Fri Sep 11, 2026 | 06:56 PM IST

Medically Reviewed by Dr Naveen Polavarapu , Gastroenterologist

पेट की सेहत सुधारने के लिए क्या खाएं और किन चीजों से बनाएं दूरी? जानें डॉक्‍टर की राय

पाचन तंत्र स्‍वस्‍थ रहता है, तो सेहत बेहतर होती है। न्‍यूट्र‍िएंट्स बेहतर ढंग से एब्‍जॉर्ब होते हैं और शरीर की इम्‍यून‍िटी बढ़ती है। इससे बीमारी और इंफेक्‍शन का खतरा दूर होता है। पाचन अच्‍छा रहेगा, तो आपकी कार्यक्षमता भी सुधरेगी। जानें बेहतर पाचन के ल‍िए क्‍या खाएं और क्‍या नहीं?

जब पाचन अच्‍छा नहीं होता है, तो पेट फूलना, कब्‍ज, एस‍िड र‍िफ्लक्‍स, दस्‍त जैसी समस्‍याएं बढ़ जाती हैं। आजकल लोग समय बचाने के चक्‍कर में बाजार का तला-भुना या इंस्‍टेंट फूड्स का सेवन करने लगते हैं। इससे पाचन खराब हो जाता है। अमरीकी चिकित्सा संस्थान Johns Hopkins Medicine के मुताब‍िक, गैस, कब्ज और दस्त जैसी पाचन संबंधी समस्याएं लाखों लोगों को प्रभावित करती हैं। अगर पश्चिमी देशों की बात करें, तो उनमें 15 प्रतिशत लोग इर्र‍िटेबल बाउल स‍िंड्रोम (IBS) से पीड़ित हो सकते हैं। पाचन समस्‍याओं से बचने के ल‍िए हेल्‍दी डाइट लेना जरूरी है। कई ऐसे फूड्स हैं जो डाइजेशन को सपोर्ट करते हैं। डॉक्‍टर से जानते हैं हेल्‍दी पाचन के ल‍िए क्‍या खाएं और क्‍या न खाएं? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Naveen Polavarapu, Senior Consultant Gastroenterologist, Liver Specialist & Advanced Therapeutic Endoscopist & Endosonologist At Yashoda Hospitals, Hitec City से बात की।

पेट की सेहत सुधारने के ल‍िए क्‍या खाएं?

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फाइबर र‍िच फूड्स

सेब, पपीता, संतरा, ओट्स, जौ, रागी वगैरह में फाइबर पाया जाता है। फाइबर र‍िच फूड्स से पाचन बेहतर होता है और वजन घटाने में मदद मि‍लती है। साल 2025 में Best Practice & Research Clinical Gastroenterology में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, फाइबर आंतों की गति, गट बैरियर और गट माइक्रोबायोटा को प्रभावित करता है। फाइबर कब्‍ज से बचाने में मदद करता है।

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होल ग्रेन्‍स

होल ग्रेन्‍स धीरे-धीरे पचते हैं और न्‍यूट्र‍िएंट्स के एब्‍जॉर्ब होने की प्रक्र‍िया को बेहतर बनाते हैं और पाचन पर दबाव नहीं बनाते। साल 2016 में Journal Of Chiropractic Medicine नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुता‍ब‍िक, होल ग्रेन्‍स में फाइबर, विटामिन, मिनरल्स और बायोएक्टिव कंपाउंड्स मौजूद होते हैं ज‍िससे गट हेल्‍थ को सपोर्ट म‍िलता है और बाउल मूवमेंट बेहतर होता है।

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प्रोबायोट‍िक्‍स

प्रोबायोट‍िक्‍स जैसे दही या योगर्ट डाइजेशन को सपोर्ट करते हैं और गुड गट बैक्‍टीर‍ि‍या को बढ़ावा देते हैं। Mayo Clinic के मुताब‍िक, प्रोबायोटिक्स जीवित सूक्ष्मजीव होते हैं, जिनमें मुख्य रूप से गुड बैक्टीरिया या यीस्ट शामिल होते हैं। ये शरीर में भोजन को पचाने में मदद कर सकते हैं और पाचन बीमारियों के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं।

