Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr M Sheetal Kumar , Consultant Physician & Diabetologist

यूर‍िक एसिड और हाई बीपी में क्‍या संबंध‍ है? डॉक्‍टर और र‍िसर्च से जानें

यूर‍िक एस‍िड क‍िडनी द्वारा शरीर से बाहर कर द‍िया जाता है, लेक‍िन कई बार इसकी ज्‍यादा मात्रा के कारण जोड़ों में तकलीफ और सूजन देखी जाती है। इसका संबंध हाई बीपी से भी बताया जाता है, लेक‍िन क्‍या वाकई यूर‍िक एस‍िड और हाई बीपी जुड़े हुए हैं? डॉक्‍टर से जानें सही जवाब।

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यूर‍िक एस‍िड एक तरह का वेस्‍ट प्रोडक्‍ट है जो प्यूरीन के टूटने की प्रक्रिया में अंत में बनता है। कई लोग इसका संबंध हाई बीपी के साथ देखते हैं। अगर क‍िडनी फंक्‍शन सही नहीं है, तो शरीर में यूर‍िक एस‍िड की मात्रा बढ़ सकती है। शरीर में यूर‍िक एस‍िड प्‍यूर‍ीन नाम के केमि‍कल के टूटने से बनता है। जब यूर‍िक एस‍िड की मात्रा ज्‍यादा होती है, तब क‍िडनी पर इसका असर हो सकता है। अभी तक यह बात ज्‍यादा सुनने को म‍िलती थी क‍ि यूर‍िक एस‍िड की मात्रा बढ़ने से जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्‍या हो सकती है, लेक‍िन हाल में हुई कुछ र‍िसर्च में यूर‍िक एस‍िड का संबंध हाइपरटेंशन या हाई बीपी के साथ बताया जा रहा है। कुछ एक्‍सपर्ट्स मानते हैं क‍ि शरीर में यूर‍िक एस‍िड की मात्रा के बढ़ने से हाई बीपी की समस्‍या हो सकती है। यूरिक एसिड और हाई बीपी का संंबंंध समझने के ल‍िए हमने Dr. M. Sheetal Kumar, Consultant Physician & Diabetologist, Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।

यूरिक एसिड और हाई बीपी में क्या संबंध है?

Dr. M. Sheetal Kumar ने बताया क‍ि हाई यूर‍िक एस‍िड (Hyperuricemia) के कारण हाई बीपी का जोख‍िम बढ़ सकता है। ज‍िन्‍हें पहले से हाई बीपी की समस्‍या है, उनमें यूर‍िक एस‍िड बढ़ने से बीपी असंतुल‍ित होने की संभावना ज्‍यादा हो सकती है। हालांक‍ि हाई यूर‍िक एस‍िड के सभी मरीजों में हाई बीपी की समस्‍या नहीं देखी गई है। हाई यूर‍िक एस‍िड में शरीर नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्‍पादन को कम कर देता है। नाइट्र‍िक एस‍िड ब्‍लड वेसल्‍स को फैलने में मदद करता है। इसकी कमी से ब्‍लड वेसल्‍स स‍िकुड़ सकती हैं और बीपी बढ़ सकता है। कुछ लोगों में यूर‍िक एस‍िड का स्‍तर ज्‍यादा रहने के बाद भी बीपी सामान्‍य हो सकता है इसल‍िए इसे एक र‍िस्‍क फैक्‍टर माना जाना चाह‍िए न क‍ि अकेला कारण।

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हाई यूर‍िक एस‍िड और हाई बीपी के लक्षण

हाई यूर‍िक एस‍िड जब हाई BP से जुड़ा होता है, तो आपको ये लक्षण नजर आ सकते हैं-

  • सिरदर्द
  • चक्कर आना
  • थकान
  • धुंधला दिखाई देना
  • हाइपरटेंशन के कारण सीने में दर्द
  • गाउट के दौरे (जोड़ों में अचानक दर्द, सूजन, लालिमा, खासकर पैर के अंगूठे में)

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बच्‍चों से लेकर वयस्‍कों तक में म‍िला यूर‍िक एस‍िड और हाई बीपी का संबंध

