बारिश के मौसम में बुखार, कमजोरी और शरीर में दर्द जैसे लक्षण तेजी से बढ़ने लगते हैं। इन लक्षणों को देखते ही लोग वायरल फीवर समझकर घर पर ही एंटीबायोटिक या पैरासिटामोल लेने लगते हैं। कई बार जिसे लोग वायरल फीवर समझते हैं, वह डेंगू हो सकता है और घर पर इलाज करने की वजह से मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है। लोगों का डेंगू और वायरल फीवर में अंतर न कर पाने की वजह इसके लक्षणों का एक जैसा होना। इसलिए हमने Dr. Niraj Kumar, Senior Consultant, ShardaCare Hospital, Greater Noida से बात की। उन्होंने बताया कि वायरल फीवर और डेंगू दोनों वायरल संक्रमण हैं, लेकिन इनके कारण, गंभीरता, जांच और इलाज का तरीका अलग-अलग होता है। इसलिए इन दोनों के अंतर को समझना बहुत जरूरी है।
डेंगू और वायरल फीवर में अंतर
Dr. Niraj Kumar ने बताया कि डेंगू और वायरल फीवर के बुखार के पैटर्न में काफी अंतर होता है और डेंगू के मामले में तो प्लेटलेट्स पर भी ध्यान देने की जरूरत होती है।
सामान्य वायरल फीवर (Viral Fever) |
डेंगू (Dengue) |
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1 |
कारण |
विभिन्न प्रकार के वायरस से होने की संभावना |
केवल डेंगू वायरस (DENV) |
2 |
फैलने का तरीका |
किसी संक्रमित मरीज के पास जाने, छींक या खांसी |
केवल संक्रमित एडीज मच्छर के काटने पर होना और सीधे व्यक्ति से व्यक्ति में नहीं फैलता। |
3 |
बुखार का पैटर्न |
धीरे-धीरे बढना और साथ में सर्दी, खांसी या गले में खराश संभव |
अचानक 103°F से 104°F तक बहुत तेज बुखार होना |
4 |
शारीरिक दर्द |
सामान्य बदन दर्द और थकान |
बहुत तेज हड्डियां टूटने जैसा दर्द होना, जिसे ‘’ब्रेकबोन फीवर’ भी कहते हैं। |
5 |
सिर और आंखों का दर्द |
हल्का से मध्यम सिरदर्द |
तेज सिरदर्द के साथ आंखों के पीछे दर्द होना |
6 |
त्वचा पर चकत्ते |
आमतौर पर नहीं होते या बहुत हल्के |
बुखार के कुछ दिनों बाद त्वचा पर लाल चकत्ते या दाने निकल सकते हैं। |
7 |
प्लेटलेट्स |
आमतौर पर प्लेटलेट्स खास कम नहीं होते |
प्लेटलेट्स और सफेद ब्लड सेल्स (WBC) तेजी से गिर सकते हैं। |
8 |
ब्लीडिंग का खतरा |
ब्लीडिंग का खतरा नहीं होता |
गंभीर मामलों में नाक, मसूड़ों, पेशाब या मल से खून आने का खतरा रहता है। |
9 |
समय |
आमतौर पर 3 से 7 दिनों में ठीक हो जाता है। |
बुखार करीब एक हफ्ते रहता है, लेकिन बुखार उतरने के 24-48 घंटे बाद का समय सबसे सेंसिटिव होता है। |
10 |
लैब टेस्ट |
मुख्य रूप से लक्षणों के आधार पर पहचान। |
NS1 Antigen, Dengue IgM, RT-PCR, CBC टेस्ट से पुष्टि |
11 |
इलाज |
आराम, पर्याप्त पानी, पैरासिटामोल और संतुलित आहार। |
कोई विशेष एंटीवायरल नहीं। शरीर में हाइड्रेशन बनाए रखना |
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वायरल फीवर क्या है?
Dr. Niraj Kumar कहते हैं, “वायरल फीवर कोई बीमारी नहीं है, बल्कि वायरस से होने वाली इंफेक्शन है। इसमें फ्लू इन्फ्लुएंजा, एडेनोवायरस, एंटेरोवायरस और कई वायरस शरीर में संक्रमण फैलाकर बुखार कर सकते हैं। आमतौर पर वायरल फीवर 3 से 7 दिनों में आराम, पर्याप्त पानी और डॉक्टर की सलाह से ठीक हो जाता है।
इलाज
वायरल फीवर में मरीज को पर्याप्त आराम, ज्यादा से ज्यादा तरल चीजें पिलाना, पैरासिटामोल और पौष्टिक डाइट देने से मरीज ठीक हो जाता है।
डेंगू क्या है?
