बारिश के मौसम में अगर किसी के प्लेटलेट्स लगातार कम हो रहे हैं, तो सबसे पहले डेंगू होने की संभावना मानी जाती है, लेकिन यह जानना बहुत जरूरी है कि हर बार कम प्लेटलेट्स का मतलब डेंगू होना नहीं है। कई अन्य बीमारियां भी इसका कारण हो सकती हैं। इस बारे में Dr. Vineeta Singh Tandon, Senior Consultant, Internal Medicine, ISIC Multispeciality Hospital, Delhi कहती हैं कि प्लेटलेट्स कम होने के कारण इंफेक्शन, दवाएं या अन्य मेडिकल कंडीशंस हो सकती है। इसलिए डेंगू न होने पर अन्य बीमारियों के कारण जानना बहुत जरूरी है।
प्लेटलेट काउंट कितना सामान्य है?
Cleveland Clinic के अनुसार, प्लेटलेट काउंट को इस तरह से चेक किया जा सकता है।
कंडीशन |
प्लेटलेट काउंट की रेंज |
बीमारी |
सामान्य प्लेटलेट स्तर |
1,50,000 से 4,00,000 प्रति माइक्रोलीटर |
शरीर में रक्त का थक्का जमने के लिए यह सामान्य स्तर है। |
कम प्लेटलेट काउंट |
1,50,000 प्रति माइक्रोलीटर से कम |
इस स्थिति को थ्रोम्बोसाइटोपेनिया कहा जाता है, जिससे बहुत ज्यादा ब्लीडिंग का रिस्क हो सकता है। |
अधिक प्लेटलेट काउंट |
4,50,000 प्रति माइक्रोलीटर से अधिक |
इस स्थिति को थ्रोम्बोसाइटोसिस कहा जाता है, जिससे खून के थक्के बनने का खतरा बढ़ सकता है। |
प्लेटलेट्स कम होने के 5 कारण
Cleveland Clinic के मुताबिक, प्लेटलेट काउंट कम होने होना हर व्यक्ति के लिए गंभीर समस्या नहीं होती, लेकिन इसके कई कारण हो सकते हैं। इसमें ऑटोइम्यून बीमारियां, कैंसर या उसका इलाज कराते समय प्लेटलेट्स कम होना, दवाओं के साइड इफेक्ट्स और वायरल इंफेक्शन भी हो सकता है।
Dr. Vineeta Singh कहती हैं, “प्लेटलेट्स यानी खून में मौजूद छोटी कोशिकाएं शरीर में ब्लीडिंग रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। शरीर में चोट लगने पर ये आपस में जुड़कर खून का थक्का बनाने में मदद करती हैं। इसलिए जब प्लेटलेट्स कम होने लगते हैं, तो ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में इसके कारणों को जानना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।”
1. वायरल या गंभीर संक्रमण
Dr. Vineeta Singh ने बताया कि डेंगू के अलावा वायरल इंफेक्शन भी शरीर में होने वाले इम्यून रिस्पॉन्स के कारण प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं। इसमें हेपेटाइटिस C, HIV, गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण जैसे सेप्सिस भी हो सकते हैं। इसके कारणों को जानने के लिए डॉक्टर ब्लड रिपोर्ट्स चेक कर सकते हैं।
2. विटामिन B12 और फोलेट की कमी
Dr. Vineeta Singh ने कहा, “शरीर में विटामिन B12 और फोलेट की कमी होने पर भी ब्लड सेल्स बनने की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। इसकी कमी आमतौर पर रेड ब्लड सेल्स को प्रभावित करती है, लेकिन कई मामलों में प्लेटलेट्स भी कम हो सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति में लगातार कमजोरी या थकान दिखती है, तो विटामिन लेवल की भी जांच कराने की सलाह दी जा सकती है।”
3. ऑटोइम्यून बीमारी का होना
Dr. Vineeta Singh के अनुसार, कभी-कभी इम्यून सिस्टम गलती है, शरीर की अपनी ही प्लेटलेट्स को नुकसान पहुंचाने लगता है। इसे इम्यून थ्रोम्बोसाइटोपिनिया (ITP) कहा जाता है। इस कंडीशन में प्लेटलेट काउंट काफी कम हो सकते हैं और कुछ लोगों को स्किन पर छोटे लाल या बैंगनी निशान दिखाई दे सकते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि ITP सिर्फ प्लेटलेट रिपोर्ट देखकर नहीं किया जाता। कई मामलों में इसके अन्य टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है।

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4. कुछ दवाओं का असर
