Fri Sep 11, 2026 | 09:03 PM IST

Medically Reviewed by Dr Bharath Kumar Surisetti , Consultant Neurologist | MD, DM (Neurology), PDF Movement Disorders (NIMHANS)

गर्भनिरोधक गोलियां और माइग्रेन का संबंध: डॉक्टर से जानें खतरे और सही मैनेजमेंट

गर्भनिरोधक गोलियों और माइग्रेन के बीच कनेक्शन एस्ट्रोजन हार्मोन होता है। जब इन गोलियों के कारण शरीर में एस्ट्रोजन का लेवल अचानक कम या ज्यादा होता है तो यह दिमाग की नसों को प्रभावित कर सकता है, जो माइग्रेन को ट्रिगर कर सकता है। 

महिला के बेहतर स्वास्थ्य या फिर फैमिली की बात जब भी आती है तो गर्भनिरोधक गोलियां (Oral Contraceptive Pills) लेने की बात सबसे ऊपर आती है। ये गोलियां महिलाओं के शरीर के अंदर होने वाले हार्मोनल असंतुलन से होने वाली समस्याओं को काफी हद तक कंट्रोल करने में मदद करती हैं। खासकर इन गोलियों को लेने से महिलाओं को अनचाही प्रेग्नेंसी को रोकने में मदद मिलती है। जबकि कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं, जो गर्भनिरोधक गोलियां तो लेती हैं, लेकिन इसके साथ ही उन्हें सिर में तेज दर्द की समस्या का सामना भी करना पड़ता है, जो अक्सर माइग्रेन के कारण होती है। माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है। गर्भनिरोधक गोलियां लेने वाली महिलाओं के मन में यह सवाल उठता है कि इन दोनों के बीच कोई कनेक्शन है या नहीं? या गर्भनिरोधक गोलियां लेने पर माइग्रेन की स्थिति कब होती है? आइए इस लेख में Dr. Bharath Kumar Surisetti, Consultant Neurologist, Yashoda Hospitals से जानते हैं कि गर्भनिरोधक गोलियां और माइग्रेन में क्या संबंध है? 

माइग्रेन पर गर्भनिरोधक गोलियों का असर

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी का कहना है कि गर्भनिरोधक गोलियां माइग्रेन पर अलग-अलग तरह से असर डाल सकती हैं। ये गोलियां आपके शरीर पर क्या असर डाल सकती है यह इस बात पर निर्भर करता है कि महिला का शरीर हार्मोनल बदलाव को लेकर कितना सेंसिटिव है और कौन-सी गोली इस्तेमाल की जा रही है। खासकर एस्ट्रोजन हार्मोन के लेवल में बदलाव माइग्रेन का बड़ा कारण बनता है। इसलिए, ये गोलियां कभी माइग्रेन की समस्या को कम कर सकती हैं और कभी बढ़ा भी सकती हैं। इतना ही नहीं, कुछ महिलाओं में, जिन्हें पीरियड्स के समय माइग्रेन होता है, ये गोलियां फायदेमंद हो सकती हैं, क्योंकि ये शरीर में एस्ट्रोजन के लेवल को स्थिर रखती हैं, जिससे माइग्रेन के दौरे कम हो सकते हैं। जबकि कुछ महिलाओं में इन गोलियों को शुरू करने के बाद माइग्रेन की समस्या शुरू हो सकती हैं या पहले से ज्यादा बढ़ सकती है। खासकर, जब गोली के बीच में ब्रेक होता है, तो माइग्रेन का दर्द बढ़ सकता है। 

2025 में European Society Of Medicine (2025) में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, "जब माइग्रेन के दौरान गर्भनिरोधक गोलियां ली जाती हैं तो दो बड़े जोखिमों पर फोकस किया जाता है, जिसमें एक नसों में खून के थक्के जमना (Venous Thromboembolism) और स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाता है। खून के थक्के जमने का जोखिम किसी भी महिला को हो सकता है, लेकिन कंबाइंड पिल्स, जिसमें एस्ट्रोजन होता है, इस खतरे को बढ़ा देती हैं, जबकि प्रोजेस्टिन-ओनली पिल और IUD (कॉपर टी) से यह जोखिम नहीं बढ़ता है।"

इसे भी पढ़ें: PCOS और माइग्रेन में क्या संबंध है? डॉक्टर से जानें कारण, लक्षण और मैनेजमेंट के तरीके

साथ ही, 2009 में Expert Review of Neurotherapeutics में प्रकाशित लेख के अनुसार, "कंबाइंड गर्भनिरोधक गोलियां गर्भ रोकने का एक बेहतरीन तरीका है, लेकिन माइग्रेन के मरीजों में इसके कुछ साइड इफेक्ट्स के जोखिम भी देखने को मिलते हैं। इसलिए, जिन महिलाओं को ऑरा वाला माइग्रेन  यानी सिरदर्द से पहले धुंधला दिखना या चमक महसूस होना है, उन्हें इन पिल्स का सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि यह उनके लिए असुरक्षित हो सकती है।"

गर्भनिरोधक गोलियां लेने के दौरान माइग्रेन कैसे मैनेज करें? 

