गॉलब्लैडर यानी पित्ताशय में पथरी बिना किसी लक्षण के रहती है, लेकिन जब यह पित्त नली यानी बाइल डक्ट में फंस जाती है, तो पेट के ऊपरी हिस्से में अचानक तेज दर्द, मतली, उल्टी, अपच और गैस जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इस स्थिति को बाइलरी कोलिक कहा जाता है, जो काफी दर्दनाक हो सकती है। आकाश हेल्थकेयर के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं थेराप्यूटिक एंडोस्कोपी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट और डायरेक्टर डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, कोई एक खास भोजन सीधे तौर पर गॉलस्टोन यानी पित्त की पथरी का कारण नहीं बनता, लेकिन लंबे समय तक असंतुलित खानपान, फाइबर और विटामिन-C की कमी, चीनी, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, फास्ट फूड और अनहेल्दी फैट का सेवन गॉलब्लैडर की हेल्थ पर बुरा असर डाल सकता है।
पित्त की पथरी में क्या नहीं खाना चाहिए?
डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं कि पित्त की पथरी होने पर कई बार मरीज को लंबे समय तक इसके बारे में पता ही नहीं चलता है और ऐसे में अगर व्यक्ति की डाइट अनहेल्दी है तो समस्या तेजी से बढ़ सकती है और अचानक उठने वाले तेज दर्द का कारण बन सकती है। पित्त की पथरी होने पर ज्यादा फैट वाला खाना खाने से आपकी तकलीफ और दर्द का खतरा काफी बढ़ सकता है। इस स्थिति को 'बाइलरी कोलिक' कहा जाता है। यह तब होता है जब कोई पथरी पित्त की नली को बंद कर देती है, जिससे अचानक असहनीय दर्द होने लगता है।
साल 2023 में NIH की Bookshelf में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पित्ताशय की पथरी मुख्य रूप से कोलेस्ट्रॉल या पिगमेंट से बनती है, जो मोटापा, उम्र और हार्मोनल बदलावों के कारण हो सकती है। आमतौर पर इसके लक्षण नहीं दिखते, लेकिन फैटी भोजन करने पर यह पित्त की नली को ब्लॉक करके तेज दर्द पैदा कर सकती है। यदि यह पथरी आगे बढ़कर मुख्य पित्त नली में फंस जाए (Choledocholithiasis), तो यह लिवर के एंजाइमों को बिगाड़ देती है। गंभीर मामलों में, यह पैनक्रियाज तक पहुंचकर खतरनाक सूजन का कारण भी बन सकती है।
1. रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट
डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं कि मैदा से बने बिस्कुट, केक, पेस्ट्री, कुकीज, सफेद ब्रेड और अन्य बेकरी प्रोडक्ट्स में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है। इनमें फाइबर की मात्रा बेहद कम होती है, जिससे डाइजेस्टिव सिस्टम पर ज्यादा दबाव पड़ता है। डॉ. मल्होत्रा के अनुसार, लंबे समय तक ऐसे फूड्स का ज्यादा सेवन गॉलब्लैडर की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसकी जगह साबुत अनाज, ओट्स और फाइबर युक्त फूड्स को अपनी डाइट में शामिल करना ज्यादा फायदेमंद रहता है।
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2. फास्ट फूड
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में फास्ट फूड का सेवन तेजी से बढ़ा है लेकिन बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज में नमक, चीनी और अनहेल्दी फैट की मात्रा ज्यादा होती है। डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, ऐसे फूड्स नियमित रूप से खाने से न केवल मोटापा और मेटाबॉलिक समस्याएं बढ़ती हैं, बल्कि गॉलब्लैडर यानी पित्ताशय पर भी बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए इनका सेवन जितना संभव हो, कम करना चाहिए।
3. अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड
चिप्स, पैकेट में मिलने वाली नमकीन और अन्य अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में नमक, चीनी, प्रिजर्वेटिव और अनहेल्दी फैट बहुत होता है। डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, ऐसे फूड्स खाने से पित्त की पथरी बनने और अगर यह समस्या है तो अचानक दर्द उठने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
4. सैचुरेटेड और ट्रांस फैट
