अक्सर लोगों को यह कंफ्यूजन रहता है कि वेट लॉस के लिए क्या चुनें? इंटरमिटेंट फास्टिंग या कैलोरी डेफिसिट?
ये दोनों ही तरीके वेट लॉस में मदद करते हैं। इंटरमिटेंट फास्टिंग में यह तय किया जाता है कि कितने घंटे खाना है और कितने घंटे फास्ट रखना है? इसके कई अलग-अलग प्रकार होते हैं जैसे एक है 16:8 तरीका, जिसमें 16 घंटे फास्ट और 8 घंटे खाया जाता है या फिर 5:2 तरीका, जिसमें हफ्ते में 5 दिन सामान्य डाइट और 2 दिन लो कैलोरी डाइट लेना होता है। वहीं वेट लॉस का दूसरा तरीका है कैलेरी डेफिसिट जिसमें आप दिनभर की टोटल ली गई कैलोरी से ज्यादा कैलोरी बर्न करने पर फोकस करते हैं। उदाहरण के लिए अगर आपने 1500 कैलोरी वाली डाइट दिनभर में ली है और एक्सरसाइज या अन्य फिजिकल एक्टिविटी के जरिए 2000 कैलोरी बर्न की है, तो आपके शरीर में 500 कैलोरी का डेफिसिट बनेगा। वेट लॉस करने वाले लोग इन दोनों पाॅपुलर उपायों को अपनाते हैं, लेकिन इनमें से ज्यादा बेहतर कौन सा तरीका है? किस तरीके से जल्दी वजन घटता है? ऐसे सवालों के जवाब जानने के लिए हमने Swetha. A, Deputy Chief Dietitian At Yashoda Hospitals, Secunderabad से बात की।
इंटरमिटेंट फास्टिंग vs कैलोरी डेफिसिट
| इंटरमिटेंट फास्टिंग | कैलोरी डेफिसिट |
| समय फिक्स करके खाने का तरीका | कैलोरी इंटेक और कैलोरी बर्न करने के बीच अंतर रखना |
| इसका फोकस है कब खाना है? | इसका फोकस है कितनी कैलोरी बर्न करना है और कितना इंटेक रखना है? |
| कुछ घंटे फास्ट किया जाता है | कम कैलोरी का सेवन किया जाता है |
| उदाहरण- 16 घंटे फास्टिंग और 8 घंटे खाना | उदाहरण- 1500 कैलोरी लेना और 2000 कैलोरी बर्न करना |
| फास्टिंग का एक तरीका जिससे वजन घटता है। | वजन घटाने के लिए एक जरूरी स्थिति। |
- इंटरमिटेंट फास्टिंग यानी खाने का समय तय करना।
- कैलोरी डेफिसिट यानी शरीर द्वारा बर्न की गई कैलोरी से कम कैलोरी लेना।
- इंटरमिटेंट फास्टिंग वेट लॉस का एक तरीका है, जबकि कैलोरी डेफिसिट वेट लॉस के लिए एक जरूरी स्थिति है।
- इंटरमिटेंट फास्टिंग के दौरान भी तभी वेट लॉस होगा, जब कुल कैलोरी सेवन में कुछ कमी आए, भी कैलोरी डेफिसिट बनेगा।
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वेट लॉस का मूल आधार है कैलोरी डेफिसिट
Deputy Chief Dietitian Swetha. A ने कहा ''इंटरमिटेंट फास्टिंग और कैलोरी डेफिसिट दोनों ही वेट लॉस में मदद करते हैं, लेकिन वेट लॉस के लिए लंबे समय तक क्या बेहतर है इस पर गौर किया जाता है, व्यक्ति की जीवनशैली देखी जाती है और सबसे जरूरी स्वास्थ्य स्थिति को भी ध्यान में रखा जाता है। ये जरूरी कारक हैं। कुछ शोध में बताया गया है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग से ज्यादा वजन घटाने में मदद मिलती है, लेकिन वेट लॉस का मूल आधार कैलोरी डेफिसिट ही है।'' साल 2020 में मेडिकल जर्नल Journal Of Obesity & Metabolic Syndrome में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, वेट लॉस के लिए कैलोरी डेफिसिट खास कारक है। इससे मेटाबोलिक हेल्थ को भी सुधारने में मदद मिलती है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग से वजन तेजी से घटता है

