Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Abhinav Gupta , Consultant Neurologist & Director - Neurology Bhav Neuro Centre, Ghaziabad

स्लीप एपनिया यानी सोते समय सांस की परेशानी से दिल की सेहत पर कैसे असर पड़ता है? जानें डॉक्टर से

स्लीप एपनिया में सोते समय सांस की परेशानी होती है, जो कि सीधे तौर पर ऑक्सीजन सप्लाई को बाधित करती है। इसकी वजह से हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है और हार्ट हेल्थ पर भी इसका बुरा असर देखने को मिलता है।

स्लीप एपनिया वह समस्या है, जिसमें सोते हुए व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत होती है। बार-बार सांस रुकती है और कुछ देर में सामान्य हो जाती है। ऐसे में शरीर और ब्रेन तक सही तरह से ऑक्सीजन सप्लाई नहीं हो पाती है, जिससे व्यक्ति थकान, कमजोरी जैसी कई समस्याएं महसूस कर सकता है। यहां तक कि स्लीप एपनिया के कारण ब्लड प्रेशर और हार्ट संबंधी बीमारियां भी हो सकती हैं। यहां सवाल उठता है कि आखिर स्लीप एपनिया का हार्ट से क्या कनेक्शन है यानी यह हृदय संबंधी समस्याओं को कैसे ट्रिगर करती है? आइए, जानते हैं ग्रेटर नोएडा स्थित सर्वोदय अस्पताल में Director-Neurology डॉ. अभिनव गुप्ता से।

स्लीप एपनिया हृदय को कैसे प्रभावित करता है?

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स्लीप एपनिया में मरीज अक्सर सोते समय रुक-रुक कर सांस लेता है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन सप्लाई कम हो जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर स्लीप एपनिया हृदय स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है? Harvard Health Publishing के अनुसार, स्लीप एपनिया के कारण शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिर जाता है। ऐसे में शरीर एपिनेफ्रीन (जिसे एड्रेनालिन भी कहा जाता है) नामक एक स्ट्रेस हार्मोन बनाने लगता है। इसमें बढ़ोतरी के कारण हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है। इसमें आगे बताया गया है कि अगर ब्लड प्रेशर में बार-बार उछाल आता है, तो इससे रक्त वाहिकाओं को नुकसान हो सकता है और नींद में आने वाली यह रुकावट हानिकारक एलडीएल कोलेस्ट्रॉल और अन्य ब्लड फैट्स के स्तर को भी बढ़ा सकती है। ऐसे में नसों में ब्लॉकेज हो सकती है, जिससे दिल की मांसपेशियों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। इस तरह देखा जाए, तो स्लीप एपनिया के मरीजों में स्वस्थ लोगों की तुलना में दिल का दौरा पड़ने की संभावना ज्यादा होती है।

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स्लीप एपनिया में होने वाली हार्ट से जुड़ी समस्याएं

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स्लीप एपनिया के कारण व्यक्ति को हार्ट से जुड़ी कई तरह की समस्याएं होने का जोखिम होता है, जैसे-

हाई ब्लड प्रेशर का रिस्क

स्लीप एपनिया के कारण रात के समय ब्लड प्रेशर का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसा खासकर उन लोगों के साथ होता है, जिन पर दवाएं विशेष असर नहीं करती हैं। दरसअल, सोने के दौरान बार-बार सांस रुकने के कारण ऑक्सीजन सप्लाई पर असर पड़ता है, जिससे शरीर में तनाव क्रिएट होता है। ऐसे में एड्रेनालिन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि रात को सोते समय ब्लड प्रेशर का स्तर कम होना चाहिए, लेकिन वह बढ़ा रहता है।

हार्ट अटैक का जोखिम

जो लोग लंबे समय तक स्लीप एपनिया का इलाज नहीं कराते हैं, उनमें हार्ट अटैक का रिस्क दोगुना हो जाता है। असल में, रात को अच्छी नींद नहीं मिलने के कारण नसों में फैट यानी प्लाक बढ़ने लगता है। वहीं, ब्लड प्रेशर भी लगातार हाई रहता है। हाई ब्लड प्रेशर और नसों में ब्लाॅकेज मिलकर हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा देते हैं।

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दिल की धड़कन का अनियमित होना

