Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr Bharath Kumar Surisetti , Consultant Neurologist | MD, DM (Neurology), PDF Movement Disorders (NIMHANS)

परिवार में स्ट्रोक का इतिहास है तो जरूर कराएं ये 6 टेस्ट, समय रहते चल सकेगा बीमारी का पता

अगर परिवार में स्ट्रोक का इतिहास है, तो कुछ लोगों में जेनेटिक जांच कराना जरूरी हो सकता है। यहां जानिए, किन परिस्थितियों में डॉक्टर ऐसी जांच की सलाह देते हैं और इससे क्या फायदा होता है।

स्ट्रोक और अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियां आज दुनिया भर में विकलांगता और मौत के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। अक्सर लोग यह मानते हैं कि स्ट्रोक केवल बढ़ती उम्र या हाई ब्लड प्रेशर की वजह से होता है, लेकिन कई मामलों में आनुवंशिक यानी जेनेटिक कारण भी इसकी संभावना को प्रभावित कर सकते हैं। यदि आपके परिवार में माता-पिता, भाई-बहन या करीबी रिश्तेदारों को कम उम्र में स्ट्रोक, ब्रेन एन्यूरिज्म, अल्जाइमर, पार्किंसंस या अन्य जेनेटिक ब्रेन डिजीज रही है, तो आपके लिए समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराना और जोखिम का आकलन कराना बेहद जरूरी हो सकता है। इस लेख में यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी से जानिए, अगर परिवार में स्ट्रोक का इतिहास हो तो कौन से टेस्ट करवाने चाहिए?

परिवार में स्ट्रोक का इतिहास हो तो कौन से टेस्ट करवाने चाहिए?

डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी के अनुसार, फैमिली हिस्ट्री होने का मतलब यह नहीं कि बीमारी निश्चित रूप से होगी, लेकिन जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा हो सकता है। इसलिए लक्षणों का इंतजार करने की बजाय समय रहते एक्सपर्ट से परामर्श लेना बेहतर होता है। डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी बताते हैं कि यदि परिवार के किसी सदस्य को 55 वर्ष की उम्र से पहले स्ट्रोक हुआ हो, बार-बार ब्रेन हैमरेज की समस्या रही हो या किसी आनुवंशिक ब्रेन बीमारी का इलाज हुआ हो, तो अन्य परिवार के सदस्यों को भी जोखिम का मूल्यांकन (Risk assessment) कराना चाहिए।

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इसके अलावा यदि परिवार में कई लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और हार्ट डिजीज के साथ स्ट्रोक हुआ है, तो यह भी फ्यूचर के जोखिम का संकेत हो सकता है। यदि आपको बार-बार सिरदर्द, चक्कर आना, बोलने में कठिनाई, शरीर के किसी हिस्से में अचानक कमजोरी, याददाश्त में तेजी से गिरावट या बैलेंस संबंधी समस्याएं महसूस होती हैं, तो इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

कौन-कौन से टेस्ट कराने चाहिए?

डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी के अनुसार, टेस्ट का चुनाव व्यक्ति की उम्र, पारिवारिक इतिहास, लक्षणों और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के आधार पर किया जाता है। हर व्यक्ति को सभी जांच कराने की जरूरत नहीं होती, लेकिन जोखिम वाले लोगों में कुछ जरूरी टेस्ट उपयोगी हो सकते हैं।

family history of stroke tests

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  1. इनमें ब्लड प्रेशर की नियमित जांच
  2. ब्लड शुगर
  3. लिपिड प्रोफाइल
  4. कैरोटिड डॉप्लर अल्ट्रासाउंड
  5. जरूरत पड़ने पर MRI या CT स्कैन,
  6. MR एंजियोग्राफी (MRA) या CT एंजियोग्राफी (CTA)

डॉक्टर की सलाह पर जेनेटिक काउंसलिंग और जेनेटिक टेस्टिंग शामिल हो सकती है। यदि परिवार में ब्रेन एन्यूरिज्म या किसी खास आनुवंशिक बीमारी का इतिहास है, तो एक्सपर्ट अन्य टेस्ट की सलाह भी दे सकते हैं।

क्या जेनेटिक टेस्ट सभी के लिए जरूरी है?

डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी का कहना है कि केवल फैमिली हिस्ट्री होने के आधार पर हर व्यक्ति को जेनेटिक टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती। यह निर्णय न्यूरोलॉजिस्ट और जेनेटिक काउंसलर द्वारा व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री, परिवार में बीमारी के प्रकार और जोखिम का मूल्यांकन करने के बाद लिया जाता है। जेनेटिक टेस्ट से यह पता लगाया जा सकता है कि किसी खास आनुवंशिक बदलाव की मौजूदगी है या नहीं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि बीमारी निश्चित रूप से विकसित होगी।

साल 2009 में Journal of The Neurological Sciences में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, कोरियाई आबादी में परिवार का मेडिकल इतिहास होना स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा देता है। इस स्टडी में पाया गया कि जिन परिवारों में स्ट्रोक का इतिहास रहा है, वहां इसका जोखिम कई गुना ज्यादा होता है, जिसमें माता-पिता की तुलना में भाई-बहन का इतिहास होना सबसे ज्यादा खतरा पैदा करता है। भाई-बहन के बीच यह गहरा संबंध जेनेटिक कारणों के साथ-साथ एक ही घर में रहने, समान खान-पान और रहन-सहन जैसे पर्यावरणीय कारकों के प्रभाव को भी दिखाता है। संक्षेप में, पारिवारिक इतिहास स्ट्रोक के खतरे की पहचान करने का एक बेहद मजबूत जरिया है, लेकिन यह बीमारी की गंभीरता या रिकवरी को प्रभावित नहीं करता।

डॉक्टर की सलाह

डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी बताते हैं कि केवल टेस्ट कराना ही पर्याप्त नहीं है। यदि परिवार में स्ट्रोक या न्यूरोलॉजिकल बीमारी का इतिहास है, तो हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना भी उतना ही जरूरी है। नियमित एक्सरसाइज, बैलेंस डाइट, धूम्रपान और तंबाकू से दूरी, शराब का सीमित सेवन, पर्याप्त नींद और तनाव कंट्रोल दिमाग और हार्ट दोनों की हेल्थ के लिए फायदेमंद हैं। साथ ही हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों को कंट्रोल रखना स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। नियमित हेल्थ चेकअप के जरिए जोखिम कारकों की समय पर पहचान और इलाज किया जा सकता है।

निष्कर्ष

परिवार में स्ट्रोक या आनुवंशिक ब्रेन बीमारी का इतिहास होने का मतलब यह नहीं कि आपको भी वही बीमारी जरूर होगी, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भी सही नहीं है। डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी के अनुसार, जोखिम वाले लोगों को समय पर न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेकर जरूरी टेस्ट, नियमित हेल्थ चेकअप करवाने चाहिए और एक हेल्दी लाइफस्टाइल अपनानी चाहिए। सही समय पर जोखिम की पहचान और उचित देखभाल से कई गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं को रोका या उनके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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FAQ

  • क्या कम उम्र के लोगों को भी स्ट्रोक हो सकता है?

    कम उम्र के लोगों को भी स्ट्रोक हो सकता है लेकिन यह कम आम है, आनुवंशिक कारण, कुछ बीमारियां और अनहेल्दी लाइफस्टाइल कम उम्र में भी स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा सकती हैं।
  • कितने अंतराल पर हेल्थ चेकअप कराना चाहिए?

    यह व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। यदि किसी बीमारी की फैमिली हिस्ट्री है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित अंतराल पर टेस्ट कराने चाहिए।

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Akanksha Tiwari

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Senior Sub Editor

आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 10, 2026 13:23 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Jul 10, 2026 13:23 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Bharath Kumar Surisetti

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