Fri Sep 25, 2026 | 10:09 PM IST

Medically Reviewed by Dr Chandni Jain Gupta , Dermatologist

फंगल इंफेक्‍शन vs एक्‍ज‍िमा: क्‍या है अंतर? डर्मेटोलॉज‍िस्‍ट से जानें लक्षण, कारण और इलाज

एक्‍ज‍िमा और फंगल इंफेक्‍शन, त्‍वचा की दो अलग-अलग समस्‍याएं हैं, लेक‍िन अक्‍सर इनमें कुछ कॉमन लक्षण देखकर लोग इन्‍हें एक समझ लेते हैं जैसे दोनों में रेडनेस, त्‍वचा में पपड़ी बनना या खुजली की समस्‍या हो सकती है। डॉक्‍टर से जानें दोनों में क्‍या अंतर है?
फंगल इंफेक्‍शन vs एक्‍ज‍िमा: क्‍या है अंतर? डर्मेटोलॉज‍िस्‍ट से जानें लक्षण, कारण और इलाजफंगल इंफेक्‍शन vs एक्‍ज‍िमा: क्‍या है अंतर? डर्मेटोलॉज‍िस्‍ट से जानें लक्षण, कारण और इलाज

मानसून सीजन आ चुका है और इस दौरान फंगल इंफेक्‍शन तेजी से बढ़ता है। हालांक‍ि, फंगल इंफेक्‍शन और स्‍क‍िन ड‍िजीज एक्‍ज‍िमा अक्‍सर एक जैसे लगते हैं। लोग ज‍िसे फंगल इंफेक्‍शन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, वह असल में एक्‍ज‍िमा होता है और इलाज के अभाव में गंभीर हो जाता है। इसल‍िए फंगल इंफेक्‍शन और एक्‍ज‍िमा में अंतर (Fungal Infection vs Eczema) समझना जरूरी है। जब क‍िसी व्‍यक्‍त‍ि को फंगल इंफेक्‍शन होता है, तो लाल चकत्ते या खुजली हो सकती है। वहीं एक्‍ज‍िमा होने की शुरुआत तेज खुजली से होती है। इसके बाद लाल चकत्ते और छोटे-छोटे उभरे हुए दाने हो सकते हैं ज‍िनमें जलन भी हो सकती है। फंगल इंफेक्‍शन और एक्‍ज‍िमा के अंतर को व‍िस्‍तार से समझने के ल‍िए हमने Dr. Chandni Jain Gupta, Dermatologist, Cosmetologist And Hair Transplant Surgeon At Elantis Healthcare, New Delhi से बात की।

फंगल इंफेक्‍शन और एक्‍ज‍िमा में कॉमन क्‍या है?

  • फंगल इंफेक्‍शन और एक्‍ज‍िमा दोनों में ही सूजन और रेडनेस होती है।
  • दोनों में ही त्‍वचा ड्राई और खुजलीदार हो जाती है।
  • दोनों ही शरीर में क‍िसी भी जगह हो सकता है।

फंगल इंफेक्‍शन और एक्‍ज‍िमा में अंतर

                            Fungal Infection                          Eczema
लक्षण ज्‍यादातर केस में लाल, उभरे हुए पैच। ज्‍यादातर केस में सूजन, रेडनेस, ड्राईनेस।
कैसे फैलता है? पसीना, नमी, संक्रम‍ित व्‍यक्‍त‍ि के संपर्क से भी फैलता है।  संक्रामक नहीं है। 
कारण  यीस्‍ट या फंगस। इम्‍यून‍ स‍िस्‍टम में गड़बड़ी।
ठीक होने में क‍ितना समय लगता है? सही इलाज के साथ 8 से 10 द‍िनों में राहत म‍िलती है। लंबा समय लग सकता है और इसे जड़ से खत्‍म करना मुश्‍क‍िल है।
इलाज  एंटीफंगल दवाओं का इस्‍तेमाल। एंटीएलर्जी प‍िल्‍स का इस्‍तेमाल। 
  • फंगल इंफेक्‍शन आमतौर पर यीस्‍ट या फंगस के कारण होता है। वहीं एक्‍जि‍मा एलर्जी के प्रत‍ि अनुवांश‍िक प्रवृति‍ या इम्‍यू न स‍िस्‍टम में गड़बड़ी के कारण होता है।
  • फंगल इंफेक्‍शन के इलाज में एंटी-फंगल दवाओं की मदद ली जाती है। वहीं एक्‍ज‍िमा में एलर्जी दूर करने की दवाएं दी जाती है।
  • फंगल इंफेक्‍शन संक्राम‍क रोग है जो क‍ि एक व्‍यक्‍त‍ि से दूसरे में फैल सकता है जबक‍ि एक्‍जि‍मा संक्रामक रोग नहीं है।

