इंटरमिटेंट फास्टिंग आजकल बेहद पॉपुलर हो रही है। इससे वजन घटाने में मदद मिलती है और इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार होता है इसलिए लोग यह समझते हैं कि यह हार्मोनल हेल्थ के लिए भी फायदेमंद है खासकर PMOS की स्थिति में जब पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। Mayo Clinic के मुताबिक, इंटरमिटेंट फास्टिंग की मदद से बीपी कंट्रोल होता है, कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल होता है और क्रॉनिक सूजन को कम करने में मदद मिलती है। कई स्टडीज में बताया गया है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग, हार्मोनल हेल्थ को सपोर्ट करने में भी मदद करती है। जानते हैं क्या यह पीएमओएस से पीड़ित महिलाओं के लिए भी फायदेमंद है? बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Tanima Singhal, Prenatal Care Expert, Gynaecologist & Lactation Expert, Ma-Si Care Clinic, Lucknow से बात की।
क्या PMOS में इंटरमिटेंट फास्टिंग हार्मोनल हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकती है?

Gynaecologist Dr. Tanima Singhal ने कहा ''PMOS के हर केस में इंटरमिटेंट फास्टिंग से मदद मिले, ऐसा जरूरी नहीं है। हालांकि, अगर PMOS का कारण मोटापा है और महिला का वजन ज्यादा है, तो इंटरमिटेंट फास्टिंग से वेट लॉस करने में मदद मिल सकती है। साथ ही इंसुलिन रेजिस्टेंस से सुधार हो सकता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस में सुधार होने से मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।''
क्या कहती हैं स्टडीज?
साल 2022 में Nutrients नामक जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, इंटरमिटेंट फास्टिंग गट माइक्रोबायोम और जैविक घड़ी में सुधार होता है जिससे हार्मोन्स पर अच्छा असर पड़ता है। इंटरमिटेंट फास्टिंग की मदद से वजन, मेटाबॉलिक स्वास्थ्य और कुछ हार्मोनल एवं प्रजनन संबंधित लक्षणों में सुधार देखा गया है।
साल 2025 में Food Science & Nutrition नामक जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, इंटरमिटेंट फास्टिंग की मदद से लेप्टिन, घ्रेलिन, इंसुलिन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन्स पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। स्टडी में यह भी बताया गया है कि लेप्टिन और घ्रेलिन जैसे हार्मोन्स भूख को कंट्रोल करते हैं जिससे PMOS में हार्मोनल हेल्थ को सपोर्ट मिल सकता है।
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इंटरमिटेंट फास्टिंग से हार्मोनल असंतुलन भी हो सकता है
Dr. Tanima Singhal ने बताया कि इंटरमिटेंट फास्टिंग में लो कैलोरी, पोषक तत्वों की कमी या फास्टिंग विंडो ज्यादा होने से शुगर लेवल असंतुलित हो सकता है और लंबे समय में इसके कारण हार्मोनल असंतुलन हो सकता है। इससे ओव्यूलेशन प्रभावित हो सकते हैं। कुछ महिलाओं में पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं। साथ ही अगर आप गर्भवती हैं, ब्रेस्टफीडिंग मदर हैं या ईटिंग डिसऑर्डर है, तो इंटरमिटेंट फास्टिंग से बचना चाहिए।
PMOS में किन चीजों का सेवन करें?
अमरीकी चिकित्सा संस्थान Johns Hopkins Medicine के मुताबिक, हेल्दी फैट्स युक्त फूड्स जैसे ऑलिव ऑयल, नट्स, बीज, प्रोटीन युक्त फूड्स, पत्तेदार साग जैसे पालक या केल, टमाटर, मशरूम, शिमला मिर्च, साबुत अनाज जैसे ब्राउन राइस, जौ, ज्वार, क्विनोआ, रोल्ड ओट्स वगैरह को चुन सकते हैं। हाइड्रेशन के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, बिना चीनी वाली ड्रिंक्स लें और कैफीन युक्त पेय पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में करें।
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PMOS में किन चीजों के सेवन से बचें?
- ट्रांस फैट
- सैचुरेटेड फैट
- प्रोसेस्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड
- ज्यादा चीनी वाली चीजें
- ज्यादा नमक वाले फूड्स
- रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट
PMOS में ये टेस्ट किए जाते हैं
- ब्लड शुगर और HbA1c
- लिपिड प्रोफाइल
- थायराइड टेस्ट
- हार्मोन टेस्ट
- अल्ट्रासाउंड
- जरूरत के अनुसार डॉक्टर AMH, प्रोलैक्टिन या अन्य हार्मोन की जांच भी सलाह दे सकते हैं।
PMOS में प्रोजेस्टेरोन दवा की मदद ली जाती है
Dr. Tanima Singhal ने बताया कि जिन महिलाओं को लंबे समय तक पीरियड्स नहीं आते, उनमें गर्भाशय की अंदरूनी परत (Endometrium) को सुरक्षित रखने के लिए डॉक्टर प्रोजेस्टेरोन दवा दी जा सकती है। वहीं अगर गर्भधारण में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर एग बनने और रिलीज होने (Ovulation) में मदद करने वाली दवाएं दे सकते हैं। PMOS में कई महिलाओं को इंसुलिन रेजिस्टेंस के लिए शुगर कंट्रोल करने वाली दवा मेटफॉर्मिन भी दी जाती है। साथ ही मरीजों को वेट लॉस करने की सलाह दी जाती है। वजन में 5 से 10% कमी भी कुछ महिलाओं में पीरियड्स और इंसुलिन रेजिस्टेंस में सुधार ला सकती है।
निष्कर्ष:
इंटरमिटेंट फास्टिंग से PMOS में हार्मोनल हेल्थ को सुधारने में मदद मिल सकती है, लेकिन इसे इलाज के तौर पर देखा नहीं जा सकता। कुछ मामलों में, इंटरमिटेंट फास्टिंग से लो शुगर लेवल या एनर्जी लेवल में बदलाव से हार्मोन्स प्रभावित हो सकते हैं इसलिए PMOS में हार्मोनल हेल्थ को सुधारने के लिए डॉक्टर से संपर्क करें। PMOS में कारण के मुताबिक, प्रोजेस्टेरोन, ओव्यूलेशन के लिए दवा, शुगर कंट्रोल के लिए मेटफॉर्मिन जैसी दवाएं दी सकती हैं।
FAQ
PMOS में कौन से हार्मोन्स प्रभावित होते हैं?
PMOS में LH हार्मोन, एंड्रोजन, इंसुलिन, प्रोजेस्टेरोन हार्मोन में बदलाव देखा जा सकता है और शरीर में इनका लेवल प्रभावित हो सकता है।क्या PMOS में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का लेवल बढ़ सकता है?
हां, कुछ महिलाओं में एंड्रोजन टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का लेवल बढ़ सकता है। इससे मुंहासे और चेहरे पर अनचाहे बाल की समस्या हो सकती है।
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Jul 28, 2026 19:57 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Jul 28, 2026 19:57 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Tanima Singhal