डीप फ्राइड फूड, तली-भुनी चीजें, मीट, फ्राइड चिकन, कुछ बेकरी प्रोडक्ट्स और पैकेज्ड स्नैक्स में सैचुरेटेड और ट्रांस फैट ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं। डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, ट्रांस फैट ब्लड में ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ाकर पित्तशय के सामान्य काम में बाधा डाल सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति को पहले से पित्त की पथरी है, तो ज्यादा फैट वाला भोजन पित्ताशय के संकुचन को बढ़ा सकता है, जिससे पथरी बाइल डक्ट में फंसने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे पेट के ऊपरी हिस्से में अचानक दर्द हो सकता है।
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साल 2017 में Journal of Health, Population and Nutrition में प्रकाशित रिसर्च से पता चलता है कि हमारा खान-पान यह तय करता है कि हमें किस तरह की पथरी होगी। बीफ, पोर्क जैसे रेड मीट और जानवरों से मिलने वाले फैट का ज्यादा सेवन करने से 'कोलेस्ट्रॉल वाली पथरी' होने का खतरा बढ़ जाता है। दूसरी तरफ, बहुत ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाने से 'पिगमेंट वाली पथरी' होने की संभावना ज्यादा होती है। इससे साफ है कि आप जैसा भोजन करते हैं, उसका सीधा असर आपके शरीर में बनने वाली पित्त की पथरी के प्रकार पर पड़ता है।
5. शुगर
ज्यादा चीनी, खासतौर से फ्रक्टोज युक्त फूड्स का ज्यादा सेवन गॉलब्लैडर यानी पित्ताशय के फंक्शन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस, कैंडी, मिठाइयां और शक्कर से भरपूर डेजर्ट शरीर में ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल बढ़ा सकते हैं। इससे पित्त की क्वालिटी प्रभावित हो सकती है और समय के साथ पित्त की पथरी बनने या पहले से मौजूद पथरी से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
डॉक्टर की सलाह
डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, पित्त की पथरी से पीड़ित लोगों को बैलेंस और पौष्टिक डाइट अपनानी चाहिए। भोजन में पर्याप्त फाइबर, विटामिन-C से भरपूर फल और सब्जियां, साबुत अनाज और पर्याप्त मात्रा में पानी शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। साथ ही, बहुत ज्यादा तला-भुना और फैट युक्त भोजन एक बार में खाने के बजाय हल्का और छोटे-छोटे हिस्सों में भोजन करना बेहतर रहता है। हालांकि, हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है, इसलिए डाइट में बड़े बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना जरूरी है।
निष्कर्ष
पित्त की पथरी की समस्या में केवल दवाइयों पर निर्भर रहने के बजाय खानपान पर खास ध्यान देना भी बेहद जरूरी है। डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, ज्यादा चीनी, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, फास्ट फूड, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और ट्रांस फैट से भरपूर फूड्स पित्ताशय यानी गॉलब्लैडर की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं और पित्त की पथरी से होने वाली तकलीफ बढ़ा सकते हैं। वहीं, बैलेंस डाइट, पर्याप्त फाइबर, विटामिन-C और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर पित्ताशय को बेहतर तरीके से हेल्दी रखा जा सकता है। यदि पित्त की पथरी के साथ बार-बार तेज पेट दर्द, उल्टी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
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FAQ
पित्त की पथरी में मीठा खाना चाहिए या नहीं?
पित्त की पथरी की समस्या होने पर मीठा खाने से परहेज करना चाहिए। शुगर से बनी चीजों का ज्यादा सेवन पित्त की पथरी की समस्या को कई गुना बढ़ा सकता है।पित्त की पथरी को गलाने के लिए कौन सी दवा है?
पित्त की पथरी गलाने के लिए कौन सी दवा दी जाए ये इस बात कर निर्भर करता है कि पित्त की पथरी का प्रकार कौन सा है और इसका साइज क्या है। पथरी गलाने के लिए दवा कभी भी बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेनी चाहिए।
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Jul 17, 2026 14:39 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Sharad Malhotra