आज की बिजी लाइफस्टाइल में नाश्ता छोड़ना कई लोगों की आदत बन चुकी है। कोई ऑफिस की जल्दी में सुबह का खाना नहीं खाता, तो कोई वजन कम करने के लिए ब्रेकफास्ट स्किप कर देता है लेकिन क्या सुबह का नाश्ता छोड़ने की यह आदत आपकी पित्ताशय (Gallbladder) की सेहत पर असर डाल सकती है? आकाश हेल्थकेयर के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं थेराप्यूटिक एंडोस्कोपी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट और डायरेक्टर, डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, केवल नाश्ता छोड़ना हर व्यक्ति में गॉलस्टोन बनने का कारण नहीं बनता। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक भोजन के बीच बहुत ज्यादा अंतर रखता है या बार-बार भोजन छोड़ता है, तो इससे पित्ताशय का नॉर्मल फंक्शन प्रभावित हो सकता है।
क्या नाश्ता छोड़ना पित्त की पथरी का कारण बनता है?
डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं, ''पित्ताशय एक छोटा-सा अंग है, जो लिवर द्वारा बनाए गए पित्त (Bile) को इकट्ठा करता है। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक कुछ नहीं खाता या बार-बार कई दिनों तक नाश्ता छोड़ देता है, तो पित्ताशय पर्याप्त रूप से खाली नहीं हो पाता। इससे पित्त लंबे समय तक पित्ताशय में जमा रह सकता है, जिसे पित्त का ठहराव (Bile Stasis) कहा जाता है। यही स्थिति कुछ लोगों में पथरी बनने की संभावना को बढ़ा सकती है।''
- डॉ. शरद मल्होत्रा का कहना है कि पित्त की पथरी बनने के पीछे केवल नाश्ता छोड़ना जिम्मेदार नहीं होता। इसके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।
- मोटापा, तेजी से वजन कम करना, लंबे समय तक की फास्टिंग, ज्यादा ऑयली और अनहेल्दी डाइट लेना, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और कुछ हार्मोनल स्थितियां भी गॉलस्टोन यानी पित्त की पथरी बनने के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
- इसके अलावा, परिवार में पहले से पित्त की पथरी का इतिहास होने पर भी संभावना ज्यादा हो सकती है। इसलिए केवल एक आदत को दोष देने के बजाय पूरी लाइफस्टाइल पर ध्यान देना जरूरी है।
साल 2024 में Frontiers in Nutrition Journal में प्रकाशित रिसर्च आर्टिकल के अनुसार, नाश्ता न करना या सुबह का पहला खाना देर से खाना पित्त की पथरी (gallstones) के खतरे को काफी बढ़ा देता है। इस दौरान की गई स्टडी के अनुसार, पहले भोजन में हर एक घंटे की देरी इस खतरे को 5% तक बढ़ा देती है। इसका मुख्य वैज्ञानिक कारण यह है कि लंबे समय तक खाली पेट रहने से पित्त (bile) गाढ़ा हो जाता है और उसमें कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे पथरी बनने लगती है। सुबह 9 बजे से पहले नाश्ता करने वालों की तुलना में, जो लोग अपना पहला भोजन दोपहर में करते हैं, उनमें पथरी का खतरा 49% ज्यादा पाया गया है। पित्त की पथरी से बचने के लिए समय पर नाश्ता करना स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है।
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पित्त की पथरी से बचने के लिए क्या करें?
डॉ. शरद मल्होत्रा सलाह देते हैं कि दिन की शुरुआत पौष्टिक नाश्ते से करनी चाहिए और भोजन के बीच बहुत लंबा अंतर नहीं रखना चाहिए। बैलेंस डाइट में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और पर्याप्त फाइबर शामिल करना फायदेमंद माना जाता है। साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, नियमित एक्सरसाइज करना और क्रैश डाइट या बहुत तेजी से वजन कम करने से बचना भी जरूरी है। यदि वजन कम करना हो, तो धीरे-धीरे और एक्सपर्ट की सलाह के अनुसार करना बेहतर रहता है। हेल्दी खानपान और एक्टिव लाइफस्टाइल पित्ताशय को सामान्य रूप से काम करने में मदद कर सकती है।
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डॉक्टर की सलाह
यदि किसी व्यक्ति को बार-बार पेट के दाईं ऊपरी तरफ तेज दर्द होता है, खासकर ऑयली भोजन करने के बाद, या मतली, उल्टी, अपच, पेट फूलना या कंधे तक फैलने वाला दर्द महसूस होता है, तो इसे सामान्य गैस या अपच समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण पित्त की पथरी का संकेत हो सकते हैं। समय रहते गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से परामर्श लेकर अल्ट्रासाउंड जैसी जांच कराने से समस्या की सही पहचान और समय पर इलाज हो सकता है।
निष्कर्ष
नाश्ता छोड़ना सीधे तौर पर हर व्यक्ति में पित्त की पथरी का कारण नहीं बनता, लेकिन लंबे समय तक भोजन के बीच ज्यादा अंतर रखना पित्ताशय ने फंक्शन को प्रभावित कर सकता है और कुछ लोगों में पित्त की पथरी बनने का जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए नियमित समय पर बैलेंस भोजन करना, पर्याप्त पानी पीना, हेल्दी वजन बनाए रखना और ज्यादा फास्टिंग या क्रैश डाइट से बचना बेहतर विकल्प है। यदि पित्त की पथरी से जुड़े लक्षण बार-बार दिखाई दें, तो बिना देरी किए एक्सपर्ट डॉक्टर से सलाह लेना सबसे जरूरी है।
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FAQ
पित्त की पथरी क्यों होती है?
पित्त में कोलेस्ट्रॉल या अन्य तत्वों का असंतुलन, पित्त का लंबे समय तक जमा रहना, मोटापा, तेजी से वजन कम करना और कुछ समस्याओं के कारण पित्त में पथरी हो सकती है।गॉल ब्लैडर स्टोन के क्या लक्षण हैं?
पेट के दाईं ऊपरी हिस्से में दर्द, ऑयली भोजन के बाद दर्द बढ़ना, मतली, उल्टी, अपच और पेट फूलना इसके सामान्य लक्षण हो सकते हैं।
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Current Version
Jul 16, 2026 18:04 IST
Modified By : Akanksha Tiwari Jul 16, 2026 18:04 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Sharad Malhotra