आजकल खराब खानपान, अनियमित डेली रूटीन, तनाव और देर रात तक जागने जैसी आदतें एसिड रिफ्लक्स और गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज का खतरा बढ़ा सकती हैं। ऐसे में जब भी किसी को एसिडिटी होती है, सबसे पहले जो घरेलू उपाय याद आता है, वह है एक गिलास दूध पी लेना। कई लोगों का मानना है कि दूध पेट की जलन को तुरंत शांत कर देता है, जबकि कुछ लोगों का अनुभव इसके बिल्कुल उल्टा होता है।
बेंगलुरु के एस्टर सीएमआई हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट मेडिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. अनुपमा एन. के. बताती हैं कि एसिड रिफ्लक्स को कंट्रोल करने के लिए केवल दूध पर निर्भर रहना सही नहीं है। सही खानपान, लाइफस्टाइल में बदलाव और ट्रिगर फूड्स की पहचान करना ज्यादा जरूरी है।
एसिड रिफ्लक्स में दूध पीना सही है या गलत?
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. अनुपमा के अनुसार, दूध का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति किस प्रकार का दूध पी रहा है, कितनी मात्रा में पी रहा है और उसका शरीर पर कैसा रिएक्शन होता है। यदि दूध पीने से जलन बढ़ती है और एसिड रिफ्लक्स की समस्या होती है, तो डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह जरूर लें।
| तुलना | दूध पीने के फायदे और अस्थायी राहत | दूध पीने के नुकसान और संभावित खतरे |
| तुरंत प्रभाव | दूध पीने से भोजन नली यानी फूड पाइप पर कुछ समय के लिए एक सुरक्षात्मक परत यानी प्रोटेक्टिव लेयर जैसी बन जाती है, जिससे सीने की जलन में तुरंत और अस्थायी राहत मिलती है। | दूध में मौजूद प्रोटीन और फैट पेट में एसिड के प्रोडक्शन को और ज्यादा बढ़ा सकते हैं, जिससे कुछ ही समय बाद एसिड रिफ्लक्स के लक्षण दोबारा लौट सकते हैं। |
| दूध का प्रकार और मात्रा | लो-फैट या स्किम्ड दूध कई लोगों द्वारा बेहतर तरीके से सहन किया जा सकता है और इससे एसिडिटी कम ट्रिगर होती है। | फुल-फैट दूध, क्रीम वाले मिल्क ड्रिंक, या एक बार में अधिक मात्रा में दूध पीना एसिड रिफ्लक्स के मरीजों की समस्याएं और बढ़ा सकता है। |
| फायदा और पोषण | जिन लोगों को दूध से कोई परेशानी नहीं होती, उनके लिए यह कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन D का एक अच्छा सोर्स है, जो हड्डियों की हेल्थ के लिए फायदेमंद है। | जिन लोगों को लैक्टोज इनटॉलरेंस या दूध के प्रति संवेदनशीलता होती है, उन्हें पेट फूलना, गैस, एसिडिटी, पेट दर्द और बेचैनी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। |
| एसिडिटी का स्थायी इलाज | इसे केवल एक अस्थायी राहत माना जा सकता है, यह किसी भी तरह से एसिडिटी या जीईआरडी का स्थायी समाधान या इलाज नहीं है। | यदि इसे बिना सोचे-समझे नियमित रूप से गलत तरीके से लिया जाए, तो यह पेट की जलन और खट्टी डकार की समस्या को और गंभीर बना सकता है। |
विकल्प और सही तरीका |
संतुलित मात्रा में सही प्रकार का दूध पीना सेहतमंद हो सकता है, बशर्ते शरीर पॉजिटिव रिएक्शन दे। | जिन्हें दूध से परेशानी हो, वे लैक्टोज-फ्री दूध, बादाम मिल्क, या ओट मिल्क जैसे प्लांट-बेस्ड विकल्पों को अपना सकते हैं। |
साल 2022 में European Journal of Nutrition में प्रकाशित ट्रायल से पता चलता है कि मेटाबोलिक सिंड्रोम से पीड़ित पुरुषों और महिलाओं में, कम फैट या फुल फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन रोजाना कम से कम तीन सर्विंग तक बढ़ाने से जीईआरडी (GERD) के सामान्य लक्षणों जैसे सीने की जलन और एसिड रिफ्लक्स पर कोई खास नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।
सीमित डेयरी डाइट की तुलना में इन फूड्स को बढ़ाने से एसिड रिफ्लक्स या हार्टबर्न के स्कोर में कोई खास अंतर नहीं देखा गया। आसान शब्दों में कहें तो, जिन लोगों को मेटाबोलिक सिंड्रोम है, वे सीमित मात्रा में डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन कर सकते हैं, क्योंकि इससे उनके एसिडिटी या सीने की जलन के लक्षण गंभीर रूप से नहीं बढ़ते हैं।

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एसिड रिफ्लक्स के मरीज दूध पीते समय किन बातों का रखें ध्यान?
