Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

लो-ग्लाइसेमिक डाइट हो रही है पॉपुलर, डायटिशियन से जानें क्या यह सभी के लिए सुरक्षित है?

लो-ग्लाइसेमिक डाइट से शुगर लेवल कंट्रोल होता है, बैड कोलेस्‍ट्रॉल का स्‍तर घटता है, हार्ट हेल्‍थ बेहतर होती है और वजन घटाने में मदद म‍िलती है इसल‍िए ये डाइट बहुत तेजी से पॉपुलर हो रही है। जानें क्‍या यह सभी के ल‍िए सेफ है?

आजकल लो-ग्‍लाइसेम‍िक डाइट तेजी से पॉपुलर हो रही है। इससे वजन कम होता है और शुगर लेवल कंट्रोल होता है, लेक‍िन पहले जानते हैं जीआई क्‍या होता है? जीआई या ग्‍लाइसेम‍िक इंडेक्‍स एक स्‍केल है ज‍िससे देखा जाता है क‍ि क‍िस खाद्य पदार्थ में कार्ब्स की क‍ितनी मात्रा मौजूद है और कार्ब्स शरीर में कैसे र‍िएक्‍ट कर रहे हैं? यह स्‍केल 0 से 100 के बीच होता है। अगर कोई फूड लो जीआई है, तो उसका जीआई 1 से 55 के बीच होगा, अगर क‍िसी फूड का हाई जीआई है, तो वैल्‍यू 70 या उससे ज्‍यादा होगी। अगर क‍िसी चीज का ग्लाइसेमिक इंडेक्‍स ज्‍यादा होगा, तो उसे खाकर शुगर लेवल तेजी से बढ़ेगा। लो ग्‍लाइसेम‍िक कार्ब्स आसानी से ब्रेक होते हैं और जल्‍दी ग्‍लूकोज र‍िलीज करते हैं। आजकल लोग तेजी से लो जीआई डाइट की तरह रुख कर रहे हैं। जानते हैं आख‍िर लो जीआई डाइट क्‍या है और क्‍या यह सभी के ल‍िए सुरक्ष‍ित है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।

लो-ग्लाइसेमिक डाइट क्‍या होती है?

लो-ग्लाइसेमिक डाइट में केवल ऐसी चीजों का सेवन क‍िया जाता है ज‍िससे ब्‍लड शुगर लेवल तेजी से न बढ़े। लो जीआई फूड्स शरीर में धीरे-धीरे एब्‍जॉर्ब होते हैं और पेट को लंबे समय तक भरा रखते हैं और आप जल्‍दी-जल्‍दी या बार-बार खाने की आदत से बच सकते हैं।

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क्‍यों पॉपुलर हो रही है लो-ग्लाइसेमिक डाइट?

  • लो-ग्लाइसेमिक डाइट लेने से शुगर लेवल कंट्रोल करने में मदद मि‍लती है।
  • इसका सेवन करने से टाइप 2 डायब‍िटीज का खतरा कम होता है।
  • लो जीआई डाइट लेने से मोटापा कम करने में भी मदद म‍िल सकती है।
  • लो-ग्लाइसेमिक डाइट की मदद से कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को भी कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है।

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क्‍या लो-ग्लाइसेमिक डाइट सभी के ल‍िए सुरक्ष‍ित है?

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  • नहीं लो-ग्लाइसेमिक डाइट सभी के ल‍िए सुरक्ष‍ित नहीं है। लो जीआई डाइट में सभी पोषक तत्‍व मौजूद नहीं होते हैं। हेल्‍दी रहने के ल‍िए डाइट में फैट, प्रोटीन, फाइबर र‍िच फूड्स को भी शाम‍िल करना जरूरी है।
  • लो ग्‍लाइसेम‍िक डाइट में कैलोरी काउंट नहीं की जाती हैं। लो जीआई डाइट में हाई जीआई फूड्स को लो जीआई फूड्स से र‍िप्‍लेस कर द‍िया जाता है।
  • लो जीआई डाइट हर क‍िसी के ल‍िए अच्‍छी नहीं होती क्‍योंक‍ि कुछ ऐसे भी फूड्स है ज‍िनका जीआई कम होता है, लेक‍िन सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्‍यादा होने के कारण पचने में ज्‍यादा समय लगता है जैसे चॉकलेट, च‍िप्‍स, आइसक्रीम वगैरह।
  • साल 2023 में Nutrients नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, लंबे समय तक लो जीआई डाइट के फायदे बने रहते हैं या नहीं, इस पर ज्‍यादा जानकारी नहीं म‍िली है। साथ ही हार्मोन्‍स और सूजन पर भी लो जीआई डाइट का सीमि‍त असर ही देखा गया है।

