अगर मानसून में आपको खुजली हो, स्किन पर रेडनेस दिखे या गोलाकार चकत्ते नजर आएं, तो ये फंगल इंफेक्शन के लक्षण हो सकते हैं। बारिश में नमी के कारण फंगस तेजी से पनपते हैं। यह हाथ-पैर, पेट, गर्दन, कमर, सिर, नाखून या अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकते हैं। मानसून में फंगल इंफेक्शन अक्सर गीले कपड़ों, हाइजीन बरकरार न रखने या नमी के करीब रहने के कारण होता है। यह एक व्यक्ति से दूसरे में भी फैल सकता है इसलिए समय पर इलाज जरूरी है। पहले ये समझते हैं कि आखिर मानसून में फंगल इंफेक्शन का खतरा क्यों बढ़ जाता है, कौन से लक्षण नजर आते हैं और बचाव के उपाय क्या हैं? बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Chandni Jain Gupta, Dermatologist, Cosmetologist And Hair Transplant Surgeon At Elantis Healthcare, New Delhi से बात की।
घर या दीवार में नमी से हो सकता है फंगल इंफेक्शन
साल 2025 में Clinical Infection In Practice में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, ज्यादा नमी के कारण घरों, दीवारों और आस-पास के वातावरण में फंगस बढ़ सकता है जिससे फंगल इंफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है। नमी वाले घरों में फफूंद के संपर्क में आने से सांस संबंधित समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
यह भी पढ़ें- क्या बारिश का पानी स्किन इंफेक्शन का कारण बन सकता है? डर्मेटोलॉजिस्ट से जानें
कैसे पता चलेगा फंगल इंफेक्शन हो गया है?
Dermatologist Dr. Chandni Jain Gupta ने बताया कि मानसून में अक्सर बारिश में भीग जाने का डर बना रहता है। भीगने के बाद जो लोग गीले कपड़े ज्यादा देर तक पहने रह जाते हैं उन्हें अक्सर फंगल इंफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है। फंगल इंफेक्शन होने के कुछ संकेत है, जिनसे समझ आता है कि फंगल इंफेक्शन हुआ है-
- पहला कॉमन लक्षण हैं खुजली होना।
- त्वचा में रेडनेस।
- त्वचा में छोटे दाने नजर आना।
- लाल या गोलाकार चकत्ते बनना।
- त्वचा का छिलना।
- जलन या चुभन महसूस होना।
- पैरों की उंगलियों के बीच खुजली होना।
फंगल इंफेक्शन के ये लक्षण नजर आने पर इलाज नहीं करवाएंगे, तो समय के साथ ये लक्षण शरीर के अलग-अलग हिस्सों में फैलने लगेंगे क्योंकि फंगस तेजी से ग्रो करता है।
यह भी पढ़ें- डायबिटीज में बार-बार हो रहा है फंगल इंफेक्शन? डॉक्टर से जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव के तरीके
मानसून में फंगल इंफेक्शन का खतरा क्यों बढ़ जाता है?
Dr. Chandni Jain Gupta ने बताया कि मानसून के दिनों में वातावरण में नमी बढ़ जाती है और फंगस नमी वाले वातावरण में तेजी से पनपते हैं इसलिए इस दौरान फंगल इंफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है। मानसून के दौरान भले ही बारिश होती है, लेकिन उमस के कारण शरीर से पसीना ज्यादा निकलता है जिससे फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। कई बार पसीना बगल, स्किन फोल्ड्स या अन्य जगहों पर लंबे समय तक जमा रहता है जिससे फंगल इंफेक्शन बढ़ सकता है।
मानसून में फंगल इंफेक्शन का खतरा किसे ज्यादा?
मानसून में हाइजीन का ख्याल न रखने के कारण किसी को भी फंगल इंफेक्शन हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा हो सकता है जैसे-
- डायबिटिक मरीज।
- जिम जाने वाले लोग।
- फील्ड वर्कर्स।
- छोटे बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं।
- जो व्यक्ति पहले से बीमार हो या जिनकी इम्यूनिटी कमजोर हो।
मानसून में फंगल इंफेक्शन से बचने के लिए क्या करें?