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के अनुसार, गर्भनिरोधक गोलियां लेने के साथ माइग्रेन को कंट्रोल करने के लिए जरूरी है कि आप इन तरीकों को अपनाएं, जिसमें- 

1. कम एस्ट्रोजन वाली गोलियां लें

मार्केट में ऐसी कई लो डोज पिल्स मिल रही हैं, जिनमें एस्ट्रोजन की मात्रा बहुत कम होती है। ये गोलियां हार्मोनल उतार-चढ़ाव को कम करती हैं, जिससे माइग्रेन के ट्रिगर्स को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। 

2. लगातार या लंबे समय तक चलने वाले साइकल पिल्स

डॉक्टर अक्सर उन महिलाओं को लगातार पैक लेने की सलाह दे सकते हैं, जिन्हें पीरियड्स के दौरान माइग्रेन होता है। इसमें आप ब्रेक के बिना गोलियां लेती रहती हैं, जिससे पीरियड्स कम बार होते हैं। जब आपको पीरियड्स नहीं होंगे तो आपका एस्ट्रोजन लेवल भी नहीं गिरेगा और माइग्रेन से बचाव होगा। 

3. गैप को कम करना 

नॉर्मल गर्भनिरोधक पैक में 7 दिन की प्लेसबो या खाली गोलियां होती हैं। डॉक्टर इस 7 दिन के अंतराल को कम करके 2 या 3 दिन करने की सलाह दे सकते हैं, ताकि शरीर में हार्मोन लेवल बिल्कुल नीचे न गिरे। 

इन टिप्स को अपनाने से हार्मोन में अचानक कमी आने से रोका जा सकता है, जिससे माइग्रेन कम हो सकता है। हालांकि, हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए इसका असर भी अलग-अलग तरीके से हो सकता है। 

इसे भी पढ़ें: क्या माइग्रेन माता-पिता से बच्चों में आता है? जानें डॉक्टर से कारण, लक्षण और बचाव

कब सावधानी बरतना जरूरी है?

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी ने बताया कि, अगर गर्भनिरोधक गोलियां लेना शुरू करने के बाद सिर में दर्द बढ़ जाए या फिर पहली बार माइग्रेन का दर्द शुरू होने लगे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह आपके लिए एक चेतावनी का संकेत हो सकता है, कि आपके शरीर में हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है। इसके साथ आप इन बातों का भी ध्यान रखें- 

  • ऑरा वाले माइग्रेन में कम्बाइन्ड ओरल कंट्रासेप्टिव, जिनमें एस्ट्रोजन भी होता है, उन्हें लेने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह माइग्रेन को ट्रिगर कर सकता है। 
  • अगर आप पहले से गोलियां ले रही हैं और आपका सिरदर्द अचानक बढ़ जाए, माइग्रेन बार-बार ट्रिगर करें या दर्द के साथ बोलने में मुश्किल या शरीर के एक हिस्से में कमजोरी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।  
  • स्मोकिंग करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह ब्लड के थक्के और स्ट्रोक के जोखिम को कई गुना बढ़ा देते हैं। 
  • ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखना चाहिए क्योंकि यह दिल से जुड़ी समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकता है। 

इसे भी पढ़ें: बच्चों में माइग्रेन: कारण, लक्षण और इलाज

डॉक्टर से कब मिलें?

गर्भनिरोधक गोलियां लेने के साथ माइग्रेन ट्रिगर होना एक गंभीर समस्या हो सकती है। हालांकि, आपको गर्भनिरोधक गोलियां लेने से पहले डॉक्टर से कंसल्ट करना बहुत जरूरी होता है। इसके अलावा जरूरी है कि आप इन स्थितियों में भी  तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें, अगर गर्भनिरोधक गोलियां लेना शुरू करने के बाद माइग्रेन का दर्द शुरू हो जाए। इसके अलावा, अगर आपको पहले से माइग्रेन की समस्या है और गर्भनिरोधक गोलियां लेने के बाद माइग्रेन ज्यादा ट्रिगर होने लगे। माइग्रेन के साथ ऑरा जैसे आंखों के सामने चमक, धुंधलापन नजर आने लगे या फिर अगर मरीज को सिरदर्द के साथ चक्कर आना, बोलने में समस्या या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी महसूस हो। इतना ही नहीं अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर, स्मोकिंग की आदत या ब्लड क्लॉटिंग बनने की समस्या रही है। गर्भनिरोधक गोलियां लेने के साथ माइग्रेन से जुड़े इन संकेतों को नजरअंदाज किए बिना तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। 

