Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

नींद के दौरान खर्राटों और सांस की परेशानी? आपकी मदद कर सकते हैं ये 5 फूड्स

ऑब्‍सट्रेक्‍ट‍िव स्‍लीप एपनिया (OSA) के कारण नींद में खर्राटों और सांस की परेशानी होती है। इसे कम करने के ल‍िए कुछ आसान फूड्स की मदद ले सकते हैं जो वजन कंट्रोल करते हैं, सूजन कम करते हैं, शुगर लेवल कंट्रोल करते हैं ज‍िससे खर्राटों से न‍िजात पाने में मदद म‍िलती है। 

रात में तेज खर्राटे लेना या सोते समय सांस लेने में दिक्कत होना ऑब्‍सट्रेक्‍ट‍िव स्‍लीप एपनिया (Obstructive Sleep Apnea) का संकेत हो सकता है। यह समस्या सिर्फ नींद ही नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। कई बार खराब खानपान और बढ़ता वजन भी इस परेशानी को बढ़ा देते हैं। कुछ खास फूड्स शरीर में सूजन कम करने, वजन कंट्रोल रखने और बेहतर नींद में मदद कर सकते हैं। ऐसे पांच फूड्स के बारे में जानने के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

1. बेरीज और फल

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खर्राटों की समस्‍या को दूर करने के ल‍िए बेरीज और फलों का सेवन फायदेमंद माना जाता है। ज‍िन लोगों को ऑब्‍सट्रेक्‍ट‍िव स्‍लीप एपनिया (OSA) होता है, उनमें ऑक्‍सीडेट‍िव स्‍ट्रेस के कारण हार्ट ड‍िजीज, टाइप 2 डायब‍िटीज जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। बेरीज और फल खाने से ऑक्‍सीडेट‍िव स्‍ट्रेस घटता है।

2. नट्स

नींद के दौरान खर्राटों और सांस की परेशानी दूर करने के ल‍िए बादाम, प‍िस्‍ता, अखरोट जैसे मेवों का सेवन कर सकते हैंं। नट्स ऑक्‍सीडेट‍िव स्‍ट्रेस को घटाने, सूजन को कम करने, हार्ट की सेहत को बेहतर बनाने, वजन कंट्रोल करने और नींद की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करते हैं।

3. हरी पत्तेदार सब्‍ज‍ियां

हरी पत्तेदार सब्‍ज‍ियों में एंटीऑक्‍सीडेंट्स होते हैं ज‍िससे सूजन को कम करने में मदद म‍िलती है। सूजन कम होने से नींद के दौरान खर्राटों की समस्‍या को कम करने में मदद म‍िलती है।

4. लो फैट डेयरी प्रोडक्‍ट्स

ऑब्‍सट्रेक्‍ट‍िव स्‍लीप एपनिया को दूर करने के ल‍िए लो-फैट डेयरी प्रोडक्‍ट्स जैसे स्‍क‍िम्‍ड दही, दूध और कॉटेज चीज का सेवन कर सकते हैं। लो फैट डेयरी प्राेडक्‍ट्स से वजन कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है और स्‍लीप एपनिया के लक्षण कंट्रोल होते हैं।

5. होल ग्रेन्‍स

होल ग्रेन्‍स का ऑब्‍सट्रेक्‍ट‍िव स्‍लीप एपनिया से सीधा कनेक्‍शन नहीं है, लेक‍िन होल ग्रेन्‍स का सेवन करने से शुगर लेवल संतुल‍ित रहता है, इससे नींद अच्‍छी आती है और सूजन को कम करने में मदद म‍िलती है ज‍िससे खर्राटों की समस्‍या को दूर करने में मदद म‍िलती है।

न‍िष्‍कर्ष:

नींद के दौरान खर्राटों और सांस की परेशानी को दूर करने के ल‍िए बेरीज, फल, नट्स, हरी पत्तेदार सब्‍ज‍ियां, लो फैट डेयरी प्रोडक्‍ट्स, होल ग्रेन्‍स वगैरह का सेवन कर सकते हैं।

FAQ

  • ऑब्‍सट्रेक्‍ट‍िव स्‍लीप एपनिया में क्‍या न खाएं?

    र‍िफाइंड कार्ब्स, अल्‍कोहल, हाई फैट म‍िल्‍क और मीट, केला, कैफीन वगैरह का सेवन ऑब्‍सट्रेक्‍ट‍िव स्‍लीप एपनिया में नहीं करना चाह‍िए। इससे वजन बढ़ सकता है और खर्राटों की समस्‍या दूर करने में परेशानी हो सकती है। 
  • ऑब्‍सट्रेक्‍ट‍िव स्‍लीप एपनिया के लक्षण क्‍या हैं?

    तेज खर्राटे लेना, सोते समय सांस रुकना और रात में बार-बार नींद खुलना। इसके अलावा दिनभर थकान, सुबह सिरदर्द और नींद पूरी होने के बाद भी सुस्ती महसूस होना भी इसके संकेत हो सकते हैं।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 22, 2026 20:11 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 22, 2026 20:11 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Neha Mohan Sinha

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