Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Prof Dr Smriti Agrawal , Professor & Gynaecologist - Department of Obstetrics & Gynaecology

महिलाओं में रात में नींद टूटने (स्लीप एपनिया) का कारण बन सकता है PMOS, डॉक्‍टर से समझें दोनों का संबंध 

स्लीप एपनिया नींद से संबंधि‍त समस्‍या है ज‍िसमें तेज खर्राटे, सोते समय सांस रुकना, हांफना या घुटन महसूस हो सकती है। डॉक्‍टर से जानें मह‍िलाओं में इसका PMOS से क्‍या संबंध है?

कई मह‍िलाएं जो PMOS (पूर्व नाम PCOS) का श‍िकार हैं, उन्‍हें अक्‍सर यह डर रहता है क‍ि कहीं इसका संबंध स्‍लीप एपन‍िया के साथ न हो। स्‍लीप एपन‍िया होने पर सोते समय सांस लेने में बार-बार रुकावट आती है। सोने के दौरान ऐसा कई बार हो सकता है। अगर क‍िसी मह‍िला को PMOS और स्‍लीप एपन‍िया, दोनों समस्‍याएं हैं, तो एकाग्रता में कमी आ सकती है, द‍िनचर्या प्रभाव‍ित हो सकती है क्‍योंक‍ि PMOS में हार्मोनल समस्‍याएं और स्‍लीप एपन‍िया के कारण नींद की कमी ज‍ब म‍िल जाती हैं, तो शरीर की गत‍िव‍िध‍ियों को बैलेंस करना मुश्‍क‍िल लगने लगता है। आइए समझते हैं PMOS और स्‍लीप एपन‍िया का क्‍या संबंध है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Smriti Agrawal, Professor & Gynaecologist At Department Of Obstetrics & Gynaecology, King George's Medical University, Lucknow से बात की।

साल 2024 में Frontiers In Endocrinology में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, PMOS से पीड़ि‍त लगभग 20.8% महिलाओं को ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया था। स्‍लीप एपन‍िया का संबंध मोटापा और मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जुड़ी समस्याओं से भी देखा गया।

PMOS और स्लीप एपनिया का क्‍या संबंध है?

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PMOS और स्‍लीप एपन‍िया का सीधा संबंध नहीं है, लेक‍िन इन दोनों स्‍थ‍िति‍यों के जोख‍िम‍ म‍िलते-जुलते हैं। PMOS में मह‍िलाओं को अक्‍सर वजन बढ़ने की समस्‍या होती है और वजन बढ़ने के कारण स्‍लीप एपन‍िया जैसी बीमार‍ियां हो सकती हैं। जब शरीर में फैट खासकर गर्दन और ऊपरी शरीर के भाग में फैट जमा हो जाता है, तो नींद के दौरान सांस की नली को प्रभाव‍ित करता है। इससे स्‍लीप एपन‍िया का खतरा बढ़ सकता है। हालांक‍ि, सामान्‍य वजन वाली मह‍िलाओं को भी स्‍लीप एपन‍िया हो सकता है। कई स्‍टडीज में इसके पीछे हार्मोनल और मेटाबॉल‍िक कारक को ज‍िम्‍मेदार बताया गया है।

Mayo Clinic के मुताब‍िक, PMOS और स्‍लीप एपनि‍या के बीच संबंध हो सकता है। एपन‍िया एक नींद से संबंध‍ित समस्‍या है ज‍िसमें सोते समय बार-बार सांस लेने में रुकावट आती है ज‍िससे नींद बार-बार टूट सकती है और ऑक्‍सीजन लेवल प्रभाव‍ित हो सकता है और यह समस्‍या PMOS में हो सकती है क्‍योंक‍ि इस दौरान शरीर में हार्माेनल बदलाव के कारण वजन बढ़ता है। पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) को पहले पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) कहा जाता था।

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PMOS और स्लीप एपनिया में वेट मैनेजमेंट जरूरी है

