Fri Sep 11, 2026 | 08:18 PM IST

Medically Reviewed by Dr Bharath Kumar Surisetti , Consultant Neurologist | MD, DM (Neurology), PDF Movement Disorders (NIMHANS)

माइग्रेन हैंगओवर (पोस्टड्रोम) क्या है? डॉक्टर से जानें इसके कारण, लक्षण और इलाज

माइग्रेन हैंगओवर, जिसे पोस्टड्रोम फेज भी कहा जाता है, माइग्रेन अटैक के बाद होने वाली स्थिति है जिसमें थकान, कमजोरी, ध्यान की कमी और मूड में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके कारणों, सही डायग्नोसिस और उपचार के बारे में जानकारी होना जरूरी है ताकि माइग्रेन हैंगओवर से जल्दी रिकवरी हो सके।

माइग्रेन को अक्सर सिर्फ सिरदर्द समझ लिया जाता है, लेकिन यह एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जिसमें कई स्टेज शामिल होते हैं। इन्हीं में से एक है माइग्रेन हैंगओवर, जिसे मेडिकल भाषा में पोस्टड्रोम भी कहा जाता है। कई बार लोग सिरदर्द ठीक होने के बाद राहत महसूस करते हैं, लेकिन कुछ समय तक शरीर पूरी तरह नॉर्मल नहीं हो पाता, जिससे रोजमर्रा के काम करना मुश्किल लग सकता है, इसलिए जरूरी है कि हम इसे नजरअंदाज न करें और इसके हर पहलू को समझें। इस लेख में यशोदा हॉस्पिटल हैदराबाद के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी से जानिए, माइग्रेन हैंगओवर (पोस्टड्रोम) क्या है? माइग्रेन हैंगओवर के लक्षण क्या हैं, माइग्रेन हैंगओवर होने का कारण क्या है और इसका इलाज कैसे होता है?

माइग्रेन हैंगओवर क्या होता है?

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं, ''माइग्रेन हैंगओवर को डॉक्टर की भाषा में पोस्टड्रोम कहा जाता है, यह माइग्रेन अटैक की आखिरी स्टेज होती है। जब तेज सिरदर्द खत्म हो जाता है, तब भी शरीर पूरी तरह ठीक महसूस नहीं करता और यही स्थिति माइग्रेन हैंगओवर कहलाती है। कुछ लोगों को हल्की सेंसिटिविटी भी रहती है, जैसे तेज रोशनी या आवाज से परेशानी। माइग्रेन हैंगओवर की यह अवस्था कुछ घंटों से लेकर एक-दो दिन तक रह सकती है और हर व्यक्ति में इसके लक्षण अलग-अलग होते हैं।'' कई बार लोगों को समझ नहीं आता कि यह माइग्रेन का ही हिस्सा है और वे इसे कोई दूसरी बीमारी समझ लेते हैं। आसान भाषा में कहें तो, माइग्रेन हैंगओवर वह समय है जब सिरदर्द तो चला जाता है, लेकिन शरीर और दिमाग अभी भी उसके असर से उबर रहे होते हैं।

माइग्रेन हैंगओवर के लक्षण

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि माइग्रेन हैंगओवर के दौरान मरीजों को कई तरह के लक्षण महसूस हो सकते हैं। जैसे-

  • इस दौरान मरीजों को सबसे ज्यादा थकान महसूस होती है, जिससे वे बहुत कमजोर और सुस्त लगते हैं। इसके साथ ही दिमाग में धुंधलापन यानी मेंटल फॉग भी होता है, जिससे सोचने-समझने और ध्यान लगाने में परेशानी होती है। 
  • कई लोगों को चक्कर आना भी महसूस होता है, जिससे संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। शरीर में दर्द, खासकर मांसपेशियों में दर्द और जकड़न भी आम लक्षण हैं।
  • इसके अलावा, फोकस में कमी के कारण व्यक्ति अपने रोजमर्रा के काम ठीक से नहीं कर पाता।
  • कुछ मरीजों को तेज रोशनी और आवाज के प्रति संवेदनशीलता बनी रहती है, जिससे उन्हें असहजता होती है और वे शांत व अंधेरी जगह पर रहना पसंद करते हैं। 
  • हर व्यक्ति में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए कई बार लोग इसे समझ नहीं पाते और इसे कोई दूसरी समस्या मान लेते हैं।