निष्कर्ष

गर्भनिरोधक गोलियां और माइग्रेन के बीच के कनेक्शन का प्रभाव हर महिला में अलग-अलग नजर आता है। कुछ महिलाओं के लिए यह फायदेमंद हो सकती है, जबकि कुछ में समस्या को ट्रिगर कर सकता है। इसलिए, सही गर्भनिरोधक गोलियों को चुनना सोच-समझकर और डॉक्टर की सलाह से करना जरूरी है। गर्भनिरोधक गोलियां लेने पर सबसे महत्वपूर्ण बात है कि आप अपने लक्षणों पर ध्यान दें और शरीर में होने वाले किसी भी बदलाव को समय पर डॉक्टर के साथ शेयर करें, ताकि सुरक्षित और सही इलाज आसानी से मिल सके। 

Image Credit: Freepik 

FAQ

  • क्या गर्भनिरोधक गोली माइग्रेन का कारण बन सकती है?

    हां, गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन कुछ महिलाओं में माइग्रेन का कारण बन सकती हैं या उसे बढ़ा सकती हैं। हार्मोन के स्तर में बदलाव, खासकर एस्ट्रोजन हार्मोन में गिरावट माइग्रेन की समस्या को ट्रिगर कर सकती है।
  • महिलाओं में माइग्रेन क्यों ज्यादा होता है?

    महिलाओं में माइग्रेन अटैक का मुख्य कारण आमतौर पर शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन में उतार-चढ़ाव के कारण होता है। पीरियड्स, प्रेग्नेंसी, मेनोपॉज या गर्भनिरोधक गोलियों के कारण जब शरीर में एस्ट्रोजन का लेवल गिर जाता है तो यह दिमाग में न्यूरोकेमिकल्स को एक्टिव कर देता है, जिससे माइग्रेन के अटैक पड़ते हैं। महिलाओं में यह पुरुषों की तुलना में 3 गुना ज्यादा आम होता है। 
  • गर्भनिरोधक गोली क्या नुकसान करती है?

    गर्भनिरोधक गोलियों के साइड इफेक्ट्स में जी मिचलाना, सिर में दर्द, ब्रेस्ट में दर्द, मूड में बदलाव और अनियमित ब्लीडिंग या स्पॉटिंग जैसी समस्याएं शामिल हैं। ये गोलियां आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती हैं, लेकिन इनके कारण वजन बढ़ना, कामेच्छा में कमी और कुछ मामलों में ब्लड क्लॉटिंग का जोखिम भी बढ़ जाता है। 
  • माइग्रेन की लास्ट स्टेज में क्या होता है?

    माइग्रेन की लास्ट स्टेज को पोस्टड्रोम या माइग्रेन हैंगओवर कहा जाता है। इस स्थिति में सिरदर्द खत्म होने के बाद व्यक्ति को ज्यादा थकान, चिड़चिड़ापन, फोकस में कमी और शरीर में भारीपन महसूस हो सकता है, जो कुछ घंटों से लेकर एक या दो दिन तक रह सकता है।
  • माइग्रेन में किस प्रकार के गर्भनिरोधक से बचना चाहिए?

    माइग्रेन, खासकर ऑरा के साथ माइग्रेन की समस्या से पीड़ित महिलाओं को एस्ट्रोजन से भरपूर गर्भनिरोधक गोलियां लेने से बचना चाहिए, क्योंकि ये गोलियां माइग्रेन अटैक के खतरे को बढ़ा सकती हैं। इसके स्थान पर आप सिर्फ प्रोजेस्टेरोन वाली गोलियां, आईयूडी या नॉन-हार्मोनल तरीके अपना सकते हैं।  

Read Next

अल्कोहोलिक लिवर सिरोसिस क्या है? डॉक्टर से जानें लक्षण, कारण, इलाज और बचाव

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Apr 25, 2026 17:06 IST

    Modified By : Katyayani Tiwari
  • Apr 25, 2026 17:06 IST

    Modified By : Katyayani Tiwari
  • Apr 25, 2026 17:06 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Bharath Kumar Surisetti

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content