साल 2025 में मेडिकल जर्नल Annals Of Internal Medicine में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, एक साल तक जिस ग्रुप ने 4:3 इंटरमिटेंट फास्टिंग (हफ्ते में 3 दिन फास्टिंग) को अपनाया उनका वजन करीब 7.6% तक वजन कम हुआ, जबकि जिन लोगों ने सीमित कैलोरी का सेवन किया उनके वजन में 5% फर्क देखने को मिला। स्टडी में यह भी बताया गया कि इंटरमिटेंट फास्टिंग करने से बीपी, टोटल कोलेस्ट्रॉल, बैड कोलेस्ट्रॉल, फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल में भी सुधार देखा गया।
इंटरमिटेंट फास्टिंग और कैलोरी डेफिसिट के परिणाम में खास अंतर नहीं दिखा
साल 2022 में मेडिकल जर्नल New England Journal Of Medicine में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, एक साल तक 139 लोगों को दो ग्रुप में बांटा गया। एक ग्रुप को टाइम रेस्ट्रिक्शन यानी टाइम की पाबंदी से खाना दिया और दूसरे ग्रुप को कैलोरी रेस्ट्रिक्शन यानी कैलोरी में पाबंदी के साथ भोजन दिया गया। टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ग्रुप का वजन एक साल बाद 8.0 kg तक कम हुआ और कैलोरी-रिस्ट्रिक्टेड ग्रुप का वजन 6.3 kg तक कम हुआ। यह अंतर इतना ज्यादा नहीं है इसलिए टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग (इंटरमिटेंट फास्टिंग) वेट लॉस के लिए कैलोरी डेफिसिट जितने ही फायदे देती है।
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कंसिस्टेंसी बनाए रखना जरूरी है
Swetha. A ने बताया कि लंबे समय तक वेट लॉस के रिजल्ट देखने के लिए कंसिस्टेंसी बनाए रखना जरूरी है। रोजाना हेल्दी डाइट लेने और एक्सरसाइज करने से वजन घटता है और इसका असर बना रहता है। इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करने जा रहे हैं, तो पहले डायबिटीज, एसिडिटी, प्रेग्नेंसी और अन्य हेल्थ कंडीशन के लिए डॉक्टर से सलाह लें।
डॉक्टर से संपर्क कब करें?
- चक्कर, अधिक कमजोरी, बेहोशी या लगातार थकान महसूस हो।
- अगर ईटिंग डिसऑर्डर की हिस्ट्री रही हो।
- प्रेग्नेंसी या स्तनपान करा रही हैं।
- अगर आप नियमित दवाएं ले रहे हैं।
- डायबिटीज या थायराइड की बीमारी हो।
- सर्जरी या गंभीर बीमारी की स्थिति हो।
निष्कर्ष:
इंटरमिटेंट फास्टिंग वेट लॉस का एक असरदार तरीका है। इससे कम समय में अच्छे परिणाम देखने को मिलते हैं, लेकिन यह एक तरह की डाइट है जो कैलोरी डेफिसिट के सिद्धांत पर ही काम करती है यानी वजन घटाने के लिए बर्न की गई कैलोरी से कम कैलोरी इंटेक रखना जरूरी है तभी वजन घटेगा। साथ ही आप जो भी तरीका अपनाएं उसके साथ कंसिस्टेंट रहें, हेल्दी डाइट और एक्सरसाइज पर फोकस करें, तो वेट लॉस जर्नी आसान हो जाएगी।
FAQ
क्या ज्यादा बड़ा कैलोरी डेफिसिट सुरक्षित है?
नहीं। कैलोरी डेफिसिट ज्यादा बड़ा होगा, तो वेट लॉस हो सकता है, लेकिन इससे अधिक कमजोरी, पोषक तत्वों की कमी का खतरा बढ़ सकता है इसलिए यह उतना सुरक्षित नहीं माना जाता है।क्या कैलोरी डेफिसिट से बेली फैट घटता है?
कैलोरी डेफिसिट से पूरे शरीर का फैट घटता है, यह किसी खास एरिया जैसे बेली पर फोकस नहीं करता इसलिए जब वजन घटेगा, तो पेट की चर्बी भी कम हो सकती है।
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Jul 28, 2026 15:41 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dt Swetha A