Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr Rajeev Chowdry , General Physician & Internal Medicine Specialist, Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad | 23 Years of Clinical Experience

बारिश में गीले जूते-मोजों से बढ़ सकता है पैरों में इंफेक्शन का खतरा, डॉक्‍टर से जानें कैसे करें सुरक्षा?

मानसून में पैरों को साफ रखना जरूरी है। अगर पैर बार‍िश के दूष‍ित पानी और गंदगी के संपर्क में आएंगे, तो इंफेक्‍शन का खतरा बढ़ सकता है। डॉक्‍टर से जानें बचाव के उपाय।

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मानसून में दूष‍ित पानी, गंदगी और कीचड़ के कारण पैरों में इंफेक्‍शन होने की संभावना बढ़ जाती है। बाहर जाते समय अगर पैर दूष‍ित पानी में पड़ जाए या लंबे समय तक गीले जूते या मोजों को पहनकर रखेंगे, तो इंफेक्‍शन का खतरा बढ़ सकता है। मानसून में नमी बढ़ने के कारण त्‍वचा को बचाने के प्रयास करने पड़ते हैं, वरना सामान्‍य समस्‍या गंभीर इंफेक्‍शन में भी बदल सकती है। मानसून में पैरों के इंफेक्‍शन से बचने के ल‍िए डॉक्‍टर से जानें कुछ आसान उपाय। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Rajeev Chowdry, Internal Medicine Specialist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।

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1. मानसून में टाइट जूते न पहनें

मानसून में ज्‍यादा टाइट जूते पहनने से बचना चाह‍िए वरना ज्‍यादा नमी जमा हो सकती है। कोश‍िश करें क‍ि मानसून में कॉटन फैब्र‍िक से बने जूते ही पहनें। चमड़े वाले जूते पहनने से बचें। मानसून में जूतों को ड्राई रखने का प्रयास करें और कोश‍िश करें क‍ि आपको जूते वॉटरप्रूफ हों।

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2. डायब‍िटीज में पैरों का ख्‍याल कैसे रखें?

कुछ डायब‍िटि‍क मरीजों में घाव भरने में सामान्‍य से अध‍िक समय लग सकता है इसल‍िए ऐसे लोगों को मानसून में पैरों की देखभाल के प्रत‍ि ज्‍यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। Dr. Rajeev Chowdry ने कहा, ''मानसून में डायब‍िट‍िक मरीजों में एथलीट फुट जैसे फंगल इंफेक्‍शन का खतरा ज्‍यादा होता है। इसके कारण पैरों की त्‍वचा में खुजली, रेडनेस और त्‍वचा के फटने की समस्‍या हो सकती है। साथ ही डायब‍िट‍िक मरीजों का ब्‍लड सर्कुलेशन खराब होता है और उनमें न्‍यूरोपैथी की समस्‍या के कारण पैरों में अल्‍सर की समस्‍या गंभीर हो सकती है। ज्‍यादा नमी या पानी वाली जगहों पर खड़े होने से टखनों में सूजन और एड‍िमा हो सकता है। इससे डायबिटिक फुट की समस्‍या और बढ़ सकती है।''

3. एंटीफंगल पाउडर का इस्‍तेमाल कर सकते हैं

अगर ज्‍यादा पसीना आता है या देर तक जूते-मोजे पहने रहते हैं, तो नमी से पैरों में इंफेक्‍शन बढ़ सकता है। इससे बचने के ल‍िए एंटीफंगल पाउडर का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।

मानसून में बढ़ जाता है एथलीट फुट का खतरा

मानसून में फंगस के कारण उंगल‍ियों के बीच इंफेक्‍शन हो सकता है। इसे एथलीट फुट कहा जाता है। एथलीट फुट के कारण खुजली और पपड़ीदार रैशेज हो जाते हैं। एथलीट फुट का इलाज एंटीफंगल दवाओं से क‍िया जाता है। यह इंफेक्‍शन दोबारा भी हो सकता है इसल‍िए मानसून में व‍िशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। Mayo Clinic के मुताब‍िक, अगर पैरों की उंगल‍ियों के बीच पपड़ीदार, छिलने वाली या फटी हुई स्किन नजर आए, स्‍क‍िन में खुजली हो, त्‍वचा में सूजन द‍िखे, जलन या चुभन महसूस हो, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें, ये एथलीट फुट के लक्षण हो सकते हैं।

