Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Kapil Sharma , Group Director - Gastroenterology & Advanced Endoscopy

पेट में जलन के साथ उल्‍टी के लक्षण को हल्‍के में न लें, डॉक्‍टर से जानें इसका कारण और इलाज

पेट में जलन के साथ उल्‍टी के लक्षण को अक्‍सर लोग एस‍िड‍िटी या पेट की समस्‍या समस्‍या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेक‍िन यह गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या हो सकती है। डॉक्‍टर से जानें कारण और इलाज।

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पेट में जलन और उल्‍टी का कारण ज्‍यादातर मामलों में पेट से संबंध‍ित समस्‍याएं होती हैं। इसके पीछे एस‍िड र‍िफ्लक्‍स, गैस्‍ट्राइट‍िस, पेट में अल्‍सर, फूड पॉइजन‍िंग या पेट में इंफेक्‍शन हो सकता है। पेट में जलन और उल्‍टी कभी-कभी होना आम बात है, लेक‍िन बार-बार ये लक्षण नजर आ रहे हैं, तो जांच कराना जरूरी है। Mayo Clinic के मुताब‍िक, अगर खाना खाने के बाद पेट में दर्द, जलन या उल्‍टी आए, तो यह बदहजमी या अपच का लक्षण भी हो सकता है। जो लोग अल्‍कोहल या धूम्रपान का सेवन करते हैं, उनमें यह समस्‍या ज्‍यादा देखी जाती है। पेट में जलन और उल्‍टी आने के कारणों को समझने के ल‍िए हमने Dr. Kapil Sharma, Gastroenterologist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।

1. एसिड रिफ्लक्स

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Gastroenterologist Dr. Kapil Sharma ने कहा, ''एस‍िड र‍िफ्लक्‍स की समस्‍या तब होती है जब पेट का एस‍िड दोबारा भोजन नली में जाने लगता है। इससे सीने में जलन होती है और कुछ लोगों में मतली और उल्‍टी जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। हालांक‍ि, हर व्‍यक्‍त‍ि को उल्‍टी हो ऐसा जरूरी नहीं है।''

एस‍िड‍ र‍िफ्लक्‍स के अन्‍य लक्षण

  • खट्टी डकार
  • मुंह में खट्टा स्‍वाद आना
  • लेटने पर जलन बढ़ना
  • खाने के बाद पेट में भारीपन

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2. गैस्ट्राइटिस

Dr. Kapil Sharma ने बताया क‍ि गैस्ट्राइटिस होने पर पेट की अंदरूनी परत में सूजन या जलन हो सकती है। यह समस्‍या पेट में ज्‍यादा एस‍िड बनने के कारण होती है। यह समस्‍या दर्द न‍िवारक दवाएं या अल्‍कोहल का अध‍िक सेवन करने के कारण हो सकती है।गैस्ट्राइटिस होने पर पेट के ऊपरी ह‍िस्‍से में जलन हो सकती है और कुछ लोगों को मतली या उल्‍टी की समस्‍या हो सकती है।

गैस्ट्राइटिस के अन्‍य लक्षण

  • पेट में भारीपन
  • पेट फूलना
  • पेट के ऊपरी ह‍िस्‍से में दर्द या जलन
  • भूख कम लगना

लक्षणों को हल्‍के में लेना पड़ सकता है भारी

Mayo Clinic के मुताब‍िक, गैस्ट्राइटिस अचानक शुरू हो सकता है इसल‍िए इसे हल्‍के में नहीं लेना चाह‍िए। इससे पेट के कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है। कुछ मामलों में गैस्ट्राइटिस पेट में अल्‍सर का कारण भी बन सकता है।

3. पेट में इंफेक्‍शन

अगर पेट या आंतों में वायरस, बैक्‍टीर‍िया या परजीवी मौजूद है, तो उससे पेट में इंफेक्‍शन हो सकता है। पेट में इंफेक्‍शन होने पर उल्‍टी आ सकती है और कुछ लोगों में पेट में जलन महसूस हो सकती है। MedlinePlus के मुताब‍िक, गर्भवती मह‍िलाएं, श‍िशुओं, बुजुर्गों ओर कमजोर इम्‍यून‍िटी वाले लोगों में इसका खतरा ज्‍यादा हो सकता है। पेट में इंफेक्‍शन की समस्‍या ज्‍यादातर मामलों में जल्‍दी ठीक हो जाती है, लेक‍िन इसे हल्‍के में नहीं लेना चाह‍िए।

पेट में इंफेक्‍शन के अन्‍य लक्षण

  • पेट दर्द और ऐंठन
  • दस्‍त
  • भूख कम लगना
  • कमजोरी

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4. पेट का अल्सर

पेट या छोटी आंत की अंदरूनी परत में घाव बनने के ल‍िए पेट में अल्‍सर हो सकता है। यह समस्‍या अक्‍सर एच. पाइलोरी (H. pylori) इंफेक्‍शन या पेनक‍िलर दवाओं के ज्‍यादा सेवन से हो सकती है। पेट के अंदरूनी परत में घाव होने के कारण एस‍िड के संपर्क में आने पर जलन और दर्द महसूस हो सकता है। पेट में सूजन और जलन के कारण मतली महसूस हो सकती है।

