आमतौर पर हमें हर तरह के स्किन इंफेक्शन एक जैसे लगते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन दोनों एक-दूसरे से अलग हैं। इनके लक्षण और कारण भी एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। ऐसे में यह सवाल जरूर मन में उठता है कि बैक्टीरियल और फंगल स्किन इंफेक्शन के बीच अंतर को कैसे समझा जाए? इस लेख में राजौरी गार्डन स्थित कॉस्मेटिक स्किन क्लिनिक की कॉस्मेटोलॉजिस्ट और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. करुणा मल्होत्रा से जानेंगे इनके बीच फर्क को विस्तार से।
| विशेषता | फंगल इंफेक्शन (Fungal Infection) |
बैक्टीरियल इंफेक्शन (Bacterial Infection) |
| कारण | यह फंगस या यीस्ट के अत्यधिक बढ़ने के कारण होता है। |
यह हानिकारक बैक्टीरिया (जैसे Staphylococcus या Streptococcus) के कारण होता है। |
| लक्षण | लाल रैशेस, गोल छल्ले (Ring-like structure), अत्यधिक खुजली, सूखी या पपड़ीदार त्वचा। | लालिमा, सूजन, दर्द, गर्मी महसूस होना, पास या पानी से भरे छाले होना। |
| त्वचा का स्वरूप | त्वचा आमतौर पर सूखी, पपड़ीदार या छिलने वाली होती है। | त्वचा में अक्सर सूजन, पस/मवाद, घाव या पीले रंग की पपड़ी जमती है। |
| फैलाव और स्थिति (Location) | ज्यादातर नमी वाले हिस्सों में (जैसे जांघों के बीच, उंगलियों के बीच, बगल में)। | शरीर के किसी भी हिस्से पर, विशेषकर जहां कोई कट, घाव या खरोंच लगी हो। |
| फैलने का तरीका | संक्रमित व्यक्ति के कपड़े, तौलिया या छूने से आसानी से फैलता है। | खुले घाव, कटी त्वचा या दूषित सतहों के संपर्क में आने से फैलता है। |
| सामान्य उदाहरण | दाद (Ringworm), एथलीट फुट (Athlete's Foot), जांघों की खुजली (Jock Itch), कैंडिडियासिस। | फुंसी/फोड़ा (Boils/Carbuncles), सेलुलाइटिस (Cellulitis), इम्पेटिगो (Impetigo)। |
| इलाज | इसके लिए एंटीफंगल (Antifungal) क्रीम, पाउडर या दवाओं का उपयोग किया जाता है। | इसके लिए एंटीबायोटिक (Antibiotic) क्रीम या ओरल एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता होती है। |
फंगल स्किन इंफेक्शन क्या है?
जब शरीर के किसी हिस्से में पसीना और नमी लंबे समय तक बनी रहती है,तो इसकी वजह से प्रभावित हिस्से में फंगस की मात्रा बढ़ जाती है, तो वहां दाद, खुजली या चकत्ते जैसी समस्या हो सकती है। एथलीट फुट (पैरों की उंगलियों में सड़न या खुजली), दाद और यीस्ट इन्फेक्शन इसके कुछ आम उदाहरणों में शामिल हैं।
CDC की मानें, तो दुनिया भर में हर साल एक अरब से अधिक लोगों को फंगल इन्फेक्शन होता है। यह समस्या सामान्य से लेकर गंभीर और जानलेवा भी हो सकती है। आमतौर पर कमजोर इम्यूनिटी, अधिक उम्र, क्रोनिक बीमारी से जूझ रहे लोगों को फंगल इन्फेक्शन होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
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फंगल इंफेक्शन के प्रकार
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- एथलीट फुटः यह समस्या होने पर मरीज को अपने पंजों पर काफी ज्यादा खुजली महसूस होती है और पैरों की उंगलियों के बीच त्वचा छिलने या फटने लगती है।
- दादः इस समस्या में लाल या गोल चकत्ते बनते हैं, जिनके किनारे उभरे हुए और बीच की त्वचा साफ दिखती है।
- जॉक इचः जांघों के बीच के हिस्से में खुजलीदार, लाल चकत्ते उभरना।
- क्यूटेनियस कैंडिडियासिसः यह यीस्ट की मात्रा अत्यधिक बढ़ने से यह समस्या होती है। इसमें त्वचा की सिलवटों जैसे कि बगल या स्तनों के नीचे लाल, जलन वाले रैशेज पैदा हो जाते हैं।
कब जाएं डाॅक्टर के पास?