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4. बाहर से आकर पैरों को साफ करें

मानसून या सामान्‍य द‍िनों में भी जब आप बाहर से घर लौटें, तो पैरों की सफाई करें। बार‍िश के पानी के संपर्के के कारण पैरों में नमी मौजूद होने से फंगल इंफेक्‍शन का खतरा बढ़ सकता है। पैरों की सफाई के ल‍िए पैरों को गुनगुने पानी और माइल्‍ड साबुन से साफ करें। पैरों को साफ करने के बाद अच्‍छी तरह से ड्राई करना न भूलें।

5. पैरों को मॉइश्चराइज रखें

पैरों की सफाई के बाद पैरों को मॉइश्चराइज रखना जरूरी है। इससे फंगल ग्रोथ का खतरा कम होता है। डॉक्‍टर की सलाह पर अच्‍छी क्वालिटी वाले मॉइश्चराइजर का इस्‍तेमाल करें, ध्‍यान रहे क‍ि उंगल‍ियों के बीच के ह‍िस्‍से में नमी न मौजूद हो, वरना इंफेक्‍शन हो सकता है।

6. फुट स्‍क्रब का इस्‍तेमाल कर सकते हैं

हफ्ते में एक बार फुट स्‍क्रब का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इससे डेड स्‍क‍िन सेल्‍स को हटाने और फंगल ग्रोथ से बचने में मदद म‍िल सकती है। फुट स्‍क्रब के ल‍िए प्‍यूम‍िक स्‍टोन का इस्‍तेमाल भी कर सकते हैं और एक्‍सपर्ट की सलाह पर मेड‍िकेटेड स्‍क्रब का इस्‍तेमाल भी कर सकते हैं।

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7. फुटव‍ियर की सफाई पर गौर करें

हर बार जूते उतारने के बाद, पैरों के साथ-साथ जूतों की भी सफाई करें। जूतों के अंदर भी खास एंटीफंगल पाउडर का इस्‍तेमाल कर सकते हैं ताक‍ि फंगल ग्रोथ न हो। बैक्टीरिया और फंगस को बढ़ने से रोकने के लिए अपने जूतों को रेगुलर डिसइंफेक्ट करें।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

अगर पैरों में सूजन, रेडनेस, छाले नजर आएं, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें। मानसून में अगर डायब‍िट‍िक मरीजों को पैरों में कोई असामान्‍य लक्षण नजर आए, तो तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें। अगर इलाज में देरी होगी, तो छोटी चोट, पैरों में अल्‍सर का रूप भी ले सकती है।

न‍िष्‍कर्ष:

मानसून में पैरों के इंफेक्‍शन का खतरा होता है। इससे बचने के ल‍िए मानसून में टाइट जूते न पहनें, डायब‍िट‍िक मरीजों के पैरों में इंफेक्‍शन का खतरा ज्यादा होता है और इसे नजरअंदाज करने पर अल्‍सर हो सकता है इसल‍िए सावधानी बरतें। बाहर से आकर पैरों को गुनगुने पानी से साफ करें, एंटीफंगल पाउडर का इस्‍तेमाल करें, फुट स्‍क्रब का इस्‍तेमाल करें, पैरों को मॉइश्चराइज रखें और फुटव‍ियर या जूतों को साफ रखें। मानसून में एथलीट फुट का खतरा बढ़ जाता है। इसमें डॉक्‍टर की सलाह पर एंटीफंगल दवाओं का इस्‍तेमाल क‍िया जाता है।

FAQ

  • क्या पैरों में बदबू इंफेक्शन के कारण हो सकती है?

    हां, ज्‍यादा पसीना आने से, फंगल या बैक्‍टीर‍ियल इंफेक्‍शन से पैरों में बदबू आ सकती है। हालांक‍ि, बदबू का एक कारण हाइजीन की कमी भी हो सकती है, इसके पीछे हमेशा इंफेक्‍शन नहीं होता।
  • क्या पैरों का इंफेक्शन एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है?

    कुछ संक्रमण जैसे फंगल इंफेक्शन, संक्रमित व्यक्ति के तौलिए, मोजे, जूते जैसी चीजों के संपर्क से फैल सकते हैं।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 13, 2026 18:36 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Rajeev Chowdry

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