पेट में अल्‍सर के अन्‍य लक्षण

  • पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द
  • पेट फूलना
  • मतली

5. फूड पॉइजनिंग

जब कोई व्‍यक्‍त‍ि दूष‍ित भोजन या पानी का सेवन कर लेता है, तो उसमें मौजूद बैक्‍टीर‍िया, वायरस और टॉक्‍स‍िन के कारण फूड पॉइजन‍िंग हो सकती है। दूषित भोजन से पेट और आंतों में जलन और हल्‍की सूजन हो सकती है। शरीर दूषित भोजन और हानिकारक जीवाणुओं को बाहर निकालने की कोशिश करता है और इस वजह से व्‍यक्‍त‍ि को उल्‍टी आ सकती है।

फूड पॉइजनिंग के अन्‍य लक्षण

  • दस्‍त होना
  • पेट में ऐंठन
  • बुखार और कमजेारी
  • पेट में दर्द

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पेट में जलन और उल्‍टी आने पर क्‍या करें?

  • उल्‍टी होने पर शरीर में पानी या इलेक्‍ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है इसल‍िए पर्याप्‍त मात्रा में पानी प‍िएं।
  • कुछ दर्द न‍िवारक दवाएं पेट की परत को नुकसान पहुंचा सकती है ज‍िससे जलन और अल्‍सर की समस्‍या बढ़ सकती है। इसल‍िए डॉक्‍टर की सलाह के बगैर दवाओं का सेवन न करें।
  • एक बार में ज्यादा भोजन करने से पेट पर दबाव बढ़ सकता है और एसिड रिफ्लक्स की समस्या बढ़ सकती है। दिनभर में छोटे-छोटे मील्‍स लें।
  • चाय, कॉफी और कैफीन वाले पेय पदार्थों से बचें। इससे कुछ लोगों में एसिड रिफ्लक्स के लक्षण बढ़ा सकते हैं।

पेट में जलन और उल्‍टी का इलाज

  • अगर एस‍िड‍िटी या एस‍िड र‍िफ्लक्‍स के कारण पेट में जलन और उल्‍टी आ रही है, तो डॉक्‍टर एंटास‍िड दे सकते हैं। इससे पेट में जलन, खट्टी डकार और एस‍िड‍िटी से राहत म‍िलेगी।
  • अगर पेट में एच. पाइलोरी बैक्टीरिया की वजह से जलन, गैस्ट्राइटिस या अल्सर है, तो केवल एसिड कम करने वाली दवाएं काफी नहीं होतीं। बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए डॉक्टर एंटीबायोटिक्स दे सकते हैं।
  • पेट में जलन और उल्‍टी में दवा के साथ-साथ लाइफस्‍टाइल में बदलाव करने की सलाह दी जाती है जैसे हल्‍की एक्‍सरसाइज करना, जल्‍दी पचने वाला भोजन और पर्याप्‍त मात्रा में पानी का सेवन करने से मदद म‍िलती है।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • अगर तेज बुखार हो।
  • लगातार उल्‍टी हो रही हो।
  • उल्‍टी में ब्‍लड आए।
  • मल काला हो।
  • चक्‍कर आए।

अगर पेट में जलन और उल्‍टी आ रही है, तो डॉक्‍टर से जांच कराएं। समस्‍या के आधार पर डॉक्‍टर इलाज करते हैं इसल‍िए खुद से दवाएं न लें।

न‍िष्‍कर्ष:

पेट में जलन और उल्‍टी के पीछे ज्‍यादातर पेट से संबंधि‍त समस्‍याएं हो सकती हैं। एस‍िड र‍िफ्लक्‍स यानी पेट का एस‍िड भोजन नली में आने की समस्‍या, गैस्ट्राइटिस यानी पेट की अंदरूनी परत में सूजन, पेट में इंफेक्‍शन और पेट का अल्सर यानी पेट की अंदरूनी परत में घाव के कारण पेट में जलन और उल्‍टी की समस्‍या हो सकती है। हालांक‍ि, हर व्‍यक्‍त‍ि में लक्षण अलग हो सकते हैं, लेक‍िन क‍िसी भी असामान्‍य लक्षण के नजर आने पर डॉक्‍टर से संपर्क करना न भूलें। अगर पेट में जलन के पीछे एस‍िड‍िटी है, तो डॉक्‍टर एंटास‍िड दे सकते हैं, इंफेक्‍शन के ल‍िए एंटीबायोट‍िक्‍स दवाएं और लाइफस्‍टाइल में बदलाव करने की सलाह दी जाती है।

FAQ

  • उल्टी आने के मुख्य कारण क्या हैं?

    फूड पॉइजनिंग, एसिड रिफ्लक्स, गैस्ट्राइटिस, पेट का अल्सर, माइग्रेन, मोशन सिकनेस या पेट में इंफेक्‍शन के कारण उल्‍टी आ सकती है।
  • उल्टी होने पर डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

    अगर उल्टी बार-बार हो रही है, 24 घंटे से ज्यादा बनी हुई है या ज्‍यादा कमजोरी है, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 07, 2026 19:05 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Kapil Sharma

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