Fri Sep 11, 2026 | 06:56 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

वेट लॉस के दौरान आलू खाना चाहिए या नहीं? डायटिशियन से जानें क्या यह वजन बढ़ाता है

आलू में कार्ब्स की भरपूर मात्रा होती है इसल‍िए अक्‍सर लोगों के मन में यह सवाल आता है वेट लॉस डाइट में इसे शाम‍िल करें या नहीं? वहीं आलू खाकर एनर्जी भी भरपूर म‍िलती है इसल‍िए लोग कंफ्यूज हो जाते हैं। जानते हैं वेट लॉस जर्नी में आलू दाेस्‍त बनता है या दुश्‍मन?

हम सबका पसंदीदा आलू, स‍िर्फ एक सब्‍जी नहीं है बल्‍क‍ि पर‍िवार का अहम सदस्‍य है। जब कुछ समझ नहीं आता, तो मम्‍मी आलू बना लेती हैं, जब मेहमान अचानक आ जाएं, तो आलू की सब्‍जी झटपट बन जाती है, ट‍िफि‍न में मम्‍मी आलू की सब्‍जी ही द‍ेती थीं, और अगर बार‍िश हो जाए, तो आलू के कटलेट को कौन म‍िस करना चाहेगा? आलू इंड‍ियन क‍िचन की खास सब्‍जी है ज‍िससे कई तरह की ड‍िशेज बनाई जाती हैं और हम लोग आलू बेहद शौक से खाते हैं, लेक‍िन जब वेट लॉस करने की बात आती है, तो लोग आलू से दूर भागते हैं और यह तर्क देते हैं क‍ि इससे वजन बढ़ता है। क्‍या वाकई आलू खाने से आप मोटे हो सकते हैं? क्‍या इसे वेट लॉस जर्नी का ह‍िस्‍सा नहीं बनना चाह‍िए? ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब जानने के ल‍िए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।

क्‍या आलू को वेट लॉस जर्नी का ह‍िस्‍सा बनाना सही है?

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Dietitian Smita Singh ने बताया क‍ि हां आलू को वेट लॉस जर्नी का ह‍िस्‍सा बना सकते हैं। आलू में कैलोरी कम होती है। इसमें व‍िटाम‍िन सी, बी6 के अलावा फाइबर होता है जो पेट जल्‍दी भरने में मदद करता है और वेट लॉस को सपोर्ट करता है। आलू खाते समय उसमें चीज, क्रीम या बाजार की सॉस म‍िलाने के बजाय ताजी सब्‍ज‍ियां और हर्ब्स का इस्‍तेमाल करें। साथ ही आलू को प्रोटीन र‍िच फूड्स के साथ खाएं। इस तरह आलू का सेवन करने से वजन भी नहीं बढ़ेगा और पेट भी भर जाएगा। Mayo Clinic के एक प्रकाश‍ित लेख के मुताब‍िक, आलू एक हीराे सब्‍जी है, लेक‍िन इसे पकाने का तरीका आलू को व‍िलेन बनाता है। आलू में कार्ब्स होता है ज‍िससे वजन और शुगर लेवल दोनों बढ़ सकते हैं, लेक‍िन इसे अनसैचुरेटेड फैट्स, फाइबर और प्रोटीन के साथ खाएंगे, तो शुगर स्‍पाइक से बच सकेंगे क्‍योंक‍ि ग्‍लूकोज स्‍थ‍िर गत‍ि से र‍िलीज होगा।

आलू को पकाने के तरीके से तय होती है कैलोरी

100 ग्राम आलू में करीब 77 कैलोरी होती हैं और जब आलू को उबाल ल‍िया जाता है, तो कैलोरी इंटेक करीब 110 से 120 हो जाता है। हालांक‍ि आलू खाकर शरीर को क‍ितनी कैलोरी म‍िलेंगे, यह उसे पकाने के तरीके पर न‍िर्भर करता है। अगर आप आलू को फ्राई करने के बजाय उबालकर खाएंगे, स्‍टीम या बेक करेंगे, तो कम कैलोरी काउंट होंगी। साथ ही कम तेल का इस्‍तेमाल और आलू को हेल्‍दी सब्‍ज‍ियों और हर्ब्स के साथ म‍िक्‍स करके खाएंगे, तो यह वेट लॉस में बाधा नहीं डालेगा। उदाहरण के ल‍िए अगर आलू को बहुत सारी हरी सब्‍ज‍ियां, दही, हर्ब्स के साथ म‍िक्‍स करके खाएंगे, तो स्‍वाद बढ़ेगा और शरीर ज्‍यादा कैलोरी कंज्‍यूम नहीं करेगा, बजाय इसके क‍ि आप केवल आलू खाएं ज‍िसमें कैलोरी घटाने का चांस ही नहीं होता।

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आलू खाने के गलत तरीके को फॉलो न करें

