Fri Oct 9, 2026 | 01:27 AM IST

Medically Reviewed by Dr Sharad Malhotra , Senior Consultant & Director – Gastroenterology, Hepatology & Therapeutic Endoscopy

7 फूड्स जिनके कारण बढ़ सकती है GERD की समस्या, डॉक्टर ने दी सावधानी बरतने की सलाह

कुछ रोजाना खाए जाने वाले फूड्स जैसे तला-भुना, मसालेदार खाना, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक बिना पता चले जीईआरडी के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। यहां जानिए किन चीजों से बचना चाहिए।
7 फूड्स जिनके कारण बढ़ सकती है GERD की समस्या, डॉक्टर ने दी सावधानी बरतने की सलाह7 फूड्स जिनके कारण बढ़ सकती है GERD की समस्या, डॉक्टर ने दी सावधानी बरतने की सलाह

आजकल की मॉडर्न लाइफस्टाइल में सीने में जलन, खट्टी डकार और गले में जलन जैसी समस्याएं इतनी आम हो गई हैं कि कई लोग इन्हें सामान्य एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन अगर ये लक्षण बार-बार दिखाई दें, खासकर भोजन करने के बाद या रात में सोते समय, तो यह गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) का संकेत हो सकता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें पेट का एसिड बार-बार भोजन नली में वापस आने लगता है, जिससे न केवल डाइजेशन प्रभावित होता है बल्कि लंबे समय तक इलाज न मिलने पर भोजन नली में सूजन और अन्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। आकाश हेल्थकेयर के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं थेराप्यूटिक एंडोस्कोपी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट और डायरेक्टर, डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, हर व्यक्ति के शरीर का रिएक्शन अलग हो सकता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि कौन-से फूड्स आपके लिए ट्रिगर का काम करते हैं और किन चीजों का सेवन सीमित करने से आपको राहत मिल सकती है।

कौन से फूड्स GERD को बढ़ाते हैं?

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, हमारे रोज के खान-पान में कुछ फूड्स ऐसे हैं जो धीरे-धीरे GERD के लक्षण को और गंभीर बना सकते हैं। यदि आपको बार-बार एसिडिटी या एसिड रिफ्लक्स की शिकायत रहती है, तो इन फूड्स का सेवन सीमित करना फायदेमंद हो सकता है।

1. तले हुए ज्यादा फैट वाले फूड्स

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं कि फ्रेंच फ्राइज, समोसा, कचौड़ी, पकोड़े और अन्य डीप फ्राइड फूड्स में फैट की मात्रा ज्यादा होती है। ऐसे फूड्स पेट को लंबे समय तक खाली नहीं होने देते हैं, जिससे एसिड बनने की संभावना बढ़ जाती है जिससे एसिड ऊपर की ओर आने लगता है। डॉक्टर शरद मल्होत्रा सलाह देते हैं कि ऐसे फूड्स से परहेज करना ज्यादा बेहतर होता है।

2. मसालेदार भोजन

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं कि रोजाना ज्यादा मिर्च और मसालों से बने भोजन कई लोगों में एसिडिटी और सीने में जलन को ट्रिगर कर सकते हैं। हर व्यक्ति पर इसका प्रभाव अलग हो सकता है, लेकिन जिन लोगों को जीईआरडी की समस्या रहती है, उन्हें बहुत ज्यादा तीखा भोजन खाने से बचना चाहिए।

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3. चॉकलेट

चॉकलेट में कैफीन और फैट मौजूद होता है। ये तत्व लोअर इसोफेगल स्फिंक्टर (LES) को रिलैक्स कर सकते हैं, जिससे पेट का एसिड भोजन नली में वापस आने लगता है। यदि आपको अक्सर रिफ्लक्स होता है, तो चॉकलेट का सेवन सीमित करना बेहतर हो सकता है।

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4. कॉफी और कैफीन ड्रिंक्स

कॉफी, एनर्जी ड्रिंक्स और कुछ सॉफ्ट ड्रिंक्स में मौजूद कैफीन एसिड रिफ्लक्स के लक्षणों को बढ़ा सकता है। डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं कि जिन लोगों को बार-बार सीने में जलन होती है, उन्हें कैफीन का सेवन कम करने की सलाह दी जाती है।

