Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr Akshay Chugh

इंटरमिटेंट फास्टिंग से फैट बर्न होता है या सिर्फ कैलोरी कम होती है? डॉक्टर से जानें सच

इंटरमिटेंट फास्टिंग वजन कम करने के लिए कैलोरी कम करने के साथ-साथ शरीर के हार्मोन्स में बदलाव करके फैट बर्न करने की प्रक्रिया को आसान बनाती है। यह रात की क्रेविंग कम करने, इंसुलिन कंट्रोल करने और ऑटोफैगी को बढ़ावा देता है। 

इंटरमिटेंट फास्टिंग का चलन आजकल वजन कम करने के लिए लोगों में काफी मशहूर हो गई है। कई लोग वजन कम करने और हेल्दी रहने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग का सहारा लेते हैं। इंटरमिटेंट फास्टिंग के दौरान 16 घंटे फास्ट किया जाता है, जिसमें सिर्फ पानी लिया जाता है। जबकि बाकr 8 घंटे खाने के लिए रखते हैं। खाने के विंडो में भी हेल्दी और संतुलित मात्रा में खाना जरूरी है। ऐसे में लोग अक्सर यह जानना चाहते हैं कि क्या यह तरीका शरीर के फैट को बर्न करता है या फिर यह सिर्फ दिनभर खाई जाने वाली कैलोरी की मात्रा को कम करता है। आइए इस बारे में Dr. Akshay Chugh, Internal Medicine & Metabolic Disorders, Metro Hospital and Heart Institute, Noida से जानते हैं।

क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग सिर्फ कैलोरी कम करने का तरीका है?

Dr. Akshay Chugh कहते हैं कि सबसे पहले हमें वजन कम करने का सबसे जरूरी नियम समझना जरूरी है, जिसे एनर्जी बैलेंस कहा जाता है। अगर आप शरीर की जरूरत से कम कैलोरी खाएंगे तो आपका वजन कम होगा। इसके बाद फर्क नहीं पड़ता है कि आप दिन में 6 बार थोड़ा-थोड़ा खाएं या 8 घंटे की विंडो में 2 बार खाएं। इंटरमिटेंट फास्टिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें खाने का समय सीमित हो जाता है। जैसे 16/8 नियम में 16 घंटे व्यक्ति भूखा रहता है और 8 घंटे ही विंडो में खाना खाते हैं। इससे लोग अपने आप कम खाना खाते हैं। इससे-

  • रात में बार-बार कुछ खाने की क्रेविंग या आदत कम हो जाती है।
  • बिना जरूरत के स्नैक्स और चाय या कॉफी से मिलने वाली कैलोरी कम हो जाती है।

साल 2020 में The College of Family Physicians of Canada में प्रकाशित स्टडी में बताया गया है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग, मोटापे को कम करने या वजन को मैनेज करने का एक प्रभावी और सुरक्षित तरीका है। रिसर्च के अनुसार, इंटरमिटेंट फास्टिंग करने से वजन में 0.8% से 13.0% तक की कमी आती है, जिसमें ज्यादा फैट की कमी देखी जाती है।

इंटरमिटेंट फास्टिंग का हार्मोन पर असर

Dr. Akshay Chugh बताते हैं कि वजन कम होने का मुख्य कारण कैलोरी डेफेसिट है, लेकिन इंटरमिटेंट फास्टिंग शरीर के हार्मोन्स में ऐसे बदलाव करती है, जो फैट बर्न करना आसान बना देते हैं। इंसुलिन एक स्टोरेज हार्मोन है। जब हम खाना खाते हैं तो इंसुलिन बढ़ता है और शरीर की एनर्जी जमा करने का संकेत देता है। जब तक इंसुलिन ज्यादा रहता है, शरीर जमा हुई चर्बी को आसानी से नहीं बर्न करता है। जब आप 12 से 16 घंटे तक फास्टिंग करते हैं तो इंसुलिन का लेवल काफी कम हो जाता है। इसके बाद शरीर में जमा फैट को एनर्जी के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर देता है।

