गर्मियों के मौसम में तेज धूप, शरीर में पानी की कमी, मसालेदार भोजन करने और अनियमित खानपान की आदतों के कारण एसिडिटी और सीने में जलन जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। इतना ही नहीं, लंबे समय तक खाली पेट रहने, ज्यादा चाय या कॉफी पीना और तनाव भी इस परेशानी को बढ़ा सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार गर्मियों में पित्त दोष बढ़ने के कारण अम्लता यानी एसिडिटी की समस्या ज्यादा होती है। ऐसे में कुछ मसाले और जड़ी-बूटियों का सेवन पाचन तंत्र को संतुलित रखने में फायदेमंद हो सकती हैं। ऐसे में आइए हरियाणा के सिरसा स्थित रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा से जानते हैं कि गर्मियों में एसिडिटी और सीने में जलन से राहत पाने के लिए किन जड़ी-बूटियों का सेवन करना चाहिए?
गर्मियों में एसिडिटी और सीने की जलन से राहत के लिए जड़ी-बूटियां
आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, गर्मियों में एसिडिटी और सीने में जलन की समस्या से राहत पाने के लिए आप इन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का सेवन कर सकते हैं-
1. तुलसी
तुलसी अपने औषधीय गुणों के लिए जानी जाती है। इसेक पत्तों में मौजूद नेचुरल ततव पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करतदे हैं। खाने के बाद 4 से 5 ताजी तुलसी की पत्तियां चबाने या तुलसी की चाय पीने से पेट को आराम मिस सकता है। हालांकि, अगर एसिडिटी बार-बार या गंभीर रूप से होती है तो सिर्फ घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के स्थान पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
इसे भी पढ़ें: क्या एसिडिटी और एसिड रिफ्लक्स एक ही हैं? गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से जानें
2. जीरा
जीरा का इस्तेमाल ज्यादातर भारतीय रसोई में किया जाता है। यह न सिर्फ आपके खाने का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि पाचन क्रिया के लिए भी फायदेमंद होता है। भुना हुआ जारी या जीरे का पानी कई लोग खाना खाने के बाद पीना पसंद करते हैं। यह पाचन क्रिया को बेहतर रखने और पेट में गैस या ब्लोटिंग की समस्या को कम करने में मदद कर सकता है। गर्मियों में जीरे का पानी पीने से शरीर को ताजगी मिलती है।
3. अजवाइन
अपच और गैस की समस्या में घरेलू उपाय के रूप में अजवाइन का सेवन करना काफी फायदेमंद माना जाता है। भोजन के बाद एक चुटकी अजवाइन को हल्के गुनगुने पानी के साथ लेने से पाचन क्रिया को बेहतर रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, जिन लोगों को बार-बार एसिडिटी या पेट के अल्सर जैसी समस्याएं रहती हैं, उन्हें नियमित रूप से इनका सेवन करने से पहले आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।

4. हींग
हींग को पाचन को बेहतर रखने के लिए अक्सर खाना पकाने के दौरान इस्तेमाल किया जाता है। हींग का सेवन गैस, ब्लोटिंग और अपच जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद कर सकती है। दाल यी सब्जी में थोड़ी मात्रा में हींग डालने से भोजन आसानी से पच सकता है। हींग का सेवन हमेशा सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, क्योंकि ज्यादा मात्रा में इसका सेवन पेट के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
5. दालचीनी
दालचीनी में नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं और इसे पाचन के लिए फायदेमंद माना जाता है। हल्की मात्रा में इसका सेवन खाना खाने के बाद पेट में होने वाली असुविधा को कम करने में मदद कर सकती हैं। हर्बल चाय के रूप में दालचीनी का सेवन करने से आपको लाभ मिल सकता है। हालांकि, दालचीनी का ज्यादा मात्रा में सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि ज्यादा मात्रा में इसका सेवन सेहत पर बुरा असर डाल सकता है।
इसे भी पढ़ें: खाने के बाद सीने में भारीपन गैस है या हार्ट अटैक की चेतावनी? ऐसे पहचानें अंतर
निष्कर्ष
तुलसी, जीरा, अजवाइन, हींद और दलाचीनी जैसी जड़ी बूटियों का सेवन गर्मियों में एसिडिटी और सीने में जलन की समस्या से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इनके असर हर व्यक्ति पर अलग-अलग पड़ सकते हैं और इन्हें किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
Image Credit: Freepik
FAQ
कौन सा फल खाने से एसिडिटी कम होती है?
एसिडिटी कम करने के लिए कम एसिड और अल्कलाइन गुणों वाले फल खाने चाहिए। ऐसे फल पेट के एसिड को शांत करने में मदद करते हैं और जलन से राहत दिलाते हैं।एसिडिटी होने से शरीर में क्या होता है?
एसिडिटी होने पर पेट में ज्यादा एसिड बनता है, जो भोजन की नली में ऊपर की ओर चढ़ने लगता है। इसके कारण सीने और पेट में जलन, खट्टी डकारें, जी मिचलाना और ज्यादा गैस या भारीपन जैसी शारीरिक समस्याएं होती हैं।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Jun 29, 2026 18:52 IST
Modified By : Katyayani Tiwari Jun 29, 2026 18:52 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Shrey Sharma