जब मौसम में बदलाव आता है, तो बदलते मौसम में सर्दी, खांसी, बुखार और गले में खराश जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। ऐसे में कई बार मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं लेना शुरू कर देते हैं। कई तो मरीज को आराम मिल जाता है, तो कई मामलों में मरीज की सेहत गंभीर हो सकती है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल आता है कि वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन क्या है और इनमें क्या अंतर है? क्या इन इंफेक्शन में इलाज भी अलग हो सकता है? इन सभी सवालों के जवाब Dr. Vineeta Singh Tandon, Senior Consultant, Internal Medicine, ISIC Hospital, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन दोनों अलग-अलग वजहों से होते हैं, लेकिन इनके लक्षण कई बार एक जैसे दिखते हैं। हालांकि, इलाज दोनों ही मामलों में अलग-अलग होते हैं।
वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन में फर्क
Dr. Vineeta Singh Tandon ने वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन में हुए फर्क को समझाया है।
अंतर |
वायरल इंफेक्शन |
बैक्टीरियल इंफेक्शन |
कारण |
वायरस का शरीर में फैलना |
बैक्टीरिया का शरीर में फैलना |
एंटीबायोटिक की जरूरत |
कोई जरूरत नहीं होती |
डॉक्टर की सलाह पर एंटीबायोटिक दवाएं लें |
बुखार |
हल्का या मध्यम बुखार होना |
लगातार तेज बुखार होना |
लक्षण |
नाक बहना या बंद होना |
गले में बहुत ज्यादा दर्द होना |
समय |
5 से 7 दिनों में धीरे-धीरे खुद ही ठीक होना |
लक्षण लंबे समय तक बने रह सकते हैं |
बीमारियां |
सामान्य सर्दी-जुकाम, फ्लू, कोविड-19, चिकनपॉक्स, डेंगू और वायरल बुखार |
स्ट्रेप थ्रोट (गले का संक्रमण), यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI), निमोनिया, त्वचा संक्रमण और टायफाइड |
वायरल इंफेक्शन में क्या होता है?
Dr. Vineeta Singh Tandon ने कहा, “वायरल इंफेक्शन में वायरस शरीर में अपनी संख्या बढ़ाते हैं, तो इस वजह से बीमारियां होने का खतरा बढ़ सकता है। इसमें वायरल इंफेक्शन में सर्दी-जुकाम, फ्लू, कोविड 19, चिकनपॉक्स, डेंगू और कई तरह के वायरल बुखार शामिल हो सकते हैं। आमतौर पर वायरल इंफेक्शन में शरीर खुद ही कुछ दिनों बाद मरीज के आराम, पर्याप्त पानी, पौष्टिक डाइट और डॉक्टर की सलाह पर दी गई दवाओं के जरिए ठीक हो सकता है।”
Cleveland Clinic के अनुसार, वायरल इंफेक्शन के इन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।
- बुखार होना
- सिर और शरीर में तेज दर्द होना
- बहुत ज्यादा थकान महसूस होना
- गले में खराश या दर्द होना
- खांसी आना
- छींके आना
- मतली या उल्टी होना
- दस्त लगना
- स्किन पर चकत्ते होना
- जख्म या छाले होना

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बैक्टीरियल इंफेक्शन में क्या होता है?
Dr. Vineeta Singh Tandon के मुताबिक, “इस इंफेक्शन में बैक्टीरिया शरीर में बढ़ जाते हैं। हालांकि, सभी बैक्टीरिया नुकसानदायक नहीं होते, लेकिन कुछ बैक्टीरिया इंफेक्शन भी कर सकते हैं। इसमें गले का बैक्टीरियल संक्रमण, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI), कुछ तरह का निमोनिया, स्किन इंफेक्शन और टायफाइड जैसी बीमारियां बैक्टीरिया की वजह से हो सकती हैं। ऐसे मामलों में आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं।”
Dr. Vineeta Singh Tandon ने बैक्टीरियल इंफेक्शन के लक्षणों की पहचान करने की सलाह दी है।
- लगातार तेज बुखार होना
- गले में बहुत ज्यादा दर्द
- टॉन्सिल पर सफेद या पीले धब्बे
- पेशाब करते समय जलन
- कान में तेज दर्द होना
- घाव से मवाद निकलना
- लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षण
बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण
Cleveland Clinic के अनुसार, लोगों को बैक्टीरियल इंफेक्शन के इन कारणों से बचाव करना जरूरी है। बैक्टीरियाा आमतौर पर नाक, मुंह या आंखों के रास्ते जा सकते है। कई बार कट या घाव के जरिए भी स्किन के ऐसे हिस्सों में जा सकते हैं, जहां उन्हें नहीं जाना चाहिए। ऐसे में बैक्टीरिया वहां अपनी संख्या बढ़ाने लगते हैं। कई बार बैक्टीरिया सेल्स में तेजी से बढ़कर नुकसान पहुंचा सकते हैं, तो कई बार टॉक्सिन्स छोड़ते हैं, जो सेल्स को नष्ट कर सकते हैं।
क्या बुखार या इंफेक्शन होने पर एंटीबायोटिक लेना जरूरी है?
