
हेमिप्लेजिक माइग्रेन सिर्फ सिरदर्द नहीं है, बल्कि यह न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसके लक्षण कुछ समय से लेकर कुछ हफ्तों तक रह सकते हैं। जब इसके लक्षण जैसे बहुत ज्यादा सिरदर्द, शरीर के एक तरफ लकवा होना दिखता है, तो लोग इसे स्ट्रोक समझ लेते हैं। इसलिए यह जानना जरूरी है कि स्ट्रोक और हेमिप्लेजिक माइग्रेन में फर्क होता है। हेमिप्लेजिक माइग्रेन से बचने के लिए इसके ट्रिगर्स को जानना बहुत महत्वपूर्ण है ताकि इसके रिस्क से बचा जा सके। अगर किसी मरीज को हेमिप्लेजिक माइग्रेन के लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसका इलाज घर पर खुद न करें। बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर लेना खतरनाक हो सकता है, इसलिए समय रहते डॉक्टर से जरूर सलाह लें।
FAQ
क्या हेमिप्लेजिक माइग्रेन सामान्य माइग्रेन से अलग है?
सामान्य माइग्रेन में अक्सर सिरदर्द, मतली या आंखों में रोशनी महसूस होती है, लेकिन हेमिप्लेजिक माइग्रेन में इन सबके अलावा मांसपेशियों में कमजोरी या शरीर के एक हिस्से में लकवा महसूस होता है।क्या हेमिप्लेजिक माइग्रेन में सामान्य माइग्रेन की दवाइयां ली जा सकती हैं?
नहीं, हेमिप्लेजिक माइग्रेन में मरीजों को कुछ ऐसी दवाइयों से बचने की सलाह दी जाती है, जो आमतौर पर सामान्य माइग्रेन के मरीजों को दी जा सकती हैं।यदि आप हेमिप्लेजिक माइग्रेन से पीड़ित हैं तो क्या आप गाड़ी चला सकते हैं?
हेमिप्लेजिक माइग्रेन में गंभीर सिरदर्द के साथ शरीर में सुन्नपन और लकवे की स्थिति हो सकती है, ऐसे में किसी को भी गाड़ी नहीं चलानी चाहिए और न ही किसी भी तरह की मशीनरी का इस्तेमाल करना चाहिए।माइग्रेन कितनी उम्र तक रहता है?
माइग्रेन आमतौर पर किशोरावस्था या 20 की उम्र से शुरू हो सकता है। 50 साल की उम्र के बाद कम या खत्म हो सकता है, लेकिन कुछ मामलों में यह उम्रभर भी रह सकता है।माइग्रेन के अंत में क्या होता है?
माइग्रेन के अंतिम स्टेज को पोस्टड्रोम माइग्रेन कहते हैं। इसके लक्षणों में थकान, मानसिक धुंधलापन और शरीर में दर्द शामिल हैं। गंभीर सिरदर्द के बाद और सामान्य महसूस करने से ठीक पहले ये लक्षण महसूस होते हैं। हालांकि, हर माइग्रेन में ऐसा नहीं होता।
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Current Version
Apr 18, 2026 11:11 IST
Modified By : Aneesh Rawat Apr 18, 2026 11:11 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Abhinav Gupta