Dr. Niraj Kumar ने कहा, “डेंगू एडीज एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस मच्छर के काटने से फैलती है। यह वायरल फीवर के मुकाबले ज्यादा गंभीर हो सकता है। समय पर इलाज न मिलने पर कुछ मरीजों में गंभीर डेंगू, ब्लीडिंग, ब्लड प्रेशर गिरना और अंगों को नुकसान जैसी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं। आमतौर पर संक्रमित मच्छर के काटने के 4 से 7 दिन बाद इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
इलाज
डेंगू का कोई विशेष एंटीवायरल इलाज नहीं है। इसमें मरीज के शरीर में पानी की कमी रोकना, समय-समय पर जांच कराना और जरूरत पड़ने पर अस्पताल में भर्ती करना जरूरी हो सकता है।
सबसे जरूरी बात यह है कि मरीज को डॉक्टर की सलाह के बिना पेनकिलर दवाएं बिल्कुल नहीं लेनी चाहिए। इससे शरीर में ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है।
dengue vs viral fever
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डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?
Dr. Niraj Kumar के अनुसार, अगर बुखार के साथ ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
- तेज पेट दर्द
- बार-बार उल्टी
- सांस लेने में तकलीफ
- बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होना
- चक्कर आना
- नाक या मसूड़ों से खून
- पेशाब कम आना
- लगातार प्लेटलेट्स घटना
रिसर्च क्या कहती है?
StatPearls Publishing के मुताबिक, डेंगू की शुरुआत में इसके लक्षण कई वायरल संक्रमणों जैसे इन्फ्लुएंजा, एडेनोवायरस, एंटेरोवायरस, खसरा, रूबेला, एपस्टीन-बार वायरस और COVID-19 से मिलते-जुलते हो सकते हैं। इसलिए सिर्फ लक्षण के आधार पर बीमारी के बारे में बताना मुश्किल होता है। इसलिए सही समय पर लैब जांच और डॉक्टर की सलाह जरूरी होती है।
विभिन्न रिसर्च के अनुसार, डेंगू दुनिया में सबसे तेजी से फैलने वाली मच्छरों से जुड़ी वायरल बीमारियों में से एक है। समय पर पहचान, पर्याप्त हाइड्रेशन और चेतावनी वाले लक्षणों पर नजर रखने से गंभीर डेंगू और उससे जुड़ी गंभीर समस्याओं के रिस्क को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
निष्कर्ष
Dr. Niraj Kumar लोगों को सलाह देते हैं कि मानसून के सीजन में बुखार को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि डेंगू और वायरल फीवर के शुरुआती लक्षण एक जैसे लग सकते हैं। इसलिए अगर सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द और रैशेज होने लगे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। किसी भी मरीज को बिना डॉक्टर की सलाह के एस्प्रिन या आईब्रुफिन जैसी पेनकिलर न दें। समय पर पहचान करके ही डेंगू या वायरल फीवर की जटिलताओं से बचा जा सकता है।
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FAQ
क्या डेंगू के मरीज को प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए तुरंत प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन की जरूरत होती है?
हमेशा नहीं। अगर प्लेटलेट काउंट 10,000 से 20,000 से नीचे न गिरे या शरीर से कोई ब्लीडिंग जैसे नाक, मसूड़ों या उल्टी में खून न हो, तब तक प्लेटलेट चढ़ाने की जरूरत नहीं होती। सिर्फ ORS और पर्याप्त तरल पदार्थ से ही प्लेटलेट्स रिकवर हो जाते हैं।क्या डेंगू या वायरल फीवर में दर्द से राहत के लिए कॉम्बिफ्लैम या ब्रूफेन ली जा सकती है?
बिल्कुल नहीं। डेंगू या बुखार में आइब्रोफेन, एस्पिरिन या पेनकिलर दवाएं गलती से भी न लें। इनसे पेट में अल्सर और इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है। दर्द और बुखार के लिए केवल पैरासिटामोल ही सुरक्षित है।
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Current Version
Aug 03, 2026 15:44 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Niraj Kumar