साल 2016 में American Academy of Neurology के Neurology जर्नल में प्रकाशित Peer Review के अनुसार, माइग्रेन का असर केवल सिरदर्द तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि दर्द ठीक होने के बाद भी इसके लक्षण बने रहते हैं, जिसे 'पोस्टड्रोम' (Postdrome) कहा जाता है। इस स्टडी में पाया गया कि लगभग 81% मरीजों को सिरदर्द खत्म होने के बाद भी थकान, फोकस में कमी और गर्दन में अकड़न जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। ज्यादातर मामलों में ये लक्षण 24 घंटे तक रहते हैं। यह स्पष्ट करता है कि माइग्रेन के मरीजों की कार्यक्षमता और स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है। इसलिए, इलाज के दौरान केवल दर्द कम करने पर ही नहीं, बल्कि दर्द के बाद होने वाली इन समस्याओं पर भी ध्यान देना बहुत जरूरी है।

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migraine hangover postdrome

माइग्रेन हैंगओवर के कारण

माइग्रेन हैंगओवर के सटीक कारण अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन यह दिमाग में होने वाले कुछ बदलावों से जुड़ा होता है। माइग्रेन अटैक के दौरान और उसके बाद भी दिमाग में न्यूरोकेमिकल और ब्लड वेसल्स से जुड़े बदलाव चलते रहते हैं। सिरदर्द खत्म हो जाने के बाद भी ये बदलाव तुरंत सामान्य नहीं होते, जिसके कारण व्यक्ति को थकान, चक्कर और मानसिक धुंधलापन जैसे लक्षण महसूस होते हैं। इसके अलावा, कुछ ट्रिगर फैक्टर भी होते हैं जो माइग्रेन को बढ़ावा देते हैं और अप्रत्यक्ष रूप से माइग्रेन हैंगओवर के लक्षणों को भी प्रभावित करते हैं। जैसे कि ज्यादा स्ट्रेस लेना एक बड़ा कारण हो सकता है, क्योंकि इससे दिमाग पर दबाव बढ़ता है और माइग्रेन शुरू हो सकता है। 

शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन भी एक अहम कारण है, क्योंकि इससे शरीर और दिमाग दोनों ठीक से काम नहीं कर पाते। नींद की कमी भी माइग्रेन और उसके बाद की स्टेज को प्रभावित करती है। जब शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो रिकवरी में ज्यादा समय लगता है। इसी तरह, समय पर खाना न खाना भी माइग्रेन को ट्रिगर कर सकता है, जिससे बाद में हैंगओवर जैसे लक्षण बढ़ जाते हैं।

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माइग्रेन हैंगओवर की जांच कैसे होती है?

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि माइग्रेन हैंगओवर या पोस्टड्रोम की जांच किसी विशेष टेस्ट के जरिए नहीं होती, बल्कि मरीज के इतिहास और उसके अनुभवों के आधार पर की जाती है। आमतौर पर, अगर किसी व्यक्ति को पहले माइग्रेन की समस्या रही हो और उसके बाद सिरदर्द के खत्म होने के समय थकान, चक्कर, मानसिक धुंधलापन, शरीर में दर्द या सेंसिटिविटी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर इसे माइग्रेन हैंगओवर मान सकते हैं। डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी कहते हैं कि सबसे पहले मरीज से उसके माइग्रेन अटैक के बारे में विस्तार से पूछा जाता है और यह देखा जाता है कि सिरदर्द कब शुरू हुआ, कितने समय तक रहा, उसके दौरान और बाद में किन लक्षणों का अनुभव हुआ। इसके आधार पर डॉक्टर यह समझ पाते हैं कि क्या यह वास्तव में माइग्रेन के बाद का पोस्टड्रोम है या कुछ और समस्या हो सकती है।

