आपने कई बार ऐसा महसूस किया होगा कि मूड सही नहीं है या मानसिक थकान है, तो आपके खाने की क्रेविंग बढ़ने लगती है। ऐसे में आप कुछ भी खाने लगते हैं। कुछ लोग मीठा अधिक खाते हैं, तो कुछ लोगों को तीखा खाने की चाह बढ़ जाती है। ऐसे में यह सवाल मन में जरूर उठता है कि क्या वाकई तनाव की वजह से हमारे खाने-पान की आदतें बदल सकती हैं? आखिर ऐसा क्यों होता है और इनका आपस में क्या कनेक्शन है? आइए, जानते हैं इस बारे में डॉ. चांदनी तुगनायत, Psychotherapist, Life Alchemist, Founder & Director, Gateway of Healing की क्या राय है।
क्या तनाव के कारण खाने की आदतें बदल सकती हैं?
how mental fatigue and stress changes your eating habits explains expert 01 (20)
तनाव हमारे शरीर को कई तरह से प्रभावित करता है। इसमें सिर्फ हमारी जीवनशैली या कामकाज करने के तौर-तरीके शामिल नहीं हैं। इसमें हमारी खानपान की आदतें भी शुमार हैं। American Psychiatric Association के अनुसार, तनाव हमारी ईटिंग हैबिट्स को कई तरह से प्रभावित करता है, जिसमें हमें कितनी भूख लगती है, हम कितना खाते हैं और किस तरह का खाना चुनते हैं, ये बातें भी शामिल हैं। यही नहीं, तनाव की वजह से अक्सर लोग जरूरत से ज्यादा खाने लगते हैं, खासकर कम्फर्ट फूड्स। इसका मतलब है कि वे पैकेट बंद या प्रोसेस्ड खाना जिसमें फैट और शुगर (चीनी) की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। हालांकि, हर इंसान का शरीर तनाव या मानसिक थकान पर अलग तरह से प्रक्रिया करता है। तनाव या थकान में कुछ लोगों की भूख पूरी तरह खत्म हो जाती है, जिससे धीरे-धीरे वे डिप्रेशन का शिकार होने लगते हैं।
इसे भी पढ़ें: हर समय हेल्दी खाने की चिंता (Orthorexia) कैसे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है? जानें एक्सपर्ट से
तनाव या मानसिक थकान खाने की आदतों को कैसे बदलती है?
कोर्टिसोल हार्मोन का बढ़ना
तनाव या मानसिक थकान के कारण शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन काफी ज्यादा मात्रा में रिलीज होने लगता है। यह एक तरह का स्ट्रेस हार्मोन है, जो कि दिमाग को संकेत देता है कि शरीर को तुरंत एनर्जी की जरूरत है। यही कारण है कि तनाव होने की स्थिति में हमें हेल्दी चीजें नहीं, बल्कि पिज्जा और बर्गर जैसी चीजें खाने का मन अधिक करता है। इसे ही कंफर्ट फूड कहते हैं।
ओवरईटिंग करना
तनाव में अक्सर लोग ओवर ईटिंग कर बैठते हैं। हालांकि, यह सच है कि मानसिक थकान और तनाव हर व्यक्ति की भूख को अलग तरह से प्रभावित करती है। कुछ लोगों का दिमाग थका होने पर ब्रेन को पेट भरने का सिग्नल ठीक से नहीं दे पाता, जिससे बिना भूख के भी व्यक्ति ओवरईटिंग करने लगता है। वहीं, कुछ लोग ऐसे होत हैं, जिनका शरीर तनाव में फाइट या फ्लाइट मोड में चला जाता है, जिससे पाचन क्रिया धीमी हो जाती है और भूख पूरी तरह से मर जाती है।
इसे भी पढ़ें: ज्यादा तनाव बन सकता है अचानक Heart Failure की वजह? डॉक्टर से जानें कितना है खतरा
निष्कर्ष
तनाव और मानसिक थकान होने पर खानपान की हर आदत बदल जाती है। किसी को ज्यादा, तो किसी को कम भूख लगती है। अगर कुछ समय के लिए ऐसा हो रहा है, तो यह चिंता का विषय नहीं है। अगर लंबे समय तक ऐसा हो रहा है, तो आपको एक्सपर्ट से संपर्क करने की जरूरत है। ध्यान रखें कि अक्सर ओवरईटिंग करने से वजन बढ़ सकता है और कम खाने से शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है, जिससे इम्यूनिटी पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
All Image Credit: Freepik
FAQ
तनाव के समय हमें मीठा या जंक फूड खाने की क्रेविंग क्यों बढ़ जाती है?
तनाव के कारण कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ जाता है, जिससे दिमाग को तुरंत एनर्जी का संकेत मिलता है। इसलिए तनाव में हाई-कैलोरी और मीठी चीजें खाने की क्रेविंग बढ़ जाती है।तनाव के कारण होने वाली ओवरईटिंग को कैसे रोकें?
तनाव में क्रेविंग को रोकने के लिए तुरंत पानी पिएं, गहरी सांसें लें और पैकेटबंद खाने की जगह मुट्ठी भर मखाने या नट्स खाएं।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Jun 30, 2026 20:15 IST
Modified By : Meera Tagore Jun 30, 2026 20:15 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Chandni Tugnait
-1782807848432.webp)