साल 2026 में Frontiers In Medicine में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के अनुसार, फंगल इंफेक्‍शन होने पर त्‍वचा की बाहरी परत में पाए जाने वाले केराटिन (Keratin) पर असर पड़ता है। वहीं एक्‍ज‍िमा में त्‍वचा की ऊपरी सुरक्षा परत कमजोर हो जाती है। इससे त्‍वचा में सूजन और ऑक्‍सीडेटि‍व स्‍ट्रेस बढ़ सकता है।

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लक्षणों में अंतर

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फंगल इंंफेक्‍शन

  • क‍िनारे उभरे हुए द‍िखना खासकर दाद (रिंगवर्म) में।
  • त्‍वचा का छ‍िलना।
  • लाल और खुजलीदार चकत्ते।
  • कभी-कभी हल्की सूजन होना।

एक्‍ज‍िमा

  • त्‍वचा में ड्राईनेस होना।
  • पपड़ीदार या खुरदुरी त्‍वचा।
  • तेज खुजली।
  • रेडनेस या सूजन।

जांच

फंगल इंफेक्‍शन

Dermatologist Dr. Chandni Jain Gupta ने बताया क‍ि फंगल इंफेक्‍शन ब्‍लड में प्रवेश नहीं करता है इसल‍िए इसमें ब्‍लड टेस्‍ट नहीं क‍िए जाते हैं। कुछ केस में स्‍क‍िन स्‍क्रेप‍िंग से जांच की जाती है। कुछ मरीजों का ( शुगर टेस्‍ट या थायराइड टेस्‍ट भी क‍िया जाता है।

एक्‍ज‍िमा

एक्‍ज‍िमा के केस में अगर बाहरी एलर्जी है यानी कॉन्‍टेक्‍ट डर्मेटाइटिस है, तो पैच टेस्‍ट या स्‍क‍िन प्र‍िक टेस्‍ट क‍िया जाता है। कुछ मामलों में थायराइड टेस्‍ट भी क‍िया जाता है। हालांक‍ि, एक्‍ज‍िमा के ज्‍यादातर मामलों में डॉक्‍टर लक्षणों के आधार पर इलाज करते हैं, इसमें एलर्जी टेस्‍ट नहीं क‍िया जाता है।

कारण

फंगल इंफेक्‍शन

  • फंगल इंफेक्शन फंगस या यीस्‍ट की अध‍िक ग्रोथ के कारण होता है। 
  • क‍िसी ऐसे व्‍यक्‍त‍ि के संपर्क में आना ज‍िसे पहले से फंगल इंफेक्‍शन हो।
  • घर पर पालतू जानवर हों ज‍िन्‍हें रैशेज हो या कोई एलर्जी हो।
  • गीली या गंदी जगह पर नंगे पैर चलने से भी फंगल इंफेक्‍शन हो सकता है।

एक्‍ज‍िमा

Dr. Chandni Jain Gupta ने बताया क‍ि अक्‍सर जब शरीर का इम्‍यून‍ स‍िस्‍टम ड‍िस्‍टर्ब हो जाता है, तब एक्‍ज‍िमा होता है। ऐसे मामलों में स्‍क‍िन र‍िएक्‍शन बढ़ सकता है। एक्‍ज‍िमा होने के सभी कारण का पूरी तरह से पता लगाना फ‍िलहाल संभव नहीं है, इसल‍िए इसे जड़ से खत्‍म नहीं क‍िया जा सकता है और इलाज के बाद भी एक्‍ज‍िमा दोबारा हो सकता है।

