Mon Oct 12, 2026 | 12:00 AM IST

Medically Reviewed by Dr Bharath Kumar Surisetti , Consultant Neurologist | MD, DM (Neurology), PDF Movement Disorders (NIMHANS)

5 मिनट का Mini Stroke हो सकता है बड़े स्ट्रोक की चेतावनी, इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

मिनी स्ट्रोक दिमाग तक ब्लड फ्लो में अस्थायी रुकावट है, जो बड़े स्ट्रोक का गंभीर चेतावनी संकेत हो सकता है। इसके लक्षणों को पहचानकर और लाइफस्टाइल में बदलाव लाकर गंभीर स्ट्रोक के खतरे को कम किया जा सकता है।
5 मिनट का Mini Stroke हो सकता है बड़े स्ट्रोक की चेतावनी, इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें5 मिनट का Mini Stroke हो सकता है बड़े स्ट्रोक की चेतावनी, इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

स्ट्रोक एक ऐसी गंभीर समस्या है, जो दिमाग तक ब्लड की जरूरत बाधित होने के कारण होती है। आमतौर पर लोग स्ट्रोक को अचानक आने वाली स्थिति मानते हैं, जिसमें शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, बोलने में परेशानी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं लेकिन कई बार शरीर स्ट्रोक से पहले ही कुछ संकेत देने लगता है। इन्हीं संकेतों में से एक है मिनी स्ट्रोक (Mini Stroke), जिसे मेडिकल भाषा में ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) कहा जाता है। इस लेख में यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी से जानिए, मिनी स्ट्रोक क्या होता है और बचाव के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

मिनी स्ट्रोक और बड़े स्ट्रोक में क्या संबंध है?

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के अनुसार, मिनी स्ट्रोक कई बार बड़े स्ट्रोक से पहले आने वाला संकेत हो सकता है। इसमें ब्लड फ्लो में आई रुकावट थोड़े समय बाद खुद ठीक हो जाती है, इसलिए इसके लक्षण खत्म हो जाते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि खतरा टल गया है। डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी बताते हैं कि जिन लोगों को मिनी स्ट्रोक होता है, उनमें भविष्य में गंभीर स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है। खासतौर पर अगर हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, मोटापा या हार्ट संबंधी बीमारी जैसी समस्याएं मौजूद हों, तो सतर्क रहना और भी जरूरी हो जाता है। मिनी स्ट्रोक के लक्षण अक्सर अचानक दिखाई देते हैं और कुछ मिनटों या घंटों में ठीक हो सकते हैं। यही वजह है कि लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते। डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी बताते हैं कि कुछ लक्षण हैं जिन्हें देखकर सतर्क हो जाना चाहिए।

इसे भी पढ़ें: Silent Stroke क्या है? इसके कारण, शुरुआती लक्षण, जांच और इलाज डॉक्टर से जानें

  • चेहरे, हाथ या पैर के किसी एक हिस्से में अचानक कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना।
  • बोलने में परेशानी, शब्दों का सही उच्चारण न कर पाना या दूसरों की बात समझने में दिक्कत होना।
  • अचानक चक्कर आना, चलने में परेशानी या शरीर का बैलेंस बिगड़ना।
  • एक या दोनों आंखों से धुंधला दिखाई देना या अचानक नजर कमजोर होना।
  • अचानक तेज सिरदर्द होना, खासकर यदि पहले ऐसा अनुभव न हुआ हो।

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के अनुसार, भले ही ये लक्षण कुछ समय बाद खत्म हो जाएं, फिर भी इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

मिनी स्ट्रोक होने के कारण क्या हैं?

मिनी स्ट्रोक का मुख्य कारण दिमाग तक ब्लड पहुंचाने वाली नसों में अस्थायी रुकावट आना होता है। यह रुकावट अक्सर खून का थक्का बनने के कारण हो सकती है। हाई ब्लड प्रेशर, अनियंत्रित डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, खराब खानपान और फिजिकल एक्टिविटी की कमी इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा कुछ लोगों में हार्ट की अनियमित धड़कन के कारण भी खून के थक्के बनने का खतरा बढ़ सकता है, जो दिमाग तक पहुंचकर समस्या पैदा कर सकते हैं।

किन लोगों को मिनी स्ट्रोक का खतरा होता है?

National Institute of Neurological Disorders and Stroke की रिपोर्ट के अनुसार, टीआईए (Transient Ischemic Attack) जिसे मिनी स्ट्रोक भी कहते हैं किसी को भी हो सकता है, लेकिन बढ़ती उम्र के लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है। हाई ब्लड प्रेशर, धूम्रपान, हार्ट डिजीज, डायबिटीज, मोटापा और ज्यादा शराब का सेवन मिनी स्ट्रोक के रिस्क को बढ़ा देते हैं। मिनी स्ट्रोक को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह फ्यूचर में होने वाले बड़े स्ट्रोक के लिए एक गंभीर चेतावनी संकेत है। टीआईए से पीड़ित लगभग एक-तिहाई लोगों को आगे चलकर गंभीर स्ट्रोक होने की आशंका रहती है। हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और हार्ट संबंधी बीमारियों का सही डॉक्टरी इलाज कराकर स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। 

mini strokemini stroke

मिनी स्ट्रोक के बाद कौन सी जांच जरूरी है?

यदि किसी व्यक्ति को मिनी स्ट्रोक के लक्षण महसूस होते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर मरीज की स्थिति के आधार पर कई जांच कर सकते हैं। इनमें ब्लड टेस्ट, ब्लड प्रेशर की जांच, हार्ट की जांच और MRI या CT स्कैन शामिल हो सकते हैं।

मिनी स्ट्रोक से बचाव के लिए क्या करें?

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी सलाह देते हैं कि हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर स्ट्रोक के रिस्क को कम किया जा सकता है। इसके लिए नियमित एक्सरसाइज करें, बैलेंस डाइट लें, नमक और ज्यादा फैट वाले भोजन का सेवन कम करें। ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को कंट्रोल रखें। धूम्रपान और ज्यादा शराब से बचें। इसके अलावा समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाना भी जरूरी है।

निष्कर्ष

मिनी स्ट्रोक भले ही कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाए, लेकिन यह शरीर का एक गंभीर संकेत हो सकता है। डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी के अनुसार, चेहरे, हाथ-पैर में कमजोरी, बोलने में परेशानी, चक्कर या अचानक नजर कमजोर होने जैसे लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और सही इलाज से बड़े स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए शरीर में होने वाले छोटे बदलावों को समझें और जरूरत पड़ने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

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FAQ

  • मिनी स्ट्रोक के लक्षण कितनी देर तक रहते हैं?

    मिनी स्ट्रोक के लक्षण कुछ मिनटों से लेकर कुछ घंटों तक रह सकते हैं और कई बार अपने आप ठीक हो जाते हैं।
  • मिनी स्ट्रोक होने पर क्या करना चाहिए?

    मिनी स्ट्रोक होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि यह फ्यूचर में बड़े स्ट्रोक का संकेत हो सकता है।
  • क्या युवा लोगों को मिनी स्ट्रोक हो सकता है?

    उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा ज्यादा होता है, लेकिन खराब लाइफस्टाइल, तनाव और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण युवाओं में भी यह हो सकता है।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 17, 2026 19:21 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Bharath Kumar Surisetti