Fri Sep 11, 2026 | 06:50 PM IST

Medically Reviewed by Dr Bharath Kumar Surisetti , Consultant Neurologist | MD, DM (Neurology), PDF Movement Disorders (NIMHANS)

क्या ज्यादा स्क्रीन टाइम से घट रहा है आपका Attention Span? जानें दिमाग पर इसका असर

स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट और टीवी आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लगातार मोबाइल और स्क्रीन का इस्तेमाल फोकस और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट और टेलीविजन हमारी डेली लाइफ का हिस्सा बन चुके हैं। ऑफिस का काम हो, ऑनलाइन पढ़ाई, सोशल मीडिया, गेमिंग, लगभग हर एक्टिविटी किसी न किसी स्क्रीन से जुड़ गई है। कई लोग दिन में 8 से 10 घंटे या उससे भी ज्यादा समय स्क्रीन के सामने बिताते हैं। ऐसे में हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम केवल आंखों या फिजिकल हेल्थ को ही नहीं, बल्कि दिमाग के फंक्शन पर भी असर डाल सकता है। इस लेख में यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट, Dr. Bharath Kumar Surisetti से जानिए, क्या ज्यादा स्क्रीन टाइम से अटैंशन का समय घट रहा है?

क्या स्क्रीन टाइम से अटेंशन स्पैन कम होता है?

डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी बताते हैं कि सोशल मीडिया रील्स, शॉर्ट वीडियो और लगातार आने वाले नोटिफिकेशन दिमाग को बार-बार नई जानकारी लेने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे दिमाग को तुरंत मिलने वाले रिवॉर्ड की आदत पड़ सकती है। जिसके कारण, किताब पढ़ना, पढ़ाई करना या किसी जटिल काम पर लंबे समय तक ध्यान लगाना कठिन महसूस हो सकता है। बार-बार मोबाइल चेक करने की आदत भी फोकस को प्रभावित करती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि हर तरह का स्क्रीन उपयोग नुकसानदायक है। यदि स्क्रीन का इस्तेमाल सीखने, काम करने या सीमित एंटरटेनमेंट के लिए बैलेंस तरीके से किया जाए, तो इसका बुरा प्रभाव कम किया जा सकता है।

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  • डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी के अनुसार, बच्चों और किशोरों का दिमाग अभी विकास की प्रक्रिया में होता है, इसलिए उन पर ज्यादा स्क्रीन टाइम का प्रभाव ज्यादा पड़ सकता है।
  • लंबे समय तक मोबाइल या टैबलेट का उपयोग करने से पढ़ाई में ध्यान कम लगना, याददाश्त प्रभावित होना, चिड़चिड़ापन और नींद की क्वालिटी खराब होना जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
  • वहीं, वयस्कों में भी लगातार स्क्रीन देखने से मानसिक थकान और मल्टीटास्किंग की आदत बढ़ सकती है, जिससे कार्यक्षमता प्रभावित होती है।

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screen time reduce attention span

अटेंशन स्पैन बेहतर रखने के लिए क्या करें?

डॉ. भरत कुमार सुरीसेट्टी सलाह देते हैं कि स्क्रीन टाइम को सीमित करने के साथ-साथ नियमित ब्रेक लेना जरूरी है। 20-20-20 नियम अपनाना आंखों और दिमाग दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा, नोटिफिकेशन को सीमित करना, सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन से दूरी बनाना, रोजाना फिजिकल एक्टिविटी करना, पर्याप्त नींद लेना और किताब पढ़ने, मेडिटेशन या किसी क्रिएटिव एक्टिविटी में समय बिताना अटेंशन स्पैन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

निष्कर्ष

स्क्रीन का उपयोग आज की जरूरत है, लेकिन जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम अटेंशन स्पैन, फोकस और मेंटल हेल्थ पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। खासकर लगातार शॉर्ट वीडियो देखने और बार-बार नोटिफिकेशन चेक करने की आदत फोकस को कमजोर कर सकती है। हालांकि, बैलेंस स्क्रीन उपयोग, हेल्दी डेली रूटीन, पर्याप्त नींद और नियमित फिजिकल एक्टिविटी अपनाकर इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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FAQ

  • बच्चों पर ज्यादा स्क्रीन टाइम का क्या असर पड़ता है?

    बच्चों में ज्यादा स्क्रीन टाइम से फोकस, सीखने की क्षमता, नींद और व्यवहार पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
  • स्क्रीन टाइम कम करने के लिए क्या करें?

    स्क्रीन उपयोग का समय तय करें, अनावश्यक नोटिफिकेशन बंद करें, नियमित ब्रेक लें और ऑफलाइन एक्टिविटीज में समय बिताएं।
  • क्या सोने से पहले मोबाइल चलाना सही है?

    सोने से पहले लंबे समय तक मोबाइल देखने से नींद की क्वालिटी खराब हो सकती है, जिससे अगले दिन ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई हो सकती है।

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Akanksha Tiwari

Akanksha Tiwari

Senior Sub Editor

आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jun 30, 2026 20:54 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Jun 30, 2026 20:54 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Bharath Kumar Surisetti

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