लीन प्रोटीन

लीन प्रोटीन जैसे अंडे, मछली या दाल का सेवन करें। प्रोटीन का सेवन करने से पेट जल्‍दी भर जाता है और ओवरईट‍िंग से बचाव होता है ज‍िससे पाचन पर ज्‍यादा दबाव नहीं पड़ता। प्रोटीन, पाचन तंत्र की अंदरूनी परत की कोशिकाओं को र‍िपेयर करने का काम करती है। साल 2025 में The American Journal Of Clinical Nutrition में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, हर प्रोटीन डाइजेशन पर एक जैसा असर नहीं करता। प्रोटीन का स्रोत (दूध, अंडा या मांस) और भोजन को पकाने या प्रोसेस करने के तरीके पर न‍िर्भर करता है क‍ि वह क‍ितनी आसानी से पकेगा।

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पेट की सेहत सुधारने के ल‍िए क्‍या न खाएं?

प्रोसेस्‍ड फूड्स से परहेज करें

ऑयली, तली हुई, म‍िर्च-मसाले वाली चीजें, जंक फूड्स वगैरह के सेवन से बचें। इससे एस‍िड‍िटी और ब्‍लोटि‍ंग हो सकती है। प्रोसेस्‍ड फूड्स में फाइबर कम होता है ज‍िससे गट हेल्‍थ में गुड बैक्‍टीर‍िया का संतुल‍न ब‍िगड़ सकता है।

मीठी चीजों से बचें

मीठी चीजों का ज्‍यादा सेवन करने से आंतों में गुड और बैड बैक्‍टीर‍िया का संतुलन ब‍िगड़ सकता है ज‍िससे गट हेल्‍थ प्रभाव‍ित होती है। ज्‍यादा चीनी के सेवन से गैस, पेट फूलना और अपच जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। मीठी चीजों का ज्‍यादा सेवन करने से वजन बढ़ सकता है ज‍िससे मेटाबोलिक समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

स्‍वस्‍थ पाचन के ल‍िए ये ड्र‍िंक्‍स न लें

कैफीन, कार्बोनेटेड ड्र‍िंक्‍स, अल्‍कोहल से परहेज करें वरना हार्टबर्न या लूज मोशन हो सकते हैं। कार्बोनेटेड ड्रिंक्स में मौजूद गैस पेट फूलने, डकार और पेट में भारीपन का कारण बन सकती हैं। ज्‍यादा कैफीन से ड‍िहाइड्रेशन हो सकता है और कुछ लोगों में कब्‍ज की समस्‍या बढ़ सकती है।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

पाचन को बेहतर बनाने के ल‍िए छोटे मील्‍स लें और पर्याप्‍त मात्रा में पानी का सेवन करें। अगर इसके बाद भी पाचन समस्‍याएं होती रहें, तो इसके साथ वेट लॉस, उल्‍टी, स्‍टूल में ब्‍लड जैसे लक्षण नजर आएं, तो डॉक्‍टर से सलाह लेना न भूलें।

न‍िष्‍कर्ष:

पाचन को बेहतर बनाने के ल‍िए फाइबर र‍िच फूड्स जैसे फल और सब्‍ज‍ियां खाएं, होल ग्रेन्‍स का सेवन करें, प्रोबायोट‍िक्‍स जैसे दही और योगर्ट खाएं। लीन प्रोटीन जैसे फ‍िश, अंडे या दाल का सेवन करें। ज्‍यादा प्रोसेस्‍ड, ऑयली, म‍िर्च-मसाले वाली चीजें, शुगरी फूड्स, कैफीन, अल्‍कोहल वगैरह का परहेज करें।

FAQ

  • पेट में इंफेक्शन के क्‍या कारण हैं?

    दूषित भोजन या पानी, हाइजीन की कमी, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क और कच्‍चा भोजन खाने से पेट में इंफेक्शन हो सकता है।
  • फूड पॉइजनिंग और पेट के इंफेक्शन में क्या अंतर है?

    फूड पॉइजनिंग अक्सर दूषित भोजन में मौजूद विषाक्‍त पदार्थों के कारण होता है, जबकि पेट का इंफेक्शन वायरस, बैक्टीरिया या परजीवी से हो सकता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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  • Current Version

    Jul 27, 2026 20:34 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Naveen Polavarapu

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