1. त्वचा को ड्राई रखें
त्वचा को ज्यादा से ज्यादा ड्राई रखने की कोशिश करें। भीगे हुए कपड़े, मोजे या अन्य गीली चीजों को ज्यादा देर तक पहनने से बचें।
2. रोजाना स्नान करें
मानसून में फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन से बचने के लिए रोजाना स्नान करना जरूरी है। साथ ही शरीर के हाइजीन का ख्याल रखें।
3. एंटीफंगल पाउडर का इस्तेमाल करें
मानसून में अक्सर लेदर या अन्य सिंथेटिक मटेरियल से बने जूते पहनने से पसीना आ जाता है और फंगल इंफेक्शन का खतरा रहता है। इससे बचने के लिए एंटीफंगल पाउडर का इस्तेमाल कर सकते हैं।
4. शुगर लेवल कंट्रोल करें
डायबिटिक मरीजों में अनियंत्रित शुगर लेवल के कारण फंगल इंफेक्शन होने का खतरा ज्यादा होता है इसलिए ब्लड शुगर लेवल को लगातार मॉनिटर करें और कंट्रोल करने के लिए मील टाइम, एक्सरसाइज और हेल्दी डाइट पर फोकस करें।
5. मानसून में कॉटन कपड़ों को प्राथमिकता दें
मानसून में कॉटन के कपड़ों को पहनने से पसीना जल्दी सूख जाता है, नमी कम बनती है और फंगल इंफेक्शन का खतरा भी घट सकता है। साथ ही मानसून में ज्यादा टाइट कपड़े पहनने से बचना चाहिए। पसीना आने पर कपड़ों को एक से अधिक बार बदलने में देर न करें।
यह भी पढ़ें- ज्यादा पसीने से हो सकती हैं स्किन से जुड़ी ये 5 समस्याएं, गर्मियों में सावधानी है जरूरी
फंगल इंफेक्शन का इलाज क्या है?
फंगल इंफेक्शन के लक्षण नजर आने पर डॉक्टर एंटीफंगल क्रीम, लोशन या दवा देते हैं। फंगल इंफेक्शन पर बाजार में मिलने वाली आम क्रीम या मॉइश्चराइजर न लगाएं। इनमें आर्टिफिशियल फ्रेगरेंस और केमिकल्स मौजूद होते हैं जिससे फंगल इंफेक्शन बढ़ सकता है।
अलग-अलग प्रकार से दी जाती हैं एंटीफंगल दवाएं
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक, एंटीफंगल दवाओं को अलग-अलग तरीके से दिया जाता है। ज्यादातर लोगों को यह क्रीम, ऑइंटमेंट, शैंपू (स्कैल्प फंगल इंफेक्शन के मामलों में) या पाउडर के फॉर्म में देते हैं। कुछ एंटीफंगल दवाओं को टैबलेट या लिक्विड फॉर्म में खाना होता है। इनका इस्तेमाल शरीर के अंदर फैले संक्रमण जैसे फेफड़ों के फंगल इंफेक्शन के इलाज में किया जा सकता है। गंभीर फंगल इंफेक्शन में दवाएं आईवी या नस के जरिए भी दी जाती हैं।
डॉक्टर से संपर्क कब करें?
- अगर इंफेक्शन तेजी से शरीर में फैलने लगे।
- त्वचा से पस निकलने लगे।
- तेज बुखार आए।
- बार-बार फंगल इंफेक्शन हो रहा हो।
- डायबिटिक मरीज हों।
निष्कर्ष:
कभी-कभी मामूली लगने वाला फंगल इंफेक्शन मानसून में गंभीर रूप ले सकता है। मानसून में होने वाली खुजली, रेडनेस, दाने को नजरअंदाज न करें, ये फंगल इंफेक्शन के लक्षण हो सकते हैं। इसे नजरअंदाज करने पर यह तेजी से फैलता है और बारिश में नमी के कारण बढ़ सकता है। बचाव के लिए कपड़े और शरीर को ड्राई रखें, रोजाना स्नान करें। फंगल इंफेक्शन के इलाज के लिए डॉक्टर एंटीफंगल क्रीम और दवाओं के इस्तेमाल की सलाह दे सकते हैं।
FAQ
मानूसन में कौन-कौन से स्किन इंफेक्शन हो सकते हैं?
मानसून में खुजली या रेडनेस का कारण केवल फंगल इंफेक्शन नहीं होता। मानसून के दिनों में एक्जिमा, कीड़े का काटना, कैंडिडा इंफेक्शन, दाद या बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ सकता है।फंगल इंफेक्शन में स्टेरॉयड क्रीम का इस्तेमाल सुरक्षित है?
खुजली और जलन को कम करने के लिए अक्सर लोग स्टेरॉयड क्रीम का इस्तेमाल कर लेते हैं, लेकिन यह फंगस को खत्म नहीं करता और इंफेक्शन लौट सकता है इसलिए डॉक्टर की सलाह के बगैर स्टेरॉयड का इस्तेमाल न करें।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Aug 07, 2026 15:30 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Aug 07, 2026 15:30 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Chandni Jain Gupta