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Medically Reviewed by Dr Niraj Kumar , Senior Consultant – General Medicine

डेंगू में सिर्फ प्लेटलेट्स नहीं, पानी की कमी पर भी दें ध्यान, डिहाइड्रेशन के ये 5 संकेत हो सकते हैं खतरनाक

डेंगू में प्लेटलेट्स ही नहीं पानी की कमी होना भी स्थिति को गंभीर कर सकता है। अगर मरीज को डेंगू की बीमारी में डिहाइड्रेशन हो जाए, तो इसके पांच लक्षणों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। अगर लक्षण गंभीर महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। 
डेंगू में सिर्फ प्लेटलेट्स नहीं, पानी की कमी पर भी दें ध्यान, डिहाइड्रेशन के ये 5 संकेत हो सकते हैं खतरनाकडेंगू में सिर्फ प्लेटलेट्स नहीं, पानी की कमी पर भी दें ध्यान, डिहाइड्रेशन के ये 5 संकेत हो सकते हैं खतरनाक

डेंगू को अक्सर तेज बुखार, बदन दर्द और कमजोरी से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इस बीमारी में एक और चीज पर नजर रखना उतना ही जरूरी है, और वह है शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन। तेज बुखार, उल्टी, भूख कम लगना और कभी-कभी दस्त के कारण डेंगू के दौरान शरीर से पानी की कमी हो सकती है। ऐसे में अगर मरीज को पर्याप्त मात्रा में पानी या तरल पदार्थ न दिया जाए, तो गंभीर डिहाइड्रेशन हो सकता है। डेंगू में डिहाइड्रेशन होने पर कौन-से लक्षणों पर नजर रखनी चाहिए? यह जानने के लिए हमने Dr. Niraj Kumar, Senior Consultant, ShardaCare Hospital, Greater Noida से बात की।

उन्होंने बताया कि गंभीर डिहाइड्रेशन की स्थिति में ब्लड प्रेशर गिर सकता है और डेंगू के गंभीर रूप में शॉक जैसी स्थिति का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए डेंगू के दौरान केवल प्लेटलेट्स पर ध्यान देना ही काफी नहीं है, बल्कि शरीर में पानी की स्थिति पर भी नजर रखना जरूरी है।

डेंगू में डिहाइड्रेशन होने पर 5 लक्षणों पर रखें नजर

Dr. Niraj Kumar कहते हैं, “डेंगू के शुरुआती दिनों में तेज बुखार और पसीने के कारण शरीर से पानी कम हो सकता है। इसके साथ उल्टी, दस्त, मतली और भूख कम लगने से मरीज कम तरल पदार्थ लेने लगता है। डेंगू के गंभीर मामलों में शरीर में डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होने और डेंगू शॉक का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए डिहाइड्रेशन को समय रहते पहचानना जरूरी है।”

1. पेशाब का रंग गहरा होना

Dr. Niraj Kumar बताते हैं कि अगर डेंगू के दौरान पेशाब सामान्य से ज्यादा गहरा पीला या कम मात्रा में आने लगे, तो यह शरीर में पानी की कमी का संकेत हो सकता है। हालांकि, सिर्फ पेशाब के रंग से डिहाइड्रेशन की पहचान नहीं की जा सकती है।

PubMed में प्रकाशित एक अध्ययन में डेंगू मरीजों के पेशाब के रंग और शरीर में पानी की स्थिति के बीच संबंध का अध्ययन किया गया। पेशाब का यूरिन कलरीमेट्री टेस्ट डेंगू के मरीजों के हाइड्रेशन लेवल के साथ बहुत सटीक रूप से जुड़ा पाया गया। हालांकि, रिसर्चर्स का कहना है कि घर पर सिर्फ पेशाब का रंग देखकर डेंगू की गंभीरता तय नहीं की जा सकती।

2. मुंह और होंठ सूखना

बार-बार मुंह सूखना, होंठों का सूखना या प्यास ज्यादा लगना भी शरीर में तरल पदार्थ कम होने का लक्षण हो सकता है। इसलिए अगर मरीज बार-बार मुंह सूखने या होंठों को जीभ से गीला करने लगे, तो उसे तरल चीजें देना शुरू करें।

3. बहुत ज्यादा कमजोरी या सुस्ती

Dr. Niraj Kumar के अनुसार, डेंगू में कमजोरी सामान्य है, लेकिन अगर मरीज असामान्य रूप से सुस्त रहने लगे, चक्कर आएं या बेचैनी महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर तब जब मरीज पर्याप्त तरल नहीं ले पा रहा हो।

