Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr Sharad Malhotra , Senior Consultant & Director – Gastroenterology, Hepatology & Therapeutic Endoscopy

क्या सुबह का नाश्ता छोड़ने से बढ़ता है पित्त की पथरी का खतरा? डॉक्टर से जानें सच

नाश्ता छोड़ना सीधे तौर पर पित्त की पथरी का कारण नहीं बनता, पर भोजन के बीच लंबा अंतराल पित्ताशय के फंक्शन को प्रभावित कर जोखिम बढ़ा सकता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि नियमित हेल्दी नाश्ता और बैलेंस लाइफस्टाइल पित्त की पथरी से बचाव में सहायक हो सकती है।

आज की बिजी लाइफस्टाइल में नाश्ता छोड़ना कई लोगों की आदत बन चुकी है। कोई ऑफिस की जल्दी में सुबह का खाना नहीं खाता, तो कोई वजन कम करने के लिए ब्रेकफास्ट स्किप कर देता है लेकिन क्या सुबह का नाश्ता छोड़ने की यह आदत आपकी पित्ताशय (Gallbladder) की सेहत पर असर डाल सकती है? आकाश हेल्थकेयर के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं थेराप्यूटिक एंडोस्कोपी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट और डायरेक्टर, डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, केवल नाश्ता छोड़ना हर व्यक्ति में गॉलस्टोन बनने का कारण नहीं बनता। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक भोजन के बीच बहुत ज्यादा अंतर रखता है या बार-बार भोजन छोड़ता है, तो इससे पित्ताशय का नॉर्मल फंक्शन प्रभावित हो सकता है।

क्या नाश्ता छोड़ना पित्त की पथरी का कारण बनता है?

डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं, ''पित्ताशय एक छोटा-सा अंग है, जो लिवर द्वारा बनाए गए पित्त (Bile) को इकट्ठा करता है। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक कुछ नहीं खाता या बार-बार कई दिनों तक नाश्ता छोड़ देता है, तो पित्ताशय पर्याप्त रूप से खाली नहीं हो पाता। इससे पित्त लंबे समय तक पित्ताशय में जमा रह सकता है, जिसे पित्त का ठहराव (Bile Stasis) कहा जाता है। यही स्थिति कुछ लोगों में पथरी बनने की संभावना को बढ़ा सकती है।''

  • डॉ. शरद मल्होत्रा का कहना है कि पित्त की पथरी बनने के पीछे केवल नाश्ता छोड़ना जिम्मेदार नहीं होता। इसके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।
  • मोटापा, तेजी से वजन कम करना, लंबे समय तक की फास्टिंग, ज्यादा ऑयली और अनहेल्दी डाइट लेना, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और कुछ हार्मोनल स्थितियां भी गॉलस्टोन यानी पित्त की पथरी बनने के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
  • इसके अलावा, परिवार में पहले से पित्त की पथरी का इतिहास होने पर भी संभावना ज्यादा हो सकती है। इसलिए केवल एक आदत को दोष देने के बजाय पूरी लाइफस्टाइल पर ध्यान देना जरूरी है।

साल 2024 में Frontiers in Nutrition Journal में प्रकाशित रिसर्च आर्टिकल के अनुसार, नाश्ता न करना या सुबह का पहला खाना देर से खाना पित्त की पथरी (gallstones) के खतरे को काफी बढ़ा देता है। इस दौरान की गई स्टडी के अनुसार, पहले भोजन में हर एक घंटे की देरी इस खतरे को 5% तक बढ़ा देती है। इसका मुख्य वैज्ञानिक कारण यह है कि लंबे समय तक खाली पेट रहने से पित्त (bile) गाढ़ा हो जाता है और उसमें कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे पथरी बनने लगती है। सुबह 9 बजे से पहले नाश्ता करने वालों की तुलना में, जो लोग अपना पहला भोजन दोपहर में करते हैं, उनमें पथरी का खतरा 49% ज्यादा पाया गया है। पित्त की पथरी से बचने के लिए समय पर नाश्ता करना स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है।

इसे भी पढ़ें: क्या पित्ताशय की पथरी बिना सर्जरी के ठीक हो सकती है? डॉक्टर से जानें

Skipping Breakfast Increase Gallstone Risk

पित्त की पथरी से बचने के लिए क्या करें?

डॉ. शरद मल्होत्रा सलाह देते हैं कि दिन की शुरुआत पौष्टिक नाश्ते से करनी चाहिए और भोजन के बीच बहुत लंबा अंतर नहीं रखना चाहिए। बैलेंस डाइट में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और पर्याप्त फाइबर शामिल करना फायदेमंद माना जाता है। साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, नियमित एक्सरसाइज करना और क्रैश डाइट या बहुत तेजी से वजन कम करने से बचना भी जरूरी है। यदि वजन कम करना हो, तो धीरे-धीरे और एक्सपर्ट की सलाह के अनुसार करना बेहतर रहता है। हेल्दी खानपान और एक्टिव लाइफस्टाइल पित्ताशय को सामान्य रूप से काम करने में मदद कर सकती है।

इसे भी पढ़ें: पित्त की पथरी होने पर भूलकर भी न खाएं ये 5 चीजें, बढ़ सकती है दर्द की समस्या

डॉक्टर की सलाह

यदि किसी व्यक्ति को बार-बार पेट के दाईं ऊपरी तरफ तेज दर्द होता है, खासकर ऑयली भोजन करने के बाद, या मतली, उल्टी, अपच, पेट फूलना या कंधे तक फैलने वाला दर्द महसूस होता है, तो इसे सामान्य गैस या अपच समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण पित्त की पथरी का संकेत हो सकते हैं। समय रहते गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से परामर्श लेकर अल्ट्रासाउंड जैसी जांच कराने से समस्या की सही पहचान और समय पर इलाज हो सकता है।

निष्कर्ष

नाश्ता छोड़ना सीधे तौर पर हर व्यक्ति में पित्त की पथरी का कारण नहीं बनता, लेकिन लंबे समय तक भोजन के बीच ज्यादा अंतर रखना पित्ताशय ने फंक्शन को प्रभावित कर सकता है और कुछ लोगों में पित्त की पथरी बनने का जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए नियमित समय पर बैलेंस भोजन करना, पर्याप्त पानी पीना, हेल्दी वजन बनाए रखना और ज्यादा फास्टिंग या क्रैश डाइट से बचना बेहतर विकल्प है। यदि पित्त की पथरी से जुड़े लक्षण बार-बार दिखाई दें, तो बिना देरी किए एक्सपर्ट डॉक्टर से सलाह लेना सबसे जरूरी है।

All Image Credit- magnific

FAQ

  • पित्त की पथरी क्यों होती है?

    पित्त में कोलेस्ट्रॉल या अन्य तत्वों का असंतुलन, पित्त का लंबे समय तक जमा रहना, मोटापा, तेजी से वजन कम करना और कुछ समस्याओं के कारण पित्त में पथरी हो सकती है।
  • गॉल ब्लैडर स्टोन के क्या लक्षण हैं?

    पेट के दाईं ऊपरी हिस्से में दर्द, ऑयली भोजन के बाद दर्द बढ़ना, मतली, उल्टी, अपच और पेट फूलना इसके सामान्य लक्षण हो सकते हैं।

Read Next

लिवर मरीजों को सार्कोपेनिया का खतरा ज्यादा क्यों होता है? बता रहे हैं डॉक्टर

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Akanksha Tiwari

Akanksha Tiwari

Senior Sub Editor

आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Jul 16, 2026 18:04 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Jul 16, 2026 18:04 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Sharad Malhotra

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content