आज के समय में बढ़ते तनाव और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही के कारण कई गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जिनमें थायराइड से जुड़ी समस्याएं भी शामिल हैं। खास बात यह है कि कई लोग इस स्थिति के बारे में सही जानकारी नहीं रखते, जिसके कारण समय पर पहचान और इलाज में देरी हो जाती है और समस्या पहले से ज्यादा गंभीर हो जाती है। जब शरीर में थायराइड हार्मोन का लेवल अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाता है तो ऐसी स्थिति को थायराइड स्टॉर्म कहते हैं, जो कि जानलेवा भी साबित हो सकती है। इस लेख में दिल्ली के पीएसआरआई अस्पताल के एंडोक्रिनोलॉजी और डायबिटीज विभाग की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. हिमिका चावला से जानिए, थायराइड स्टॉर्म के कारण, लक्षण और इलाज क्या है?
थायराइड स्टॉर्म क्या है?
थायराइड स्टॉर्म (Thyroid Storm) एक दुर्लभ लेकिन बेहद खतरनाक मेडिकल स्थिति है, जो तब होती है जब शरीर में थायराइड हार्मोन का लेवल अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। यह समस्या मुख्य रूप से उन लोगों में देखने को मिलती है जो पहले से हाइपरथायरायडिज्म से पीड़ित होते हैं, लेकिन उनका इलाज सही तरीके से नहीं हो रहा होता या वे अपनी दवाएं नियमित रूप से नहीं लेते। डॉ. हिमिका चावला के अनुसार, इस स्थिति में शरीर का मेटाबॉलिज्म ज्यादा तेज हो जाता है, जिससे दिल, दिमाग और फेफड़ों जैसे जरूरी अंगों पर गंभीर दबाव पड़ता है। यही कारण है कि इसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है और इसमें तुरंत इलाज जरूरी होता है।
American Thyroid Association की साल 2012 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर समय पर इलाज नहीं किया जाए, तो यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि चूंकि थायराइड स्टॉर्म को केवल लैब टेस्ट से पहचानना मुश्किल है, इसलिए डॉक्टरों ने इसके लक्षणों के आधार पर नए मानक तैयार किए हैं। मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, दिल की धड़कन बढ़ना, घबराहट, बेहोशी या भ्रम की स्थिति और पेट की समस्याएं शामिल हैं। यह स्टडी बताती है कि समय पर सही पहचान और इलाज ही मरीज की जान बचा सकता है। दवाइयों को बीच में छोड़ना या इंफेक्शन इसका मुख्य कारण हो सकता है। थायराइड के मरीजों को अपनी दवाइयां नियमित रूप से लेनी चाहिए और गंभीर लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टरी सहायता लेनी चाहिए।
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थायराइड स्टॉर्म क्यों होता है?
डॉ. हिमिका चावला बताती हैं कि थायराइड स्टॉर्म का मुख्य कारण पहले से शरीर में मौजूद हाइपरथायराइडिज्म होता है, जिसमें थायराइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाती है लेकिन यह स्थिति अचानक गंभीर क्यों हो जाती है, इसके पीछे कई ट्रिगर्स होते हैं। डॉ. हिमिका चावला बताती हैं कि सबसे आम ट्रिगर गंभीर इंफेक्शन है। इसके अलावा सर्जरी, किसी प्रकार की चोट या शारीरिक तनाव भी इस स्थिति को भड़का सकता है। कई मामलों में भावनात्मक तनाव, अचानक थायराइड की दवाएं बंद करना, डिलीवरी के बाद हार्मोनल बदलाव, अनियंत्रित डायबिटीज और हार्ट डिजीज थायराइड स्टॉर्म को ट्रिगर कर सकते हैं।
साल 2026 में The Journal of Clinical Endocrinology & Metabolism में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, थायराइड स्टॉर्म (Thyroid storm) की स्थिति में तुरंत इलाज न मिलने पर मृत्यु दर 25% तक हो सकती है। यह मुख्य रूप से महिलाओं में देखा जाता है और शरीर के अंगों के फेल होने का कारण बन सकता है। इसके मैनेजमेंट में दवाओं के जरिए थायराइड हार्मोन को कंट्रोल करना, दिल की धड़कन को संभालना और शरीर के तापमान को कम करना शामिल है। अगर किसी मरीज में हाइपरथायरायडिज्म के गंभीर लक्षण दिखें तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। सही समय पर पहचान और उचित इलाज ही इस जानलेवा खतरे से जान बचा सकता है।
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थायराइड स्टॉर्म के लक्षण क्या होते हैं?