हालांकि, माइग्रेन हैंगओवर के लिए कोई खास लैब टेस्ट या इमेजिंग टेस्ट नहीं होते लेकिन अगर लक्षण सामान्य नहीं हैं, बहुत लंबे समय तक बने रहते हैं, या कुछ असामान्य चीजें दिखाई देती हैं, तो डॉक्टर अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं को भी जांचने के लिए टेस्ट कर सकते हैं। इसमें MRI, CT स्कैन या ब्लड टेस्ट शामिल हो सकते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लक्षण किसी और बीमारी का संकेत नहीं हैं।

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माइग्रेन हैंगओवर का इलाज

माइग्रेन हैंगओवर, यानी पोस्टड्रोम के लिए कोई खास और सीधा इलाज नहीं होता है, इसलिए इसका उपचार मुख्य रूप से सपोर्टिव केयर पर आधारित होता है। इसका मतलब है कि मरीज को आराम देकर और सही डेली रूटीन फॉलो करवाकर शरीर को ठीक होने में मदद की जाती है। सबसे जरूरी है पर्याप्त आराम करना, क्योंकि माइग्रेन के बाद शरीर और दिमाग दोनों थके हुए होते हैं। इसके साथ ही शरीर में पानी की कमी न हो, इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बहुत जरूरी है। 

  • बैलेंस्ड और पौष्टिक भोजन भी रिकवरी को तेज करने में मदद करता है।
  • इस दौरान तेज रोशनी, तेज आवाज और अन्य सेंसिटिविटी बढ़ाने वाले कारणों से बचना चाहिए, क्योंकि ये लक्षणों को और बढ़ा सकते हैं।
  • कुछ लोगों को हल्की मात्रा में कैफीन जैसे चाय या कॉफी लेने से राहत मिलती है, लेकिन यह हर व्यक्ति पर अलग-अलग असर करता है। इसलिए जिसे कैफीन से परेशानी होती है, उसे इससे बचना चाहिए। ध्यान रखें ज्यादा मात्रा में कैफीन माइग्रेन के कई रोगियों में Medication Overuse Headache (MOH) का कारण बन सकता है। इसलिए अगर इसे पीने से आपको राहत मिलती भी है, तो ज्यादा न पिएं।
  • लंबे समय में माइग्रेन हैंगओवर से बचने का सबसे अच्छा तरीका है माइग्रेन अटैक को ही रोकना। इसके लिए हेल्दी डेली रूटीन अपनाना बहुत जरूरी है, जैसे समय पर सोना, सही खाना और तनाव को कम करना। इसके अलावा, अपने ट्रिगर्स को पहचानना और उनसे बचना भी मददगार होता है।
  • माइग्रेन डायरी बनाना एक अच्छा तरीका है, जिसमें आप अपने अटैक का समय, कारण और लक्षण लिख सकते हैं। इससे पैटर्न समझने में मदद मिलती है और डॉक्टर भी बेहतर इलाज दे पाते हैं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर प्रिवेंटिव दवाइयां भी दे सकते हैं, जिससे माइग्रेन और उसके बाद होने वाले लक्षणों को कंट्रोल किया जा सके।

डॉक्टर से कब मिलें?

माइग्रेन हैंगओवर आमतौर पर कुछ घंटों से लेकर 1-2 दिन में अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ स्थितियों में डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी हो जाता है। अगर आपको बार-बार माइग्रेन अटैक हो रहे हैं और हर बार उसके बाद लंबे समय तक थकान, चक्कर या मानसिक धुंधलापन यानी मेंटल फॉग बना रहता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह इस बात का संकेत हो सकता है कि आपकी समस्या बढ़ रही है और सही इलाज की जरूरत है। अगर माइग्रेन के बाद के लक्षण 48 घंटे से ज्यादा समय तक बने रहें या धीरे-धीरे और गंभीर होते जाएं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसी तरह, अगर आपको बहुत ज्यादा चक्कर आ रहे हैं, संतुलन बिगड़ रहा है, बोलने में दिक्कत हो रही है या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी महसूस हो रही है, तो यह किसी अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्या का संकेत भी हो सकता है।