स्लीप एपनिया के मरीजों में भी अनियमित दिल की धड़कन जैसी समस्या देखने को मिलती है। दरअसल, ठीक से नहीं सोने के कारण दिल की मांसपेशियों पर लगातार दबाव बना रहता है, जिससे दिल की धड़कन के खतरनाक रूप से बिगड़ने की संभावना बढ़ जाती है। 

हार्ट फेलियर का खतरा

समस्या कोई भी हो, हार्ट को लगातार ब्लड पंप करना पड़ता है। ऐसे ही स्लीप एपनिया में सांस की नली में रुकावट होने के बाद भी दिल लगातार ब्लड पंप करता है। इससे शरीर में एक खास किस्म का तनाव पैदा होता है। अगर समस्या पुरानी हो जाए, तो इसकी वजह से दिल की मांसपेशियां मोटी और कमजोर हो जाती हैं। हार्ट के लिए ब्लड पंप मुश्किल हो जाता है और यह कंजेस्टिव हार्ट फेलियर का कारण बनता है।

स्ट्रोक

स्लीप एपनिया के मरीजों में स्ट्रोक का रिस्क भी काफी ज्यादा होता है। साल 2025 में मेडिकल जर्नल Chest में प्रकाशित आर्टिकल के अनुसार,, स्लीप एपनिया और स्ट्रोक का गहरा संबंध है। इसका मुख्य कारण ब्लड प्रेशर में बार-बार उतार-चढ़ाव आना, जिससे शरीर के अंदरूनी हिस्सों में सूजन का बढ़ना और खून के थक्के जमने की बढ़ी हुई प्रवृत्ति। ये तमाम कारण मिलकर दिमाग की नसों को ब्लाॅक करते हैं, जिससे स्ट्रोक का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। 

स्लीप एपनिया की कंडीशन को कैसे मैनेज करें?

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डॉ. अभिनव गुप्ता कहते हैं कि ध्यान रखें कि स्लीप एपनिया एक मेडिकल कंडीशन है। इसलिए, अगर किसी को स्लीप एपनिया है, तो वह तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और अपना ट्रीटमेंट करवाएं। हालांकि, स्लीप एपनिया को मैनेज करने के लिए जीवनशैली में कुछ अच्छी आदतों को अपनाया जा सकता है, जैसे-

  • अपने वजन को बढ़ने न दें। मोटापे के कारण स्लीप एपनिया जैसी समस्या बढ़ जाती है। अगर वजन ज्यादा है, तो उसे कम करने पर फोकस करें।
  • सोते हुए अपनी पोजिशन का ध्यान रखा जा सकता है। एक ओर करवट लेकर सोने से सांस लेने की प्रक्रिया में सुधार होता है।
  • सोने से पहले शराब का सेवन बिल्कुल न करें। इनमें ऐसे तत्व होते हैं, जो अच्छी और गहरी नींद लेने से रोकते हैं। साथ ही, सांस लेने की प्रक्रिया को और कठिन बना देते हैं।
  • नियमित रूप से एक्सरसाइज करें। स्लीप एपनिया के मरीजों के लिए यह बहुत फायदेमंद होता है। इससे मसल्स टोन होती हैं और कार्डियोवास्कुलर हेल्थ में सुधार होता है।

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निष्कर्ष

स्लीप एपनिया के मरीजों को हार्ट से संबंधित समस्या का जोखिम बहुत ज्यादा होता है। इसलिए, उन्हें अपनी सेहत के साथ जरा भी खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। स्लीप एपनिया होने पर तुरंत डॉक्टर से अपनी जांच करवाएं और जीवनशैली में जरूरी बदलाव करें, ताकि समस्या को कुछ हद तक कम किया जा सके।

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FAQ

  • स्लीप एपनिया की सटीक जांच के लिए कौन-से टेस्ट करवाए जाते हैं?

    स्लीप एपनिया को कंफर्म करने के लिए पॉलीसोम्नोग्राफी (Polysomnography) टेस्ट किया जाता है। इसमें मरीज को एक रात स्लीप लैब में सुलाकर उसकी हृदय गति, ऑक्सीजन स्तर और मस्तिष्क की तरंगों को मापा जाता है।
  • क्या खर्राटे लेने का मतलब हमेशा स्लीप एपनिया होता है?

    बार-बार खर्राटे लेना स्लीप एपनिया का सबसे आम संकेत है, लेकिन हर खर्राटे लेने वाले व्यक्ति को यह बीमारी हो, यह जरूरी नहीं है।

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Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jul 13, 2026 08:45 IST

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