पेट में जलन, खट्टी डकार, पेट दर्द या खाना खाने के बाद भारीपन जैसी समस्याएं आजकल बहुत आम हो गई हैं। कई बार लोग इसे सामान्य गैस या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन बार-बार होने वाली ये परेशानियां गैस्ट्राइटिस का संकेत हो सकती हैं। गैस्ट्राइटिस में पेट की अंदरूनी परत में सूजन आ जाती है, जिससे डाइजेशन प्रभावित हो सकता है।
आकाश हेल्थकेयर के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं थेराप्यूटिक एंडोस्कोपी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट और डायरेक्टर, डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, गैस्ट्राइटिस के दौरान हर व्यक्ति के लिए एक जैसी डाइट काम नहीं करती। किसी व्यक्ति को कोई भोजन आसानी से पच सकता है, जबकि दूसरे व्यक्ति में वही चीज पेट की जलन या दर्द बढ़ा सकती है। इसलिए अपनी बॉडी के संकेतों को समझना और सही भोजन को चुनना जरूरी है।
गैस्ट्राइटिस में क्या खाएं और क्या नहीं?
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर शरद मल्होत्रा के अनुसार, गैस्ट्राइटिस में हर व्यक्ति के लिए एक जैसी डाइट सही नहीं होती, लेकिन कुछ ऐसे फूड्स हैं जो पेट पर कम दबाव डालते हैं और कुछ चीजें लक्षणों को बढ़ा सकती हैं। सही भोजन का चुनाव पेट की जलन, एसिडिटी और असहजता को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है।
| तुलना | क्या खाना चाहिए | किन चीजों से बचना चाहिए |
| पाचन और हल्के भोजन | आसानी से पचने वाले फूड्स जैसे- दलिया, खिचड़ी, उबली हुई सब्जियां, हल्का पका हुआ भोजन और सूप, जो पेट पर दबाव नहीं डालते। | भारी और फैट युक्त भोजन जैसे- तला-भुना और ज्यादा फैट वाला खाना खाने से बचें, जो डाइजेशन को धीमा कर पेट में असहजता बढ़ाता है। |
| फाइबर और अनाज | फाइबर से भरपूर चीजें जैसे- ताजे फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज, जो डाइजेशन प्रोसेस के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। | तेज मसालेदार चीजों का सेवन करें बहुत ज्यादा मिर्च-मसाले वाले फूड्स, जो पेट की अंदरूनी परत में जलन और एसिडिटी बढ़ाते हैं उनसे परहेज करना चाहिए। |
| प्रोटीन के सोर्स | बैलेंस प्रोटीन के लिए दालें, अंडे (यदि सूट करें), कम फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट और उबला हुआ चिकन या मछली। | ज्यादा मात्रा में चाय, कॉफी या कैफीन का सेवन विशेषकर खाली पेट परेशानी बढ़ा सकता है। |
| ड्रिंक्स और आदतें | शरीर को हाइड्रेट रखने और डाइजेशन में मदद के लिए भरपूर पानी पिएं लेकिन भोजन के तुरंत बाद पानी पीने से बचें। | शराब और धूम्रपान, जो पेट की परत को नुकसान पहुंचाकर गैस्ट्राइटिस के लक्षणों को गंभीर करते हैं। |
| खान-पान का समय | नियमित अंतराल पर हल्का भोजन करना चाहिए, ताकि पेट में एसिड का संतुलन बना रहे। | लंबे समय तक भूखा रहना यानी बहुत देर तक खाली पेट रहना नहीं चाहिए, इससे पेट में जलन और एसिडिटी बढ़ सकती है। |
गैस्ट्राइटिस के दौरान अपने शरीर के रिएक्शन को समझना बहुत जरूरी है। यदि किसी खास फूड से आपको परेशानी या जलन महसूस हो, तो उसका सेवन तुरंत बंद कर दें और डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह लें।

साल 2020 में Evidence-Based Complementary and Alternative Medicine जर्नल में प्रकाशित स्टडी से साबित होता है कि खान-पान की आदतें और भोजन की पसंद सीधे तौर पर पेट और डाइजेशन से जुड़ी समस्याओं से जुड़ी हुई हैं। क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस के मरीजों के लिए अपनी लाइफस्टाइल और खान-पान में सुधार करना बहुत जरूरी है। खासतौर से मीठी, नमकीन, मांसाहारी, मसालेदार और तली-भुनी चीजों के सेवन को कंट्रोल करना चाहिए।
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गैस्ट्राइटिस में कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर शरद मल्होत्रा सलाह देते हैं कि अगर पेट दर्द लगातार बना रहता है, बार-बार उल्टी होती है, वजन कम हो रहा है, मल का रंग काला हो गया है या उल्टी में खून दिखाई देता है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
निष्कर्ष
गैस्ट्राइटिस में सही डाइट पेट की जलन और असहजता को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभा सकती है। हल्का, बैलेंस और आसानी से पचने वाला भोजन लेना फायदेमंद हो सकता है, जबकि ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और कैफीन युक्त चीजों से कुछ लोगों में परेशानी बढ़ सकती है। हालांकि, गैस्ट्राइटिस के सही इलाज के लिए केवल खानपान पर निर्भर न रहें। लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर डॉक्टर से जांच और उचित इलाज लेना जरूरी है।
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FAQ
क्या गैस्ट्राइटिस में केला खाना सुरक्षित है?
कई लोगों में केला आसानी से पच जाता है, लेकिन कुछ लोगों में परेशानी हो सकती है। खाने के बाद शरीर के रिएक्शन पर ध्यान देना चाहिए।क्या तनाव गैस्ट्राइटिस के लक्षणों को बढ़ा सकता है?
तनाव सीधे हर मामले में गैस्ट्राइटिस का कारण नहीं होता, लेकिन यह पेट की परेशानी और एसिडिटी जैसे लक्षणों को बढ़ा सकता है।क्या गैस्ट्रिटिस वाला व्यक्ति दही खा सकता है?
कुछ लोगों को दही से आराम मिल सकता है, जबकि कुछ में डेयरी प्रोडक्ट्स से परेशानी बढ़ सकती है। इसका असर व्यक्ति की सहनशीलता पर निर्भर करता है।
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Aug 07, 2026 17:32 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Sharad Malhotra