Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vighnesh Y , Sr. Consultant – General Medicine

बच्चों में फ्लू है बारिश के मौसम में आम, डॉक्टर से जानें इसके लक्षण, कारण और बचाव के उपाय

इन्फ्लुएंजा (Influenza) या फ्लू को सामान्‍य सर्दी-जुकाम समझने की गलती न करें। यह सामान्‍य कोल्‍ड से बहुत अलग है। अगर सावधानी न बरती जाए, तो लक्षण गंभीर हो सकते हैं। डॉक्‍टर से जानें बच्‍चों में फ्लू के लक्षण क्‍या हैं?

इन्फ्लुएंजा (Influenza) को आम भाषा में फ्लू कहा जाता है। यह एक तरह का वायरल इंफेक्‍शन है जो तेजी से एक इंसान से दूसरे में फैलता है। इन्फ्लुएंजा या फ्लू के पीछे इन्फ्लुएंजा ए और बी ज‍िम्‍मेदार माने जाते हैं। फ्लू का वायरस बड़ों से ज्‍यादा बच्‍चों को आसानी से अपना श‍िकार बना लेता है क्‍योंक‍ि बच्‍चों की इम्‍यून‍िटी कमजोर होती है। फ्लू होने पर बच्‍चों में बुखार, तेज कंपकंपी, सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण नजर आते हैं। फ्लू नाक, गले और श्वसन तंत्र पर बुरा असर डालता है। बच्‍चों को फ्लू के प्रकोप से बचाने के ल‍िए समझते हैं इसके लक्षण, कारण और बचाव के ल‍िए कौन से तरीके सुरक्ष‍ित हैं? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Vighnesh Y, Sr. Consultant General Physician At Yashoda Hospitals, Secunderabad से बात की।

बच्‍चों में फ्लू के लक्षण क्‍या हैं?

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  • 100°F या उससे तेज बुखार, ठंड लगना, स‍र्दी-जुकाम, गले में खराश फ्लू के आम लक्षण हैं।
  • फ्लू के कारण सूखी खांसी, गले में खराब, नाक बहना और स‍िर दर्द भी हो सकता है।
  • फ्लू की चपेट में आते ही बच्‍चे खाना कम कर देते हैं।
  • बच्‍चों को अध‍िक थकान और कमजोरी महसूस होती है।
  • छोटे बच्‍चे आपको सुस्‍त नजर आ सकते हैं।
  • बच्‍चों में गुस्‍सा और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है।
  • कुछ मामलों में बच्‍चों को उल्‍टी या दस्‍त की समस्‍या भी हो सकती है।

फ्लू के गंभीर पर‍िणाम क्‍या हैं?

Dr. Vighnesh Y ने बताया क‍ि अगर फ्लू का इलाज समय पर न हो, तो साइनस इंफेक्‍शन, कान में इंफेक्‍शन, अस्‍थमा ट्रि‍गर होना, न‍िमोन‍िया और दुर्लभ मामलों में सांस की तकलीफ हो सकती है। साल 2021 में Journal Of Clinical And Translational Research में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, छोटे बच्‍चों में फ्लू गंभीर रूप ले सकता है ज‍िससे न‍िमोनि‍या का खतरा होता है और हॉस्‍प‍िटल में भर्ती करने की नौबत भी आ सकती है। स्‍टडी में यह भी बताया गया है क‍ि 5 साल और 2 साल से कम उम्र के बच्‍चों को क्रिटिकल केयर की जरूरत पड़ सकती है।

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क‍िन बच्‍चों को फ्लू का खतरा ज्‍यादा होता है?

कमजोर इम्‍यून‍िटी वाले बच्‍चे, जन्‍मजात बीमार‍ियों के साथ पैदा हुए बच्‍चे, पांच साल से कम उम्र के बच्‍चे और ज‍िन बच्‍चों को फ्लू शॉट नहीं लगा हो, उनमें फ्लू का वायरस जल्‍दी फैल सकता है। रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के मुताब‍िक, 5 साल से कम उम्र के बच्‍चों में फ्लू का खतरा ज्‍यादा होता है। साथ ही जो बच्‍चे दो वर्ष से कम उम्र के हैं और ज‍िन्‍हें क्रॉन‍िक हेल्‍थ कंडीशन जैसे डायब‍िटीज या अस्‍थमा है, उनमें भी फ्लू होने का खतरा ज्‍यादा हो सकता है।

बच्चों में फ्लू होने के क्‍या कारण हैं?

  • बड़ों के मुकाबले, बच्‍चों की इम्‍यून‍िटी इतनी व‍िकस‍ित और मजबूत नहीं होती है ज‍िस कारण से वे इंफेक्‍शन की चपेट में जल्‍दी आ जाते हैं। इस वजह से उन्‍हें जल्‍दी फ्लू हो सकता है।
  • अगर घर में कि‍सी व्‍यक्‍त‍ि को फ्लू है, तो बच्‍चे जल्‍दी बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। खांसने या छींकने से न‍िकलने वाली बूंदें तेजी से अन्‍य लोगों को संक्रम‍ित कर सकती हैं।
  • बच्‍चे अपने हाईजीन का ख्‍याल खुद नहीं रख पाते हैं ज‍िसके कारण इंफेक्‍शन की चपेट में जल्‍दी आ जाते हैं।
  • ब‍िना हाथ साफ क‍िए बार-बार आंख, मुंह या नाक छूने से फ्लू का खतरा बढ़ सकता है।

बच्चों को फ्लू के प्रकोप से कैसे बचाएं?