  • आलू को सब्‍जी समझना बंद करें। इसे हरी सब्‍ज‍ियां जैसे भ‍िंडी, पालक, शि‍मला म‍िर्च और अन्‍य सब्‍ज‍ियों के साथ म‍िक्‍स करके खाएं। हमारे क‍िचन में अक्‍सर आलू की सब्‍जी बनती है, जो क‍ि अनहेल्‍दी है। केवल आलू खाने से वजन बढ़ सकता है। इसल‍िए इसे सब्‍जी समझना बंद करें और इसे अन्‍य सब्‍ज‍ियों के साथ पेयर करें।
  • आलू के च‍िप्‍स, पकौड़े या क‍िसी भी तरह से आलू को फ्राई करके न खाएं। आलू को बेक कर सकते हैं।
  • आलू को रोटी या चावल के साथ खाने से बचें क्‍योंक‍ि रोटी और चावल में पहले से ही कार्ब्स मौजूद होता है। अक्‍सर लोग पूरी और आलू, रोटी और आलू या आलू के साथ दाल-चावल खाते हैं। इससे वजन तेजी से बढ़ता है।

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ठंडे आलू में रेजि‍स्‍टेंस स्‍टार्च ज्‍यादा होता है

आलू में रेज‍िस्‍टेंस स्‍टार्च होता है जो एक प्रकार का कार्ब्स है और केला, आलू, ओट्स, चावल वगैरह में पाया जाता है। एक्‍सपर्ट्स मानते हैं क‍ि डायब‍िटीज में आलू या चावल को ठंडा करके खाने से उसमें रेजि‍स्‍टेंस स्‍टार्च की मात्रा बढ़ जाती है ज‍िससे शुगर स्‍पाइक नहीं होती है। साल 2019 में Journal Of The Academy Of Nutrition And Dietetics नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, पास्‍ता, आलू, क ला, ब्रेड, चावल वगैरह में रेज‍िस्‍टेंस स्‍टार्च होता है और इसे पकाकर ठंडा करने पर रेज‍िस्‍टेंस स्‍टार्च की मात्रा बढ़ जाती है।

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वेट लॉस डाइट में रोजाना आलू खाना चाह‍िए?

वेट लॉस डाइट में रोज आलू को शाम‍िल नहीं करना चाह‍िए। आलू में प्रोटीन, हेल्‍दी फैट्स और अन्‍य जरूरी व‍िटाम‍िन्‍स और म‍िनरल्‍स नहीं होते हैं इसल‍िए ज्‍यादा आलू खाने से आपको सुस्‍ती महसूस हो सकती है। आलू को वेट लॉस डाइट में शाम‍िल करें, लेक‍िन मात्रा का ख्‍याल रखें और प्रोटीन, अन्‍य फाइबर र‍िच फूड्स वगैरह को भी प्राथम‍िकता दें।

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क‍िन लोगों को आलू से परहेज करना चाह‍िए?

वैसे तो सभी आलू खा सकते हैं, लेक‍िन डायब‍िटीज में इसे सीमि‍त मात्रा में खाना चाह‍िए, जो लोग लो-कार्ब डाइट फॉलो कर रहे हैं, वे भी इससे परहेज कर सकते हैं। आलू से एलर्जी है या गैस, ब्‍लोट‍िंग जैसी समस्‍या है, तो भी आलू न खाएं। एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट फॉलो कर रहे हैं या कोई हेल्‍थ कंडीशन है, तो डॉक्‍टर की सलाह पर ही आलू का सेवन करें।

न‍िष्‍कर्ष:

वेट लॉस जर्नी में आलू का सेवन कर सकते हैं, लेक‍िन आलू की मात्रा और उसे पकाने के तरीके पर गौर करना जरूरी है। आलू को प्रोटीन और अन्‍य फाइबर फूड्स, हरी सब्‍ज‍ियों के साथ खाना चाह‍िए। केवल आलू आएंगे, तो वजन तेजी से बढ़ेगा। साथ ही आलू को चावल या रोटी के साथ नहीं खाना चाह‍िए। केवल आलू से बनी सब्‍जी से परहेज करें, इसे अन्‍य हरी सब्‍ज‍ियों के साथ म‍िक्‍स करके खाएं।

FAQ

  • डायब‍िटीज में आलू खा सकते हैं?

    डायब‍िटीज में आलू खा सकते हैं, लेक‍िन आलू का ग्‍लाइसेमि‍क इंडेक्‍स 70 से 100 के बीच में होता है, इसल‍िए डायब‍िट‍िक मरीजों को सीमि‍त मात्रा में ही आलू का सेवन करना चाह‍िए।
  • थायराइड में आलू खाना सही है?

    थायराइड में आलू खा सकते हैं, लेक‍िन अगर हाइपोथायरायडिज्म के साथ मोटापे या डायबिटीज से पीड़ि‍त हैं, तो आलू के सेवन से पहले डॉक्‍टर से सलाह लें।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 09, 2026 15:16 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jul 09, 2026 15:16 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Smita Singh

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