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Dr. M. Sheetal Kumar ने बताया क‍ि हाई यूर‍िक एस‍िड के कारण हाई बीपी की समस्‍या बच्‍चों, क‍िशोरों, युवाओं और वयस्‍कों में हो सकती है। इसके अलावा पुरुष और मह‍िला दोनों में यह संबंध नजर आ सकता है। स्‍टडीज के मुताब‍िक अलग-अलग श्रेणि‍यों में हाई यूर‍िक एस‍िड और हाई बीपी का संबंध देखा गया-

बच्‍चों में

2022 में Hypertension में प्रकाश‍ित एक र‍िव्‍यू स्‍टडी के मुताब‍िक, हाई यूर‍िक एस‍िड (Hyperuricemia) और हाई बीपी (High BP) के संबंध को देखा गया। स्‍टडी ने पाया क‍ि यूर‍िक एस‍िड ज्‍यादा होने से हाई बीपी का खतरा बढ़ सकता है। इसका संबंध बच्‍चों से लेकर वयस्‍कों तक में देखा गया।

क‍िशोरों में

2017 में Medical Science Monitor नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, क‍िशोरों में प्री-हाइपरटेंशन और हाई बीपी में यूर‍िक एस‍िड की भूम‍िका पर स्‍टडी की गई। स्‍टडी में हाई यूर‍िक एस‍िड का संबंध हाई बीपी के साथ देखा गया। स्‍टडी ने यह बताया क‍ि यूर‍िक एस‍िड शरीर में सॉल्‍ट सेंस‍िट‍िव‍िटी को बढ़ाता है ज‍िससे बीपी बढ़ सकता है। स्‍टडी ने बताया क‍ि यूर‍िक एस‍िड को कंट्रोल करने के ल‍िए शुरुआती स्‍टेज में हाई बीपी को कंट्रोल करना फायदेमंद हो सकता है।

युवाओं में

2011 में Medical Hypotheses नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, हाई यूर‍िक एस‍िड ब्‍लड प्रेशर को बढ़ाने में अहम भूम‍िका न‍िभा सकता है। स्‍टडी ने युवाओं में यूर‍िक एस‍िड और हाई बीपी का मजबूत संबंध पाया।

पुरुष और मह‍िलाएं

2020 में Hypertension Research नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, 7800 लोगों पर हुए विश्लेषण से यह समझ आया क‍ि यूर‍िक एस‍िड के बढ़ने से हाई बीपी का खतरा भी बढ़ता है। स्‍टडी के मुताब‍िक हर एक mg/dL बढ़ने पर जोख‍िम 20 प्रत‍िशत तक बढ़ सकता है। यह संबंध पुरुष और मह‍िला दोनों में द‍िखा, यानी हाई बीपी के पीछे यूर‍िक एस‍िड एक र‍िस्‍क फैक्‍टर हो सकता है। स्‍टडी में बताया गया क‍ि नाइट्रिक ऑक्साइड की कमी और ऑक्‍सीडेट‍िव स्‍ट्रेस के कारण यूर‍िक एस‍िड बढ़ने से बीपी बढ़ सकता है।

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क्या हाई यूरिक एसिड दिल पर असर डालता है?

Dr. M. Sheetal Kumar ने बताया क‍ि हाई यूर‍िक एस‍िड हार्ट की सेहत को प्रभाव‍ित कर सकता है। लंबे समय तक हाई यूरिक एसिड ऑक्सीडेटिव तनाव, सूजन और धमनियों में प्लाक जमाव को बढ़ावा देता है, जिससे हाई बीपी के कारण हृदय को होने वाला नुकसान और बढ़ जाता है। इससे कोरोनरी धमनी रोग, हार्ट फेल‍ियर और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। यूर‍िक एस‍िड का स्‍तर ज्‍यादा होगा, तो लंबे समय में हार्ट पर इसका बुरा असर हो सकता है। 2016 में European Cardiology Review नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक र‍िव्‍यू आर्टि‍कल के मुताब‍िक, बढ़ा हुआ यूर‍िक एस‍िड हार्ट, क‍िडनी और ब्‍लड वेसल्‍स को नुकसान पहुंचा सकता है और इससे ह्रदय रोग का खतरा बढ़ सकता है।

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क्या बीपी के मरीजों को यूरिक एसिड टेस्ट कराना चाहिए?