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इलाज में अंतर 

फंगल इंफेक्‍शन

  • फंगल इंफेक्‍शन तेजी से फैलता है इसल‍िए इसका जल्‍द से जल्‍द इलाज करना जरूरी है। इलाज के ल‍िए एंटीफंगल दवाओं का इस्‍तेमाल क‍िया जाता है। एंटीफंगल दवाओं का इलाल ओरल प‍िल्‍स से भी क‍िया जाता है।
  • फंगल इंफेक्‍शन वाले ह‍िस्‍से में बैक्‍टीर‍ियल इंफेक्‍शन भी हो गया हो और साथ में पस या दर्द हो, तो उन मामलों में एंटीबायोटि‍क्‍स भी दी जाती हैं।
  • एक साल से कम उम्र के श‍िशुओं को भी फंगल इंफेक्‍शन होने पर एंटीफंगल दवाओं का इस्‍तेमाल क‍िया जाता है।
  • डॉक्‍टर सलाह देते हैं क‍ि फंगल इंफेक्‍शन के इलाज में स्‍टेरॉयड क्रीम का इस्‍तेमाल नहीं करना चाह‍िए।
  • माइल्‍ड फंगल इंफेक्‍शन के इलाज में 8 से 10 द‍िनों में आराम म‍िल सकता है।

एक्‍ज‍िमा

एक्‍ज‍िमा के इलाज में यह समझना जरूरी है क‍ि एक्‍ज‍िमा होने का कारण क्‍या है? अगर क‍िसी प्रोडक्‍ट को लगाने से एक्‍ज‍िमा हुआ है, तो उसका प्रयोग बंद करने की सलाह दी जाती है। एटोपिक डर्मेटाइटिस एक प्रकार का एक्‍ज‍िमा है ज‍िसमें दवाएं और मेड‍िकेटेड क्रीम का इस्‍तेमाल क‍िया जाता है। अगर एक्‍ज‍िमा ज्‍यादा गंभीर है, तो इंजेक्‍शन की मदद भी ली जाती है। अगर माइल्‍ड या नई एलर्जी है, तो एलर्जी से राहत के ल‍िए क्रीम या एंटी-एलर्जी दवाओं का इस्‍तेमाल क‍िया जाता है।

न‍िष्‍कर्ष:

फंगल इंफेक्‍शन होने पर लाल और खुजलीदार चकत्ते नजर आ सकते हैं। फंगल इंफेक्‍शन के पीछे कैंड‍िडा हो सकता है। फंगल इंफेक्‍शन से दूसरे व्‍यक्‍त‍ि में फैलता है और इसके ल‍िए एंटी-फंगल दवाओं की मदद ली जाती है। वहीं एक्‍ज‍िमा एक से दूसरे व्‍यक्‍त‍ि में नहीं फैलता। एक्‍ज‍िमा में त्‍वचा लाल, सूजन भरी नजर आ सकती है। त्‍वचा में पपड़ीदार या खुरदुरी सतह भी दि‍ख सकती है। इम्‍यून‍ स‍िस्‍टम ड‍िस्‍टर्ब होने के कारण एक्‍ज‍िमा हो सकता है वहीं इसका इलाज एंटी-एलर्जी प‍िल्‍स या क्रीम से क‍िया जाता है।

FAQ

  • फंगल इंफेक्‍शन कि‍तने प्रकार का होता है?

    रिंगवर्म, एथलीट फुट, जॉक इच, नेल फंगस, कैंडिडिआसिस फंगल इंफेक्‍शन के कुछ प्रकार हैं। 
  • एक्‍ज‍िमा के प्रमुख प्रकार कौन से हैं?

    एटोपिक डर्मेटाइटिस, कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस, सेबोरिक डर्मेटाइटिस, स्टैसिस डर्मेटाइटिस, एक्‍ज‍िमा के प्रमुख प्रकार माने जाते हैं।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 10, 2026 18:48 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Chandni Jain Gupta

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