आमतौर पर सोने की पोजीशन इसलिए मायने रखती है, ताकि गर्दन या पीठ में अकड़न पैदा न हो। क्या कभी आपने सोचा है कि सोने की सही पोजीशन पाचन बेहतर पाचन और ब्रीदिंग के लिए भी जरूरी हो सकती है? विशेषज्ञ बताते हैं कि सोने की पोजीशन से आपके स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ सकता है। आइए, मुंबई के परेल स्थित Gleneagles Hospitals में Senior Consultant Chest Physician, Bronchoscopists , Intensivist and Sleep Disorders specialist डॉ. हरीश चाफले और नई दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में लेप्रोस्कोपिक, लेजर और जनरल सर्जरी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. नीरज धमीजा से समझते हैं कि सोने की गलत पोजीशन सांस लेने और पाचन को कैसे प्रभावित करती है और इनके लिए किस पोजीनश में सोना बेहतर होता है?
सोने की पोजीशन सांस लेने की प्रक्रिया को कैसे प्रभावित करती है?
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डॉ. हरीश चाफले के मुताबिक, सोने की पोजीशन हमारे सांस लेने की प्रक्रिया को कई मायनों में प्रभावित करती है, जैसे-
पीठ के बल सोनाः 1998 में Sleep Medicine Reviews के रिव्यू में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, पीठ के बल सोना हमारे लिए सबसे खराब पोजिशन में से एक है। विशेषकर, जब कोई खर्राटे या ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया से पीड़ित हैं, तो सांस लेने के लिहाज से यह सबसे खराब पोजीशन है। इस पोजिशन में लेटने से गुरुत्वाकर्षण जीभ और गले के कोमल टिश्यूज को पीछे की तरफ खींचता है, जिससे सांस की नली सिकुड़ या पूरी तरह बंद हो सकती है।
करवट लेकर सोनाः Harvard Health Publishing पब्लिशिंग के अनुसार, सोने के लिए इसे सबसे अच्छी पोजीशन माना जाता है। खासकर, ब्रीदिंग प्राॅब्लम से जूझ रहे लोगों के लिए इसे फायदेमंद माना जाता है। यह एयरवेज को खुला रखने में मदद करती है, जिससे सोते हुए खर्राटे या अन्य समस्याएं नहीं होती हैं।
पेट के बल सोनाः कुछ लोग पेट के बल भी सोना पसंद करते हैं, लेकिन जो लोग खर्राटे लेते हैं, उनके लिए यह पोजीशन सही नहीं है। इस अवस्था में सोने से कभी-कभी सांस की नली को खुला रखने में मदद कर सकती है। हालांकि, फिजियोथेरेपिस्ट आमतौर पर इस पोजीशन में सोने की सलाह नहीं देते हैं, क्योंकि इसकी वजह से गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर भारी दबाव पड़ता है।
सोने की पोजीशन पाचन प्रक्रिया को कैसे प्रभावित करती है?
डॉ. नीरज धमीजा बताते हैं, "जिस तरह सोने की पोजीशन सांस लेने संबंधी समस्याओं को ट्रिगर कर सकती है, इसी तरह पाचन प्रक्रिया पर भी इसका गहरा असर पड़ता है।" साल 2023 में World J Clin Cases में प्रकाशित शोध पत्र के अनुसार, बाईं करवट लेकर सोना एसिड रिफ्लक्स या पेट की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद है। दरअसल, यह रात के समय होने वाले एसिड रिफ्लक्स (रात में पेट का एसिड भोजन नली में वापस आना) को काफी हद तक कम करता है। शोध पत्र में आगे यह बात भी जोड़ी गई है कि दाईं करवट या पीठ के बल सोने की तुलना में बाईं करवट सोने से एसिड के बने रहने का समय और एसिड रिफ्लक्स के एपिसोड की संख्या काफी घट जाती है, जिससे मरीजों को रात में सीने में जलन से राहत मिलती है। इससे उनकी नींद पूरी हो जाती है और रोजमर्रा की जीवनशैली में भी सुधार होता है।
डॉक्टर की सलाह
अगर आपको किसी भी तरह की परेशानी है, जैसे सांस संबंधी समस्या या पाचन संबंधी परेशानियां, दोनों ही स्थिति में सोने की सही पोजीशन मायने रखती है। हालांकि, आपको यह ध्यान रखना है कि अगर परेशानी गंभीर है, तो बेहतर है कि आप अपना इलाज करवाएं। सोने की पोजीशन को किसी तरह से भी समस्या का समाधान न समझें। इसके विपरीत परेशानी हो, तुरंत डॉक्टर से अपना इलाज करवाएं। यह भी याद रखें कि दोनों परेशानियां भिन्न हैं और दोनों के लिए एक्सपर्ट भी अलग हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, कहने की बात यह है कि सोने की पोजीशन आपकी सांस संबंधी समस्या और डाइजेशन को गहराई तक प्रभावित करती है। हालांकि, अगर आपको पहले से ही पाचन संबंधी समस्या है, तो उसका ट्रीटमेंट करवाएं। इसी तरह ब्रीदिंग प्राॅब्लम होने पर भी डाॅक्टर से बात किया जाना जरूरी है। हां, सोने की सही पोजीशन आपकी समस्या को काफी हद तक कम कर सकता है। वहीं, गलत पोजीशन में सोने से समस्या ट्रिगर भी हो सकती है। इन बातों को जरा भी नजरअंदाज न करें।
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FAQ
सीने में जलन से बचने के लिए किस करवट सोना चाहिए?
सीने में जलन होने पर बाईं करवट सोना सही होता है, क्योंकि यह पेट के एसिड को भोजन नली में आने से रोकता है।क्या पेट के बल सोने से शरीर पर कोई बुरा असर पड़ता है?
हां, पेट के बल सोने से गर्दन को एक तरफ घुमाना पड़ता है और रीढ़ की हड्डी का प्राकृतिक आकार बिगड़ जाता है, जिससे गर्दन और पीठ में गंभीर दर्द हो सकता है।
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Jul 01, 2026 20:08 IST
Modified By : Meera Tagore Jul 01, 2026 20:08 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Neeraj Dhamija