Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr Chandni Jain Gupta , Dermatologist

स्कैल्प में फंगल इंफेक्शन के इन चेतावनी संकेतों को न करें नजरअंदाज, जानें कब डॉक्टर से लें सलाह

त्‍वचा की तरह स्‍कैल्‍प में भी फंगल इंफेक्‍शन होता है और यह हेयर लॉस का कारण बन सकता है इसल‍िए इसे गंभीरता से लेना जरूरी है। यह क‍िसी भी उम्र में हो सकता है, लेक‍िन बच्‍चों में यह ज्‍यादा कॉमन होता है। जानें इसके चेतावनी संकेतों के बारे में।

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स्‍कैल्‍प के फंगल इंफेक्‍शन को टीनिया कैपिटिस (Tinea Capitis) भी कहा जाता है। स्‍कैल्‍प फंगल इंफेक्‍शन सुनने में इतना गंभीर नहीं लगता, लेक‍िन इसकी समय पर पहचान जरूरी है क्‍योंक‍ि इससे स्थायी या अस्थायी हेयर लॉस हो सकता है। स्‍कैल्‍प पर फंगल इंफेक्‍शन फैलाने वाला फंगस जैसे ही स्‍कैल्‍प के संपर्क में आता है, यह खुद को मल्‍टीप्‍लाई करना शुरू कर देता है। यह पूरे हेड शॉफ्ट को इंफेक्‍ट कर सकता है ज‍िससे हेयर फॉलि‍कल्‍स और बाल भी संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं। इससे बाल कमजोर हो जाते हैं और आसानी से टूट जाते हैं। कई चेतावनी संकेत हैं जो स्‍कैल्‍प फंगल इंफेक्‍शन होने पर नजर आ सकते हैं। ऐसे ही कुछ संकेतों के बारे में आगे जानेंगे। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Chandni Jain Gupta, Dermatologist, Cosmetologist And Hair Transplant Surgeon At Elantis Healthcare, New Delhi से बात की।

NCBI Bookshelf में प्रकाशित StatPearls के एक मेडिकल चैप्‍टर के अनुसार, स्‍कैल्‍प फंगल इंफेक्‍शन आमतौर पर ट्राइकोफाइटन (Trichophyton) और माइक्रोस्पोरम (Microsporum) नामक फंगस की प्रजातियों के कारण होता है। ये फंगस बालों के रोम और बालों के शॉफ्ट में प्रवेश करके उन्हें प्रभावित कर सकते हैं। यह इंफेक्‍शन संक्रमित व्यक्ति, जानवर, मिट्टी या संक्रमित वस्तुओं जैसे कंघी और टोपी के संपर्क से फैल सकता है।

स्‍कैल्‍प फंगल इंफेक्‍शन के चेतावनी संकेत

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1. बालों का आसानी से टूट जाना

Dr. Chandni Jain Gupta ने कहा, ''स्‍कैल्‍प फंगल इंफेक्‍शन होने पर बाल आसानी से टूटते हैं और आसानी से न‍िकल जाते हैं। जहां इंफेक्‍शन है वहां से बाल झड़ने लगते हैं। इसके कारण सिर पर गोल आकार के गंजे या खाली पैच भी नजर आ सकते हैं।''

2. स्‍कैल्‍प पर रेड पैच नजर आना

इंफेक्‍शन के कारण स्‍कैल्‍प की सतह में बदलाव आ सकता है। स्‍कैल्‍प पर लाल पैच नजर आए या सूजन द‍िखे, तो यह स्‍कैल्‍प फंगल इंफेक्‍शन हो सकता है। इलाज न म‍िलने पर यह समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ने लगता है।

3. स्‍कैल्‍प पर पपड़ीदार त्‍वचा

अगर स्‍कैल्‍प पर सफेद और ड्राई पपड़ी जम रही है जो डैंड्रफ जैसी द‍िखती है, तो गौर करें। यह स्‍कैल्‍प फंगल इंफेक्‍शन का लक्षण हो सकता है ज‍िसमें फंगस के बढ़ने के साथ खुजली भी होती है।

4. बैक्‍टीर‍ियल इंफेक्‍शन के लक्षण

अगर फंगल इंफेक्‍शन के साथ बैक्‍टीर‍ियल इंफेक्‍शन हो जाता है, तो दाने हो जाते हैं और दानों से पस न‍िकलने लगता है।

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स्‍कैल्‍प फंगल इंफेक्‍शन के र‍िस्‍क फैक्‍टर्स

  • पर‍िवार में क‍िसी को यह इंफेक्‍शन है, तो आपको भी हो सकता है।
  • अगर इम्‍यून‍िटी कमजोर है, तो इंफेक्‍शन हो सकता है।
  • डायब‍िटीज या एनीमि‍या होने पर खतरा बढ़ सकता है।

कैसे फैलता है?