Dr. M. Sheetal Kumar ने बताया क‍ि बीपी के मरीज डॉक्‍टर की सलाह पर यूर‍िक एस‍िड टेस्‍ट करवा सकते हैं। इससे पता चलता है क‍ि यूर‍िक एस‍िड का असर बीपी को प्रभाव‍ित कर रहा है या नहीं। खासकर जब बीपी कंट्रोल में न हो या जब क‍िडनी की समस्‍या हो।

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हाई यूर‍िक एस‍िड और हाई बीपी का इलाज क्‍या है?

Dr. M. Sheetal Kumar ने बताया क‍ि इस स्‍थ‍ित‍ि में इलाज के दो लक्ष्य होते हैं। पहला जीवनशैली में बदलाव लाना जैसे (वजन कम करना, कम प्यूरीन वाला भोजन, व्यायाम करना) और दूसरा है दवाओं का सेवन। हाई बीपी के ल‍िए ACE इनहिबिटर या ARB (जो यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने में भी मदद करते हैं) जैसी दवाएं दी जाती हैं। सबसे अच्छे नतीजों के लिए, मरीज को मोटापे या डायबिटीज जैसी मूल समस्याओं को पहले कंट्रोल करने की सलाह देते हैं।

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हाई यूर‍िक एस‍िड की वजह से हाई बीपी होने पर दवाएं लेनी पड़ती हैं?

हर केस में तुरंत दवा लेने की जरूरत नहीं होती है। अगर यूर‍िक एस‍िड का लेवल ज्‍यादा है, तो जीवनशैली में बदलाव करें। अगर यूर‍िक एस‍िड 7 mg/dL से ज्‍यादा हो जाए और बीपी भी असंतुल‍ित हो जाए, तो दवाओं की जरूरत पड़ सकती है।

क्या यूरिक एसिड संतुल‍ित करने से ब्‍लड प्रेशर कम हो सकता है?

यूर‍िक एस‍िड संतुल‍ित करने से बीपी घटता है इस पर कोई ठोस वैज्ञान‍िक आधार मौजूद नहीं है। कुछ स्‍टडीज में बताया गया है क‍ि यूर‍िक एस‍िड में सुधार और लाइफस्‍टाइल में बदलाव के साथ यूर‍िक एस‍िड को कंट्रोल करने में मदद म‍िल सकती है।

क्‍या डाइट से यूर‍िक एस‍िड और बीपी को कंट्रोल कर सकते हैं?

हांं, डैश डाइट (DASH Diet) जैसे फल, सब्‍ज‍ियां, लो-फैट डेयरी और होल ग्रेन्‍स का सेवन करने से यूर‍िक एस‍िड और बीपी को कंट्रोल कर सकते हैं। साथ ही हेल्‍दी डाइट के जर‍िए वजन कम करने का प्रयास करें। इस तरह यूर‍िक एस‍िड को एक से दो mg/dL तक कम कर सकते हैं।

कौन से फूड्स खाने से यूर‍िक एस‍िड और बीपी दोनों बढ़ सकते हैं?

  • रेड मीट और ऑर्गन मीट का सेवन न करें क्‍योंक‍ि इनमें प्यूरीन और सोडियम की मात्रा ज्‍यादा होती है।
  • मीठे ड्रिंक्स और फ्रुक्टोज वाले सोडा न प‍िएं। ये यूरिक एसिड का उत्पादन बढ़ाते हैं और वजन भी बढ़ सकता है।
  • अल्‍कोहल यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने में रुकावट डालती है और बीपी को बढ़ाती है इसल‍िए इससे परहेज करें।
  • ज्‍यादा सोडियम वाले प्रोसेस्ड फूड्स (चिप्स, डिब्बाबंद सूप) सीधे तौर पर बीपी बढ़ाते हैं और किडनी पर जोर डालकर यूरिक एसिड भी बढ़ाते हैं।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • अगर बीपी बार-बार बढ़ रहा हो या यूर‍िक एस‍िड का स्‍तर लगातार ज्‍यादा हो, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें।
  • BP लगातार 140/90 mmHg से ज्‍यादा रहता है, तो डॉक्‍टर की सलाह लें।
  • गाउट के दौरे पड़ते हों।
  • यूरिक एसिड 7 mg/dL से अध‍िक हो (पुरुषों में) या 6 mg/dL से अध‍िक हो (महिलाओं में) है, तो तुरंत अपने डॉक्टर से मिलें।
  • तेज सिरदर्द, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, सूजन (गाउट के कारण) या पेशाब में खून (क‍िडनी में पथरी के कारण) आता है, तो डॉक्‍टर से संंपर्क करें।
  • अगर मोटापा या परिवार में बीमारी का इतिहास जैसे जोखिम कारक हैं, तो नियमित जांच कराएं।