पहली बार अगर आपको माइग्रेन जैसा तेज सिरदर्द और उसके बाद ऐसे लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो भी डॉक्टर से मिलना जरूरी है, ताकि सही जांच और इलाज किया जा सके।

migraine hangover postdrome

निष्कर्ष 

माइग्रेन को केवल एक सामान्य सिरदर्द समझना सही नहीं है, क्योंकि यह एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसमें कई स्टेज होते हैं। माइग्रेन हैंगओवर या पोस्टड्रोम इसकी आखिरी स्टेज होती है, जिसमें सिरदर्द खत्म होने के बाद भी व्यक्ति पूरी तरह सामान्य महसूस नहीं करता। इस दौरान थकान, चक्कर, मेंटल फॉग, शरीर में दर्द और रोशनी या आवाज के प्रति सेंसिटिविटी जैसे लक्षण बने रह सकते हैं। यह स्थिति कई बार लोगों को भ्रमित कर देती है, क्योंकि वे सोचते हैं कि सिरदर्द खत्म हो गया तो समस्या भी खत्म हो गई लेकिन वास्तव में शरीर और दिमाग को पूरी तरह ठीक होने में समय लगता है। यही कारण है कि इस स्टेज को समझना और इसे नजरअंदाज न करना बहुत जरूरी है। माइग्रेन हैंगओवर का कोई खास इलाज नहीं है, लेकिन सही देखभाल, जैसे पर्याप्त आराम, सही खानपान, पानी की पर्याप्त मात्रा और ट्रिगर्स से बचाव, से इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। अगर लक्षण ज्यादा समय तक बने रहें या गंभीर हो जाएं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

FAQ

  • माइग्रेन हैंगओवर कितने समय तक रहता है?

    यह आमतौर पर कुछ घंटों से लेकर 24-48 घंटे तक रह सकता है, लेकिन हर व्यक्ति में इसका समय अलग हो सकता है।
  • क्या माइग्रेन हैंगओवर में कैफीन लेने से राहत मिलती है?

    कुछ लोगों को हल्की मात्रा में कैफीन से आराम मिल सकता है, लेकिन कुछ लोगों में यह लक्षण बढ़ा सकता है, इसलिए यह व्यक्ति पर निर्भर करता है।
  • माइग्रेन कितनी उम्र तक रहता है?

    माइग्रेन की समस्या अक्सर 20-30 साल की उम्र में शुरू होती है और यह बीमारी पूरी जिंदगी रह सकती है। महिलाओं में हार्मोनल बदलाव के कारण माइग्रेन ज्यादा प्रभावित करता है। हालांकि कुछ मामलों में 50 की उम्र के बाद या मेनोपॉज के बाद माइग्रेन कम परेशान कर सकता है।
  • माइग्रेन होने पर क्या परहेज करना चाहिए?

    माइग्रेन में कुछ चीजें ट्रिगर का काम करती हैं, इसलिए उनसे बचना जरूरी है। जैसे- ज्यादा शोर, तनाव, नींद की कमी और स्क्रीन का ज्यादा उपयोग। खाने में चॉकलेट, कैफीन, फास्ट फूड, प्रोसेस्ड फूड, चीज और शराब से परहेज करना चाहिए। इसके अलावा बहुत देर तक भूखे रहना भी माइग्रेन बढ़ा सकता है।
  • माइग्रेन की लास्ट स्टेज में क्या होता है?

    माइग्रेन की लास्ट स्टेज को पोस्टड्रोम (हैंगओवर) फेज कहा जाता है। इसमें तेज सिरदर्द कम हो जाता है, लेकिन व्यक्ति थकान, कमजोरी, चक्कर, ध्यान की कमी और मूड में बदलाव महसूस करता है।

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Disclaimer

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Akanksha Tiwari

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Senior Sub Editor

आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 19, 2026 14:58 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Apr 19, 2026 14:58 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Bharath Kumar Surisetti

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