पेट में जलन, भारीपन, खट्टी डकारें और ऊपरी पेट में दर्द जैसी समस्याएं आजकल काफी आम हो गई हैं। अक्सर लोग इन लक्षणों को देखकर तुरंत एसिडिटी मान लेते हैं, जबकि कई बार इसके पीछे गैस्ट्राइटिस जैसी समस्या भी हो सकती है। एसिडिटी और गैस्ट्राइटिस दोनों के लक्षण काफी हद तक एक जैसे लगते हैं, इसलिए लोग इनके बीच का फर्क समझ नहीं पाते हैं, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार गैस्ट्राइटिस और एसिडिटी दो अलग समस्याएं हैं, जिनके कारण, लक्षण और इलाज अलग हो सकते हैं। गैस्ट्राइटिस और एसिडिटी के बीच का अंतर जानने के लिए हमने Dr. K. S. Somasekhar Rao, Senior Consultant Gastroenterologist, Hepatologist & Advanced Therapeutic Endoscopist At Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।

एसिडिटी क्या होती है?
एसिडिटी या एसिड रिफ्लक्स तब होता है जब पेट का एसिड ऊपर खाने की नली (इसोफेगस) में वापस आने लगता है। इससे सीने में जलन महसूस होती है, जो अक्सर खाने के बाद या लेटने पर बढ़ सकती है।
गैस्ट्राइटिस क्या होता है?
गैस्ट्राइटिस पेट की अंदरूनी परत में सूजन या जलन की समस्या है। इसका मुख्य कारण H. pylori इंफेक्शन, दर्द की कुछ दवाओं (NSAIDs) का ज्यादा इस्तेमाल, अल्कोहल का सेवन या स्ट्रेस भी हो सकता है।
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एसिडिटी और गैस्ट्राइटिस के लक्षणोंं में अंंतर
एसिडिटी और गैस्ट्राइटिस के लक्षणों में भी थोड़ा फर्क होता है। गैस्ट्राइटिस में मतली, उल्टी, भूख कम लगना और थोड़ी मात्रा में खाने के बाद भी पेट भरा-भरा महसूस हो सकता है। गंभीर मामलों में उल्टी में खून, काले रंग का मल जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं। दूसरी ओर, एसिडिटी में मुख्य रूप से सीने में जलन और खट्टा पानी मुंह तक आने जैसी समस्या होती है।
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एसिडिटी और गैस्ट्राइटिस के इलाज में अंतर
एसिडिटी और गैस्ट्राइटिस का इलाज भी अलग होता है। एसिडिटी में एंटासिड दवाएं और मसालेदार खाना कम करने की सलाह दी जाती है। जबकि गैस्ट्राइटिस में डॉक्टर एंटीबायोटिक्स, एसिड कम करने वाली दवाएं और पेट को नुकसान पहुंचाने वाली चीजों से बचने की सलाह देते हैं। अगर ये लक्षण कई दिनों तक बने रहें, तो सही जांच और इलाज के लिए गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी है।
निष्कर्ष:
गैस्ट्राइटिस और एसिडिटी के लक्षण भले ही एक जैसे लगें, लेकिन दोनों अलग समस्याएं हैं। एसिडिटी में पेट का एसिड ऊपर आता है, जबकि गैस्ट्राइटिस में पेट की अंदरूनी परत में सूजन होती है। सही कारण पहचानकर इलाज कराना जरूरी है, ताकि समस्या लंबे समय तक न बनी रहे और पेट स्वस्थ रहे।
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May 28, 2026 21:47 IST
Modified By : Yashaswi Mathur May 28, 2026 21:47 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr KS Somasekhar Rao