Dr. Vineeta Singh का कहना है, “कुछ दवाएं भी प्लेटलेट काउंट को कम कर सकती हैं। ऐसा कभी-कभी दवा का प्लेटलेट्स बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है या इम्यून सिस्टम प्लेटलेट्स को नष्ट करने लगता है। कुछ एंटीबायोटिक या कीमोथेरेपी की दवाएं इसमें शामिल हो सकती है। अगर किसी नई दवा को लेने के बाद प्लेटलेट्स काउंट कम होने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लें। खुद से दवा बंद न करें, क्योंकि डॉक्टर ही बता सकते हैं कि दवा को बदलने की जरूरत है या रोकने की जरूरत है।”
5. बोन मैरो से जुड़ी समस्या
Dr. Vineeta Singh कहती हैं, “शरीर में ब्लड सेल्स बनाने का काम बोन मैरो करती है। अगर किसी बीमारी की वजह से बोन मैरो ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो प्लेटलेट्स बनना कम हो सकता है। कुछ गंभीर रक्त से जुड़ी बीमारियों में एनीमिया और लिम्फोमा जैसी कंडीशंस के कारण प्लेटलेट काउंट कम हो सकते हैं। हालांकि, कम प्लेटलेट्स की हर रिपोर्ट का मतलब बोन मैरो की गंभीर बीमारी नहीं होती। डॉक्टर लक्षण, CBC और अन्य जरूरी टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं, ताकि कारणों का पता चल सके।”
प्लेटलेट्स कम होने के लक्षण
Dr. Vineeta Singh कहती हैं कि कई बार लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन प्लेटलेट्स ज्यादा कम होने पर ब्लीडिंग हो सकती है। आमतौर पर लोगों को इन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।
- बिना चोट के शरीर पर नीले या बैंगनी निशान पड़ना
- स्किन पर छोटे-छोटे लाल या बैंगनी डॉट्स दिखना
- नाक से बार-बार खून आना
- मसूड़ों से खून निकलना
- छोटी चोट के बाद लंबे समय तक ब्लीडिंग होना
- पेशाब या मल में खून आना
- महिलाओं में हैवी पीरियड्स होना
प्लेटलेट्स कम होने पर क्या करें?
Dr. Vineeta Singh सलाह देती हैं कि प्लेटलेट्स कम होने पर घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि इसके कारणों को जानने की जरूरत है। इसके अलावा, मरीज ये काम कर सकते हैं।
- डॉक्टर की सलाह पर ब्लड टेस्ट कराएं।
- जो भी दवा या सप्लीमेंट लेते हैं, उसके बारे में डॉक्टर को बताएं।
- बिना सलाह के कोई दवा शुरू या बंद न करें।
- पर्याप्त मात्रा में फ्लूड लें।
- अगर ब्लीडिंग के लक्षण हों, तो इसे इग्नोर न करें।
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निष्कर्ष
Dr. Vineeta Singh कहती हैं कि प्लेटलेट काउंट का इलाज हर व्यक्ति का एक जैसा नहीं होता। इसलिए इंटरनेट या किसी अन्य मरीज को दी गई दवाओं के आधार पर खुद दवा न लें। इसके साथ इस बात का भी ध्यान रखें कि प्लेटलेट काउंट कम होने पर सिर्फ डेंगू हो, ऐसा जरूरी नहीं होता। इसका कारण इंफेक्शन, विटामिन B12 और फोलेट की कमी भी हो सकती है। इसलिए डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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FAQ
बिना डेंगू के प्लेटलेट्स कम होने पर सही कारण जानने के लिए डॉक्टर कौन-से टेस्ट करते हैं?
इसके सही कारण का पता लगाने के लिए CBC, विटामिन B12 या फोलेट लेवल टेस्ट, लिवर फंक्शन टेस्ट और जरूरत पड़ने पर बोन मैरो बायोप्सी कराई जाती है।क्या शराब का ज्यादा सेवन करने से भी प्लेटलेट काउंट गिर सकता है?
शराब, बोन मैरो की प्लेटलेट बनाने की क्षमता को सीधे तौर पर धीमा कर देती है। साथ ही, लंबे समय तक शराब पीने से लिवर सिरोसिस हो जाता है, जिससे प्लीहा प्लेटलेट्स को ज्यादा मात्रा में नष्ट करने लगती है।
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Sep 11, 2026 16:50 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Vineeta Singh Tandon