  • स्‍कैल्‍प फंगल इंफेक्‍शन भी एक से दूसरे व्‍यक्‍त‍ि में फैल सकता है। यह इंफेक्‍शन हेयर फॉल‍िकल को इंफेक्‍ट करता है।
  • कि‍सी अन्‍य संक्रम‍ित व्‍यक्‍त‍ि का हाथ या स‍िर आपके स्‍कैल्‍प पर लगने से इंफेक्‍शन हो सकता है।
  • क‍िसी वस्‍तु पर फंगस हो और वह स‍िर पर लग जाए, तो भी फंगस फैल सकता है।

बच्‍चों में ज्‍यादा कॉमन है

  • स्‍कैल्‍प फंगल इंफेक्‍शन एक कॉमन समस्‍या है। वयस्‍कों के मुकाबले यह बच्‍चों में ज्‍यादा कॉमन है। कई बच्‍चों को स्‍कूल में यह इंफेक्‍शन क‍िसी और के जर‍िए हो जाता है।
  • 4 से 8 साल की उम्र के बच्‍चों में यह समस्‍या ज्‍यादा देखी जाती है।

स्‍कैल्‍प फंगल इंफेक्‍शन की जांच कैसे होती है?

  • स्‍कैल्‍प फंगल इंफेक्‍शन के फ‍िजि‍कल लक्षणों के आधार पर डॉक्‍टर बीमारी का पता लगाते हैं।
  • ब्रश तकनीक या कॉटन स्‍वैब की मदद से फंगल कल्‍चर टेस्‍ट क‍िया जाता है।
  • रेयर केस में स्‍क‍िन बायोप्‍सी की जाती है।

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स्‍कैल्‍प फंगल इंफेक्‍शन का इलाज

Dr. Chandni Jain Gupta ने कहा, ''स्‍कैल्‍प फंगल इंफेक्‍शन बालों को अंदर से इंफेक्‍ट करता है इसल‍िए इसमें एंटीफंगल क्रीम से इलाज करना काफी नहीं होता। इसे ओरल दवाओं से ठीक क‍िया जाता है। बालों या नाखून के फंगल इंफेक्‍शन में भी ओरल प‍िल्‍स लेने से ही सही इलाज होता है। हालांक‍ि, केवल डॉक्‍टर की सलाह से ही दवाएं लें।''

  • कीटोकोनाजोल (Ketoconazole) या सेलेनियम सल्फाइड युक्‍त शैंपू का इस्‍तेमाल करने की सलाह दी जाती है।
  • माइकोनाजोल (Miconazole) जेल का इस्‍तेमाल भी डॉक्‍टर की सलाह पर क‍िया जाता है।
  • फंगल इंफेक्‍शन होने पर टोपी, कंघी या क‍िसी भी तरह की हेयर एक्‍सेसरीज को शेयर न करें। इससे एक से दूसरे व्‍यक्‍त‍ि को इंफेक्‍शन हो सकता है।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • स‍िर में दर्द होने पर या हेयर फॉल होने पर।
  • स्‍कैल्‍प पर लगातार खुजली होने पर।
  • स्‍कैल्‍प पर दाने, पस या घाव नजर आने पर।

न‍िष्‍कर्ष:

स्‍कैल्‍प फंगल इंफेक्‍शन बच्‍चों में ज्‍यादा कॉमन होता है। वैसे यह क‍िसी भी उम्र में हो सकता है। इंफेक्‍शन होने पर बाल आसानी से टूट जाते हैं, स्‍कैल्‍प पर सूजन या रेडनेस द‍िख सकती है, स्‍कैल्‍प पर पपड़ीदार त्‍वचा नजर आती है। फंगल इंफेक्‍शन के साथ बैक्‍टीर‍ियल इंफेक्‍शन होने पर दाने और उसमें पस भी भर सकता है। इन लक्षणों का इलाज जल्‍द से जल्‍द कराएं। स्‍कैल्‍प फंगल इंफेक्‍शन के इलाज के ल‍िए एंटीफंगल क्रीम काफी नहीं होती, बल्‍क‍ि एंटीफंगल दवाओं का सेवन क‍िया जाता है। साथ ही कीटोकोनाजोल या सेलेनियम सल्फाइड युक्‍त शैंपू या माइकोनाजोल जेल को इस्‍तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

FAQ

  • क्या पालतू जानवरों से स्कैल्प फंगल इंफेक्शन का खतरा होता है?

    हां, अगर संक्रमण कुत्ते, ब‍िल्‍ली या अन्‍य पालूत जानवर में है, तो उससे इंसानों को भी इंफेक्‍शन होने का खतरा होता है।
  • स्कैल्प फंगल इंफेक्शन से बचाव कैसे करें?

    अपनी कोई भी वस्‍तु जैसे कंघी, हेयरब्रश, टोपी और तौलिया दूसरों के साथ शेयर न करें। स्‍कैल्‍प को साफ रखें और असामान्‍य लक्षण नजर आने पर डॉक्‍टर से तुरंत संपर्क करें।  

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Disclaimer

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 10, 2026 18:01 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
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