जब हमें बुखार होता है, तो यह माना जाता है कि शरीर किसी इंफेक्शन से भीतर लड़ रहा है और इसकी प्रतिक्रिया के रूप में बुखार आता है। बच्चों में बुखार होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे सर्दी-जुकाम, गले में इंफेक्शन, वायरल इंफेक्शन वगैरह। ज्यादातर मामलों में माता-पिता डॉक्टर के पास जाए बगैर घर पर ही बच्चे के बुखार का इलाज शुरू कर देते हैं और स्थिति खराब हो जाती है। बुखार के लक्षणों को घर पर कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन सही इलाज की सलाह के लिए डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। ऐसे में यह जान लेते हैं कि बच्चों में बुखार की स्थिति कब सामान्य होती है और कब गंभीर बन जाती है? बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Rajeev Chowdry, Internal Medicine Specialist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।
बच्चे में बुखार की सामान्य स्थिति के संकेत
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National Health Service, UK के मुताबिक, छोटे बच्चों में बुखार होना काफी आम है। ज्यादातर मामलों में तापमान 1 से 4 दिनों के अंदर सामान्य हो जाता है। बच्चों में 100.4 या इससे ज्यादा तापमान को बुखार माना जाता है।
- बच्चा सामान्य से ज्यादा गर्म महसूस हो सकता है, खासकर पीठ या छाती छूने पर।
- बच्चे को पसीना आ सकता है।
- बच्चा बीमार, कमजोर या असहज दिखाई दे सकता है।
बच्चों में बुखार की गंभीर स्थिति कैसे पहचानें?
छोटे बच्चों को अगर बुखार आए, तो विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अगर बच्चा बुखार के बावजूद सामान्य रूप से पानी पी रहा है, प्रतिक्रिया दे रहा है और कुछ हद तक एक्टिव है, तो उसकी रिकवरी जल्दी होने की उम्मीद है। वहीं, बच्चे में बुखार के दौरान अधिक सुस्ती दिखे, बच्चा जगाने पर भी प्रतिक्रिया न दे, सांस लेने में परेशानी हो, बच्चा लगातार रोए, तो यह गंभीर स्थिति के संकेत हो सकते हैं।
बच्चे को बुखार होने पर डॉक्टर से संपर्क कब करें?
Harvard Medical School के मुताबिक, अगर बच्चे को 102 या इससे ज्यादा बुखार है, तो डॉक्टर से सलाह लें। ज्यादातर मामलों में बुखार उतर जाता है, लेकिन किसी गंभीर स्थिति से बचने के लिए जांच जरूरी है। बुखार 2 से 3 दिन से ज्यादा रहे, बच्चा पानी और दूध न पी रहा हो या शरीर में पानी की कमी हो, तो भी डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।
- अगर बच्चे को बुखार है और उसे सांस लेने के लिए जोर लगाना पड़ रहा है, तो डॉक्टर से संपर्क करें। यह फेफड़ों के गंभीर इंफेक्शन का संकेत हो सकता है।
- छोटे बच्चों में बुखार के साथ अधिक चिड़चिड़ापन नजर आए या बच्चा थोड़ा सुस्त हो जाए, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
- अगर बुखार के साथ त्वचा पर दानें नजर आएं, तो यह चिकनपॉक्स या एलर्जी का संकेत हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर से सलाह लेना न भूलें।
- अगर बच्चे की उम्र तीन महीने या उससे कम है, तो डॉक्टर से सलाह लिए बगैर बुखार का इलाज नहीं करना चाहिए।
मानसून में बढ़ जाता है बुखार का खतरा
मानसून में नमी, दूषित पानी, मच्छर वगैरह के कारण बच्चे को बुखार हो सकता है। इस मौसम में डेंगू का प्रकोप बढ़ जाता है। इसके कारण तेज बुखार आ सकता है। इसी तरह मानसून में मलेरिया के कारण भी बच्चे को बुखार के साथ ठंड लगना और कंपकंपी हो सकती है। चिकनगुनिया, टाइफाइड के कारण भी बच्चे को मानसून में बुखार आ सकता है। फ्लू (इन्फ्लुएंजा) में बुखार के साथ खांसी, गले में खराश, नाक बहना और शरीर में दर्द हो सकता है। बच्चों में वायरल इंफेक्शन बुखार के साथ नाक बहने, खांसी और गले में परेशानी का कारण बन सकता है।
बच्चे को बुखार आने पर क्या करें?
- बुखार के दौरान बच्चे को पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ जैसे सूप दें।
- बहुत ज्यादा कपड़ों या कंबल में न लपेटें।
- बुखार कम करने की दवा केवल डॉक्टर की सलाह के अनुसार दें।
- अगर बुखार लगातार बना रहता है, बार-बार लौटता है या बच्चे की हालत बिगड़ती दिखाई देती है, तो घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।
निष्कर्ष:
अगर बच्चे को बुखार 102 या इससे ज्यादा हो, बुखार 2 से 3 दिन से ज्यादा रहे, बुखार के साथ शरीर पर दाने चिकनपॉक्स का संकेत हो सकता है, बुखार के साथ चिड़चिड़ापन या सुस्ती नजर आए, सांस की परेशानी हो, तो डॉक्टर से संपर्क करें। बच्चे को बुखार है और उम्र 3 साल से कम है, तो भी खुद से इलाज न करें और डॉक्टर से संपर्क करें। बुखार के दौरान अगर बच्चा प्रतिक्रिया न दे, लगातार रोए, अधिक सुस्ती दिखे, तो भी डॉक्टर से सलाह लें। बच्चों में 100.4 या इससे अधिक तापमान को बुखार माना जाता है। सामान्य स्थिति में कमजोरी, शरीर का गर्म रहना जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। मानसून के दौरान बच्चों में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, फ्लू, टाइफाइड और वायरल इंफेक्शन का प्रकोप बढ़ सकता है और बच्चों को बुखार आ सकता है। इसलिए हाइजीन का ख्याल रखें और बच्चे को दूषित पानी से दूर रखें।
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FAQ
क्या बुखार के साथ बच्चे को दौरा पड़ सकता है?
कुछ बच्चों में बुखार के दौरान फीवरल सीजर हो सकता है। दौरा पड़ने पर बच्चे को सुरक्षित जगह पर करवट से लिटाएं और तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।बुखार में बच्चे को क्या खिलाएं?
बुखार के दौरान बच्चे को उसकी उम्र के अनुसार हल्का, आसानी से पचने वाला और पौष्टिक खाना दें। खिचड़ी, दाल-चावल, दलिया, सूप जैसे विकल्प दे सकते हैं।
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Aug 25, 2026 19:59 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Rajeev Chowdry