Foods That Worsen GERDFoods That Worsen GERD

5. टमाटर और टमाटर से बनी चीजें

टमाटर नेचुरल रूप से अम्लीय यानी एसिडिक होता है। टमाटर की चटनी, केचप और टमाटर से बनी ग्रेवी कई लोगों में एसिडिटी की समस्या बढ़ा सकती है। यदि टमाटर खाने के बाद जलन महसूस होती है, तो इसका सेवन सीमित करना उचित रहेगा।

6. खट्टे फल

संतरा, मौसंबी और ग्रेपफ्रूट जैसे खट्टे फलों में साइट्रिक एसिड की मात्रा ज्यादा होती है। ये फल सामान्य रूप से सेहत के लिए फायदेमंद हैं, लेकिन जीईआरडी से पीड़ित कुछ लोगों में ये सीने में जलन और एसिड रिफ्लक्स को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में अपने शरीर के रिएक्शन को समझते हुए इनका सेवन करें।

7. कार्बोनेटेड ड्रिंक्स

सोडा और अन्य गैस वाली ड्रिंक्स पेट में गैस और दबाव बढ़ा सकती हैं। इससे एसिड के ऊपर आने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा इनमें अक्सर चीनी और कैफीन भी मौजूद होती है, जो समस्या को और बढ़ा सकती है। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. शरद मल्होत्रा सलाह देते हैं कि एसिड रिफ्लक्स की समस्या से जूझ रहे लोगों को कार्बोनेटेड ड्रिंक्स से दूरी बनानी चाहिए।

जीईआरडी से बचाव के लिए क्या करें?

डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, केवल फूड्स से परहेज करना ही पर्याप्त नहीं है। भोजन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में करें, रात का खाना सोने से कम से कम 23 घंटे पहले खाएं, भोजन के तुरंत बाद लेटने से बचें, हेल्दी वजन बनाए रखें और धूम्रपान या ज्यादा शराब के सेवन से दूरी रखें। यदि लक्षण लगातार बने रहें या बार-बार दवाइयों की जरूरत पड़े, तो गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी है।

साल 2010 में Oxford Academic के Family Practice Journal में प्रकाशित जर्नल आर्टिकल के अनुसार, गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज के मरीजों के लक्षणों पर उनकी रोजमर्रा की लाइफस्टाइल का गहरा प्रभाव पड़ता है। अलग-अलग मरीजों पर खान-पान और आदतों का असर भी अलग-अलग देखा गया। मरीज अक्सर अपने लक्षणों के मुख्य कारणों जैसे सही ट्रिगर फूड्स, देर से खाना या थकान को खुद सही तरीके से पहचान नहीं पाते हैं और अपनी आदतों में जरूरी सुधार भी नहीं कर पाते हैं।

इसलिए, केवल दवाइयों पर निर्भर रहने के बजाय मरीजों को एक खास व्यवहार परिवर्तन कार्यक्रम (Behaviour Change Intervention) की जरूरत है। यह कार्यक्रम उन्हें उनके व्यक्तिगत ट्रिगर्स को समझने और लाइफस्टाइल में सही बदलाव करने में मदद कर सकता है, जिससे बिना ज्यादा दवाओं के एसिडिटी के लक्षणों में बड़ा सुधार लाया जा सके।

निष्कर्ष

जीईआरडी एक सामान्य लेकिन नजरअंदाज न की जाने वाली समस्या है। सही खानपान और लाइफस्टाइल अपनाकर इसके लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। यदि कुछ खास फूड्स खाने के बाद बार-बार सीने में जलन, खट्टी डकार या गले में जलन महसूस होती है, तो उन्हें अपनी डाइट से सीमित करना समझदारी होगी।

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FAQ

  • क्या GERD पूरी तरह ठीक हो सकता है?

    कई मामलों में सही लाइफस्टाइल, बैलेंस डाइट और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज से लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है। यह समस्या ठीक होगी या नहीं यह व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है।
  • क्या देर रात खाने से एसिड रिफ्लक्स हो सकता है?

    देर रात खाने से एसिड रिफ्लक्स की समस्या हो सकती है, इससे बचने के लिए खाना हमेशा सोने से 2-3 घंटे पहले खाएं।
  • क्या दूध पीने से एसिड रिफ्लक्स ठीक हो जाता है?

    दूध से कुछ लोगों को थोड़ी देर के लिए राहत मिल सकती है, लेकिन फुल फैट दूध कई लोगों में लक्षण बढ़ा भी सकता है।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 27, 2026 19:30 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Sharad Malhotra