हाई ब्लड प्रेशर दुनिया भर में समय से पहले होने वाली मौतों का एक मुख्य कारण है। गैर-संक्रामक बीमारियों के लिए वैश्विक लक्ष्यों में से एक लक्ष्य यह है कि 2010 और 2025 के बीच असंंतुलित हाई बीपी को 25 प्रतिशत तक कम किया जाए। हाई बीपी के कारण स्ट्रोक या हार्ट अटैक की स्थिति आ सकती है जिसके कारण यह माना जाता है कि हाई बीपी जानलेवा स्थिति है। FDA (Food and Drug Administration) के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। हाई ब्लड प्रेशर दिल की बीमारी, हार्ट फेलियर और स्ट्रोक जैसी कई समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है। हाई बीपी की स्थिति कितनी जानलेवा है और इसके चेतावनी संकेत समझने के लिए हमने Dr. V. Rajasekhar, Cardiologist At Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad से बात की।
WHO के मुताबिक, 2024 में दुनिया भर में 30 से 79 वर्ष की आयु के 140 करोड़ वयस्कों को हाई बीपी था। हाइपरटेंशन से पीड़ित वयस्कों की संख्या 1990 में 65 करोड़ से बढ़कर 2024 में 140 करोड़ हो गई। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि हाई बीपी की स्थिति कितनी जानलेवा है और इसका खतरा कब बढ़ जाता है?
किन स्थितियों में हाई बीपी का खतरा बढ़ता है?
Mayo Clinic के मुताबिक, 180/120 mm Hg से ज्यादा ब्लड प्रेशर को हाइपरटेंसिव इमरजेंसी या संकट माना जाता है। जिन लोगों का ब्लड प्रेशर इतना या इसके आसपास हो, उन्हें तुरंंत डॉक्टर से मदद लेना चाहिए। अगर हाई ब्लड प्रेशर का इलाज न किया जाए, तो इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और दूसरी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। 18 साल की उम्र से शुरू करके, हर दो साल में कम से कम एक बार अपना ब्लड प्रेशर चेक कराना चाहिए।
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हाई बीपी के चेतावनी संंकेत क्या हैं?
- तेज सिरदर्द।
- सीने में दर्द।
- सांस लेने में तकलीफ होना।
- नजर में बदलाव आना।
- थकान और कमजोरी होना।
हाई ब्लड प्रेशर एक जानलेवा स्थिति क्यों है?

Dr. V. Rajasekhar ने बताया कि हाई बीपी एक जानलेवा स्थिति है। अगर हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) का इलाज न किया जाए, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। American Heart Association के मुताबिक, हाई बीपी से होने वाला नुकसान धीरे-धीरे होता है। अगर सही समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो हाई बीपी में ये समस्याएं हो सकती हैं-
- हाई बीपी से धमनियां ब्लॉक हो सकती हैं और हार्ट अटैक आ सकता है।
- एंजाइना (सीने में दर्द) जैसी दिल की बीमारियां।
- दिमाग तक ब्लड और ऑक्सीजन पहुंचाने वाली नसें ब्लॉक हो जाती हैं जिससे स्ट्रोक आ सकता है।
- हाई बीपी की वजह से हार्ट को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और हार्ट फेलियर हो सकता है।
- हाई बीपी में ब्लड ठीक से फिल्टर न होने की स्थिति में किडनी के आस-पास की धमनियों को नुकसान पहुंचता है और किडनी की बीमारी या किडनी फेलियर हो सकता है।
- हाई बीपी आंख की रेटिना की नसों को नुकसान पहुंचा सकता है। इस कंडीशन को हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी (Hypertensive Retinopathy) कहते हैं और धीरे-धीरे बिना दर्द के नजर कमजोर हो जाती है।
- एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों में प्लाक जमना)।
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हाइपरटेंसिव क्राइसिस क्या है?
Dr. V. Rajasekhar ने बताया कि हाइपरटेंसिव क्राइसिस (Hypertensive Crisis) एक गंभीर स्थिति है। जब बीपी बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और तुरंत ध्यान देने की जरूरत होती है। आमतौर पर जब बीपी 180/120 mmHg या उससे ज्यादा हो जाए, तो इसे हाइपरटेंसिव क्राइसिस माना जाता है। अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फेलियर जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है।
किन लोगों में हाई बीपी का खतरा बढ़ता है?
- 40 साल से ज्यादा उम्र के लोग।
- डायबिटीज के मरीज।
- जिन लोगों के परिवार में यह बीमारी रही हो।
- मोटे लोग भी इसके खतरे में होते हैं।
हाई बीपी को कैसे कंट्रोल करें?
- संतुलित आहार लें।
- नियमित व्यायाम करें।
- वजन कंट्रोल करें।
- अल्कोहल और धूम्रपान से दूरी बनाएं।
- नियमित जांच करवाते रहना चाहिए।
डॉक्टर से संपर्क कब करें?
Dr. V. Rajasekhar ने कहा, ''अगर रीडिंग 180/120 mmHg से ज्यादा हो या आपको उलझन या बहुत तेज दर्द जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। नियमित रूप से जांच करते रहें क्योंकि समय पर इलाज से जान बच सकती है।''
निष्कर्ष:
हाई बीपी एक जानलेवा स्थिति बन सकती है। इसे कंट्रोल न किया जाए, तो हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर, किडनी फेलियर, एंजाइना, स्ट्रोक, आंखों की समस्या हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी, धमनियों में प्लाक जमे जैसी स्थिति भी हो सकती है। अगर रीडिंग 180/120 mmHg से ज्यादा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
FAQ
किन कारणों से हाई बीपी का खतरा बढ़ता है?
बढ़ती उम्र, आनुवंशिकी, अधिक वजन या मोटापा, शारीरिक रूप से एक्टिव न रहना, ज्यादा नमक वाला भोजन खाना और बहुत ज्यादा अल्कोहल का सेवन करना।सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर में अंतर क्या है?
सिस्टोलिक नंबर उस दबाव को दिखाता है, जब हार्ट सिकुड़कर ब्लड को धमनियोंं तक भेजता है। डायस्टोलिक नंबर उस दबाव को दिखाता है, जब दिल दो धड़कनों के बीच रेस्ट करता है।
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Jul 27, 2026 19:06 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Jul 27, 2026 19:06 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr V Rajasekhar