Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr KS Somasekhar Rao , Senior Consultant Gastroenterologist | Hepatologist | Advanced Therapeutic Endoscopist

अक्सर रहता है पेट खराब? डॉक्‍टर से जानें 10 कारण, जिनसे बिगड़ता है डाइजेशन

ज्‍यादा म‍िर्ची वाला भोजन, जरूरत से ज्‍यादा भोजन या अन्‍य कारणों से कभी-कभी पेट दर्द होना नॉर्मल है, लेक‍िन बार-बार होने वाले पेट दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाह‍िए क्‍योंक‍ि इसके पीछे कई तरह के इंफेक्‍शन और बीमार‍ियां भी हो सकती हैं। जानते हैं ऐसे 10 कारणों के बारे में।

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पेट दर्द भले ही सुनने में सामान्‍य समस्‍या लगे, लेक‍िन अगर यह लंबे समय तक बना रहे, तो यह गंभीर समस्‍या का लक्षण बन जाता है। क‍िसी भी बीमारी का इलाज कराने जाएं, तो सभी डॉक्‍टर एक कॉमन सवाल पूछते हैं क‍ि आपका पाचन कैसा है? अगर पाचन सही नहीं होगा, तो लगातार पेट दर्द, अपच, गैस और अन्‍य लक्षण नजर आ सकते हैं। Centre For Gastrointestinal Health के मुताब‍िक, जब पेट की मांसपेशियां सिकुड़ती हैं, तो पेट में हल्का या धीमा दर्द महसूस हो सकता है, जिसे पेट में ऐंठन (Stomach cramps) कहा जाता है। पेट दर्द की अवधि इसके कारण पर निर्भर करती है। यह कुछ घंटों से लेकर कई हफ्तों तक बना रह सकता है। आइए जानते हैं बार-बार पेट में दर्द होने के पीछे क्‍या कारण हो सकते हैं? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. K. S. Somasekhar Rao, Senior Consultant Gastroenterologist, Hepatologist & Advanced Therapeutic Endoscopist At Yashoda Hospitals, Hitec City से बात की।

Mayo Clinic के मुताब‍िक, क‍िसी भी खाने को पूरी तरह से पचने और वेस्‍ट मटेर‍ियल के फॉर्म में शरीर से बाहर न‍िकलने में 36 से 48 घंटों का समय लगता है, लेक‍िन हमारे बार-बार खाने की आदत और पाचन को आराम न देने के कारण पेट की समस्‍याएं कॉमन होती जा रही हैं। जानें लगातार पेट में दर्द के कारण-

पेट में लगातार होने वाले दर्द के कारण  
1. एक्यूट डिस्पेप्सिया 6. इरिटेबल बाउल सिंड्रोम
2. गॉलब्‍लैडर में स्‍टोन  7. पेप्‍ट‍िक अल्‍सर 
3. गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज 8. NSAIDs जैसी दवाओं का असर 
4. एंग्‍जायटी या स्‍ट्रेस  9. इंफेक्‍शन 
5. ओवरईट‍िंग  10. फूड इंटॉलरेंस

1. एक्यूट डिस्पेप्सिया

एक्यूट डिस्पेप्सिया यानी अपच की समस्‍या ज‍िसमें खाना पचाने में मुश्‍क‍िल होती है। इस स्‍थ‍िति‍ की वजह से पेट में एसिड की मात्रा बढ़ जाती है और पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है। यह समस्‍या बैक्‍टीर‍ियल, वायरल या पैरासाइट इंफेक्‍शन के कारण होती है। Mayo Clinic के मुताब‍िक, पेट दर्द के कुछ गंभीर कारण भी हो सकते हैं जैसे क्रोहन डिजीज, किडनी, ल‍िवर या पित्ताशय का कैंसर, बढ़ी हुई तिल्ली (Enlarged Spleen) वगैरह।