Dr. Vineeta Singh Tandon ने कहा, “यह सबसे बड़ी गलतफहमी है कि सर्दी, बुखार या जुकाम-खांसी होने पर एंटीबायोटिक लेनी चाहिए। कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह पर एंटीबायोटिक दवाएं लेना शुरू कर देते हैं। एंटीबायोटिक सिर्फ बैक्टीरिया पर असर करती हैं। वायरस पर इनका कोई असर नहीं पड़ता। इसका मतलब है कि अगर वायरल इंफेक्शन है, तो बीमारी जल्दी ठीक नहीं होगी, लेकिन बिना जरूरत एंटीबायोटिक दवा लेने से शरीर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस बन जाता है। इसका मतलब है कि अगर भविष्य में जब एंटीबायोटिक दवाओं की जरूरत होगी, तो इन दवाओं का असर कम हो सकता है।”
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, सर्दी-जुकाम या वायरल बुखार में एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर होती है और साथ ही एंटीबायोटिक का कोर्स अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि इससे कुछ बैक्टीरिया तो मर जाते हैं, बाकी जो बच जाते हैं, वे दवाओं के खिलाफ खुद को मजबूत कर लेते हैं।
डॉक्टर कब जांच कराने की सलाह देते हैं?
Dr. Vineeta Singh Tandon ने कहा कि इंफेक्शन के लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं, तो आमतौर पर मरीजों को CBC, सीआरपी, थ्रोट स्वैब, यूरिन टेस्ट, एक्स-रे और कल्चर टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है। इस चेकअप से ही पता चलता है कि इंफेक्शन का कारण क्या है और फिर उसी के अनुसार ही इलाज किया जा सकता है।
इंफेक्शन से बचाव के तरीके
Dr. Vineeta Singh Tandon ने खासतौर पर मौसम में बदलाव होने पर लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
- साबुन से रेगुलर हाथ धोने चाहिए।
- खांसते या छींकते समय मुंह ढकना चाहिए।
- नींद पूरी करनी चाहिए।
- बैलेंस्ड और पौष्टिक डाइट लेनी चाहिए।
- पर्याप्त पानी पिएं।
- बीमार व्यक्ति से नजदीक जाने से बचें।
- समय पर जरूरी वैक्सीन लगवाएं।
- डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक न लें।
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निष्कर्ष
Dr. Vineeta Singh Tandon लोगों को सलाह देती हैं कि छोटे बच्चे, 60 साल से ज्यादा उम्र के लोग, प्रेग्नेंट महिलाएं, डायबिटीज के मरीज, कैंसर मरीज, किडनी और लिवर के रोगियों को इंफेक्शन से बचना चाहिए। अगर किसी भी तरह के लक्षण दिखाइ देते हैं, तो बिना देरी किए डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसके साथ ही एंटीबायोटिक दवाएं ज्यादा नहीं लेनी चाहिए क्योंकि इससे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती है।
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FAQ
क्या वायरल इंफेक्शन के ठीक होने के बाद बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है?
इसे सेकेंडरी बैक्टीरियल इंफेक्शन कहते हैं। जब वायरल इंफेक्शन के कारण शरीर की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है, तो बैक्टीरिया को हमला करने का मौका मिल जाता है। उदाहरण के लिए, साधारण वायरल फ्लू के बाद मरीज को बैक्टीरियल निमोनिया या साइनस इंफेक्शन हो जाना।क्या कोई इंफेक्शन हवा के जरिए दोनों रूपों में फैल सकता है?
दोनों ही इंफेक्शन खांसने, छींकने या संक्रमित सतहों को छूने से फैल सकते हैं। हालांकि, वायरस हवा में रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट्स के जरिए बहुत ज्यादा तेजी से और बड़े पैमाने पर फैलते हैं। बैक्टीरियल इंफेक्शन आमतौर पर सीधे और नजदीकी संपर्क या दूषित चीजों के जरिए फैलते हैं।
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Jul 16, 2026 18:37 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Vineeta Singh Tandon