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. अनुपमा सलाह देती हैं कि अगर किसी व्यक्ति को बार-बार एसिड रिफ्लक्स की समस्या होती है, तो उसे रात में सोने से ठीक पहले ज्यादा मात्रा में दूध पीने से बचना चाहिए।
- भोजन या दूध पीने के तुरंत बाद लेटने से पेट का एसिड भोजन नली की ओर वापस आ सकता है, जिससे सीने में जलन और रिफ्लक्स बढ़ सकता है।
- इसके अलावा, एक बार में बहुत ज्यादा दूध पीने के बजाय सीमित मात्रा में सेवन करना बेहतर माना जाता है।
- जिन लोगों को दूध से एलर्जी है, उन्हें डेयरी प्रोडक्ट्स से पूरी तरह बचना चाहिए और डॉक्टर से सही विकल्पों के बारे में सलाह लेनी चाहिए।
कब डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए?
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. अनुपमा का कहना है कि अगर एसिड रिफ्लक्स सप्ताह में कई बार हो रहा हो, निगलने में दिक्कत हो, बिना कारण वजन कम हो रहा हो, बार-बार उल्टी आ रही हो, सीने में तेज दर्द हो या लक्षण लगातार बने रहें, तो इसे सामान्य एसिडिटी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से जांच कराना जरूरी है।
निष्कर्ष
डॉ. अनुपमा के अनुसार, दूध न तो हर व्यक्ति के लिए एसिड रिफ्लक्स का इलाज है और न ही हर किसी के लिए नुकसानदायक। कुछ लोगों को इससे थोड़ी देर के लिए राहत मिल सकती है, जबकि कुछ में यह एसिडिटी बढ़ा सकता है। इसलिए सबसे अच्छा तरीका यही है कि व्यक्ति अपने शरीर के रिएक्शन पर ध्यान दे। अगर दूध पीने से कोई परेशानी नहीं होती, तो सीमित मात्रा में लो-फैट दूध का सेवन किया जा सकता है। वहीं, यदि दूध लक्षणों को बढ़ाता है, तो डॉक्टर की सलाह से विकल्प चुनना बेहतर रहेगा।
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FAQ
क्या खाली पेट दूध पीने से एसिडिटी कम होती है?
कुछ लोगों को खाली पेट दूध पीने से थोड़ी देर के लिए राहत मिल सकती है, लेकिन कई मामलों में यह बाद में एसिड बनने की प्रोसेस को बढ़ा सकता है।क्या दही एसिड रिफ्लक्स को रोक सकता है?
यह व्यक्ति की पाचन क्षमता पर निर्भर करता है। कुछ लोग दही को आसानी से पचा लेते हैं, जबकि कुछ में इससे भी एसिडिटी बढ़ सकती है।क्या ठंडा दूध पीने से सीने की जलन तुरंत शांत हो जाती है?
ठंडा दूध कुछ लोगों को अस्थायी राहत दे सकता है, लेकिन इसका असर लंबे समय तक नहीं रहता और बाद में लक्षण दोबारा उभर सकते हैं।
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Aug 07, 2026 15:34 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Anupama N K