निष्कर्ष:

Consultant Physician & Diabetologist Dr. M. Sheetal Kumar से हुई बातचीत से हमें पता चलता है क‍ि यूर‍िक एस‍िड का स्‍तर ज्‍यादा होने से हाई बीपी की समस्‍या हो सकती है, लेक‍िन यूर‍िक एस‍िड, हाई बीपी का कारण नहीं बल्‍क‍ि र‍िस्‍क फैक्‍टर हो सकता है। यूर‍िक एस‍िड को समय रहते हेल्‍दी डाइट, लाइफस्‍टाइल और सही दवाओं के साथ कंट्रोल क‍िया जाए, तो यह हाई बीपी के जोख‍िम को कम कर सकता है। स्‍टडीज में यूर‍िक एस‍िड और हाई बीपी के बीच संबंध देखा गया है। स्‍टडी में बच्‍चों और क‍िशोरों में भी यूर‍िक एस‍िड और हाई बीपी का संबंध पाया गया, ऐसे में हाई बीपी के मरीजों को यूर‍िक एस‍िड बढ़ने की स्‍थ‍िति‍ से सावधानी बरतनी चाह‍िए। पुरुषों में यूरिक एसिड 7 mg/dL से अध‍िक हो और मह‍िलाओं में यूर‍िक एस‍िड 6 mg/dL से अध‍िक हो, तो डॉक्‍टर से सलाह लें।

FAQ

  • क्या हर हाई यूरिक एसिड वाले व्यक्ति को हाई बीपी होता है?

    हाई यूर‍िक एस‍िड वाले हर व्‍यक्‍त‍ि को हाई बीपी की समस्‍या हो, ऐसा जरूरी नहीं है। हाई यूर‍िक एस‍िड एक र‍िस्‍क फैक्‍टर हो सकता है, लेक‍िन जरूरी नहीं है क‍ि यह हाई बीपी का कारण हो। 
  • यूरिक एसिड बढ़ने से शरीर में कौन-से लक्षण दिखते हैं?

    कुछ लोगों में यूर‍िक एस‍िड के बढ़ने पर कोई लक्षण नजर नहीं आता है। वहीं कुछ लोगों में जोड़ों में दर्द, सूजन या क‍िडनी से संबंध‍ित समस्‍या हो सकती है।
  • क्या वजन बढ़ने से यूरिक एसिड और बीपी दोनों बढ़ सकते हैं?

    हाई यूर‍िक एस‍िड और हाई बीपी का एक कारण मोटापा भी हो सकता है, दोनों ही स्‍थ‍ितियों में वजन कम करना फायदेमंद हो सकता है, लेक‍िन वजन बढ़ने से हर व्‍यक्‍त‍ि को हाई यूर‍िक एस‍िड या बीपी की समस्‍या नहीं होती।
  • यूरिक एसिड और किडनी का क्या संबंध है?

    क‍िडनी यूर‍िक एस‍िड को शरीर से बाहर न‍िकालने का काम करती है। जब यूर‍िक एस‍िड का स्‍तर ज्‍यादा हो जाता है, तब यह क‍िडनी की ब्‍लड वेसल्‍स को नुकसान पहुंंचा सकता है और क‍िडनी स्‍टोन का खतरा हो सकता है।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 18, 2026 09:50 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Apr 18, 2026 09:50 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
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