Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr KS Somasekhar Rao , Senior Consultant Gastroenterologist | Hepatologist | Advanced Therapeutic Endoscopist

बच्चे के पेट दर्द को न करें नजरअंदाज, ये गंभीर संकेत दिखें तो तुरंत जाएं डॉक्टर के पास

बच्चों में पेट दर्द हमेशा गैस या अपच की वजह से नहीं होता। कुछ मामलों में यह फूड पॉइजनिंग, इंफेक्शन या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत भी हो सकता है। जानें किन लक्षणों के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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बच्‍चों में पेट दर्द एक कॉमन समस्‍या है। बच्‍चों का पाचन तंत्र, बड़ों के मुकाबले कमजोर होता है और अक्‍सर जंक फूड्स या भारी भोजन खा लेने के कारण उन्‍हें गैस या अपच की समस्‍या होती है। माता-प‍िता भी इसे हल्‍के में लेते हैं और डॉक्‍टर की सलाह ल‍िए बगैर बच्‍चों को दवा दे देते हैं। कई बार घरेलू नुस्‍खे भी अपनाते हैं। इससे लक्षण कुछ समय के ल‍िए ठीक भी हो जाते हैं, लेक‍िन शरीर में जन्‍म ले रही बीमारी का पता नहीं चल पाता है। कई बार इलाज में देरी से बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। इसल‍िए पेट में दर्द को सामान्य पेट की समस्‍या समझने की गलती न करें। अगर बच्‍चा पेट दर्द की श‍िकायत करता है, तो लक्षणों पर गौर करें। मल या उल्‍टी में ब्‍लड आना, कमजोरी या सुस्‍ती गंभीर बीमारी के लक्षण हो सकते हैं। जानें क‍िन लक्षणों को गंभीरता से लेना चाह‍िए और डॉक्‍टर से संपर्क कब करें? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. K. S. Somasekhar Rao, Senior Consultant Gastroenterologist, Hepatologist & Advanced Therapeutic Endoscopist At Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad से बात की।

बच्‍चे को पेट दर्द होने पर इन लक्षणों पर गौर करें

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साल 2017 में International Journal Of Contemporary Pediatrics में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, 2 से 15 साल की उम्र के 100 बच्‍चों में बार-बार होने वाले पेट दर्द का कारण पेट के परजीवी यानी पेट में मौजूद कीड़े थे। स्‍टडी के अनुसार, बार-बार होने वाले पेट दर्द को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और सही कारण जानने के लिए डॉक्‍टर से संपर्क करना चाह‍िए। अगर पेट दर्द के साथ ये लक्षण नजर आएं, तो देर क‍िए बगैर डॉक्‍टर से संपर्क करें-

1. लंबे समय तक पेट दर्द बना रहे

  • अगर पेट दर्द हो रहा हो और 24 घंटे से ज्‍यादा समय तक बना रहे।
  • पेट दर्द बार-बार हो रहा हो।
  • अगर दर्द एक हफ्ते या उससे ज्‍यादा समय तक बना रहे। भले ही दर्द आता-जाता हो।
  • अगर बच्‍चे को अचानक तेज पेट दर्द हो, पेट सख्‍त महसूस हो, तेज दर्द के कारण द‍िनचर्या प्रभाव‍ित हो या पेट में कोई चोट लगी हो, तो तुरंत डॉक्‍टर से मदद लें। यह किडनी स्टोन या पित्ताशय की समस्‍या हो सकती है।

2. पेट दर्द के साथ ये लक्षण तो नहीं हैं?

  • अगर बच्‍चे को 100.4°F से ज्‍यादा बुखार है, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें। यह वायरल या बैक्‍टीर‍ियल इंफेक्‍शन या आंतों का संक्रमण हो सकता है।
  • 12 घंटे से ज्‍यादा समय से उल्‍टी आ रही हो।
  • दो द‍िन से ज्‍यादा समय से दस्‍त हो रहे हों।
  • भूख में कमी हो।
  • ब‍िना वजह वजन घट रहा हो।
  • पेशाब करते समय जलन हो रही हो।

3. उल्‍टी या मल से ब्‍लड आना

Gastroenterologist, Hepatologist & Endoscopist Dr. K. S. Somasekhar Rao ने कहा ''अगर बच्‍चा खून की उल्‍टी कर रहा हो, मल से खून आ रहा हो खासकर गहरे रंग का, उल्‍टी के साथ मल त्‍याग करने में परेशानी हो, श‍िशु की उम्र 3 महीने से कम हो और उसे दस्‍त या उल्‍टी हो, सांस की तकलीफ हो, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें। यह क्रोहन डिजीज या गंभीर गंभीर गैस्ट्रोएंटेराइटिस हो सकता है।''

4. त्‍वचा में बदलाव हो

बच्‍चे की त्‍वचा में पीलापन नजर आए, अध‍िक पसीना आए, सुस्‍त हो जाए, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें।

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पेट दर्द किन बीमारियों का संकेत हो सकता है?