PMOS और स्‍लीप एपन‍िया जैसी बीमार‍ियों में वेट लॉस करना जरूरी है। Mayo Clinic के मुताब‍िक, अगर आप 5% भी वजन कम करेंगी, तो PMOS के लक्षणों को सुधारने में मदद म‍िल सकती है। इसके साथ ही वेट लॉस के ल‍िए पोर्शन कंट्रोल और कैलोरी इंटेक को सीमि‍त रखने का प्रयास करें। डाइट में प्रोटीन, फाइबर, प्रोबायोटि‍क्‍स र‍िच फूड्स को शाम‍िल करें ज‍िससे पाचन को सपोर्ट म‍िले और वजन कंट्रोल करने में आसानी हो।

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PMOS और स्लीप एपनिया के लक्षणों को कैसे कंट्रोल करें?

  • PMOS और स्लीप एपनिया में एक्‍सरसाइज को रूटीन में जरूर शाम‍िल करें। हफ्ते में कम से कम 150 म‍िनट एक्‍सरसाइज करना चाह‍िए। एक्‍सरसाइज करने से एंड्रोजन हार्मोन के स्‍तर को कंट्रोल करने और ओव्‍यूलेशन को बेहतर बनाने में मदद म‍िल सकती है।
  • PMOS और स्लीप एपनिया जैसी कंडीशन में खुद से दवाएं लेने से बचें। इससे लक्षण कम होने के बजाय बढ़ सकते हैं।
  • सोने का समय तय करें। रोज एक ही तय समय पर सोने और जागने का प्रयास करें। नींद पूरी होगी, तो हार्मोनल हेल्‍थ भी बेहतर होगी और स्लीप एपन‍िया के लक्षण भी कंट्रोल हो सकते हैं।
  • PMOS में मेंटल हेल्‍थ पर बुरा असर पड़ सकता है ज‍िससे नींद प्रभाव‍ित होती है और स्‍लीप एपन‍िया के लक्षण बढ़ सकते हैं। इससे बचने के ल‍िए स्‍ट्रेस मैनेज करें। डीप ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज और योग की मदद लें।

डॉक्टर से संपर्क कब करें?

  • PMOS के साथ तेज खर्राटे आते हैं।
  • सोते समय सांस में रुकावट ओती है।
  • रात में हांफकर नींद खुलती है।
  • नींद पूरी नहीं होती है या स‍िर दर्द रहता है, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें।

न‍िष्‍कर्ष:

PMOS और स्‍लीप एपन‍िया का सीधा संबंध नहीं है, लेक‍िन PMOS में वजन बढ़ने का कनेक्‍शन अक्‍सर स्‍लीप एपन‍िया के साथ भी देखा जाता है क्‍योंक‍ि वजन बढ़ने से स्‍लीप एपन‍िया होने की आशंका बढ़ जाती है। PMOS और स्‍लीप एपन‍िया में वेट मैनेटमेंट जरूरी होता है क्‍योंक‍ि यह दोनों के लक्षणों को कंट्रोल कर सकता है। इसके अलावा सोने का समय तय करना, एक्‍सरसाइज और स्‍ट्रेस मैनेजमेंट से भी राहत म‍िल सकती है।

image credit: magnific

FAQ

  • स्‍लीप एपन‍िया की जांच कैसे होती है?

    स्‍लीप एपन‍िया की जांच के ल‍िए स्‍लीप स्‍टडी या पॉलीसोम्नोग्राफी की जाती है। इसमें नींद के दौरान सांस, ऑक्‍सीजन लेवल और अन्‍य संकेतों की जांच की जाती है।
  • क्‍या पतले लोगों को भी स्‍लीप एपन‍िया हो सकता है?

    हां, स्‍लीप एपन‍िया केवल मोटे लोगों को ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। इसके पीछे उम्र, आनुवंश‍िक कारण और अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं भी हो सकती हैं।

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Disclaimer

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 25, 2026 14:51 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
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