  • बच्‍चों को मॉनसून के सीजन में पब्‍ल‍िक प्‍लेस पर लेकर न जाएं। भीड़ में बच्‍चे जल्‍दी इंफेक्‍शन की चपेट में आ सकते हैं।
  • बच्‍चों को मॉनसून में ज्‍यादा से ज्‍यादा तरल पदार्थ दें जैसे हेल्‍दी जूस, दूध, सूप वगैरह। इससे इंफेक्‍शन यूर‍िन के जर‍िए शरीर से बाहर न‍िकल जाएगा।
  • शरीर की इम्‍यून‍िटी बढ़ाकर बच्‍चे को इंफेक्‍शन से बचा सकते हैं। अच्‍छी इम्‍यून‍िटी के लि‍ए अच्‍छी नींद जरूरी है। बच्‍चे को रोज सोने के ल‍िए पर्याप्‍त समय दें ताक‍ि उसे आराम म‍िल सके और इम्‍यून‍िटी मजबूत हो।
  • क‍िसी भी इंफेक्‍शन से बचने के ल‍िए हाइजीन का ख्‍याल रखना जरूरी है। बच्‍चे को हाइजीन की आदतें स‍िखाएं जैसे टॉयलेट के इस्‍तेमाल के बाद हाथों को साबुन और पानी से धोना, भोजन से पहले और बाद में हाथों की सफाई वगैरह।

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फ्लू वैक्‍सीन लगवाएं

Dr. Vighnesh Y ने बताया क‍ि बच्‍चे को फ्लू के खतरे से बचाने के ल‍िए फ्लू वैक्‍सीन लगवाएं। 6 महीने और उससे अध‍िक उम्र के बच्‍चे को फ्लू वैक्‍सीन लगवाई जा सकती है। 4 हफ्ते के गैप पर दो डोज लगती है। इसके बाद हर साल एक डोज लगवा सकते हैं।

खुद से बच्‍चे को एंटीबायोट‍िक्‍स न दें

Dr. Vighnesh Y ने बताया क‍ि कई बार फ्लू के लक्षण नजर आने पर माता-प‍िता बच्‍चे को खुद से दवाएं दे देते हैं, लेक‍िन डॉक्‍टर की सलाह पर ही बुखार या क‍ोई अन्‍य दवा देनी चाह‍िए। साथ ही फ्लू एक वायरल इंफेक्‍शन है इसल‍िए बच्‍चे को एंटीबायोट‍िक दवाएं न दें। इससे न ही लक्षण कम होंगे और न ही र‍िकवरी हो पाएगी।

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डॉक्‍टर से तुरंत संपर्क कब करें?

  • अगर बच्‍चे को सांस लेने में मुश्‍क‍िल होने लगे।
  • बुखार कम न हो।
  • बच्‍चे को अध‍िक कमजोरी महसूस हो।
  • बच्‍चे को दौरे पड़ने लगें।
  • लगातार उल्टी या डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखाई देने लगें।

न‍िष्‍कर्ष:

बच्‍चे को फ्लू या इन्फ्लुएंजा होने पर तेज बुखार, ठंड लगना, सर्दी-जुकाम, गले में खराश, सूखी खांसी, थकान, कमजोरी, चिड़चिड़ापन और कुछ मामलों में उल्‍टी या दस्‍त जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं। बच्‍चों की इम्‍यून‍िटी कमजोर होती है इसल‍िए उनमें इंफेक्‍शन का खतरा ज्‍यादा हो सकता है, संक्रम‍ित व्‍यक्‍त‍ि के संपर्क में आने के कारण भी बच्‍चों को फ्लू हो सकता है। फ्लू शॉट की मदद से इंफेक्‍शन से बचाव क‍िया जा सकता है। इसके अलावा हाइजीन ट‍िप्‍स, हेल्‍दी डाइट और पर्याप्‍त पानी और आराम करने से भी राहत म‍िल सकती है। बच्‍चे को खुद से दवाएं न दें, खासकर एंटीबायोट‍िक्‍स। बुखार होने पर भी डॉक्‍टर की सलाह पर ही डोज और दवा दें।

FAQ

  • क‍िस उम्र के बच्‍चों को फ्लू का खतरा होता है?

    फ्लू संक्रमण क‍िसी भी उम्र में हो सकता है। एक्‍सपर्ट्स मानते हैं क‍ि दो से पांच साल की उम्र में फ्लू का खतरा ज्‍यादा होता है। साथ ही यह 6 महीने से कम उम्र के श‍िशुओं के ल‍िए ज्‍यादा खतरनाक हो सकता है। 
  • बच्चों में फ्लू कैसे फैलता है?

    बच्‍चों में फ्लू अध‍िकतर तीन तरीकों से फैल सकता है। पहला क‍िसी संक्रम‍ित व्‍यक्‍त‍ि के संपर्क में आने से, दूसरा क‍िसी संक्रम‍ित सतह को छूने से और तीसरा हवा में फैले संक्रमण के संपर्क से बच्‍चों को फ्लू हो सकता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 04, 2026 14:11 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
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