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इंटरमिटेंट फास्टिंग के दौरान ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन बढ़ जाता है। इस हार्मोन के बढ़ने से शरीर की चर्बी को तोड़ने में मदद मिलती है। फैट कम होने के दौरान यह मांसपेशियों को बचाकर रखता है, जिससे मेटाबॉलिज्म बहुत ज्यादा धीमा नहीं होता है।

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इसके साथ ही लंबे समय तक फास्टिंग करने से शरीर में नॉरपेनेफ्रिन नाम का हार्मोन थोड़ा बढ़ जाता है। यह फैट सेल्स को संकेत देता है कि वे अपने अंदर जमा फैटी एसिड बाहर निकालें ताकि शरीर उन्हें एनर्जी के रूप में इस्तेमाल कर सके। इसी कारण फास्टिंग के दौरान मेटाबॉलिज्म बहुत ज्यादा धीमा होने के स्थान पर थोड़ा तेज भी हो सकता है।

ऑटोफैगी और इंटरमिटेंट फास्टिंग

Dr. Akshay Chugh ने बताया कि इंटरमिटेंट फास्टिंग का फायदा सिर्फ वजन कम करना नहीं है, बल्कि यह एक फायदेमंद ऑटोफैगी है। जब 14 से 16 घंटे या उससे ज्यादा समय तक उपवास किया जाता है, तो शरीर के सेल्स पुरानी, खराब और डैमेज सेल्स को हटाकर उन्हें दोबारा इस्तेमाल करने लगती हैं। इसे आप शरीर की अंदरूनी सफाई या सर्विसिंग भी कह सकते हैं। नॉर्मल कैलोरी कम करने वाली डाइट में यह प्रक्रिया इतनी जल्दी शुरू नहीं होती है।

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किन लोगों के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग अच्छी हो सकती है?

  • जिन्हें रात में ज्यादा खाने या बार-बार स्नैकिंग की आदत है।
  • जिन लोगों को बार-बार कैलोरी गिनना पसंद नहीं है।
  • जिन्हें इंसुलिन रेजिस्टेंस या शुरुआती फैटी लिवर की समस्या है।

निष्कर्ष

Dr. Akshay Chugh का कहना है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग का असर कैलोरी कम करके वजन घटाना है, लेकिन इसके साथ-साथ यह शरीर के हार्मोन्स में भी ऐसे बदलाव करती है, जिससे फैट को बर्न करना शरीर के लिए आसान हो जाता है। यानी यह कैलोरी कंट्रोल करने का एक बेहतरीन और हार्मोनल तरीका है। इसलिए, अगर आप इंटरमिटेंट फास्टिंग कर रहे हैं, लेकिन अपनी 8 घंटे की खाने की विंडो में पिज्जा, बर्गर, मिठाइयां और बहुत ज्यादा कैलोरी वाला खाना खा रहे हैं तो आपका वजन बिल्कुल भी कम नहीं होगा।
Image Credit: Freepik

FAQ

  • इंटरमिटेंट फास्टिंग कैसे शुरू करें?

    इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करने के लिए सबसे आसान तरीका 16/8 का नियम है, जिसमें आप 16 घंटे उपवास रखते हैं और 8 घंटे के तय समय में खाना खाते हैं। शुरुआत करने के लिए पहले 12 घंटे से इसकी शुरुआत करें, खुद को हाइड्रेटेड रखें और खाने के समय हेल्दी विकल्प चुनें।
  • इंटरमिटेंट फास्टिंग में क्या खाना चाहिए?

    इंटरमिटेंट फास्टिंग के दौरान आपको अपने खाने की विंडो में प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट से भरपूर पौष्टिक चीजों को शामिल करना चाहिए, जैसे दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां और साबुत अनाज।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Aug 06, 2026 14:25 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Akshay Chugh

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