पीएसआरआई अस्पताल की एंडोक्रिनोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. हिमिका चावला के अनुसार, इस बीमारी की सबसे खतरनाक बात यही है कि इसके संकेत अचानक शुरू होते हैं और तेजी से बिगड़ते जाते हैं। इसलिए समय रहते इन्हें पहचानना बेहद जरूरी होता है।
थायराइड स्टॉर्म का सबसे प्रमुख लक्षण है बहुत तेज बुखार। मरीज का तापमान 104°F या उससे भी ज्यादा हो सकता है। इसके साथ ही दिल की धड़कन असामान्य रूप से तेज हो जाती है, कई बार दिल की धड़कन अनियमित भी हो जाती है, जिससे हार्ट पर ज्यादा दबाव पड़ता है।
साल 2022 में StatPearls (NCBI Bookshelf) में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, थायराइड स्टॉर्म (Thyroid Storm) के लक्षणों में घबराहट, बेहोशी, उल्टी, दस्त और यहां तक कि दिल का दौरा भी शामिल है। यह शरीर के अंगों, विशेषकर दिल और दिमाग पर बुरा असर डालता है। समय पर सही इलाज न मिलने पर यह जानलेवा हो सकता है। इसलिए, इन लक्षणों को पहचानकर तुरंत डॉक्टरी सहायता लेना बेहद जरूरी है।
साल 2025 में Medicine journal में प्रकाशित एक क्लीनिकल केस रिपोर्ट रिव्यू के अनुसार, थायराइड स्टॉर्म न केवल शरीर के बाकी हिस्सों, बल्कि मस्तिष्क (Intracranial brain tissue) के कामकाज को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। जब थायराइड हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है, तो मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर सही से काम नहीं कर पाते, जिससे मरीज को गंभीर मानसिक और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि थायराइड की अधिकता और शरीर की अन्य चोटें मिलकर मस्तिष्क के सुरक्षा कवच को कमजोर कर देती हैं। इससे दिमाग में T3 हार्मोन का लेवल बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, जो सीधे तौर पर दिमागी संतुलन को बिगाड़ देता है। ऐसे में थायराइड स्टॉर्म के इलाज में मानसिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क की सुरक्षा पर भी तुरंत ध्यान देना जरूरी है।
Cureus Journal of Medical Science में साल 2023 में प्रकाशित Peer Review के अनुसार, यदि थायराइड स्टॉर्म का समय पर इलाज न किया जाए, तो यह तेजी से बढ़कर 'मल्टी-ऑर्गन फेल्योर' (Multi-organ Failure) का रूप ले सकती है, जिसमें हार्ट, फेफड़े, लिवर और किडनी जैसे जरूरी अंग काम करना बंद कर देते हैं। थायराइड स्टॉर्म के लक्षणों को नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। समय पर सही पहचान और तत्काल चिकित्सा सहायता ही अंगों को स्थायी नुकसान से बचा सकती है और मरीज की जान बचा सकती है।
थायराइड स्टॉर्म का इलाज क्या है?
डॉ. हिमिका चावला, बताती हैं कि थायराइड स्टॉर्म का उपचार बहु-स्तरीय (multimodal) होता है, जिसमें हार्मोन को कंट्रोल करने के साथ-साथ शरीर के अन्य अंगों को स्थिर रखना भी शामिल है। पहला और सबसे जरूरी कदम होता है मरीज को ICU या गहन निगरानी में रखना। साल 2026 में The Journal of Clinical Endocrinology & Metabolism में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, थायराइड स्टॉर्म (Thyroid Storm) में आमतौर पर हार्मोन के प्रोडक्शन को रोकने के लिए दवाओं (Antithyroid agents), दिल की सुरक्षा के लिए बीटा-ब्लॉकर्स और शरीर की इम्यूनिटी को सहारा देने के लिए स्टेरॉयड का उपयोग करते हैं। अगर समय रहते इन लक्षणों को पहचान लिया जाए और इलाज शुरू कर दिया जाए, तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। सतर्कता और सही समय पर दी गई मेडिकल थेरेपी ही इस जानलेवा स्थिति से बचने का एकमात्र प्रभावी तरीका है।

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1. थायराइड स्टॉर्म में तुरंत उपचार से मरीज की जान बचाई जा सकती है। डॉक्टर सबसे पहले शरीर में थायराइड हार्मोन के उत्पादन (production) और उसके प्रभाव (effects) को कम करने की कोशिश करते हैं। इसके साथ ही दिल की धड़कन (heart rate) को कंट्रोल करने के लिए बीटा-ब्लॉकर दवाएं दी जाती हैं। यह दवाएं शरीर पर थायराइड हार्मोन के प्रभाव को कम करती हैं और मरीज को स्थिर करती हैं। कुछ मामलों में आयोडीन (iodine) का उपयोग भी किया जाता है, जो थायराइड हार्मोन के रिलीज को रोकने में मदद करता है, लेकिन इसे एंटी-थायराइड दवा देने के बाद ही दिया जाता है।
2. थायराइड स्टॉर्म के इलाज में केवल दवाएं ही नहीं, बल्कि सपोर्टिव केयर भी बहुत जरूरी होती है। मरीज को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ (fluids), ऑक्सीजन और इलेक्ट्रोलाइट्स दिए जाते हैं ताकि शरीर का संतुलन बना रहे। तेज बुखार होने पर शरीर को ठंडा करने के लिए कूलिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है।
3. थायराइड स्टॉर्म अक्सर किसी संक्रमण (infection), सर्जरी या दवा बंद करने के कारण हो सकता है। इसलिए डॉक्टर इन कारणों का पता लगाकर उनका भी इलाज करते हैं, जैसे कि संक्रमण होने पर एंटीबायोटिक्स देना।
डॉ. हिमिका चावला बताती हैं, ‘’अच्छी बात यह है कि समय पर और सही इलाज मिलने पर अधिकांश मरीज ठीक हो सकते हैं। उचित उपचार से 24 घंटे के भीतर सुधार दिखने लगता है लेकिन यह स्थिति बहुत खतरनाक हो सकती है, इसलिए देरी करना जानलेवा साबित हो सकता है।’’ यदि किसी व्यक्ति को हाइपरथायराइडिज्म है, तो उसे अपनी दवाएं नियमित रूप से लेनी चाहिए और डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए। सही मैनेजमेंट और समय पर उपचार से थायराइड स्टॉर्म के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
क्या थायराइड स्टॉर्म से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है?