अगर फंगल स्किन इंफेक्शन पर एंटी फंगल क्रीम काम न करे, तो बेहतर होगा कि आप इस संबंध में डॉक्टर से मिलें। कई बार सही ट्रीटमेंट नहीं मिलने की वजह से यह अन्य हिस्सों में फैलने लगता है और धीरे-धीरे इसका दर्द भी बढ़ जाता है। अगर संक्रमण ठीक होने के बाद कुछ दिनों में दोबारा हो जाए, तो समझ जाएं कि किसी अन्य मेडिकल कंडीशन की वजह से ऐसा हो रहा है।
बैक्टीरियल स्किन इंफेक्शन क्या है?
बैक्टीरियल इंफेक्शन तब होता है जब किसी खरोंच या घाव के जरिए बैक्टीरिया त्वचा के अंदर चले जाते हैं। जहां एक ओर फंगल इंफेक्शन में मुख्य रूप से खुजली होती है, वहीं बैक्टीरियल इंफेक्शन में दर्द, सूजन, रेडनेस और त्वचा में मवाद जमने की समस्या हो जाती है।
New York State Department of Health में प्रकाशित एक फैक्ट शीट की मानें, तो कई बैक्टीरियल स्किन इंफेक्शन माइल्ड होते हैं और सही इलाज के जरिए पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। हालांकि, कुछ बैक्टीरियल इंफेक्शन जानलेवा भी हो सकते हैं। यही नहीं, कुछ बैक्टीरिया बहुत आसानी से संक्रमित व्यक्ति के जरिए स्वस्थ व्यक्ति तक फैल सकता है।
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बैक्टीरियल इंफेक्शन के प्रकार
- सेलुलाइटिसः इस बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण त्वचा में सूजन, लालिमा और तेज दर्द होने लगता है। असल में, यह संक्रमण त्वचा को गहराई तक प्रभावित करता है।
- इम्पेटिगोः यह एक फैलने वाला इंफेक्शन है, जिसमें शहद के रंग जैसी सूखी पपड़ी बन जाती है। यह बच्चों में बहुत आम समस्या है।
- फॉलिकुलाइटिसः हेयर फॉलिकल्स में छोटे-छोटे दाने हो जाते हैं। इसमें कई बर मवाद भी बन जाता है।
- फोड़ेः त्वचा के अंदर गहराई में होने वाली दर्दनाक, मवाद से भरी गांठें।
बैक्टीरियल इंफेक्शन के लक्षण
- स्किन में रेडनेस छाना और सूजन बढ़ना।
- प्रभावित हिस्से में छूने पर दर्द या चुभन महसूस होना।
- प्रभावित हिस्सा गर्म होना।
- मवाद, पानी से भरे छाले या पपड़ीदार घाव बनना।
- कुछ गंभीर मामलों में बुखार आना और ठंड लगना।
डाॅक्टर के पास कब जाएं?
अगर ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी लक्षण आपको दिखाई दे, तो बेहतर है कि आप समय पर डाॅक्टर के पास जाएं। इसके अलावा, ध्यान रखें कि त्वचा से संबंधित किसी भी समस्या को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। यह समस्याएं आसानी से फैलने लगती हैं। इसलिए, त्वचा में दाने, रेडनेस, रैशेज आदि होते ही साफ-सफाई का ध्यान रखें और अपनी चीजों को दूसरों से अलग कर लें।
निष्कर्ष
बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन एक जैसे नजर आते हुए भी एक नहीं है। इनमें कुछ मूलभूत अंतर होते हैं। इनका जिक्र हमने लेख में किया है। हां, अगर घर में किसी को भी इस तरह की समस्या हो, तो उसे इग्नोर न करें। अपने लक्षणों को पहचानें और समय पर डाॅक्टर के पास जाकर अपना इलाज करवाएं।
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FAQ
यदि गलती से बैक्टीरियल इंफेक्शन पर स्टेरॉयड या एंटी-फंगल क्रीम लगा दी जाए, तो क्या होता है?
गलत क्रीम लगाना सही नहीं है। अगर बैक्टीरियल इंफेक्शन पर एंटी-फंगल या स्टेरॉयड क्रीम लगाई जाए, तो बैक्टीरिया और तेजी से फैल सकते हैं, जिससे सूजन बढ़ सकती है।डायबिटिक मरीजों में बैक्टीरियल या फंगल स्किन इंफेक्शन बार-बार क्यों लौट आता है?
डायबिटीज के मरीजों में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा होने के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे नसों में ब्लड फ्लो बाधित होता है। इसके अलावा, बढ़ा हुआ शुगर का स्तर त्वचा पर बैक्टीरिया और फंगस को पनपने के लिए अनुकूल माहौल देता है।
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Current Version
Jul 29, 2026 16:39 IST
Modified By : Meera Tagore Jul 29, 2026 16:39 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Karuna Malhotra