आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव यानी स्ट्रेस लगभग हर व्यक्ति के जीवन का हिस्सा बन चुका है। काम का दबाव, आर्थिक चिंता, पारिवारिक जिम्मेदारियां और नींद की कमी का असर सिर्फ मेंटल हेल्थ तक सीमित नहीं रहता, बल्कि डाइजेस्टिव सिस्टम पर भी गहरा असर डाल सकता है। यही कारण है कि कई लोगों में तनाव के दौरान एसिड रिफ्लक्स और गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) के लक्षण ज्यादा बढ़ जाते हैं। आकाश हेल्थकेयर के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं थेराप्यूटिक एंडोस्कोपी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट और डायरेक्टर, डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं कि तनाव सीधे तौर पर एसिड नहीं बनाता, लेकिन यह एसिड रिफ्लक्स के लक्षणों को बढ़ा सकता है और मरीज की परेशानी को ज्यादा गंभीर बना सकता है।
क्या तनाव से एसिड रिफ्लक्स हो सकता है?
डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, ''तनाव के समय शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं, जो डाइजेस्टिव सिस्टम को प्रभावित करते हैं। तनाव के कारण पेट खाली होने की प्रोसेस धीमी हो सकती है और व्यक्ति को एसिड रिफ्लक्स के लक्षण ज्यादा महसूस हो सकते हैं। कई बार तनाव की वजह से व्यक्ति दर्द और जलन जैसी समस्याओं के प्रति ज्यादा सेंसिटिव भी हो जाता है। इसलिए जिन लोगों को पहले से जीईआरडी है, उनमें तनाव के दौरान सीने में जलन और खट्टी डकार की शिकायत बढ़ सकती है।''
- डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं कि तनाव में रहने वाले लोग अक्सर अनियमित समय पर भोजन करते हैं, जल्दी-जल्दी खाते हैं या जंक फूड, चाय, कॉफी और मसालेदार चीजों का ज्यादा सेवन करने लगते हैं।
- कुछ लोग धूम्रपान या शराब का सेवन भी बढ़ा देते हैं। ये सभी आदतें एसिड रिफ्लक्स के जोखिम को बढ़ाने का काम करती हैं।
- इसके अलावा तनाव की वजह से नींद भी प्रभावित होती है, जिससे रात में एसिड रिफ्लक्स की समस्या और ज्यादा बढ़ सकती है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं कि यदि आपको बार-बार सीने में जलन, खट्टी डकार, गले में जलन, खाना या खट्टा पानी मुंह तक आना, निगलने में परेशानी या लगातार खांसी जैसी शिकायत रहती है, तो इसे सामान्य एसिडिटी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि ये लक्षण सप्ताह में दो या उससे ज्यादा बार दिखाई दें, तो यह जीईआरडी का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से जांच कराना जरूरी है।
एसिड रिफ्लक्स से बचने के उपाय
डॉ. शरद मल्होत्रा सलाह देते हैं कि एसिड रिफ्लक्स कंट्रोल करने के लिए केवल दवा ही नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल में सुधार भी जरूरी है।
- रोजाना समय पर भोजन करें, रात का खाना सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले खाएं और बहुत ज्यादा तला-भुना या मसालेदार भोजन सीमित करें।
- तनाव कम करने के लिए योग, मेडिटेशन, गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज और नियमित फिजिकल एक्टिविटी अपनाएं।
- साथ ही पर्याप्त नींद लें और धूम्रपान व शराब से दूरी बनाए रखें।
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डॉक्टर की सलाह
यदि सीने में जलन लगातार बनी रहे, निगलने में कठिनाई हो, बिना कारण वजन कम होने लगे, उल्टी में खून आए या काला मल आने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ये लक्षण किसी गंभीर डाइजेशन संबंधी समस्या का संकेत हो सकते हैं, जिनकी समय पर जांच और इलाज जरूरी है।
निष्कर्ष
तनाव सीधे तौर पर एसिड रिफ्लक्स का कारण नहीं बनता, लेकिन यह GERD के लक्षणों को ज्यादा गंभीर बना सकता है। तनाव के साथ खराब खानपान, अनियमित डेली रूटीन और नींद की कमी मिलकर समस्या को और बढ़ा देते हैं। यदि सीने में जलन या खट्टी डकार की शिकायत बार-बार हो रही है, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें। सही समय पर डॉक्टर की सलाह लें, तनाव को कंट्रोल करें और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर एसिड रिफ्लक्स की समस्या को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
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FAQ
क्या जीईआरडी का इलाज योग से किया जा सकता है?
योग, मेडिटेशन और गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज तनाव कम करने में मदद कर सकती हैं, जिससे कुछ लोगों में GERD के लक्षणों में भी सुधार हो सकता है लेकिन यह इसका पूरा इलाज नहीं है।क्या खाली पेट रहने से एसिड रिफ्लक्स बढ़ सकता है?
लंबे समय तक खाली पेट रहने से कुछ लोगों में एसिडिटी और रिफ्लक्स की परेशानी बढ़ सकती है, इसलिए समय पर भोजन करना बेहतर माना जाता है।क्या एसिड रिफ्लक्स ट्रिगर पैनिक अटैक कर सकता है?
एसिड रिफ्लक्स की समस्या अगर ज्यादा हो तो व्यक्ति को सीने में जलन, घबराहट जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।
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Jul 27, 2026 18:15 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Sharad Malhotra