डॉ. हिमिका चावला के अनुसार, यह स्थिति इमरजेंसी मानी जाती है और तुरंत अस्पताल में इलाज की आवश्यकता होती है। सही समय पर उपचार मिलने से मरीज पूरी तरह ठीक भी हो सकता है, लेकिन देरी होने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है। क्या मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है? इसका जवाब है हां, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। अगर थायराइड स्टॉर्म का जल्दी पता चल जाए और सही इलाज तुरंत शुरू हो जाए, तो मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। हालांकि, बाद में भी उसे अपने थायराइड की नियमित जांच और इलाज जारी रखना पड़ता है, ताकि स्थिति दोबारा न बिगड़े। डॉ. हिमिका चावला यह भी बताती हैं कि थायराइड के मरीजों को अपनी दवाएं नियमित रूप से लेनी चाहिए और किसी भी संक्रमण, सर्जरी या तनाव के दौरान डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए, क्योंकि ये सभी कारक थायराइड स्टॉर्म को ट्रिगर कर सकते हैं।
डॉक्टर से कब मिलें?
डॉ. हिमिका चावला के अनुसार, थायराइड स्टॉर्म एक ऐसी स्थिति है जिसमें समय पर डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी होता है। अगर किसी व्यक्ति को पहले से हाइपरथायराइडिज्म है और अचानक उसके लक्षण तेजी से बढ़ने लगें, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

सबसे पहले, यदि तेज बुखार यानी 104°F या उससे अधिक हो, बहुत तेज दिल की धड़कन हो, घबराहट या बेचैनी महसूस हो रही हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। ये थायराइड स्टॉर्म के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा अगर मरीज को भ्रम (confusion), चक्कर आना या बेहोशी जैसी समस्या होने लगे, तो यह गंभीर स्थिति का संकेत है और तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है। अगर उल्टी, दस्त या पेट में दर्द के साथ शरीर बहुत कमजोर लगने लगे, तो भी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। कई बार ये लक्षण सामान्य लग सकते हैं, लेकिन थायराइड स्टॉर्म में ये तेजी से बिगड़ सकते हैं। डॉ. हिमिका चावला बताती हैं कि जिन लोगों ने अचानक अपनी थायराइड की दवाएं बंद कर दी हैं या हाल ही में कोई सर्जरी, इंफेक्शन या डिलीवरी हुई है, उन्हें खास सतर्क रहने की जरूरत है। ऐसे समय में अगर कोई भी असामान्य लक्षण दिखें, तो देरी न करें और डॉक्टर से सलाह लें।
निष्कर्ष
डॉ. हिमिका चावला के अनुसार, जागरूकता ही थायराइड स्टॉर्म बीमारी से बचाव का सही तरीका है। यदि किसी व्यक्ति को थायराइड की समस्या है, तो उसे अपनी दवाएं नियमित रूप से लेनी चाहिए और डॉक्टर की सलाह को फॉलो करना चाहिए। थायराइड स्टॉर्म के लक्षण अचानक और तेजी से बढ़ते हैं, इसलिए इन्हें पहचानना बहुत जरूरी है। अच्छी बात यह है कि सही समय पर इलाज मिलने पर मरीज ठीक हो सकता है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि मरीज और उसके परिवार के लोग सतर्क रहें और किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
FAQ
क्या थायराइड स्टॉर्म जानलेवा होता है?
अगर समय पर इलाज न मिले तो थायराइड स्टॉर्म जानलेवा साबित हो सकता है। इसमें हार्ट फेलियर, स्ट्रोक या मल्टी-ऑर्गन फेलियर का खतरा हो सकता है।क्या थायराइड स्टॉर्म को रोका जा सकता है?
थायराइड स्टॉर्म को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके लिए मरीज थायराइड की दवाएं नियमित लें, डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें और नियमित जांच कराएं।थायराइड स्टॉर्म होने पर क्या करें?
अगर किसी में इसके लक्षण दिखें तो तुरंत इमरजेंसी में ले जाएं। घर पर इलाज करने की कोशिश न करें, क्योंकि यह स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है।
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Current Version
Apr 18, 2026 18:21 IST
Modified By : Akanksha Tiwari Apr 18, 2026 18:21 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Himika Chawla