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2. इरिटेबल बाउल सिंड्रोम

Dr. K. S. Somasekhar Rao ने कहा ''आईबीएस (IBS) आंतों से जुड़ी पाचन समस्‍या है जो आंतों की कार्यप्रणाली को प्रभाव‍ित करती है। इसके कारण बार-बार पेट दर्द, ऐंठन और मल त्‍याग करने में मुश्‍क‍िल होती है और दस्‍त या कब्‍ज की समस्‍या हो सकती है। आईबीएस में कभी-कभी टेस्‍ट र‍िपोर्ट नॉर्मल होती है, लेक‍िन लगातार असहजता महसूस होती रहती है।''

 

3. पित्त की पथरी

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गॉल ब्‍लैडर में स्‍टोन (पित्त की पथरी) होने के कारण भी लगातार पेट में दर्द हो सकता है। पथरी के कारण पित्त नली ब्‍लॉक हो जाती है ज‍िससे सूजन होती है और दबाव बढ़ने के कारण पेट दर्द होता है। National Health Service, UK के मुताब‍िक, अगर गॉल ब्‍लैडर में स्‍टोन के कारण पेट दर्द हो रहा है, तो दर्द तेज हो सकता है, 30 म‍िनट से ज्‍यादा समय से लेकर कई घंटों तक बना रह सकता है, पेट के बीच वाले हिस्से में या दाईं ओर पसलियों के ठीक नीचे दर्द होना भी गॉल ब्‍लैडर में स्‍टोन का संकेत है।

4. पेप्‍ट‍िक अल्‍सर

पेप्‍ट‍िक अल्‍सर पेट या छोटी आंत की अंदरूनी परत पर बनने वाला एक घाव है। यह पेट के एस‍िड से प्रभाव‍ित होता है ज‍िसके कारण लगातार पेट दर्द महसूस हो सकता है।

5. गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज

जीईआरडी में पेट का एसिड बार-बार भोजन नली में आ जाता है। गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) होने पर लगातार दर्द और सीने में जलन की समस्‍या होती है।

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6. NSAIDs जैसी दवाओं का असर

Gastroenterologist Dr. K. S. Somasekhar Rao ने कहा, ''NSAIDs ऐसी दवाएं होती हैं जो दर्द, बुखार या सूजन को कम करती हैं। जो लोग NSAIDs या एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटीबैक्‍टीर‍ियल दवाओं का सेवन करते हैं उनमें पेट दर्द की समस्‍या हो सकती है। ये दवाएं अगर लंबे समय तक ली जाएं, तो गट फ्लोरा को खराब कर सकती हैं।''

क्‍या कहती है स्‍टडी?

साल 2023 में मेड‍िकल जर्नल Cureus में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, NSAIDs पेट की सुरक्षा करने वाले प्रोस्टाग्लैंडीन हार्मोन के प्राेडक्‍शन को घटा सकते हैं ज‍िससे पेट की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंच सकता है। स्‍टडी में इसके लंबे इस्‍तेमाल से जुड़े खतरे जैसे गैस्ट्राइटिस, पेप्टिक अल्सर और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग पर भी जोर द‍िया है।

7. एंग्‍जायटी या स्‍ट्रेस

शायद आपने नोट‍िस क‍िया हो क‍ि जब आप स्‍ट्रेस में रहते हैं, तो अक्‍सर पेट खराब हो जाता है। ऐसा इसल‍िए होता है क्‍योंक‍ि स्‍ट्रेस का असर गट हेल्‍थ पर पड़ता है ज‍िससे एस‍ि‍ड्स र‍िलीज होते हैं और पेट दर्द हो सकता है।

8. इंफेक्‍शन

पेट में लगातार होने वाले दर्द के पीछे इंफेक्‍शन हो सकता है। एच. पाइलोरी (H. pylori), स्टमक फ्लू (Stomach flu), पैरासाइट या ई. कोलाई (E. coli) बैक्टीरिया से होन वाले इंफेक्‍शन के कारण भी पेट दर्द हो सकता है। इंफेक्‍शन का पता लगाने के ल‍िए स्टूल टेस्ट, ब्‍लड टेस्‍ट और गंभीर मामलों में एंडोस्कोपी एवं बायोप्सी कराई जाती है।