1. कब्‍ज

अगर बच्‍चे को पेट में दर्द के कारण पेट में भारीपन, मल त्‍याग में परेशानी, पेट फूलने जैसी श‍िकायत हो, तो यह कब्‍ज का लक्षण हो सकता है।

2. बदहजमी

ज्‍यादा तला-भुना या जल्‍दी-जल्‍दी खाने से पेट में गैस और बदहजमी हो सकती है ज‍िससे पेट में दर्द हो सकता है।

3. पेट का इंफेक्‍शन

Dr. K. S. Somasekhar Rao ने कहा ''कई बार बच्‍चे को वायरस, बैक्‍टीर‍िया या परजीवी संक्रमण के कारण पेट दर्द के साथ दस्‍त, उल्‍टी या बुखार हो, तो यह पेट और आंतों का इंफेक्‍शन हो सकता है।''

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4. फूड पॉइजनिंग

दूषित भोजन या पानी का सेवन करने से अचानक पेट दर्द, उल्टी और दस्त शुरू हो सकते हैं। इसे फूड पॉइजन‍िंग कहते हैं।

5. यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन

यूटीआई के कारण पेट के निचले हिस्से में दर्द, पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब आना और बुखार जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।

6. पेट में कीड़े

कुछ बच्चों में पेट के कीड़ों की वजह से पेट दर्द, भूख कम लगना, वजन न बढ़ना जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।

7. लैक्टोज इनटॉलरेंस या फूड एलर्जी

दूध या किसी खास चीज को पचाने में परेशानी होने पर पेट दर्द, गैस, पेट फूलना और दस्त हो सकते हैं।

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बच्‍चे को पेट दर्द होने पर ये गलत‍ियों न करें

  • डॉक्‍टर की सलाह के बगैर दवाएं न दें।
  • हर इंफेक्‍शन के ल‍िए एंटीबायोट‍िक देने की गलती न करें।
  • पेट पर जोर से मालिश या दबाव न डालें।
  • घरेलू नुस्खों पर पूरी तरह निर्भर न रहें, खासकर अगर दर्द 24 घंटे से ज्‍यादा समय तक बना रहे।
  • डिहाइड्रेशन को नजरअंदाज न करें।

न‍िष्‍कर्ष:

अगर बच्‍चे को पेट दर्द हो, तो उसे सामान्‍य समझकर नजरअंदाज न करें। अगर दर्द 24 घंटे से ज्‍यादा समय तक बना रहे, बार-बार पेट दर्द हो, 100.4°F से ज्‍यादा बुखार हो, उल्‍टी या मल त्‍याग में ब्‍लड आए, ज्‍यादा पसीना या त्‍वचा में पीलापन नजर आए, तो डॉक्‍टर से संपर्क करना न भूलें। बच्‍चे को अगर पेट दर्द है, तो इसके पीछे कब्‍ज, बदहजमी, पेट का इंफेक्‍शन, फूड पॉइजनिंग, यूटीआई, पेट में कीड़े, लैक्टोज इनटॉलरेंस या फूड एलर्जी हो सकती है।

FAQ

  • बच्‍चे को पेट दर्द होने पर कैसी डाइट दें?

    पेट दर्द में बच्‍चे को खिचड़ी, दही, केला, दल‍िया, सूप और जल्‍दी पचने वाली चीजें जैसे लौकी या तोरई दे सकते हैं।
  • क्या बच्‍चे में पेट दर्द अपेंडिसाइटिस का संकेत हो सकता है?

    हां, अगर दर्द पेट के दाह‍िने न‍िचले ह‍िस्‍से में और साथ में बुखार या उल्‍टी हो, तो बच्‍चे को अपेंडिसाइटिस की संभावना हो सकती है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 05, 2026 20:39 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr KS Somasekhar Rao

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