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क‍िन लोगों को नहीं लेनी चाह‍िए लो-ग्लाइसेमिक डाइट?

लो-ग्लाइसेमिक डाइट हर क‍िसी के ल‍िए नहीं है, इसे संतुल‍ित तरीके से नहीं फॉलो क‍िया जाए, तो यह फायदे देने के बजाय शरीर के ल‍िए हान‍िकारक हो सकती है। हर क‍िसी को इस डाइट को एक्‍सपर्ट की सलाह के बगैर नहीं लेना चाह‍िए जैसे-

  • टाइप 1 डायब‍िटीज के लोग अक्‍सर इंसुल‍िन लेते हैं और उनमें शुगर लेवल जल्‍दी बदल सकता है इसल‍िए डॉक्‍टर की सला‍ह के बगैर डाइट न लें।
  • अगर कोई डायब‍िटीज की दवा या इंसुल‍िन ले रहा है, तो डॉक्‍टर की सलाह के बगैर लो जीआई डाइट नहीं लेना चाह‍िए।
  • जि‍न लोगों का वजन पहले से कम है या ईट‍िंग ड‍िसऑर्डर का श‍िकार हैं, उन्‍हें भी लो जीआई डाइट लेने से बचना चाह‍िए।
  • गंभीर बीमारी के मरीज, गर्भवती मह‍िलाएं, स्‍तनपान कराने वाली मांएं, बच्‍चे और बुजुर्गों को भी लो जीआई डाइट का सेवन करने से बचना चाह‍िए।

न‍िष्‍कर्ष:

लो-ग्लाइसेमिक डाइट सभी के ल‍िए सुरक्ष‍ित नहीं होती है। टाइप 1 डायब‍िटीज, शुगर की दवा या इंसुल‍िन लेते हैं, तो डॉक्‍टर की सलाह पर लो जीआई डाइट लें। वजन पहने से कम है, ईट‍िंग ड‍िसऑर्डर है या गंभीर बीमारी है, तो भी डॉक्‍टर की सलाह पर ही ये डाइट लेना चाह‍िए। लाे-ग्लाइसेमिक डाइट का उद्देश्‍य कार्ब्स को छोड़ना नहीं बल्‍क‍ि ऐसे कार्ब्स को चुनना है जो धीरे-धीरे शुगर लेवल को बढ़ाएं। लो जीआई फूड्स का सेवन सुरक्ष‍ित होता है, लेक‍िन लो-जीआई डाइट में प्रोटीन, फैट्स की कमी हो सकती है इसल‍िए यह सभी के ल‍िए सुरक्ष‍ित नहीं होती है।

FAQ

  • लो जीआई फूड्स कौन से हैं?

    होल ग्रेन्‍स, चना, ब्राउन राइस, कोकोनट म‍िल्‍क, बादाम का दूध, मल्‍टीग्रेन ब्रेड, टमाटर, सेब वगैरह लो जीआई फूड्स कहलाते हैं। 
  • हाई जीआई फूड्स कौन से हैं?

    आलू, इंस्‍टेंट नूडल्‍स, फ्रूट जूस, व्‍हाइट ब्रेड, कॉर्न फ्लेक्‍स वगैरह हाई जीआई फूड्स हैं। इनका ज्‍यादा सेवन करने से शुगर लेवल बढ़ सकता है।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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  • Current Version

    Jul 10, 2026 19:11 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jul 10, 2026 19:11 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Smita Singh

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