Fri Sep 11, 2026 | 07:31 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

ब्लड शुगर को नेचुरली बैलेंस करते हैं ये 7 फैक्टर, एक्सपर्ट से जानें कैसे करें फॉलो?

ब्‍लड शुगर को नेचुरली बैलेंस करने के ल‍िए पोर्शन साइज, प्रोटीन इंटेक, डाइटरी फाइबर जैसे फैक्‍टर्स पर ध्‍यान देना जरूरी है। इस लेख में जानेंगे ऐसे पांच फैक्‍टर्स ज‍िनकी मदद से शुगर स्‍पाइक से बच सकते हैं।

ब्‍लड शुगर को स्‍थ‍िर रखने के ल‍िए लोग न जाने कौन-कौन सी दवाओं और सप्‍लीमेंट्स का सेवन करते हैं, लेक‍िन शुगर लेवल को नेचुरली स्‍थ‍िर रखेंगे, तो लंबे समय पर डायब‍िटीज या अन्‍य रोगों का खतरा नहीं होगा। एनर्जी लेवल बढ़ाने, हार्मोनल बैलेंस और मेटाबॉल‍िक सेहत बनाए रखने के ल‍िए शुगर लेवल का स्‍थ‍िर रहना जरूरी है। हेल्‍दी आदतों की मदद से ग्‍लूकोज स्‍पाइक्‍स से बचाव होता है और इंसुल‍िन सेंस‍िट‍िव‍िटी को बेहतर सपोर्ट म‍िलता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज (NIDDK) के अनुसार, पोषक तत्‍वों से भरपूर चीजें खाने से, फ‍िज‍िकली एक्‍ट‍िव रहने से और बैलेंस्‍ड मील खाने से ब्‍लड शुगर लेवल को नेचुरली बैलेंस करने में मदद म‍िलती है। लगातार एक्‍सरसाइज करने से इंसुल‍िन सेंस‍िट‍िव‍िटी सुधरती है और हेल्‍दी खाने से ग्‍लूकोज लेवल स्थ‍िर रहता है।आप भी ब्‍लड शुगर लेवल को नेचुरल तरीके से स्‍थ‍िर रखना चाहते हैं, तो कुछ फैक्‍टर्स पर गौर करें, जो शुगर लेवल को सामान्‍य बनाने में मदद करते हैं। इनके बारे में आगे व‍िस्‍तार से जानेंगे। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow और Dr. Sri Karan Uddesh Tanugula,Consultant General Physician, Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।

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1. इंटरमिटेंट फास्टिंग- Intermittent Fasting

Dr. Sri Karan Uddesh Tanugula ने बताया क‍ि डॉक्टर की निगरानी में 12 से 16 घंटे इंटरमिटेंट फास्टिंग करने की कोशिश करें, जैसे सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खाना। इससे इंसुलिन की कार्यक्षमता बेहतर होती है और फैट मेटाबॉलिज्म बढ़ता है, लेक‍िन पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

2. हर्बल सपोर्ट- Herbal Support

Dr. Sri Karan Uddesh Tanugula ने बताया क‍ि करेला, मेथी के दाने या दालचीनी (आधा चम्मच रोज चाय में) का सेवन किया जा सकता है। ये इंसुलिन के स्राव को बेहतर करने और खाने के बाद शुगर स्पाइक को कम करने में मदद कर सकते हैं। इन्‍हें हमेशा एक्सपर्ट की सलाह के साथ ही लें।

3. समय पर भोजन करें- Meal Timing Consistency

Nutritionist Neha Sinha ने बताया क‍ि शुगर लेवल को बरकरार रखना या स्‍थ‍िर रखना मुश्‍क‍िल काम नहीं है। समय पर खाने से भी बॉडी को इंसुल‍िन र‍िलीज करने में मदद म‍िलती है। समय पर खाएंगे, तो शुगर स्‍पाइक नहीं होंगे और खाने की क्रेव‍िंग कम होगी।

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4. डाइटरी फाइबर का सेवन करें- Eat Adequate Dietary Fiber

ब्‍लड शुगर स्‍थ‍िर रखने के ल‍िए डाइटरी फाइबर का सेवन करें। फाइबर से शुगर एब्‍जार्ब होने की प्रक्र‍िया धीमी हो जाती है। इससे डाइजेशन बेहतर होता है, पेट लंबे समय पर भरा रहता है और ब्‍लड शुगर लेवल मेनटेन रहता है।

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5. प्रोटीन इंटेक बढ़ाएं- Increase Protein Intake

प्रोटीन का सेवन करने से खाने के बाद शुगर स्‍पाइक्‍स की समस्‍या कम होती है। Nutritionist Neha Sinha ने बताया क‍ि प्रोटीन से मसल्‍स हेल्‍थ को सपोर्ट म‍िलता है और ब्‍लड शुगर को बैलेंस रखने में मदद मि‍लती है।

6. पोर्शन साइज कंट्रोल करें- Control Portion Size

ज्‍यादा मात्रा में खाने से ग्‍लूकोज का लेवल बढ़ सकता है। सीम‍ित पोर्शन में खाने से ब्‍लड शुगर लेवल कंट्रोल होता है और इंसुल‍िन स्‍ट्रेस कम होता है।

7. लो ग्‍लाइसेम‍िक चीजों का सेवन करें- Choose Low Glycemic Foods

ब्‍लड शुगर लेवल को नेचुरल तरीके से कंट्रोल करना है, तो लो ग्‍लाइसेम‍िक इंडेक्‍स फूड्स को डाइट में शाम‍िल करें। इससे लो-एनर्जी की समस्‍या नहीं होती और शुगर स्‍पाइक से बचाव होता है।

इन ट‍िप्‍स से सुधारें शुगर लेवल- Tips To Control Sugar Level

  • रूटीन में फि‍ज‍िकल एक्‍ट‍िव‍िटी को प्राथम‍िकता दें।
  • स्‍ट्रेस कंट्रोल करें।
  • द‍िनभर में कम से कम 7 से 8 घंटे सोएं।
  • हाइड्रेट रहें, सर्दि‍यों में गर्म पेय का सेवन करें।
  • माइंडफुल ईट‍िंग हैब‍िट्स अपनाएं यानी ओवरईट‍िंग से बचें और पेट भरकर खाएं।

न‍िष्‍कर्ष:

ब्‍लड शुगर लेवल को नेचुरल तरीके से कंट्रोल करने के ल‍िए समय पर भोजन करें, डाइटरी फाइबर का सेवन करें, प्रोटीन इंटेक बढ़ाएं, पोर्शन साइज कंट्रोल करें और लो जीआई चीजों का सेवन करें।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Dec 18, 2025 17:46 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
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