पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, सीने में जलन, गैस, अपच और भारीपन जैसी समस्याएं अक्सर लोगों को परेशान करती हैं। ज्यादातर लोग इन लक्षणों को सामान्य एसिडिटी समझकर घरेलू नुस्खे या बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेना शुरू कर देते हैं लेकिन कई बार यही दर्द पित्त की पथरी जैसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है, क्योंकि दोनों बीमारियों के शुरुआती लक्षण कुछ हद तक एक जैसे दिखाई देते हैं, इसलिए इनके बीच अंतर समझना आसान नहीं होता। यही कारण है कि कई मरीज सही समय पर जांच और इलाज नहीं करा पाते, जिससे आगे चलकर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
इस लेख में आकाश हेल्थकेयर के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं थेराप्यूटिक एंडोस्कोपी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट और डायरेक्टर, डॉ. शरद मल्होत्रा से जानिए, पित्त की पथरी और एसिडिटी के दर्द में क्या अंतर है, किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और दोनों समस्याओं से बचाव के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
पित्त की पथरी और एसिडिटी के दर्द में क्या अंतर है?
डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, पित्त की पथरी का दर्द ज्यादा तेज और लगातार रहने वाला होता है, जबकि एसिडिटी में जलन और बेचैनी खास लक्षण होते हैं। पथरी का दर्द पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में ज्यादा महसूस होता है और यह कंधे या पीठ तक जा सकता है। वहीं एसिडिटी का दर्द सीने के बीच में जलन के रूप में महसूस होता है।
| पैरामीटर | एसिडिटी (Acid Reflux/Acidity) का दर्द |
पित्त की पथरी (Gallstones) का दर्द |
| दर्द की जगह | सीने के बीच में या ऊपरी पेट में जलन महसूस होती है। | पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में होता है। |
| दर्द का प्रकार | जलन, खट्टी डकार और भारीपन के साथ होने वाला दर्द। | अचानक शुरू होने वाला तेज, चुभने या ऐंठन जैसा दर्द। |
| दर्द फैलना | दर्द आमतौर पर सीने और गले तक सीमित रहता है, पीठ या कंधे तक कम फैलता है। | दर्द पीठ, दाहिने कंधे या कंधे के बीचों-बीच तक फैल सकता है। |
| कब बढ़ता है? | मसालेदार भोजन, ज्यादा खाना, देर रात खाना या खाली पेट रहने पर बढ़ सकता है। | तला-भुना, ऑयली या भारी भोजन करने के बाद ज्यादा बढ़ता है। |
| दर्द की अवधि | कुछ मिनटों से कुछ घंटों तक रह सकता है और बार-बार हो सकता है। | कुछ मिनटों से लेकर कई घंटों तक रह सकता है। |
| अन्य लक्षण | सीने में जलन, खट्टी डकार, गले में जलन, मुंह में खट्टा स्वाद और पेट भारी लगना। | मतली, उल्टी, पेट फूलना और गंभीर मामलों में बुखार या पीलिया हो सकता है। |
| दवा का असर | एंटासिड या एसिड कम करने वाली दवाओं से अक्सर आराम मिल जाता है। | सामान्य एंटासिड से राहत नहीं मिलती। |
| संभावित खतरा | लंबे समय तक रहने पर भोजन नली में सूजन, अल्सर या GERD जैसी समस्या हो सकती है। | पित्ताशय में सूजन, पित्त नली में रुकावट या इंफेक्शन का जोखिम हो सकता है। |
| कब डॉक्टर से मिलें? | यदि एसिडिटी बार-बार हो, दवा से आराम न मिले या निगलने में कठिनाई, वजन घटना या खून की उल्टी जैसे लक्षण हों तो डॉक्टर से सलाह लें। | तेज दर्द, बुखार, लगातार उल्टी या पीलिया होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। |
जांच कब करानी चाहिए?
डॉ. शरद मल्होत्रा सलाह देते हैं कि यदि पेट के ऊपरी हिस्से में बार-बार दर्द हो, दर्द भोजन के बाद बढ़ जाए, उल्टी, बुखार या पीलिया जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं। दूसरी ओर, यदि लंबे समय तक सीने में जलन, खट्टी डकारें और निगलने में परेशानी बनी रहती है, तो एंडोस्कोपी जैसी जांच की जरूरत पड़ सकती है।
इलाज में क्या अंतर है?
डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, एसिडिटी का इलाज आमतौर पर खानपान में बदलाव, लाइफस्टाइल में सुधार और एसिड कम करने वाली दवाओं से किया जाता है। वहीं, यदि पित्त की पथरी लक्षण पैदा कर रही है, तो केवल दर्द की दवा लेना पर्याप्त नहीं होता। ऐसे मामलों में स्थिति के अनुसार सर्जरी स्थायी इलाज मानी जाती है। बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार पेन किलर दवाएं लेना समस्या को छिपा सकता है, लेकिन उसे खत्म नहीं करता।

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साल 2023 में NIH की Bookshelf में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, अगर पित्ताशय में पथरी बार-बार तेज दर्द, पेट में ऐंठन या दूसरी परेशानियां पैदा कर रही है, तो पित्ताशय को सर्जरी से हटाना सबसे प्रभावी और स्थायी इलाज माना जाता है। हालांकि, हर मरीज को तुरंत ऑपरेशन की जरूरत नहीं होती। यह फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि दर्द कितनी बार और कितना गंभीर होता है, पथरी से जटिलताओं का खतरा कितना है और मरीज की उम्र व स्वास्थ्य कैसा है।
पित्त की पथरी और एसिडिटी से बचाव कैसे करें?
डॉ. शरद मल्होत्रा कहते हैं कि हेल्दी लाइफस्टाइल दोनों समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है। बैलेंस डाइट लें, ज्यादा तला-भुना और फैट वाला भोजन सीमित करें, पर्याप्त पानी पिएं, नियमित एक्सरसाइज करें और वजन को कंट्रोल रखें। भोजन के तुरंत बाद लेटने से बचें और देर रात भारी भोजन करने की आदत छोड़ें। यदि पहले से पाचन संबंधी समस्याएं हैं, तो समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराना भी जरूरी है।
निष्कर्ष
पित्त की पथरी और एसिडिटी के कुछ लक्षण भले ही एक जैसे लगें, लेकिन दोनों बीमारियों के कारण, गंभीरता और इलाज अलग-अलग होते हैं। एसिडिटी अक्सर दवाओं और लाइफस्टाइल में बदलाव से कंट्रोल हो जाती है, जबकि पित्त की पथरी के लक्षण होने पर समय पर सही जांच और इलाज जरूरी होता है। इसलिए यदि पेट के ऊपरी हिस्से में बार-बार तेज दर्द, सीने में लगातार जलन या अन्य असामान्य लक्षण महसूस हों, तो स्वयं इलाज करने के बजाय गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से सलाह लें।
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Jul 31, 2026 22:48 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Sharad Malhotra