Fri Sep 11, 2026 | 06:50 PM IST

Medically Reviewed by Dr KS Somasekhar Rao , Senior Consultant Gastroenterologist | Hepatologist | Advanced Therapeutic Endoscopist

गैस्ट्राइटिस vs एस‍िड‍िटी: डॉक्टर से जानें क्या है फर्क? एक जैसे लक्षण कर सकते हैं कंंफ्यूज

गैस्ट्राइटिस और एसिडिटी के लक्षण कई बार एक जैसे लग सकते हैं, लेक‍िन ये दोनोंं अलग-अलग समस्‍याएं हैं। हालांंक‍ि इसके कुछ लक्षण समान लगते हैं जैसे पेट या सीने में जलन, ऊपरी पेट में दर्द और पेट फूलना। जानें दोनों में अंतर।

पेट में जलन, भारीपन, खट्टी डकारें और ऊपरी पेट में दर्द जैसी समस्याएं आजकल काफी आम हो गई हैं। अक्सर लोग इन लक्षणों को देखकर तुरंत एसिडिटी मान लेते हैं, जबकि कई बार इसके पीछे गैस्ट्राइटिस जैसी समस्या भी हो सकती है। एस‍िड‍िटी और गैस्‍ट्राइट‍िस दोनों के लक्षण काफी हद तक एक जैसे लगते हैं, इसलिए लोग इनके बीच का फर्क समझ नहीं पाते हैं, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार गैस्ट्राइटिस और एसिडिटी दो अलग समस्याएं हैं, जिनके कारण, लक्षण और इलाज अलग हो सकते हैं। गैस्ट्राइटिस और एसिडिटी के बीच का अंतर जानने के ल‍िए हमने Dr. K. S. Somasekhar Rao, Senior Consultant Gastroenterologist, Hepatologist & Advanced Therapeutic Endoscopist At Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।

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एस‍िड‍िटी क्‍या होती है?

एसिडिटी या एसिड रिफ्लक्स तब होता है जब पेट का एसिड ऊपर खाने की नली (इसोफेगस) में वापस आने लगता है। इससे सीने में जलन महसूस होती है, जो अक्सर खाने के बाद या लेटने पर बढ़ सकती है।

गैस्ट्राइटिस क्‍या होता है?

गैस्ट्राइटिस पेट की अंदरूनी परत में सूजन या जलन की समस्या है। इसका मुख्य कारण H. pylori इंफेक्शन, दर्द की कुछ दवाओं (NSAIDs) का ज्यादा इस्तेमाल, अल्‍कोहल का सेवन या स्‍ट्रेस भी हो सकता है।

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एस‍िड‍िटी और गैस्ट्राइटिस के लक्षणोंं में अंंतर

एसिडिटी और गैस्ट्राइटिस के लक्षणों में भी थोड़ा फर्क होता है। गैस्ट्राइटिस में मतली, उल्टी, भूख कम लगना और थोड़ी मात्रा में खाने के बाद भी पेट भरा-भरा महसूस हो सकता है। गंभीर मामलों में उल्टी में खून, काले रंग का मल जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं। दूसरी ओर, एसिडिटी में मुख्य रूप से सीने में जलन और खट्टा पानी मुंह तक आने जैसी समस्या होती है।

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एस‍िड‍िटी और गैस्ट्राइटिस के इलाज में अंतर

एस‍िड‍िटी और गैस्ट्राइटिस का इलाज भी अलग होता है। एसिडिटी में एंटासिड दवाएं और मसालेदार खाना कम करने की सलाह दी जाती है। जबकि गैस्ट्राइटिस में डॉक्टर एंटीबायोटिक्स, एसिड कम करने वाली दवाएं और पेट को नुकसान पहुंचाने वाली चीजों से बचने की सलाह देते हैं। अगर ये लक्षण कई दिनों तक बने रहें, तो सही जांच और इलाज के लिए गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी है।

निष्कर्ष:

गैस्ट्राइटिस और एसिडिटी के लक्षण भले ही एक जैसे लगें, लेकिन दोनों अलग समस्याएं हैं। एसिडिटी में पेट का एसिड ऊपर आता है, जबकि गैस्ट्राइटिस में पेट की अंदरूनी परत में सूजन होती है। सही कारण पहचानकर इलाज कराना जरूरी है, ताकि समस्या लंबे समय तक न बनी रहे और पेट स्वस्थ रहे।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 28, 2026 21:47 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 28, 2026 21:47 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr KS Somasekhar Rao

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