9. ओवरईट‍िंग

जरूरत से ज्‍यादा खाने के कारण भी लगातार पेट दर्द हो सकता है। जो लोग अध‍िक मात्रा में खाते हैं, म‍िर्च-मसाले वाला भोजन करते हैं या ज‍िनके भोजन में फैट की मात्रा ज्‍यादा होती है, उन्‍हें अक्‍सर पेट दर्द हो सकता है क्‍योंक‍ि पेट ज्‍यादा फैट को जल्‍दी पचा नहीं पाता है और असहज महसूस होता है। ओवरईट‍िंग के कारण पेट में भारीपन भी महसूस हो सकता है।

10. फूड इंटॉलरेंस

जब शरीर कुछ खास तरह की चीजों को पचा नहीं पाता है, तो उन चीजों के प्रत‍ि हम सेंस‍िट‍िव हो जाते हैं और इस स्‍थि‍त‍ि को फूड इंटॉलरेंस कहा जाता है। बार-बार पेट दर्द के अलावा, गैस, पेट फूलना जैसे लक्षण भी महसूस हो सकते हैं।

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सेडेंटरी लाइफस्टाइल से बचकर पेट को रख सकते हैं स्‍वस्‍थ

Dr. K. S. Somasekhar Rao ने बताया क‍ि अगर आप सेडेंटरी यानी न‍िष्‍क्र‍िय लाइफस्‍टाइल फॉलो करते हैं, तो पेट दर्द से छुटकारा पाना थोड़ा मुश्‍क‍िल हो सकता है क्‍योंक‍ि हम जो भी खाते हैं उसका सीधा असर पाचन पर होता है। इससे बचने के ल‍िए समय पर मील्‍स लें, हेल्‍दी डाइट लें, स्‍ट्रेस मैनेज करें और क‍िसी दवा से लक्षण ट्र‍िगर हों, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • अगर लंबे समय तक पेट दर्द हो रहा हो और लगातार बना रहे, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें।
  • पेट में दर्द के साथ वेट लॉस, ब्‍लीड‍िंग, बुखार या पील‍िया के लक्षण नजर आने पर भी डॉक्‍टर से संपर्क करें।

न‍िष्‍कर्ष:

एक्‍यूट ड‍िस्‍पेप्‍स‍िया, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, गॉल ब्‍लैडर में स्‍टोन, पेप्‍ट‍िक अल्‍सर, गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज, दवाओं का असर, एंग्‍जायटी या स्‍ट्रेस, इंफेक्‍शन, ओवरईट‍िंग या फूड इंटॉलरेंस जैसे कारणों की वजह से पेट में लगातार दर्द हो सकता है ज‍िसे नजरअंदाज नहीं करना चाह‍िए। लगातार होने वाले पेट दर्द के साथ वेट लॉस, ब्‍लीड‍िंग, बुखार या पील‍िया जैसे लक्षण नजर आएं, तो तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें। साथ ही सेडेंटरी लाइफस्‍टाइल फॉलो न करें। समय पर खाएं, हेल्‍दी फूड्स लें और नींद पूरी करेंगे, तो गट हेल्‍थ बेहतर रहेगी।

FAQ

  • क्‍या बार-बार पेट दर्द कैंसर का संकेत हो सकता है?

    हां, यह पेट के कैंसर का संकेत हो सकता है, लेक‍िन ज्‍यादातर मामलों में कारण सामान्‍य ही होते हैं, अगर पेट दर्द के साथ उल्‍टी, वेट लॉस, मल या उल्‍टी में खून द‍िखे, तो डॉक्‍टर से तुरंत संपर्क करें। 
  • खाली पेट रहने के बावजूद पेट में दर्द क्‍यों होता है?

    लंबे समय तक खाना न खाने से भी आंतों में गैस जमा हो सकती है, जिससे ऐंठन, गैस और पेट में दर्द हो सकता है।
  • खाने के बाद पेट में दर्द क्‍यों होता है?

    फूड इंटॉलरेंस, गैस, एस‍िड र‍िफ्लक्‍स, अपच के कारण भोजन के बाद पेट में दर्द की समस्‍या हो सकती है। 

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 27, 2026 17:19 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jul 27, 2026 17:19 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr KS Somasekhar Rao

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