4. पेशाब कम आना

पानी की कमी बढ़ने पर शरीर पानी बचाने की कोशिश करता है, जिससे पेशाब की मात्रा कम हो सकती है। अगर कई घंटों तक पेशाब बहुत कम हो या लगभग न आए, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

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5. चक्कर, सांस लेने में परेशानी या ब्लड प्रेशर गिरना

ये ज्यादा गंभीर संकेत हो सकते हैं। डेंगू के मरीज में चक्कर के साथ बहुत ज्यादा कमजोरी, सांस लेने में परेशानी, शरीर का ठंडा होना, बेहोशी या ब्लड प्रेशर कम होने जैसे लक्षण दिखें, तो मरीज को तुरंत अस्पताल लेकर जाएं।

डेंगू में कितना पानी पीना चाहिए?

Infectious Diseases Now में प्रकाशित स्टडी में 174 डेंगू मरीजों को शामिल किया गया। इसमें 94 महिलाएं थीं और 80 पुरुष थे। इनमें से ज्यादातर मरीजों ने लक्षणों की शुरुआत के दूसरे दिन डॉक्टर से सलाह ली। इस अध्ययन में पाया गया कि जिन मरीजों ने डॉक्टर से सलाह लेने से एक दिन पहले से कम से कम 5 गिलास तरल पदार्थ लिया था, उनमें पेट दर्द, लगातार उल्टी, सुस्ती और ब्लीडिंग जैसी गंभीर समस्याएं कम पाई गई थी।

Dr. Niraj Kumar का मानना है कि डेंगू में सभी मरीजों के लिए एक ही मात्रा तय नहीं की जा सकती। उम्र, वजन, बुखार, उल्टी-दस्त, किडनी या हार्ट की बीमारी और डेंगू की गंभीरता के आधार पर तरल की जरूरत अलग हो सकती है। मरीज को पानी के साथ ORS भी लेना चाहिए, ताकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न हो। इसके अलावा, डॉक्टर की सलाह पर नारियल पानी, नींबू पानी या छाछ ली जा सकती है।

डेंगू के मरीजों की डाइट पर ध्यान देना जरूरी

Dr. Niraj Kumar कहते हैं, “डेंगू के दौरान पानी के साथ डाइट पर भी ध्यान देना जरूरी है। डेंगू के मरीजों की डाइट में प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर से भरपूर मौसमी फल और सब्जियां भी होनी चाहिए। इससे मरीज को रिकवरी में मदद मिलती है। सबसे जरूरी बात यह है कि अगर लगातार उल्टी हो रही है या मरीज पर्याप्त मात्रा में तरल नहीं ले पा रहा है, तो सिर्फ घर पर पानी पिलाते रहना पर्याप्त नहीं हो सकता। ऐसे मामलों में डॉक्टर को जरूर दिखाएं।”

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निष्कर्ष
Dr. Niraj Kumar सलाह देते हैं कि अगर डेंगू का मरीज लगातार पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, खून आना, अत्यधिक सुस्ती या बेचैनी, सांस लेने में परेशानी, पेशाब कम होना, बेहोशी या ब्लड प्रेशर कम होने की शिकायत करे, तो मरीज को तुरंत अस्पताल लेकर जाए। आमतौर पर लोग डेंगू में प्लेटलेट्स को लेकर स्ट्रेस में रहते हैं, लेकिन डेंगू में मरीज के लक्षण और शरीर में हाइड्रेशन का संतुलन देखकर ही डॉक्टर मरीज का इलाज करते हैं।

इसके साथ, डेंगू के दौरान पर्याप्त हाइड्रेशन बनाए रखना जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा तरल लेना भी उचित नहीं है। मरीज की उम्र, सेहत और बीमारी की गंभीरता के अनुसार डॉक्टर से तरल की मात्रा के बारे में सलाह लेना बेहतर है।

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FAQ

  • डेंगू में केवल सादा पानी पीने के बजाय ORS और नारियल पानी पीना क्यों जरूरी है?

    प्लाज्मा लीकेज के साथ शरीर से सोडियम और पोटेशियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी कम हो जाते हैं। ORS और नारियल पानी इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखते हैं और लो बीपी से बचाते हैं।
  • बच्चों और बुजुर्गों में डेंगू के दौरान डिहाइड्रेशन की पहचान कैसे करें?

    बच्चों में रोते समय आंसू न आना, बहुत ज्यादा चिड़चिड़ापन या सुस्ती, और बुजुर्गों में अचानक कंफ्यूजन महसूस करना, स्किन में ढीलापन और तेज धड़कन डिहाइड्रेशन के मुख्य संकेत हैं।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 18, 2026 19:31 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Niraj Kumar